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शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2016

प्राचीन भारतिय विद्या: योग

यस्य नास्ति स्वयंप्रज्ञा शास्त्रं तस्य करोति किम्।
लोचनाभ्याम विहिनस्य दर्पणा: किम करिष्यति॥
आठवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में सुभाषितानी में उपरोक्त नीति शतक का श्लोक पढ़ा था। आज के घटना क्रम को देख कर स्मरन हो आया। आज विश्व के 197 देशों में योग दिवस मनाया गया। भारत की प्राचीन विद्या को सम्पूर्ण विश्व में प्रचार एवं स्थान मिला। दुनिया का कौन ऐसा प्राणी है जो स्वस्थ्य रहना नहीं चाहेगा। पर मनुष्य को छोड़ कर अन्य प्राणी योग विद्या का लाभ नहीं उठा सकते। ईश्वर ने इस विद्या को धारण करने के लिए मनुष्य को ही बनाया। 
आज गर्व का दिन है कि भारतीय योग पद्धति को सम्पूर्ण विश्व अपना रहा है तथा वर्ष में एक दिन "योग दिवस" के रुप में मनाने के लिए विश्व समुदाय द्वारा निर्धारित किया गया। अगर इसका श्रेय किसी को दिया जाना चाहिए तो वह हैं "बाबा रामदेव" और "प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी"। उन्होने विस्मृत हो चुकी इस प्राचीन विद्या को घर-घर तक पहुंचा दिया। लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरुक हुए और उन्होने अपनी जीवन शैली बदली। 
यह देश के जनमानस में एक क्रांतिकारी परिवर्तन माना जा सकता है। बाबा रामदेव ने हठयोग और व्यायाम को जोड़ कर स्वास्थ्य का पैकेज तैयार किया और उसकी ब्रांडिग भी की। जिन्होने योग और जीवन शैली में बदलाव कर प्राचीन शास्त्रोक्त आचार विचार को अपनाया उन्हें आशातीत परिणाम भी मिले। जो उनके घोर विरोधी है, वह भी असाध्य व्याधि से ग्रसित होने पर चुपचाप भारतीय चिकित्सा पद्धति एवं योग की शरण लेते हैं। कंबल ओढ़ कर गुड़ खाते हैं, पर किसी को दिखना नहीं चाहिए। जो जन्म भूमि से प्यार करता है वह हमारी प्राचीन जीवन विद्या को भी मानता है।
कुछ लोग दुनिया में नकारात्मकता लेकर पैदा होते हैं, कितना भी अच्छा काम हो जाए उन्हें उसमें बुराई दिखाई ही देती है क्योंकि उन्होने कभी सकारात्मक जीवन ही नहीं जीया। सुबह से एक चित्र फ़ेसबुक पर घूम रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री सुखासन में बैठ कर योग क्रिया कर रहे हैं। तो लोग कह रहे हैं उन्हें पद्मासन लगाना नहीं आता। कोई कह रहा है अर्धपद्मासन लगा रखा है। अरे भाई जरा किताबें पढ़ लो, देख लो, समझ लो, अर्ध पद्मासन कहीं होता ही नहीं है और यह किसी योगाचार्य ने नहीं कहा कि सुखासन में अनुलोम विलोम नहीं किया जा सकता। आप अपने सांसो की किसी भी प्रकार के आसन में सुख पूर्वक बैठ कर साध सकते हैं। 

अब यह तो नहीं हो सकता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने प्राचीन भारतीय विद्या योग को विश्व में पहचान दिलाने का कार्य किया है तो योग के सारे आसन आपको करके दिखाएं। यह तो खिसियानी बिल्ली के खंभा नोचने वाली कहावत हो गयी।अब कहोगे कि चाहे कुछ भी हो मुझे तो विरोध करने से मतलब है। तो भाई इसका ईलाज हकीम लुकमान के पास भी नहीं है। 
लेकिन यह तो स्वीकारना पड़ेगा कि भारत में आदि शंकराचार्य ने धर्म की पुनरुस्थापना की, महर्षि दयानंद ने वेदों को जन-जन तक पहुंचाया और उसी ॠषि परम्परा पर चलते हुए स्वामी रामदेव ने योग को विश्व के कोने कोने तक पहुंचाने का कार्य किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उसे विश्व में मान्यता दिलाने का महान कार्य किया। उपर लिखे श्लोक का अर्थ बताते हुए अपनी बात खत्म करता हूँ…… जिसके पास स्वयं का विवेक नहीं है, उसे शास्त्र कोई ज्ञान नहीं दे सकते जिस प्रकार प्रज्ञा चक्षू को दर्पण उसकी छवि नहीं दिखला सकता। इसलिए आंखे खोलिए और जो अच्छा है उसे स्वीकार कीजिए …… अस्तु॥

