बुधवार, 18 जुलाई 2012

जादू-टोने रहस्यमय संसार : छत्तीसगढ़

जादू-टोना-टोनही शब्द ही भय उत्पन्न करने के लिए पर्याप्त होता है। बचपन से सुनते आए हैं कि तंत्र-मंत्र से प्राप्त शक्ति द्वारा किसी का भी अहित किया जा सकता है। अहित करने वाला टोनहा-टोनही कहलाता है। इन तंत्र मंत्र की शक्ति के दुष्प्रभाव से बचाने या उसे निष्प्रभावी करने कार्य बैगा या तांत्रिक के जिम्मे होता है। गॉड पार्टिकल ढूंढने का दावा करने वाला समाज भी इन गैबी ताकतों के होने से इनकार नहीं करता। तंत्र मंत्र समाज के मानस में इतने गहरे बैठ चुका है कि अंधेरा होते ही अज्ञात भय के कारण रस्सी भी सांप दिखाई देने लगती है। ग्रामीण अंचल में आज भी किसी को बुखार हो जाए तो वह डॉक्टर के पास जाने की बजाए सबसे पहले बैगा-गुनिया या तांत्रिक से ही सम्पर्क करता है और उसी के ईलाज पर विश्वास करता है। फ़िर चाहे प्राण ही क्यों न निकल जाएं, अंतिम समय में उसके परिजन ही उसे डॉक्टर के पास ईलाज के लिए पहुंचाते हैं या सीधे श्मशान जाता है।

बचपन में सुनी गई टोनही जनित घटनाएं और कहानियाँ कोमल मन मस्तिष्क पर स्थाई असर डालती हैं, जिससे व्यक्ति जीवन भर नहीं उबर पाता। लोग कहते हैं कि अनपढ ही गैबी ताकतों पर विश्वास करते हैं, लेकिन मैने पढे लिखे उच्चपदों पर बैठे व्यक्तियों को भी तंत्र-मंत्र-तांत्रिकों, बैगा गुनियों के चंगुल फ़ंसे देखा है। तंत्र मंत्र का असर होता है कि नहीं? टोनही-टोनहा होता है कि नहीं? इस सत्यता को जानने का मैने बहुत प्रयास किया। लेकिन जानकार लोग इसे गुप्त ही रखना चाहते हैं। गोपनीयता की शपथ या गुरु बनाए बिना बताना नहीं चाहते। अगर किसी प्रक्रिया से आप जान भी गए या सीख भी गए तो आपको भी इसे गुप्त रखने की शर्तों का पालन करना होगा, अन्यथा मंत्रों की शक्तियाँ निष्प्रभावी होने का भय बताया जाता है। दीक्षा के वक्त शपथ दिलाते हुए गुरु यह बात अपने शिष्य के कान में अवश्य डालते हैं। 

गाँव में बिजली नहीं थी, घर के सामने तालाब में कोई रोशनी जलती थी तो बुजुर्ग कहते कि "वो दे, रक्सा बरत हे। (वह देख रक्सा [कुंवारा भूत] जल रहा है) हम भी मान लेते थे और रात के वक्त बोईर तरिया की तरफ़ नहीं जाते थे। तालाब के पार पर बहुत सारे बेर के वृक्ष थे जिसके कारण उसे बोईर तरिया कहते हैं। बेर के वृक्ष में परेतिन का वास बताया जाता है और ईमली में प्रेत का। रामगोपाल बैगाई करता है और मैं उसके साथ इन विषयों पर चर्चा करता था। वह टोनहीं के एक से एक किस्से बताता और किस्सा सुनते और चर्चा करते सुकवा (भोर के समय दिखने वाला चमकीला तारा) उग जाता था। तब कहीं जाकर हमारी बातें खत्म होती थी। नागपंचमी के दिन वह दक्षिणा लेकर अपने गुरु से भेंट करने अवश्य जाता था। तंत्र मंत्र सीखने के लिए गुरु बनाने एवं शिष्यों द्वारा अपने गुरु का मानदान करने एवं गुरु द्वारा पाठ-पीढा (उत्तराधिकार) सौंपने का ग्रामीण अंचल में यही दिन माना जाता है।

