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रविवार, 4 अक्टूबर 2009

नकली दवाईयाँ खेल, मरीज की सेहत फ़ेल

देश में नकली दवाओं का धंधा बेधड़क एवं सुनियोजित ढंग से चल रहा है, शहरों से लेकर गावं तक इनका नेटवर्क बना हुआ है। 

ये पता करना कठिन है कि कौन सी दवाई असली है और कौन सी दवाई नकली है? 

सीधे-सीधे मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है। जीवनरक्षक दवाएं मौत साबित हो रही है। 

ये तो एक पहलू है, दूसरा पहलु है कि सामान रसायन एवं सामान मिश्रण से बनी हुई दो अलग-अलग कम्पनी की दवाओं के मूल्य में काफी असमानता है। 

डाक्टर भी महंगी से महंगी दवाइयां लिखते है। आज दवा बाजार में देशी-विदेशी एक-से-एक बड़ी कम्पनियां अपना उत्पाद बेच रही हैं। शायद ही किसी ने किसी कम्पनी का विज्ञापन अख़बारों या अन्य प्रचार साधनों में देखा होगा। 

कम्पनियां सीधे ही डाक्टर एवं केमिस्टों से संपर्क कर उन्हें तरह-तरह के उपहारों से नवाज कर अपनी दवाइयाँ बेचती है और मरीजों को महंगी से महंगी दवाई खरीदनी पड़ती है। 

सारा ही गोरखधंधा चल रहा है, ऐसा लगता है कोई माई-बाप  ही नही है।

मेरे साथ ही एक घटना घटी। मुझे विगत ३ वर्षों से मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप की शिकायत है तथा मुझे २ मधुमेह एवं एक उच्च रक्तचाप नियंत्रण की गोली खानी पड़ती है। अपोलो के डाक्टर ने मुझे मधुमेह के लिए ग्लासिफेज जी वन नामक दवाई सुझाई। 

यह दवा एक बड़ी कम्पनी फ्रेंको इंडियन का उत्पाद है। जिसका मै लगातार सेवन कर रहा था। एक दिन मै सफ़र में था और रास्ते में एक केमिस्ट के यहाँ से दवाई खरीदी और खाई, तीन-चार दिन बाद मैंने शुगर चेक किया तो ३७४ बता रहा था। 

डाक्टर ने कहा कि बहुत बढ़ी हुई है अभी एक दूसरी गोली और बढा देते हैं, सामान्य होने पर कम कर देंगे। 

एक दिन मेरी नज़र सुबह कमोड पर पड़ गयी तो देखा साबुत गोली पानी में तैर रही थी। 

मै हैरान हो गया, जो गोली २२ घंटे पहले मैंने खाई है वो अभी तक भी नहीं घुली, शुगर कैसे कम होगी? 

मैंने ये बात अपने डाक्टर को बताई तो उसने कहा कि दूसरी कम्पनी की गोली ले लो और मैंने वो ली, वह पेट में जाकर घुल गई। 

मैंने कम्पनी को एक पत्र लिख कर नोटिस दिया तथा पूरी घटना के विषय में तफसील से बताया, पत्र रजिस्टर्ड डाक से भेजा लेकिन आज तक उसका कोई जवाब नही आया। 

मैंने उस दवाई कम्पनी के डीलर का पता किया और उसे फोन पर शिकायत की। उसने कहा कि आपको मेरा नंबर किस मेडिकल स्टोर वाले ने दिया है बताओ?  

फिर उसने ही कई मेडिकल स्टोर के नाम सुझाये, एक का नाम लेते हुए कहने लगा, मुझे मालूम है उसी ने दिया होगा। मैं कल से उसको माल देना ही बंद कर दूंगा, 

अनायास ही मेरी जान बच गई, शायद उपर वाले को मेरी जान बचाना ही था नही तो नकली दवाई के चक्कर में ..................राम नाम........