सोमवार, 25 मार्च 2013

ब्लॉग हायर सेकेंडरी परीक्षा ………4013


विषय - ब्लॉग होली विशिष्ट (इतिहास)
समय : 3 घंटे                                                                                                                                                 पूर्णांक - 100
निर्देश (1) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। कुल 25 प्रश्न हैं।

(अ) सही विकल्प चुन कर लिखिए (10 अंक)
(1) "धान के देश में" ब्लॉग़ के लेखक किस नाम से जाने जाते थे
 (अ) अवधिया चाचा (ब) जीके अवधिया (स) पीके अवधिया (द) बेदांती महाराज

(2) "मन पखेरु उड़ चला"  किस मशहुर कवियत्री का ब्लॉग है।
(अ)संध्या शर्मा (ब) सुनीता शर्मा (स)मोनिका शर्मा (द)वाणी शर्मा

(3) "उसने कहा था" ब्लॉग की माडरेटर कौन है।
(अ) माधवी शर्मा गुलेरी (ब) चंद्रप्रकाश गुलेरी (स) साधना गुलेरी(द) दिव्या गुलेरी

(4) श्याम कोरी उदय किस काव्य धारा के कवि हैं
(अ) ब्लॉग (ब) फ़ेसबुक (स) आरकुट (द) गुगल प्लस

(5) कविता वर्मा जी "कासे कहूँ" ब्लॉग पर साहित्य की विधा में लिखती थी
(अ)काव्य (ब) कहानी (स) यात्रा वृतांत (द) व्यंग्य

(ब) उचित संबंध जोड़ो (5 अंक)

(1) अनुप शुक्ला               - मानसिक हलचल
(2) लाला समीर लाल        -पराया देश
(3) ताऊ                           -फ़ुरसतिया  
(4)राज भाटिया                -रामप्यारी
(5)ज्ञानदत्त पाण्डे            -उडन तश्तरी

प्रश्न 2 से लेकर 11 तक प्रति प्रश्न 2-2 अंक हैं।

प्रश्न (2) ब्लॉग किसे कहते हैं, उदाहरण सहित परिभाषा लिखो

प्रश्न (3) संध्या शर्मा के ब्लॉग "मैं और मेरी कविताएं" से एक कविता लेकर उसके रस, छंद एवं अलंकार की व्याख्या कीजिए?

प्रश्न (4) ब्लॉग पर घनाक्षरी छंद रचने वाले ब्लॉगर का नाम बताएं और उनके द्वारा रचित एक छंद लिखें।

प्रश्न (5) "जलजला" ब्लॉग जगत में कब और क्यों सक्रीय हुआ?

प्रश्न (6) ब्लॉग लेखन को लेकर भारत में साईबर एक्ट की धारा 66/ए के अंतर्गत प्रथमत: किस ब्लॉगर पर जुर्म दर्ज हुआ था? उनके ब्लॉग का नाम लिखें।

प्रश्न (7) लंठ महाचर्चा लिखने वाले ब्लॉगर एवं ब्लॉग का नाम बताएं?

प्रश्न (8) जाट धर्म शाला नांगलोई में ब्लॉगरमीट कब और क्यों हुई थी?

प्रश्न (9) ब्लॉग पुरस्कारों का प्रारंभ क्यों और कहाँ हुआ?

प्रश्न (10) ताऊ द्वारा आयोजित ब्लॉग पुरस्कार किस नाम से जाना जाता है?

प्रश्न (11) चिट्ठा चर्चा पर विवाद कब और क्यों नहीं हुआ?

प्रश्न 12 से 20 तक 3-3 अंक हैं।

प्रश्न (12) नामी और बेनामी कमेंट का आशय क्या है?

