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शनिवार, 10 नवंबर 2012

हपटे बन के पथरा, फोरे घर के सिल ....... ललित शर्मा

एक घटना अमूमन सभी बाइक एवं कार चालकों के साथ घटती है, किसी मोहल्ले या सड़क से जाते वक्त किनारे बैठा कोई कुत्ता गाड़ी देख कर गुर्राते हुए हमला करने की मुद्रा बनाकर दूर तक दौड़ाता है. ऐसी हालत में फुटरेस्ट से पैर ऊपर उठाने पड़ते हैं. कहीं काट ले तो इंजेक्शन लगवाने का दर्द झेलना पड़ सकता है. कभी - कभी कार में बैठे होने पर कुत्ते दौड़ाते हैं तो बाइक सवार की तरह पैर अपने आप ही ऊपर उठ जाते हैं. जब तक कुत्ते उसे अपने इलाके से खदेड़ नहीं लेते तब गाड़ी के पीछे दौड़ते ही रहते हैं. फिर दूसरी आने वाली गाड़ी के पीछे पड़ जाते हैं. दिन भर इनका यही काम चलता रहता है. बाइक सवार जान बचाकर भागता है और ये दांत निपोरते हुए उसका मजा लेते हैं. वो भी सोचता है कि कुत्तों के कौन मुंह लगे? लेकिन बाइक और कार सवार को दौड़ाने के पीछे जायज कारण भी है. ऐसी ही किसी गाड़ी ने कभी इन्हें चोट पहुचाई होगी. तभी ये बदला लेने के लिए तत्पर रहते हैं. 

एक सर्जन मित्र हैं, हम खाली समय में अस्पताल के ओटी में बैठ कर चेस खेलते थे. वहां कोई परेशान करने नहीं आता था. एक दिन दोपहर में सिपाही दरवाजे तक आ गया. डॉक्टर की खोपड़ी उसे देखते ही गरम हो गई. वह सिपाही पर चढ़ बैठा कि भीतर क्यों आया. सिपाही ने कहा कि - साहब एम. एल. सी. रिपोर्ट लेनी है. डॉक्टर ने उसे धमका कर इंतजार करने कहा. दो घंटे बाद जाकर उसे एम.एल.सी. रिपोर्ट दी. कुछ दिनों बाद फिर एक सब इंस्पेक्टर एम.एल.सी. कराने आया. मैं भी वहां मौजूद था. डॉक्टर साहब फार्म भरने लगे. तुम्हारा नाम बताओ.......? हां! हवलदार हो? वो बोला- सर मैं सब इंस्पेक्टर हूँ. डॉ. ने कहा - अच्छा-अच्छा पहले बताना चाहिए ना... मैंने हवलदार लिख दिया इसमें.. मुझे बैठे-बैठे हंसी आ रही थी. स्पष्ट दिख रहा था कि उसके कंधे पे दो सितारे लगे हैं... मतलब दरोगा था. लेकिन डॉक्टर मुफ्त में उसकी मौज ले रहा था. मुझे कुत्ते के गाड़ी के पीछे दौड़ाने वाला सीन याद आ गया. अवश्य ही कहीं डॉक्टर साहब को इनसे चोट-फेट लगी है. तभी इस तरह का सीन देखने मिल रहा है. पूछने पर मेरी शंका सही निकली. डॉक्टर साहब के रूम से चोरी हुयी थी तब खाकी वर्दी से इन्हें माकूल सहायता नहीं मिली. ना ही चोरी गया समान मिला. तब से डॉक्टर साहब भी अपने रुतबे पर कायम है.

कभी-कभी मनुष्य के जीवन में कुछ ऐसा घट जाता है कि वह उस घटना को लेकर सभी के प्रति एक जैसी ही धारणा बना लेता है और एक जैसा व्यवहार सभी के साथ करने लगता है. आवश्यक नहीं है कि जो उसके साथ घटा हो वह सभी के साथ घटे. सभी को एक तुला पर तोलना सही नहीं होता. एक मित्र थे ओवरसियर. उनकी पत्नी के ताल्लुकात उसके अधिकारी के साथ हो गए. उन्होंने पत्नी को बहुत समझाया कि वैवाहिक जीवन में ओछी हरकतें ठीक नहीं है. लेकिन उसकी पत्नी ने बात नहीं मानी तो उसने पत्नी को छोड़ दिया. उससे तलाक नहीं लिया, बस उसका एक ही काम रह गया था. तनखा मिलने के बाद दारू पीना और औरतों को गाली बकना, उसे सभी औरतें उसकी बीबी के तरह व्यवहार करने वाली नजर आती थी. कोई अगर किसी औरत की तारीफ उसके सामने कर देता था वह मरने मारने पर उतारू हो जाता था. कब तक किसी की एक पक्षीय बातें आदमी झेल सकता है. मैं नहीं झेल पाया तो उसे टका सा जवाब दे दिया और मिलना ही बंद कर दिया.५-७ साल बाद पता चला कि वह दारू पी-पीकर मर गया. लेकिन मरते दम तक उसने अपनी सोच नहीं बदली. 

