सोमवार, 3 अक्टूबर 2011

रायफ़ल शुटिंग में श्रेयांसि ने जीता गोल्ड मेडल -- ललित शर्मा

हने को तो रविवार था, पर कल का दिन व्यस्ततम दिनों में से एक था। उदय महाराज से वादा किया था कि उसे भी साथ ही शहर ले चलुंगा रायपुर पहुंचे एक मित्र से मिलाने के लिए। उसे तैयार होने को कह कर अंतरजाल में उलझ गया। तभी छोटे भाई ने फ़ोन पर बेटियों को रायपुर छोड़ने की कही। अब उन्हे भी तैयार होने को कहा। मुझे रायपुर साढे नौ बजे तक पहुंचना था, मित्र का स्वागत करने के लिए। स्वागत के लिए बुके के फ़ुल भी उम्दा होने चाहिएं, इसलिए नर्सरी में फ़ोन करके स्पेशल बुके तैयार करने कहा। श्रेया - श्रुति का रायफ़ल शुटिंग का मैच कल हो चुका था पर परिणाम और पुरस्कार आज मिलने थे। दोपहर 2 बजे पुरस्कार वितरण समारोह होने की घोषणा हो चुकी थी। मुझे वहाँ भी उपस्थित होना था। 12 बजे आकांक्षा रेड़िओ श्रोता संघ का कार्यक्रम महाराष्ट्र मंडल रायपुर में था, इसकी सूचना भी अशोक भाई एवं स्वराज्य करुण जी पूर्व में ही दे चुके थे। घर से निकलने में ही विलंब हो गया।

श्रेया-श्रुति को भाई के पास छोड़ा तो उदय भी वहीं रम गया और मेरे साथ जाने को तैयार नहीं हुआ। अब अकेले ही मुझे मित्र के पास पहुंचना पड़ा। वहां पहुंचने पूरे एक घंटे का विलंब हो चुका था। लगा कि अब सारे कार्यक्रम विलंब से ही चलेगें, 12 बजे मित्र से इजाजत लेकर महाराष्ट्र मंडल समता कालोनी के लिए चला। रास्ते में अशोक भाई की लालबत्ती भी दिख गयी। अब दोनो साथ ही कार्यक्रम में पहुंचे। काफ़ी सारे रेड़ियो श्रोता आयोजन स्थल पर उपस्थित थे। अशोक भाई का सभी ने गर्मजोशी से स्वागत किया। वीडियो कैमरे एवं स्टिल कैमरों के फ़्लैश झमाझम चमक रहे थे। स्टेज पर पुराने गानो का मंच से गायन चल रहा था। लोग अपने पसंद के गानों के फ़रमाईश भेज रहे थे। रेड़िओ के श्रोताओं का मनोरंजन हो रहा था। हम भी गानों का मजा लिया। घड़ी के कांटे धीरे-धीरे सरकते जा रहे थे और मुझे दुसरे कार्यक्रम में भी जाना था। इसलिए अशोक भाई को सूचना देकर अगले कार्यक्रम की ओर चल पड़ा

शुटिंग रेंज पर कार्यक्रम 2 बजे प्रारंभ होने की सूचना थी, कार्यक्रम कोई भी हो नियत समय पर प्रारंभ हो नहीं पाता, आधा एक घंटे की देरी तो चलती ही है। मैं कार्यक्रम स्थल पर ढाई बजे के लगभग पहुंचा। मुख्य अतिथि के रुप में हमारे प्रदेश के गृहमंत्री ननकी राम कंवर पधार चुके थे। स्वागत कार्यक्रम प्रारंभ ही हुआ था। मैने उदय के साथ कुर्सी ग्रहण की। मुख्यातिथि के भाषण के पश्चात पुरस्कार वितरण कार्यक्रम शुरु हुआ। श्रेया को जुनियर वीमेन .177 कैलिवर एयर रायफ़ल 10 मीटर इवेंट में गोल्ड मेड़ल देने की घोषणा हुई। श्रेया उपस्थित न होने के कारण गोल्ड मेडल और प्रमाण-पत्र मैंने ग्रहण किया। यह वर्ष 2011 की उपलब्धि बच्चों के नाम रही। बेटियों को उचित मार्गदर्शन एवं माता-पिता का सहयोग मिले तो वे किसी से कम नहीं हैं।  

रविवार, 2 अक्टूबर 2011

शुटिंग से बढता है आत्मबल ---- ललित शर्मा

त्तीसगढ निर्माण होने के साथ ही प्रदेश में खेलों के प्रति सरकार ने विशेष ध्यान दिया। सभी खेलों के संघ गठित हुए और प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिताएं प्रारंभ हुई। जिससे खिलाड़ियों का रुझान खेलों की तरफ़ बढा। पहले सिर्फ़ एथलेटिक्स एवं व्हालीबाल, फ़ुटबाल, बैडमिंटन एवं क्रिकेट को ही खेल के रुप में जाना जाता था। राज्य गठन के पश्चात नए-नए खेलों का विस्तार हुआ। हमने कभी सोचा नहीं था कि शुटिंग जैसे खेल भी हमारे राज्य में प्रारंभ होगें। नवीन जिंदल के विशेष प्रयासों से छत्तीसगढ में शुटिंग प्रतियोगिताएं प्रारंभ हूई। उन्होने इस खेल के प्रचार एवं प्रसार में विशेष सहयोग एवं ध्यान दिया। छत्तीसगढ की राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ रायफ़ल एसोसिएशन के तत्वाधान में विगत 10 वर्षों से राज्य स्तरीय एवं जिला स्तरीय रायफ़ल एवं पिस्टल के सभी इवेंट कराए जा रहे हैं। जिससे खिलाड़ी मालवणकर एवं राष्ट्रीय स्तर तक पहचान बनाने में कामयाब हो रहे है। आशा है कि कुछ और वर्षों की मेहनत के पश्चात अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक भी अपनी पहचान बनाने में कामयाब होगें।