प्रश्न (13) एक साथ दो-दो कमेंट कापी पेस्ट करने वाले ब्लॉगर का नाम बताएं?

प्रश्न (14) किस हिन्दी ब्लॉगर के ब्लॉग पर सबसे अधिक टिप्पणियों का रिकार्ड कायम हुआ?
                                                          या
प्रथम ब्लॉग़ युद्द किसके बीच एवं कहाँ हुआ था?

प्रश्न (15) ब्लॉग सत्ता पर अधिकार पाने की लड़ाई में कितने ब्लॉग और ब्लॉगर खेत रहे?
                                                         या
द्वितीय ब्लॉग युद्द के कारक बताएं?

प्रश्न (16) रायपुर में आयोजित 24 जनवरी 2010 की ब्लॉगर मीट को ब्लॉग मठाधीश ने विद्रोह क्यों माना?
                                                            या
प्रेस क्लब में आयोजित ब्लॉगर मीट में कौन सा प्रस्ताव सर्व सम्मति से पारित हुआ?

प्रश्न (17) गत्यात्मक ज्योतिष ब्लॉग की जुझारु ब्लॉगर का नाम बताएं एवं गत्यात्मक ज्योतिष की 500 शब्दों में व्याख्या करें?
                                                         या
ब्लॉग जगत की चिट्ठा चर्चाओं के नाम बताईए एवं  चर्चित चिट्ठा चर्चा ब्लॉग4वार्ता प्रारंभ करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? (500 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न (18) घुमंतु ब्लॉगर ललित शर्मा का जीवन दर्शन क्या था? तथा उनकी खोजों का वर्णन 500 शब्दों में कीजिए?
                                                                               या
10 प्रमुख ब्लागरों के नाम एवं ब्लॉग का नाम बताएं तथा 50 शब्दों में उनके ब्लॉग लेखन के विषय की जानकारी दें?

प्रश्न (19) बेनामी हमला सबसे पहले किस ब्लॉग पर कब और क्यों हुआ था? बेनामी हमले के कारकों की व्याख्या कीजिए?
                                                                               या
ब्लॉग पर कमेंट करने के कुछ महीनो के बाद कमेंट मिटाने वाले ब्लॉगर का जिक्र करते हुए, कमेंट मिटाने की मानसिक स्थिति का 300 शब्दों में विश्लेषण कीजिए?

प्रश्न (20) हरियाणा के रोहतक नगर में स्थित तिलियार ब्लॉगर मीट का आयोजन क्यों और किसने किया था? मीट में उपस्थित ब्लॉगर्स का नाम बताते हुए, मीट के पश्चात उपजे विवाद पर प्रकाश डालिए?
                                                                               या
समस्त चिट्ठा चर्चाओं का जिक्र करते हुए, उनकी उपयोगिता का 500 शब्दों में विश्लेषण कीजिए?

प्रश्न क्रमांक 21 से 24 तक 5-5 अंक हैं।

प्रश्न (21) ब्लॉग जगत के घुमक्कड़ों की चर्चा करते हुए, बताईए की वे घुमक्कड़ी के लिए उर्जा कहाँ से पाते हैं? 500 शब्दों में
                                                                                 या
"मेरे दिल के अरमां  रहे रात जलते,रहे सब करवट पे करवट बदलते। यूँ हारी है बाज़ी मुहब्बत की हमने,बहुत रोया है दिल दहलते- दहलते " ये लाईन किस प्रसिद्ध कवियत्री की हैं बताईए एवं संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए?

प्रश्न (22) न दैन्यम न पलायनम, क्वचिदन्यतोअपि, सिंहावलोकन, आलसी का चिट्टा, आरंभ, देशनामा आदि ब्लॉग की सामग्री के विशिष्टता पर 100-100 शब्दों में जानकारी दें?
                                                                               या
ब्लॉग जगत के आडियो ब्लॉग्स की जानकारी देते हुए उनकी सामग्री का विश्लेषण 500 शब्दों में करें?
प्रश्न (23) नुक्कड़ की स्थापना कब हुई थी? नुक्कड़ के सहयोगी लेखकों का जिक्र 500 शब्दों में कीजिए?
                                                                             या
जन्मदिन एवं विवाह की साल गिरह की जानकारी देने वाले ब्लॉग का क्या नाम था तथा उसके बंद होने के कारणों का उल्लेख करें?