ऐसी ही कुछ कहानी मेरी सहपाठिन हेमलता की है, जिस कम्पनी में नौकरी करती थी, उसी के मालिक के साथ अफेयर हो गया। बात काफी आगे तक बढ़ गयी, दो बार गर्भपात कराया, उसका बॉस शादी का आश्वासन देता रहा। लेकिन शादी नहीं की, लिव इन रिलेशन (रखैल) चलता रहा। साल दो साल खर्चा भी मिलता रहा फिर वह भी बंद हो गया। अब इसे भी मर्दों से नफ़रत हो गयी। सब को एक ही लाठी से हांकती है। सभी मर्द उसके लिए बेवफा हैं, एक दिन उसकी माँ ने मुझसे कहा कि इसकी कहीं शादी करवा दो। मेरे मरने के बाद इसका क्या होगा, मुझे सिर्फ यही चिंता सताती है। मैंने दो चार जगह चर्चा चलाई पर कोई परिणाम नहीं निकला। जब उसे पता चला की माँ मेरे माध्यम से शादी की बात चला रही है तो उसने मुझे साफ कह दिया कि वह शादी नहीं करेगी। इस बात को आज लगभग 20 बरस हो गए। वह नारी मुक्ति का झंडा लिए पुरुषों को गरियाते रहती है।औरत और मर्द दोनों ही बेवफा हो सकते हैं. जरुरी नहीं है कि एक ही पक्ष में कोई कमी हो. दोनों पक्षों में कमी हो सकती है. जिससे गाड़ी पटरी पर ना बैठ रही हो. वर्तमान में वर्जनाएं टूट रही है। इस पर छत्तीसगढ़ी की कहावत "हपटे बन के पथरा, फोरे घर के सिल" सटीक बैठती है।

13 टिप्‍पणियां:

  1. एक कहावत है किसी गाडी के दोनों पहिया एक जैसे हो तो गाडी सही चालेगी, और अगर इसके उल्टा अगर एक पहिया साईकिल का दूसरा ट्रेक्टर का हो तो अंदाजा लगा लो कैसे चलेगा?

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  2. खिसियाई बिल्ली खंबा नौंचे

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  3. दूध के जले को छाछ को भी फूंक फूंक कर पीने की आदत हो जाती है .
    लेकिन अफ़सोस तो इस बात का होता है की लोग दूध से भी जल जाते हैं.

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  4. वह नारी मुक्ति का झंडा लिए पुरुषों को गरियाते रहती है।औरत और मर्द दोनों ही बेवफा हो सकते हैं. जरुरी नहीं है कि एक ही पक्ष में कोई कमी हो. दोनों पक्षों में कमी हो सकती है. जिससे गाड़ी पटरी पर ना बैठ रही हो. वर्तमान में वर्जनाएं टूट रही है। इस पर छत्तीसगढ़ी की कहावत "हपटे बन के पथरा, फोरे घर के सिल" सटीक बैठती है।

    ye fir bhi kyun hota hai.aisa to nahin hona chahiye

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  6. जिंदगी को रौन्दती रफ्तार.......कुत्तों के मुंह कौन लगे?
    अस्पताल के ओटी में चेस.......मैं सब इंस्पेक्टर हू!
    मजेदार/रोचक...हपटे बन के पथरा, फोरे घर के सिल।

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  7. छत्तीसगढ़ी की कहावत पर लिखा सटीक आलेख...सारी वर्जनाएं धीरे - धीरे टूट रही हैं बदलते वक़्त के साथ...

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  8. जीवन जीने के लिये है, न कि खोने के लिये।

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  9. हपटे बन के पथरा... का अर्थ यह भी निकलता है- उपलब्‍ध और कमजोर पर जोर दिखाना.

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  10. gadi ke peechhe bhagte kutte aur ek soch ke sath jeeta aadami..bahut sateek tartamy baithaya hai aapne...

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  11. दीपोत्सव पर्व पर हार्दिक बधाई और शुभकामनायें ....

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  12. aur jo bar bar dhokha khata ho,par dhokha dena nahi sikha-shayad usaki maa ne use lolz bana ke rakha hoga

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