कहते हैं टोनही का मंत्र ढाई अक्षर का होता है। टोनही जब सभी मंत्र सिद्ध कर लेती है वह सोधे हो जाती है अर्थात टोनही से बड़ा पद प्राप्त कर लेती है। टोनही नकारात्मक शक्तियों की स्वामिनी होती है, मान्यता है कि वह जो चाहे वह कर सकती है। जन मानस में प्रचलित है कि टोनही अपनी शक्तियों से किसी को मार सकती है, अपंग कर सकती है, बीमार कर सकती है। शरीर को कमजोर कर सकती है, घर से वस्तुएं गायब कर सकती है, गाय भैंस से लेकर लईकोरी स्त्री के स्तनों का दूध सुखा सकती है, पागल कर सकती है, फ़सल को उजाड़ सकती है, शारीरिक नुकसान कर सकती है। इसलिए आदमी अपने अनिष्ट की आशंका से भयभीत रहता है और हमेशा ही इससे बचना चाहता है। रामगोपाल बताता है कि तंत्र मंत्र सीखने के लिए हरेली अमावस एवं दीवाली की रात महत्वपूर्ण होती हैं। 

अमावस की रात जादू-टोना सीखने वाले महिलाएं मध्य रात्रि को गाँव या नगर के बाहर सुनसान स्थान मरघट में एकत्र होती हैं, मुख्य टोनही के मार्गदर्शन में नग्न होकर शौच करती हैं, अपने-अपने मल से दीपक बनाती हैं। उसके बाद सोधे (मुख्य टोनहीं) उन्हे एक जड़ी देती है जिसे मुंह में रखने से लार बनती हैं, फ़िर इस लार को दीपक में डालते हैं जिससे आग निकलती है, दीपक से आग निरंतर निकलते रहती है और टोनही सीखने वाली महिला बाल खुले करके अपने सिर को उपर नीचे झुकाती है (सिर उपर नीचे झुकाने को झूपना कहते हैं)। बलि के रुप में नींबू काटा जाता है, सोधे यहीं पर सीखने वालियों को मंत्र याद करवाती है तथा उन्हे ईष्ट देव को निर्धारित जीवों की बलि देने का संकल्प दिलाती है। जिन साधिकाओं को मंत्र याद हो जाता है उन्हे गुरुपूर्णिमा को "चलानी पाठ" दिया जाता है। उन्हे शिक्षा दी जाती है कि किस मंत्र का प्रयोग कैसे करना है।   

सवाल पर गंभीर मुद्रा
तारक बैगा से भी टोनही के विषय में चर्चा हुई, वे कहते हैं कि सोधे होने के बाद टोनही के पास ऐसी शक्तियाँ आ जाती हैं जिससे वह इच्छित प्राप्ति कर सकती है। इन कार्यों के लिए उसके पास गण होते हैं जिन्हे बीर कहते हैं। इन बीरों को मटिया और मसान कहा जाता है। चटिया बीर को टोनही मारण कर्म के लिए उपयोग में लाती है। चटपट काम करके लौटने के कारण इसे चटिया कहा जाता है। जब टोनही इसे भेजती है तो यह चिन्हित को मार कर ही वापस आता है। इस पर किसी बैगा, गुनिया, तांत्रिक के मंत्रों का कोई असर नहीं होता। टोनही का मटिया बीर चिन्हित को शारीरिक और आर्थिक नुकसान पहुंचाता है। गांवों में मान्यता है कि यह जहाँ भी जाता है वहां की वस्तुएं स्वत: ही गायब होने लगती हैं। घर में खाने-रांधने का सामान भी नहीं छोड़ता। पूरा घर ही खाली कर देता है। चटिया-मटिया के रहने का स्थान जानवरों का कोठा बताया जाता है तथा ये कद में छोटे होते हैं, बच्चों के साथ खेलते हैं सिर्फ़ उन्हे ही दिखाई देते हैं अन्य किसी को दिखाई नहीं देते। इनके द्वारा गायब की हुई वस्तुओं का पता नहीं चलता।