प्रश्न (24) ब्लॉग लेखन के कारकों का उल्लेख करते हुए नए ब्लॉगर का ब्लॉग जगत की हाईवे, गली-गलियारों का जिक्र करते हुए 500 शब्दों में मार्ग दर्शन कीजिए?
                                                                            या
ब्लॉग लेखन के लिए आवश्यक सामग्री का जिक्र करते हुए कुछ उल्लेखनीय ब्लॉगों के विषय में 500 शब्दों में जानकारी दीजिए।

प्रश्न -(25) निबंध लिखिए (750 शब्दों में) अंक 18

अजय झा के ब्लॉग, ब्लॉग जगत का आस्कर, बेनामी टिप्पणीकार, एग्रीगेटर्स, ब्लॉगिंग के आयाम
                                                                            या
ब्लॉगिंग के गूढ रह्स्यों की जानकारी देते हुए पिता को पत्र लिखिए ?

गुरुवार, 9 जून 2011

यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत--ललित शर्मा

विदेशी बैंको में जमा काला धन भारत लाने हेतू जनमत बनाने का काम लगभग 20 वर्षों से राजीव दीक्षित कर रहे थे। वे भारत के गाँव-गाँव में जनता के बीच अलख जगा रहे थे। लेकिन उनके पास संसाधन नहीं थे। वे प्रवचन देकर जाते और जनता सुन कर भूल जाती। बाबा रामदेव योग के जरिए देश-विदेश में प्रसिद्ध हो गए। उनसे राजीव दीक्षित का परिचय हुआ, दोनो ने काला धन वापस लाने के मुद्दे पर कार्य प्रारंभ किया। राजीव दीक्षित की मुहिम में बाबा जी शामिल हो गए। काला धन वापस लाने के लिए प्रचार-प्रसार एवं जन जागरण का कार्य बाबा रामदेव ने अपने शिविरों में प्रारंभ किया। लोगों को यह बात अच्छी लगी। तभी 2 जी घोटाला सामने आया, उसके बाद कामनवेल्थ एवं अन्य बड़े घोटाले प्रकाश में आए। जिसकी प्रतिक्रिया आम जनता में हुई और वह भी सोचने लगी कि वर्तमान केन्द्र सरकार घोटालो की जननी बन कर रह गयी है। आम जनता की पसीने की कमाई से घोटालेबाज लोग अपना घर भरने में लगे हैं।

अन्ना हजारे के भ्रष्ट्राचार विरोधी आन्दोलन की सफ़लता ने बाबा रामदेव के कान खड़े कर दिए। उन्होने विदेशी बैंकों से काला धन वापस लाने के लिए अपने सत्याग्रह की घोषणा पहले ही कर दी थी और यही सोचा होगा कि उनके अन्य शिविरों की तरह सरकार इस सत्याग्रह आन्दोलन को चलने देगी। इसी अति उत्साह में वे गलती कर बैठे। जब उनका सत्याग्रह प्रारंभ हुआ तो आम जन से लेकर फ़ेसबुक, ट्विटर, ब्लॉग इत्यादि नए मीडिया पर उनके समर्थन करने वालों का ज्वार उमड़ पड़ा। इलेक्ट्रानिक मीडिया और प्रिंट मीडिया ने भी इन्हे भरपूर कवरेज दिया। लोग गाँव और शहरों में सत्याग्रह के समर्थन में धरने पर बैठ गये। सत्याग्रह प्रारंभ होते ही वातावरण ऐसा बन गया कि दिल्ली की कांग्रेस सरकार अब गयी और तब गयी। इससे सरकार की भी चूलें हिल गयी। वह बैकफ़ुट पर आ गयी और अपने मंत्रियों को बाबा से चर्चा करने के लिए भेजा। ये चर्चा करने होटल में चले गए। बस बाबा रामदेव से यहीं पर चूक हो गयी।

