दांत में अचानक दर्द हो गया, मैं रात की बस से जगदलपुर से आ रहा था. बस में लेटे-लेटे दर्द से व्याकुल हुआ तो आखिर में बैग में पड़ी एक दर्द निवारक दवाई लेनी ही पड़ गई, सोचा थोडा दर्द कम हो जायेगा. लेकिन दवाई लेने के बाद भी दर्द कम नहीं हुआ.
जैसे-तैसे रात कटी. सुबह घर पहुंचा. सोचा कि अब डॉक्टर को दांत दिखाना चाहिए, नहीं तो दर्द के मारे बुरा हाल हो जायेगा. ये सोच कर मैंने दांत के डॉक्टर की तलाश की, वैसे तो शहर में सैकड़ों डॉक्टर हैं, पर मैं थोडा विश्वास का डॉक्टर चाहता था. एक बार पहले भी एक दांत निकलवाया था.
मैं पता करके डॉक्टर के पास पहुंचा, तो हमारे विख्यात चित्रकार डी.डी. सोनी जी मिल गए, वो बोले कहाँ ?
डॉक्टर के पास जाते हो? मैं एक मंजन बताता हूँ, उसे लगाओ और दांत की सारी बीमारी ठीक हो जाएगी. मैंने उनकी बात की तरफ ध्यान ही नही दिया और क्लिनिक में घुस गया।
एक बहुत सुन्दर सुसज्जित केबिन, जिसमे कंप्यूटर आदि लगा कर सजाया गया था, डॉक्टर ने मेरा दांत देखा, और कहा कि आपका जो दांत निकला हुआ है. उसे फिर से लगाना पड़ेगा कई दांत दिखाए और नाप देने को कहा.
मैंने कहा कि अभी मै बाहर दौरे पर जा रहा हूँ, आने के बाद नाप दे दूंगा. पहले इस दर्द का इलाज करो, पेन किलर से भी ठीक नहीं हो रहा है. उसने कहा कि आप 1000 रूपये जमा करवा दो, मैंने 1000 रूपये जमा कर दिये, उसने कहा कि आपके दांतों की सफाई करने पड़ेगी,फिर दर्द ठीक हो जायेगा.
उसने कुर्सी पर बिठा कर दांत की सफाई कर दी और लग-भग 500 रूपये की गोली दवाई पेस्ट इत्यादि लिख दिया. हमारी दुबारा मिलने की तारीख भी तय हो गई, जब दांत का नाप देना था. उसने कहा कि जब आप दुबारा आओगे तो आपके दांत की सफाई एक बार और कर दूंगा, उसका चार्ज नहीं लगेगा।
मैं केरल के दौरे पर चला गया, कुछ दिन तो दर्द ठीक रहा, वापसी में एक दिन फिर शुरू हो गया, मैं फिर से उस डॉक्टर के पास गया. तो उसने एक दांत की कीमत 800 से 2000 तक बताई, और एक दांत के लिए तीन दांत लगाने पड़ेंगे. मैं अब समझ चुका था कि ये डॉक्टर "माल प्रैक्टिस" पर उतर आया है.
मैंने कहा आप दांत की सफाई कर दो. तो उसने देख कर कहा कि अब सफाई की जरुरत नहीं है. अभी कुछ दिन पहले तो की थी. मैंने कहा अब मेरा हिसाब कर दो, जो मैंने 1000 रूपये जमा करवाए हैं. देखो उसमे से कितने रूपये बचे हैं ?
मुझे वापस कर दो. मुझे नए दांत नहीं लगवाने. तो डॉक्टर बोला वो तो हो गए दांत सफाई के, येल्लो गयी भैंस पानी में, दिन दहाड़े डाका पड़ गया। जिन दांतों की सफाई 60 रूपये में करवाई थी. उसके एक हजार रूपये. मैं अपना बैग उठा कर चुपचाप चला आया,
आते ही मैंने डी.डी. सोनी के बताये हुए 40 रूपये के मंजन को मंगवाया और उसका इस्तेमाल किया, तब से आज तक दांत में दर्द नहीं हुआ है.
सारे डॉक्टर लूटेरे नही हैं, पर कुछ डॉक्टर तो ऐसे हैं जो मर्ज से पहले मरीज को ही ठिकाने लगाने का काम करते हैं, बेख़ौफ़ हो कर. लेकिन कुछ हैं जिन्होंने इस पेशे को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है.
