फ़ादर्स डे (पितृ दिवस) मनाया गया, पाश्चात्य लोगों ने तो एक दिन निर्धारित कर रखा है। हमारी संस्कृति में पितृ पक्ष मनाया जाता है, पितरों को श्रद्धांजलि दी जाती है, उनके कार्यों को याद किया जाता है। किसी के सिर पर माँ-बाप का साया रहता है किसी के सिर पर नहीं। मेरी दृष्टि में वे भाग्यशाली हैं जिन्हे माता-पिता का मार्ग दर्शन अभी तक साक्षात मिल रहा है। मुझे नहीं मिल पाया, कभी-कभी किसी मौके पर दिल में हूक उठती है और बेचैनी छा जाती है। तब मन को बहलाता हूँ, यही नियति है, सभी को यह दिन देखना है। ईश्वर को यही मंजुर था। उन्हे शत-शत नमन। मेरी एक पुरानी पोस्ट को अर्चना चावजी ने पॉडकास्ट किया है सुनिए।
कुछ यादें कुछ बातें -- अर्चना चावजी के स्वर में