होटल में क्या चर्चा हुई? इसकी जानकारी मीडिया तक नहीं पहुंची और न ही आम देशवासियों तक। यही पर संदेह बीज पड़ गए। बाबा का अनशन प्रारंभ हो गया। लगभग एक लाख लोग रामलीला मैदान में देश के विभिन्न प्रांतो से पहुंचे। देश की जनता भ्रष्ट्राचार के खिलाफ़ खड़ी हो चुकी थी। उसे लग रहा था कि बाबा रामदेव के रुप में ईश्वर ने कोई देवदूत भेज दिया जो उनके रिसते हुए घावों पर मरहम लगाएगा। कुछ राजनैतिक पार्टियाँ तवा गर्म होने का इंतजार कर रही थी कि वो भी अपनी रोटियां सेंक ले, बहती गंगा में हस्तप्रक्षालन कर वे भी पावन हो जाएं। मुद्दों की कमी से जूझ रही पार्टियों को बैठे बिठाए मुद्दा  मिल जाए। जिस तरह शेर के शिकार पर सियारों की नजर रहती है ठीक उसी तरह ये भी ताक रहे थे। सरकार की कपट भावना सीधे-साधे बाबा जी समझ नहीं पाए एवं चक्रव्युह में फ़ंस गए। शाम को चिट्ठी सामने आते ही हवा बदल चुकी थी। सरकार के प्रवक्ता उन्हे ठग घोषित कर रहे थे। 

बाबा जी को अंदेशा नहीं था कि आधी रात को सरकार की दमनात्मक कार्यवाही हो जाएगी। सोए लोगों पर पुलिस ने अपने डंडे चला दिए और जलियांवाला बाग की याद दिला दी। सुबह तक समाचार देश भर में फ़ैल चुका था और सरकार की दमनात्मक कार्यवाही की घोर भर्तसना हो रही थी। आम नागरिक भी सरकार के दमनात्मक रवैये के खिलाफ़ अपना मुंह खोल चुका था। पुलिस के बर्बर दमन ने बच्चो, महिलाओं एवं वृद्धों को भी नहीं बख्शा। कांग्रेसी प्रवक्ता के बुद्धि पर तरस आता है। वे कह रहे थे कि "बच्चो, महिलाओं एव वृद्धों को रामलीला मैदान में लाने की क्या जरुरत थी?" अरे पहले ही बता दिया होता कि डंडे बरसेगें तो वैसा ही इंतजाम किया जाता। बाबा जी की कोई खोज खबर नहीं लगी थी। टीवी वाले मंच से कूदते हुए का फ़ुटेज दिखा रहे थे। दोपहर को बाबा प्रगट हुए सलवार कुरते में।

बाबा को टीवी पर सलवार कुरते में देख कर एक बारगी चौक गया और मीडिया को वक्तव्य देते हुए उनका रोना कुछ जंचा नहीं। पुरुषोचित कार्य करने वाले व्यक्ति पर कितना भी कष्ट आ जाए, रोते नहीं है। बाबा जी को अपनी हत्या का डर सता रहा था, महिलाओं को कवच बना कर रामलीला मैदान में हजारों की संख्या में उपस्थित घायल कार्यकर्ताओं को छोड़ कर चला आना कुछ जंचा नहीं। कांग्रेस सरकार इतनी बेवकूफ़ नहीं है कि इनकी हत्या करवा कर एक मुसिबत और अपने गले में डालती। दुरांचल से आए हुए लोग लाठी डंडे खा कर दिल्ली में भूखे प्यासे भटकते रहे। इनको गिरफ़्तारी दे देनी थी और जेल चले जाना था लेकिन दिल्ली नहीं छोड़नी थी। जो कपालभाति और अनुलोम विलोम बाबा जी शिविर में कर रहे थे, वो जेल में भी कर सकते। जिससे लोगों का विश्वास तो बचा रहता। ये  आर्य समाज की उस परम्परा से आते हैं जहाँ स्वामी दयानंद, लाला लाजपत राय, भगत सिंह, स्वामी श्रद्धानंद, हुतात्मा लेखराम, महाशय राजपाल जैसे बलिदानी लोग हुए हैं, और देश धर्म हित अपने प्राणों की बलि दी है।