मेरे सवाल पर मुस्काते हुए बैगा
कहते हैं कि टोनही आत्माओं से भी बात करती है। उनका आह्वान कर उनसे जानकारी भी ले सकती है। टोनही अपनी शक्ति बढाने के लिए मसान भी साधती है, मसान दो तरह के होते हैं, तेलिया मसान और मरी मसान। टोनही मसान की सवारी करती है। किसी इंसान पर सवार होने के बाद बैगा की झाड़-फ़ूंक के दौरान मसान ही प्रभावित के मुख से बैगा को जवाब देता है। टोनही अपनी नजर से किसी के जीवन को प्रभावित कर सकती है। टोनही का बीर मटिया काले रंग, उल्टे पैर का बौना भूत होता है, यह अपने साथ सदा कांवड़ और टोकरी रखता है। मटिया अपनी कांवड़ से दुनिया भर की चीजें ढो सकता है। चटिया-मटिया जोड़े में रहते हैं। जिसके घर में मटिया रहता है उसे मालामाल कर देता है, अगर उस घर में इसका सम्मान नहीं होता तो उसका सर्वनाश भी कर देता है। मैने एक सम्पन्न व्यक्ति के घर में मटिया का असर देखा था। वे अपने घर में खाने-पीने का सामान, रुपया पैसा, धन धान्य नहीं रखते थे। खाना पकाने का सामान रोज खरीदते थे। अधिक सामान रखने पर मटिया उसे गायब कर देता था। 

बैगा कहते हैं कि मसान की आँखें अंधेरे में लाल बल्ब जैसे चमकती हैं यह कुत्ते के रुप में मसान निर्जन इलाके में या घर पर भी रहता है। एक बार रक्सा ने इनकी भैंसा गाड़ी को पलटा दिया था। यह रक्सा आग के गोले की तरह दिखाई देता है और यह गोला उपर उठते दिखाई देता है जिसमें विस्फ़ोट होता है। कहते हैं कि जो कुंवारा मरता है वह रक्सा बनता है। अकाल मृत्यु वाले लोग परेत-परेतिन बनते हैं तथा अपनी आयु पूर्ण होने तक भटकते रहते हैं, टोनही इन्हे साध लेती है। जनश्रुति है कि परेत बेर के पेड़ में रहता है। जिस स्त्री की प्रसव के दौरान मृत्यु हो जाती है वह परेतिन बनती है। इसलिए परेतिन अपने बच्चे के साथ ही दिखाई देती है। कहते हैं कि हाट-बाजार में परेत-परेतिन अपना सामान खरीदने आते हैं। लेकिन लोग उन्हे पहचान नहीं पाते। कहते हैं कि परेतिन किसी भी रुप में आकर संबंध बना लेती है, बैगा कहते हैं रास्ते में कहीं परेतिन नजर आ जाए तो डरकर अपनी राह नहीं छोड़नी चाहिए, प्ररेतिन अपना भयानक रुप दिखा कर रास्ते से हटाने की कोशिश करती है, राहगीर के रास्ता छोड़ते ही वह परेतिन का शिकार हो जाता है। कहते हैं कि परेतिन के बाल पकड़ लिए जाएं और उसकी साड़ी बांस के खोल में भर कर रखने से जब तक उसे साड़ी नहीं मिलती वह मानव रुप में ही रहती है।

तारक बैगा
मिरचुक झालर के बल्ब जैसा जलता बुझता है, टोनही तीया (तीज नहावन) के दिन परेत जगाती है। जागने पर परेत टोनही का गुलाम हो जाता है और उसी के लिए काम करता है। टोनही के लिए हरेली अमावस एवं दीवाली की अमावस की रात महत्वपूर्ण होती है। इन दोनों रातों की साधना में इन्हे सम्मिलित होना अत्यावश्यक है। बैगा कहते हैं कि तीन साल तक लगातार अमावस साधना में न आने पर वह सभी मंत्र स्वत; ही भूल जाती है। शनिचरहा से भी लोग भय खाते हैं, जिस व्यक्ति का जन्म शनिवार को होता है उसकी नजर बिना तंत्र मंत्र सीखे ही लग जाती है। पुरुष टोनहा हो्ता है, टोनही एवं टोनहा मंत्र सीखने की प्रक्रिया एक जैसी ही है। रामगोपाल कहता था कि अगर कहीं टोनही-टोनहा या भूत परेत नजर आए तो पेशाब से गोल बना कर उसमें बैठ जाएं और बाहर न निकलें। हानि पहुचाने वाली शक्तियां उस गोले के भीतर प्रवेश नहीं करती। इससे बचाव हो जाता है। कहते हैं जिस घर की औरत टोनही बन जाती है उसके घर वालों को ही पता नहीं चलता कि वह टोनही या सोधे हो गई है। आधी रात को अपने घर वालों को जड़ी सुंघाकर बेहोश कर देती है और अपना मंत्र सिद्ध करने के लिए चली जाती है।

