महाप्रलय होने वाला है, दुनिया खत्म हो जाएगी। लोग बाग चिल्ला रहे हैं टी.वी. चैनलों में लगातार, फिल्मे बन रही है, इलेक्ट्रानिक मिडिया और प्रिंट मिडिया भी प्रमुखता से खबरे छाप रहा है. "अब दिसम्बर २०१२ में महाप्रलय होने वाला है?"
इस खबर को बड़े ही डरावने तरीके के प्रस्तुत किया जा रहा है. लोग खबरें देख देख कर आशंकित हैं कि "क्या होगा २०१२ में'
इससे पहले भी कई बार महाप्रलय की सुचना जारी हो चुकी है, लेकिन महाप्रलय नहीं आया. एक बार पहले भी महाप्रलय की स्थिति बनी थी,
शायद १९८० में जब "स्काईलेब" नामक प्रयोग शाला पृथ्वी पर गिरने वाली थी. लोग रात-रात भर जागते थे कि कहीं उनके मोहल्ले और मकान पर ही ना गिर जाये.
आदिवासी पिछड़े अंचलो में लोग रोज दारू और मुर्गा की पार्टी कर रहे थे, जमीन जायदाद और घर बेचकर, जब दुनिया ही ख़तम होगी तो क्या धन सम्पत्ति लेकर तो नहीं जाना है.
यहीं खा पीकर ख़त्म किया जाये. बस फिर शुरू हो गया दौर बेच-बेच कर खाने पीने का. जब स्काईलेब गिर गया और उसके बाद की स्थिति कितनी ख़राब हुई? ये उस समय देखने वाले ही बता सकते हैं.
अब भी यही होने वाला है, लोगों को डराया जा रहा है. महाप्रलय के नाम पर,
एक फिल्म भी आ गयी है. माया सभ्यता का हवाला देकर "दिसम्बर २०१२", महाप्रलय भले ही आए या ना आए लेकिन ये फिल्म बनाने वाले की तिजोरी में नोटों का प्रलय जरुर आ जायेगा.
टी.वी. चैनल वाले टी.आर.पी. की बाढ़ ला रहे हैं. जबकि ऐसा कुछ नहीं होने वाला.ये कहानी फ़िल्मी फंताशी के आलावा कुछ नहीं है.
एक फिल्म भी आ गयी है. माया सभ्यता का हवाला देकर "दिसम्बर २०१२", महाप्रलय भले ही आए या ना आए लेकिन ये फिल्म बनाने वाले की तिजोरी में नोटों का प्रलय जरुर आ जायेगा.
टी.वी. चैनल वाले टी.आर.पी. की बाढ़ ला रहे हैं. जबकि ऐसा कुछ नहीं होने वाला.ये कहानी फ़िल्मी फंताशी के आलावा कुछ नहीं है.
इस प्रलय के पहले एक महाप्रलय अवश्य आ चूका है "वह है बेलगाम महंगाई" इस प्रलय से बचने का रास्ता कोई नही निकाल रहा है.
"सरकार भी शतुरमुर्ग की तरह रेत में सर गडाए खड़ी है" महंगाई काम करने का रास्ता कोई नहीं ढूंढ़ रहा है.
दिसंबर २०१२ वाला महाप्रलय चाहे ना आये लेकिन इस महंगाई के महा प्रलय में बहुत कुछ तबाह होने वाला है. ये किसी को नही दिख रहा है.
महंगाई के महाप्रलय से बचने का रास्ता अवश्य ढूँढना चाहिए. अन्यथा बहुत देर हो जाएगी/
"सरकार भी शतुरमुर्ग की तरह रेत में सर गडाए खड़ी है" महंगाई काम करने का रास्ता कोई नहीं ढूंढ़ रहा है.
दिसंबर २०१२ वाला महाप्रलय चाहे ना आये लेकिन इस महंगाई के महा प्रलय में बहुत कुछ तबाह होने वाला है. ये किसी को नही दिख रहा है.
महंगाई के महाप्रलय से बचने का रास्ता अवश्य ढूँढना चाहिए. अन्यथा बहुत देर हो जाएगी/