बुधवार, 30 सितंबर 2009

शरद कोकास को जन्मदिन की हार्दिक बधाई

जन्म दिवस की मधुर वेला है
आया  ये  ही क्षण  अलबेला है
दुनिया चार  दिनों का खेला है
मिल जुल के  मनाओ मेला है

शरद  भाई  आज जन्मदिवस है तुम्हारा
बधाई   सन्देश   स्वीकार   करो   हमारा
कविता-गीत-गजल स्वागत में है तैयार
आज  मनायेगे   फिर  होली  सा त्यौहार

आपको  जन्मदिवस  की  ढेर  सी  शुभकामनाये
सफलता  आपके  ब्लॉग पर नित चटका लगाये
ईश्वर आपके जीवन में नित खुशहाली बरसाए
१००साल तक दोस्तों के साथ जी भर  ठहाके लगायें

सदा रहे  हरियाली, अलख  निरंजन  काया  हो
सर पर चढ़ कर नाचे इस दुनिया की माया  हो
मजा लो जग के मेले दा,यूँ ही सदा ठाठ बने रहे
महफिलें  सजती  रहे, यारों के भी ठाठ बने रहे

शरद भाई आपको जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाये 
अऊ हमर पटवारी भईया कोती ले घलो गाडा - गाडा बधाई 
शरद भाई जनम दिन की बधाई फौजी ताऊ मनफूल सिंग की तरफ से 







मंगलवार, 29 सितंबर 2009

आखिर दशहरा में विजय हुई

कल सुबह से सैकडों पोस्ट लिखी गई होगी ब्लागवाणी के सम्बन्ध में मैंने भी अपील की थी के भाई चालू करो,अपणे फौजी ताऊ ने भी कहा था के जो बटन ख़राब हो गया है उसे डायरेक्ट कर दो,

मैं भी सूबे नेट चालू किया तो देखा नही के ब्लागवाणी चालू है के नहीं मै तो ये सोच रहा था के जैसे सांडों के झगडे में खेत का ही नाश होता है ये हाल हमारा हो गया,

अविनाश जी ने कल एक पोस्ट में कहा था की ब्लोगवाणी फिर चालू होगी, उनकी इस बात में एक आत्मविश्वास की झलक थी, जिसने हमें संबल दिया,आखिर में दशहरा में एक विजय हुई, ब्लाग वाणी के चाहने वाले जीते,

साथियों हमारे गावं में तो इंटर नेट का कनेक्शन भी बड़ी मुश्किल से चलता है, सुदूर ग्रामीण अंचल में बैठे लोगो को अपनी बात प्रकाशित करने की सुविधा मिल रही है तथा वो पाठकों तक पहुच रही है,

हमारे लिए ये ही बड़ी बात है, आप अब ब्लोगवाणी के चाहे कैसे भी नियम कायदे बनाये हमें सिर्फ इतना ही है की हमारी पोस्ट ब्लोगवाणी पर प्रकाशित कर दे,

ब्लोगवाणी चालू होने की सूचना मुझे फोन पर राजतन्त्र वाले राजकुमार ग्वालानी जी ने दी, नहीं तो मुझे पता ही नहीं चलता,

झंझावातों का मुकाबला करके ही कोई भी मजबूत बनता है, ब्लॉग वाणी भी अब मजबूत होकर अपना  काम से लगेगी,

आप लोगो को फिर से मेरी बधाई  जो आपने एक महत्वपूर्ण काम किया,आपके साथ जुड़े सभी लोगो को मेरी शुभकामनायें,

भाई हम तो वो है, जो कबीर दास जी ने कहा था, "कबीरा खडा बाजार में सबकी मांगे खैर-ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर" हमारी तरफ से सबकी जय है, लेख