डिस्क्लैमर: पोस्ट लिखने उद्देश्य टोना-टोटका एवं टोनही के रहस्यमयी गुप्त दुनिया से परिचय कराना है। समाज में इस विषय को लेकर बहुत सारी बातें चलती रहती हैं। लोग मनोरंजन की दृष्टि से भी भूत-प्रेत की कहानियाँ गढते हैं और चौक-चौराहों पर बैठ कर समय व्यतीत करने की दृष्टि से चर्चा करते हैं। जब सदियों से ये मान्यताएं चली आ रही हैं तो इसके पीछे अवश्य ही कोई सच भी होगा। जिज्ञासु होने के बाद भी मुझे अभी तक टोनही इत्यादि का साक्षात्कार नहीं हुआ है। लेकिन कुछ घटनाएं ऐसे घट चुकी हैं जिन्हे नकारने या स्वीकार करने की स्थिति में नहीं हूँ। उन घटनाओं को सिर्फ़ अपने मन का भ्रम या संयोग मानकर  दरकिनार करते आया हूं। 

30 टिप्‍पणियां:

  1. हरेली त्योहार पर यह आपका उपहार अति आनंददायी रहा मैं आपको बधाई देता हूँ ,गाँव की माती से जुडी जानकारी के साथ , गाँव में फैली कुरीति बुरे का आपने सीधे सादे सरल सहज तरीके से अंकन किया है .पोस्ट का प्रवाह मजेदार ...

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  2. बहुत सुंदर प्रस्‍तुति ..
    डिस्‍क्‍लेमर लिखना अच्‍छा रहा ..

    नहीं तो यह अंधविश्‍वास भरी पोस्‍ट कही जाती ..

    21वीं सदी तक समाज में चल रहे टोने टोटके को देखकर ताज्‍जुब तो जरूर होता है ..

    समग्र गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष

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  3. lalit ji ,
    bahut sahi post hai . bhayi ,. main to maanta hoon in baato ko ..

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  4. hm bhi mante hai ki kahi n kahi ye jadu totka hota hi hai ... 21wee sadi me bhi ye kai bar hme anubhut kra hi deta hai ... aaj hareli tyohar me aapka ye sargarbhit post bahut hi samsamyik hai .......... utkrist lekhan ke liye sadhuwad ...

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  5. टोनही की रोचक जानकारी ...
    सच है कि अन्धविश्वासी नहीं होने पर भी कुछ बातें जिंदगी में ऐसी होती है जिनका कोई तर्क नहीं होता , हम उन्हें संशय कह कर भूल जाना चाह्ते हैं.

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  6. लगता है आपने तो जादू टोने पर डाक्टरेट करने की ओर कदम बढा दिये हैं?:) लगे रहिये, इसका फ़ायदा भी ब्लाग जगत को ही मिलने वाला है.

    रामराम.

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  7. अच्छा हुआ अपने लिख दिया कि डरना मना है.वर्ना हम तो डर ही गए होते.
    इन तंत्र मन्त्र के पीछे जरुर कुछ न कुछ सच्चाई तो रही होगी.यह बात अलग है कि वक्त के साथ इसका रूप विकृत होता गया.और अब सिर्फ अंधविश्वास ही बचा है.

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  8. बड़ी ही रहस्यमयी दुनिया है यह तो।

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  9. उत्तर प्रदेश में छत्तीसगढ़ के नाम से ही लोग डरते हैं. बस्तर में भी जादू टोना का प्रचलन आदिवासियों में है.