हमारे एक डॉक्टर मित्र हैं, उन्होने दिव्य दृष्टि पाई है। बिना किसी एक्स रे के ही जान जाते हैं कि मरीज जेब में कितने रुपए लेकर आया है और कितने रुपयों तक का इलाज झेल जाएगा। उसके बाद उसका मुंडन शुरु कर देते हैं। किसी ने सही कहा है:-
जैसे-तैसे रात कटी. सुबह घर पहुंचा. सोचा कि अब डॉक्टर को दांत दिखाना चाहिए, नहीं तो दर्द के मारे बुरा हाल हो जायेगा. ये सोच कर मैंने दांत के डॉक्टर की तलाश की, वैसे तो शहर में सैकड़ों डॉक्टर हैं, पर मैं थोडा विश्वास का डॉक्टर चाहता था. एक बार पहले भी एक दांत निकलवाया था.
मैं पता करके डॉक्टर के पास पहुंचा, तो हमारे विख्यात चित्रकार डी.डी. सोनी जी मिल गए, वो बोले कहाँ ?
डॉक्टर के पास जाते हो? मैं एक मंजन बताता हूँ, उसे लगाओ और दांत की सारी बीमारी ठीक हो जाएगी. मैंने उनकी बात की तरफ ध्यान ही नही दिया और क्लिनिक में घुस गया।
एक बहुत सुन्दर सुसज्जित केबिन, जिसमे कंप्यूटर आदि लगा कर सजाया गया था, डॉक्टर ने मेरा दांत देखा, और कहा कि आपका जो दांत निकला हुआ है. उसे फिर से लगाना पड़ेगा कई दांत दिखाए और नाप देने को कहा.
मैंने कहा कि अभी मै बाहर दौरे पर जा रहा हूँ, आने के बाद नाप दे दूंगा. पहले इस दर्द का इलाज करो, पेन किलर से भी ठीक नहीं हो रहा है. उसने कहा कि आप 1000 रूपये जमा करवा दो, मैंने 1000 रूपये जमा कर दिये, उसने कहा कि आपके दांतों की सफाई करने पड़ेगी,फिर दर्द ठीक हो जायेगा.
उसने कुर्सी पर बिठा कर दांत की सफाई कर दी और लग-भग 500 रूपये की गोली दवाई पेस्ट इत्यादि लिख दिया. हमारी दुबारा मिलने की तारीख भी तय हो गई, जब दांत का नाप देना था. उसने कहा कि जब आप दुबारा आओगे तो आपके दांत की सफाई एक बार और कर दूंगा, उसका चार्ज नहीं लगेगा।
मैं केरल के दौरे पर चला गया, कुछ दिन तो दर्द ठीक रहा, वापसी में एक दिन फिर शुरू हो गया, मैं फिर से उस डॉक्टर के पास गया. तो उसने एक दांत की कीमत 800 से 2000 तक बताई, और एक दांत के लिए तीन दांत लगाने पड़ेंगे. मैं अब समझ चुका था कि ये डॉक्टर "माल प्रैक्टिस" पर उतर आया है.
मैंने कहा आप दांत की सफाई कर दो. तो उसने देख कर कहा कि अब सफाई की जरुरत नहीं है. अभी कुछ दिन पहले तो की थी. मैंने कहा अब मेरा हिसाब कर दो, जो मैंने 1000 रूपये जमा करवाए हैं. देखो उसमे से कितने रूपये बचे हैं ?
मुझे वापस कर दो. मुझे नए दांत नहीं लगवाने. तो डॉक्टर बोला वो तो हो गए दांत सफाई के, येल्लो गयी भैंस पानी में, दिन दहाड़े डाका पड़ गया। जिन दांतों की सफाई 60 रूपये में करवाई थी. उसके एक हजार रूपये. मैं अपना बैग उठा कर चुपचाप चला आया,
आते ही मैंने डी.डी. सोनी के बताये हुए 40 रूपये के मंजन को मंगवाया और उसका इस्तेमाल किया, तब से आज तक दांत में दर्द नहीं हुआ है.
सारे डॉक्टर लूटेरे नही हैं, पर कुछ डॉक्टर तो ऐसे हैं जो मर्ज से पहले मरीज को ही ठिकाने लगाने का काम करते हैं, बेख़ौफ़ हो कर. लेकिन कुछ हैं जिन्होंने इस पेशे को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है.
हमारे एक डॉक्टर मित्र हैं, उन्होने दिव्य दृष्टि पाई है। बिना किसी एक्स रे के ही जान जाते हैं कि मरीज जेब में कितने रुपए लेकर आया है और कितने रुपयों तक का इलाज झेल जाएगा। उसके बाद उसका मुंडन शुरु कर देते हैं। किसी ने सही कहा है:-
इनको क्या काम है मुरव्वत से
ये अपने रुख से मुंह ना मोड़ेंगे
फरिस्ते शायद जान छोड़ भी दें
पर डॉक्टर अपनी फ़ीस ना छोड़ेंगे