आज खुशी होती है कि ग्रामीण स्तर के खिलाड़ियों का रुझान भी शुटिंग की तरफ़ होने लगा है। लेकिन शुटिंग एक मंहगा खेल है जिसके लिए निरंतर अभ्यास की आवश्यकता है। एयर रायफ़ले ही विदेशों से आयात करनी पड़ती हैं, जिनकी कीमत लाखों में होती है। गृह मंत्रालय की अनुमति से ही इसे आयात किया जा सकता है। जो कि एक आम खिलाड़ी के लिए दुष्कर कार्य है। जिनके पास अपने हथियार हैं वे निरंतर अभ्यास पर रहते हैं, जिसमें धनिक वर्ग के लोग अधिक हैं। रायफ़ल एसोसिएशन के पास हथियार हैं, लेकिन वे प्रतियोगिता के समय ही सुलभ हो पाते हैं, जिससे अंतर्राष्ट्रीय मानक प्राप्त हथियारों से खिलाड़ी अभ्यास नहीं कर पाते। देशी रायफ़लों से अभ्यास करने में अपेक्षित परिणाम नहीं आते। समय-समय पर कैंप आयोजित करके नित्य खिलाड़ियों को हथियार एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराने चाहिएं। जिससे छत्तीसगढ के खिलाड़ियों को लाभ होगा।

हथियारों की सेटिंग एवं रख-रखाव का प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए। जानकारी के अभाव में नए खिलाड़ी अच्छा निशाना लगाने के बाद भी मैच से बाहर हो जाते हैं। इसके लिए उन्हे सही समय पर प्रशिक्षण उपलब्ध कराना चाहिए। रायफ़ल एसोसिएशन द्वारा खिलाड़ियों को समय पर जानकारी पहुंचानी चाहिए कि कब और कहाँ प्रशिक्षण कैंप लग रहे हैं। छतीसगढ के नाम से खेलने वाले दिल्ली वालों को जानकारी पहले मिल जाती है और राज्य के खिलाड़ियों को एक दिन पहले ही अखबारों के माध्यम से सूचना मिलती है। जो कि सही नहीं है। एक माह पहले से प्रतियोगिता की तारीख की घोषणा करके खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। जिससे दूर-दराज से आने वाले खिलाड़ियों को इसका लाभ मिलेगा और प्रशिक्षण से उनका खेल भी सुधरेगा। तब ही सही मायने में नवीन जिंदल द्वारा की गयी कोशिशें परवान चढेगी। बला टालने वाला कार्य नहीं होना चाहिए। आवश्यकता हुई तो इस विषय पर नवीन जिंदल से भी चर्चा की जाएगी।

27 सितम्बर को राजधानी के माना केम्प स्थित पुलिस की शुटिंग रेंज पर प्रतियोगिता का शुभारंभ हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि मुख्य वन संरक्षक मुदित कुमार एवं आर्मी की प्रादेशिक सेना के कर्नल आर पी सिंग थे। इस अवसर पर प्रदेश के काफ़ी खिलाड़ी उपस्थित थे। प्रतियोगिता के शुभारंभ का दिन ट्रायल का होता है। आए हुए खिलाड़ी हथियारों पर एक बार हाथ आजमाते हैं। प्रतियोगिता के शुभारंभ में एसोसिएशन के सामान्य सचिव राकेश गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष शुटिंग रेंज के विस्तार के लिए जिंदल स्टील द्वारा 50 लाख रुपए खर्च किए गए। आगे भी आवश्यकता पड़ने पर जिंदल स्टील और भी सहायता करने को तैयार है। अभी विस्तार की हुई शुटिंग रेंज विधिवत विस्तार होना है। सचिव एवं कोच दुर्गेश वशिष्ठ ने कार्यक्रम का संचालन किया। शुटिंग का खेल व्यक्ति को हथियारों के प्रति अनुशासन सिखाता है। साथ ही खिलाड़ी की एकाग्रता में विस्तार के साथ साहस बढाता है।

मेरी बेटियों श्रेयांसि एवं श्रुतिप्रिया ने 5 वीं कक्षा से ही इस प्रतियोगिता में भाग लेना प्रारंभ किया था और इन पांच वर्षों में दोनो ने 4 सिल्वर एवं एक गोल्डमेडल प्राप्त किया। अगर नवीन जिंदल रायफ़ल एसोसिएशन को अपना सहयोग नहीं देते तो यह संभव नहीं था। ऐसे ही बहुत से खिलाड़ी है जो खेल के प्रति आकर्षित होकर संसाधनों की कमी के पश्चात भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। अगर सरकार का सहयोग मिले तो अवश्य ही छत्तीसगढ के खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रिय स्तर तक प्रदेश का नाम रोशन कर सकते हैं। प्रतिभाओं की कमी नहीं है, आवश्यकता है उन्हे हथियार एवं प्रशिक्षण की। इसकी तरफ़ छत्तीसगढ सरकार को विशेष ध्यान देना चाहिए एवं प्रदेश में एक शुटिंग अकादमी की स्थापना करनी चाहिए, जहाँ प्रतिभाओं को तराशा जा सके। सरकारी एवं जिन्दल कम्पनी के समवेत सहयोग से प्रदेश के खिलाड़ियों का भला हो सकता है। अकादमी खोलने के विषय पर मुख्यमंत्री महोदय से चर्चा की जाएगी।


NH-30 सड़क गंगा की सैर