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  10. उंदा प्रस्तुति |नई जानकारी देती रचना |

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  11. रहस्य मयी दुनिया की अच्छी जानकारी .... आज भी लोग इन सबको मानते हैं और कहीं न कहीं मन में डर भी समाया होता है ...

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  12. आपका हर लेख ..एक नयी जानकारी के साथ पोस्ट किया जाता हैं ...ऐसी ही नयी नयी जानकारी देने के लिए आभार

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  13. मै तो गाँव में ही रहता हूँ मेरे गाँव करीब १०० घर वैगा समाज के है,
    यहाँ पर एक दो लोग गुनिया गीरी का काम करते,दूर दूर से लोग उनसे
    अपना भूत प्रेत सम्बन्धी इलाज कराने के लिए आते है,हालाकि मेरा इन सब पर विस्वास नही है,न ही कोई इन सब चीजों को लेकर कोई परेशानी,लेकिन गाँव के लोग भूत प्रेत टोना टोटका की बाते करते रहते है,,,ये बाते आदिकाल से चली आ रही,तो कुछ बात तो है,,,,,,

    पोस्ट पे आने के लिए आभार ,,,,,,

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  14. ललित जी , इसीलिए हमारा देश अभी तक विकासशील है और अनंत तक रहेगा .
    लोगों का भ्रम दूर करने पर समय लगायें तो बेहतर होगा .

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  15. सुना तो खूब है ...पढ़कर डर गया हूँ अभी तक ऐसा देखा नहीं है ,,,

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  16. डॉ टी एस दराल जी, न मैं भ्रम पैदा कर रहा हूँ न भ्रम खत्म कर रहा हूँ। इस पोस्ट में मैने जो बातें गुप्त रहती हैं। उनके बारे में लिख कर उसे सहेज दिया है।

    भय सिर्फ़ अंधेरे में होता है। अब जहाँ तक विद्युतिकरण हो गया है। वहाँ पर यह सब चीजें दिखाई-सुनाई नहीं देती। धीरे-धीरे समाज बदलता जा रहा है और जागरुकता आ रही है। पर हजारों बरसों के अंधविश्वास को समाप्त होने में समय लगेगा।

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  17. रहस्यमयी दुनिया से साक्षात्कार कराने के लिये आभार।

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  18. इस तरह के भय मिटाने के लिए इन गुप्त बातों की जानकारी होना आवश्यक है|
    और आपने ऐसी गुप्त बातें सामने लाकर भय मिटाने के लिए सहयोग ही किया है|

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  19. रहस्‍य-रोमांच की इस दुनिया में ये परम्‍पराएं भी हमारी संस्‍कृति का अंग हैं, लेकिन अक्‍सर उनका विकृत पक्ष ही चर्चा में आता है.
    हरेली पर परंपराओं का पुण्‍य स्‍मरण कराया आपने, शुभकामनाएं.

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  20. इस रहस्मयी दुनिया और पम्पराओं से अच्छी तरह परिचित करा है दिया आपने जो थोडा बहुत मन में डर था वह भी दूर हो गया. आप उसके सबसे बड़े उदाहरण हैं, आपने सब देखा उलटके-पलटके सब तरह से फिर भी कुछ भी नहीं हुआ, सब अन्धविश्वास है इससे यह सिद्ध हो गया...

    हरेली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं...

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  21. बहुत अच्छी जानकारी ................!

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  22. जैसे अच्छी शक्तियां होती हैं वेसे ही बुरी भी होती होंगी । अचचे बुरे आदमियों की तरह पर िनमें विश्वास या अविश्वास से दूर ही रहना चहूंगी मै ।

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  23. असाम की एक् बस्ती में, जहां में रहा करता मैंने पुरे होशो हवाश में अपने एक वहीँ के, लोकल दोस्त के साथ एक कुवे के अन्दर से एक जलती लौ को निकल कर जाते हुए देखा है कई बार वो लौ कुवे के अन्दर गई और कई बार निकली |पता नहीं वो क्या था पर आज तक समझ नहीं पाया

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  24. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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