मंगलवार, 26 दिसंबर 2017

खजुराहो के मंदिर अनुपम का शिल्प : सद्यस्नाता

सद्यस्नाता नाभिदर्शना का खजुराहो के मंदिर शिल्पकला में अनुपम प्रदर्शन हैं। वह एक दौर था जब प्रतिमा शिल्प में देह सौष्ठव, वस्त्रादि अलंकरण एवं लावण्यता का विशेष ध्यान रखा जाता था।  

मंदिर की भित्तियों पर दिनचर्या का विशेष तौर पर अंकन किया गया है। जिसमें स्नानोपरांत शृंगार से लेकर दिन ढलने पर आंगिक शिथिलतायुक्त अंगड़ाई तक को प्रदर्शित किया गया है। 

उपरोक्त प्रतिमा शिल्प का त्रिआयामी अंकन किया गया है। जिसमें प्रतिमा का सौंदर्य एवं विषय उभर कर सामने आया है। 

प्रथम चित्र में सद्यस्नाता स्त्री वेणी गुंथन के लिए केश राशि को निचोड़कर व्यवस्थित कर रही है और उससे झरती पानी की बूंदे शरीर पर दिख रही है। जिसे शिल्पकार ने कुशलता से प्रदर्शित किया है, साथ ही वस्त्रों पर की गई कारीगरी भी दिखाई दे रही है। 

दूसरा त्रिआयामी चित्र भी इसका पार्श्व पक्ष दिखा रहा है। जिसमें स्त्री वेणी गुंथन के लिए केश राशि को निचोड़ रही है एवं नीचे दिखाई दे रहे हंस की ग्रीवा भी त्रिआयामी दिखाई दे रही है। 

भित्तियों में स्थापित इन प्रतिमाओं की केश सज्जा भी उल्लेखनीय है। सभी प्रतिमाओं की केश सज्जा पृथक पृथक है। इससे ज्ञात होता है कि केश सज्जा का विशेष ध्यान रखा जाता था। एक शोध प्राचीन एवं वर्तमान केश सज्जा पर हो तो बहुत कुछ नया निकल कर सामने आएगा।

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन स्वतंत्रता सेनानी - ऊधम सिंह और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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