ब्लागवाणी को बंद हुए आज 5वां दिन है। हमने एक पोस्ट भी लगाई थी इस पर एवं ब्लागवाणी के संचालकों को एक ई मेल भी किया था। पहले तो इनका जवाब मिल जाता था लेकिन अब इन्होने ने ई मेल का जवाब देना भी गवारा नहीं समझा।
अच्छा है जवाब नहीं दिया तो, हमारी कोई जोर जबरदस्ती तो है नहीं कि हमें जवाब देना जरुरी है। भाई हमारा और ब्लागवाणी का वही संबध है जो एक संकलक और ब्लाग का होता है, इससे ज्यादा कुछ नहीं।
गत वर्ष भी ब्लागवाणी ने अपनी दुकान बढा ली थी उस समय भी हमने इनसे ब्लागवाणी चालु करने का निवेदन किया था। काफ़ी कोशिशों के बाद फ़िर शुरु किया गया।
ऐसा कभी चिट्ठाजगत पर नहीं हुआ कि उन्होने कभी चिट्ठाजगत बंद किया हो या बंद करने की घो्षणा की हो।
अच्छा है जवाब नहीं दिया तो, हमारी कोई जोर जबरदस्ती तो है नहीं कि हमें जवाब देना जरुरी है। भाई हमारा और ब्लागवाणी का वही संबध है जो एक संकलक और ब्लाग का होता है, इससे ज्यादा कुछ नहीं।
गत वर्ष भी ब्लागवाणी ने अपनी दुकान बढा ली थी उस समय भी हमने इनसे ब्लागवाणी चालु करने का निवेदन किया था। काफ़ी कोशिशों के बाद फ़िर शुरु किया गया।
ऐसा कभी चिट्ठाजगत पर नहीं हुआ कि उन्होने कभी चिट्ठाजगत बंद किया हो या बंद करने की घो्षणा की हो।
मुझे लगता है कि एक समय के अंतराल पर ये भी अपनी लोकप्रियता का अंदाजा लगाने के लिए बंद करने का स्टंट करते हैं, पिछले समय भी यही हुआ।
अभी कुछ सुधार कर ब्लागवाणी को प्रस्तूत किया गया। उसमें नापसंद का बटन लगा कर बंठाढार कर दिया। पहले तो हमारी समझ में नहीं आया कि यह क्या है। जब ब्लागवाणी एंव अन्य जानकारों ने बताया तो पता चला। यही लगभग सबके साथ हुआ है।
अभी ब्लागवाणी बंद है। तकलीफ़ हो रही है इसलिए कि लोगों को ब्लागवाणी आदत पड़ गयी थी। लेकिन अब कुछ दिन बंद रहेगी तो लोगों को जो इसकी लत पड़ गयी है वह भी खतम हो जाएगी और ब्लागजगत पुन: अपने ढर्रे पर चल पड़ेगा।
अभी कुछ सुधार कर ब्लागवाणी को प्रस्तूत किया गया। उसमें नापसंद का बटन लगा कर बंठाढार कर दिया। पहले तो हमारी समझ में नहीं आया कि यह क्या है। जब ब्लागवाणी एंव अन्य जानकारों ने बताया तो पता चला। यही लगभग सबके साथ हुआ है।
अभी ब्लागवाणी बंद है। तकलीफ़ हो रही है इसलिए कि लोगों को ब्लागवाणी आदत पड़ गयी थी। लेकिन अब कुछ दिन बंद रहेगी तो लोगों को जो इसकी लत पड़ गयी है वह भी खतम हो जाएगी और ब्लागजगत पुन: अपने ढर्रे पर चल पड़ेगा।
अब लोगों के अपने फ़ीड़कल्स्टर भी हैं जिनसे वे ब्लाग पर जा सकते हैं और डेशबोर्ड पर फ़ालोवर ब्लाग की फ़ीड भी आती है। फ़िर चिट्ठाजगत तो है ही।
अब आवश्यक्ता है एक नए एग्रीगेटर की। जो अपने आपको विवादों से दूर रह कर चला सके। ब्लाग जगत को एक नया आयाम दे सके।
कई नए एग्रीगेटर भी आए लेकिन उन्होने चिट्ठों को जोड़ने के लिए इतनी ज्यादा तकनीकि का इस्तेमाल कर दिया कि लोग उसे समझ ही नही सके और वह फ़ेल हो गया। अब कोई नया सबकी समझ में आने वाला एग्रीगेटर लेकर आता है तो उसका हम स्वागत करते हैं।
उसमें चिट्ठों को दिखाने की प्रक्रिया सरल की जानी चाहिए। चिट्ठा जगत जैसे स्वचालित रुप से ब्लागर अपने चिट्ठों को स्वयं एग्रीगेटर से जोड़ सके ऐसी ही कुछ उसमें व्यवस्था होनी चाहिए। इंडली में भी यही समस्या है। हमारा ब्लाग उसमें दिखाई नहीं दे रहा है।
कई नए एग्रीगेटर भी आए लेकिन उन्होने चिट्ठों को जोड़ने के लिए इतनी ज्यादा तकनीकि का इस्तेमाल कर दिया कि लोग उसे समझ ही नही सके और वह फ़ेल हो गया। अब कोई नया सबकी समझ में आने वाला एग्रीगेटर लेकर आता है तो उसका हम स्वागत करते हैं।
उसमें चिट्ठों को दिखाने की प्रक्रिया सरल की जानी चाहिए। चिट्ठा जगत जैसे स्वचालित रुप से ब्लागर अपने चिट्ठों को स्वयं एग्रीगेटर से जोड़ सके ऐसी ही कुछ उसमें व्यवस्था होनी चाहिए। इंडली में भी यही समस्या है। हमारा ब्लाग उसमें दिखाई नहीं दे रहा है।
अभी पाबला जी ने घोषणा की है कि उनका एग्रीगेटर आ रहा है। हमारा उनसे निवेदन है कि वे जल्द से जल्द अपना एग्रीगेटर शुरु करें जिससे ब्लागरों की कठिनाई दूर हो सके।
बस ब्लागवाणी से बहुत हो गया निवेदन, अब चाहे वह चालु करे या बंद करें। इसमें उनकी मर्जी है जो करे वह अच्छा है। जब तक नया एग्रीगेटर नहीं आ जाता तब तक जैसा चल रहा है वही ठीक है।
बस ब्लागवाणी से बहुत हो गया निवेदन, अब चाहे वह चालु करे या बंद करें। इसमें उनकी मर्जी है जो करे वह अच्छा है। जब तक नया एग्रीगेटर नहीं आ जाता तब तक जैसा चल रहा है वही ठीक है।