आज बाबा जी ने 11000 सैनिकों की सेना बनाने का एलान कर दिया और कहा कि दमन होने पर सेना जवाब देगी। इस वक्तव्य से लगता है कि बाबा के दिमाग में गर्मी चढ गयी है । लोकतंत्र में व्यक्तिगत सेना बनाने का अधिकार किसी को नहीं है और हमारा संविधान भी इस बात की स्वीकृति नहीं देता। भारत के संविधान को मानने वाले संविधान को चुनौती देने का कार्य कैसे कर सकते है। देश की जनता ने बाबा को अहिंसात्मक आन्दोलन में सक्रिय योगदान दिया। जब हिंसा ही करनी है तो नक्सली क्या बुरे हैं, उन्हे तो महारत हासिल है हिंसात्मक लड़ाई लड़ने में। क्यों लोग जान गंवाएगें बाबा के साथ। जिसमें नेतृत्व की क्षमता होती है वह निहत्थे ही आत्मबल के सहारे लड़ाई जीत सकता है। भ्रष्ट्राचार के विरुद्ध लड़ाई संवैधानिक दायरे में ही रह कर लड़नी चाहिए।

बातन हाथी पाईए और बातन हाथी पाँव। बाबा की की प्रसिद्धि का ग्राफ़ दो दिन में ही गिर गया। उनके अनशन को समाप्त करने के लिए गन्ना रस पिलाने वाले भी नही दिख रहे। देश की जनता ने इन पर विश्वास जताया था, लेकिन मुझे लगता है कि इनके पास नेतृत्व की क्षमता नहीं है, मंच पर बैठ कर योगासन करा लेना एवं प्रवचन दे देना सरल है, पर मैदान में आने के बाद भीड़ का नेतृत्व करना कोई आसान काम नहीं है। कांग्रेस सरकार ने निहत्थे लोगों पर लाठियाँ चलाई उसकी हम पुरजोर निंदा करते हैं, लेकिन इनके राम लीला मैदान छोड़ कर भागने वाले कार्य की सराहना नहीं कर सकते। एक बात तो है कि इस आन्दोलन से जनता जागरुक हुई है और इसका परिणाम आने वाले चुनाव में अवश्य दिखाई देगा। भारत की जनता इंतजार कर रही है कि सवा अरब की जनसंख्या वाले देश में कोई तो ऐसा आएगा जो उसे भ्रष्ट्राचारियो एवं अत्याचारियों से निजात दिलाएगा।

यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। 
अभ्युत्थानं अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहं।
परित्राणायत साधुर्नाम विनाशाय च दुष्कृताम्। 
धर्म संस्थापनात्ध्याये सं भवामी युगे युगे।


नोट-उपरोक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं।
फ़ोटो -- गुगल से साभार, किसी को आपत्ति होगी तो हटा दी जाएगीं।

बुधवार, 30 मार्च 2011

कौन जीतेगा कौन हारेगा? एक सवाल मित्रों से --- ललित शर्मा

आज हिन्दुस्तान और पाकिस्तान का घमासान देखने बैठ गए। लड़खड़ाते हुए हिन्दुस्तानी बल्ले बाज सम्मान जनक स्कोर तक पहुंच गए। रियाज ने अच्छी बॉ्लिंग की, 5 विकेट लिए। सचिन शतक से चूके। पाकिस्तानी पारी को लेकर ऑनलाईन मित्रों से कुछ सवाल किए।हि्न्दुस्तानी बॉलर कौन चलेगा? फ़िल्डिंग कैसी रहेगी? और कौन जीतेगा?
अवधिया  जी हिन्दुस्तानी खिलाड़ियों के मैच से निराश दिखे। उन्होने सीधे ही कह दिया कि "हारेगें।"
संजीत त्रिपाठी जी ने कहा- "जीतना ही है।"लेट्स सी। सट्टेबाजों ने भाव भारत का 30 पैसे खोला था जो कि शाम साढ़े चार बजे 80 पैसा हो गया था।
राजीव तनेजा जी ने  कहा कि--वे मैच कम देखते हैं, इसलिए अंदाजा नहीं लगा सकते।
अजय झा जी ने कहा-सब बहुत ही अच्छा अच्छा होगा सर,आप तो जश्न क इंतज़ाम करिए
राजेन्द्र तेला जी ने कहा-aashaawaadee desh premee hoon, जहीर की बॉलिंग चलेगी
ज्वेल प्रकाश ने कहा-भारत जी्तेगा, बॉलिंग भी अच्छी रहेगी।
संजय भास्कर ने कहा- पता नहीं, पर मैच अच्छा था

अब मैच शुरु हो गया है। आगे देखते हैं क्या होता है?
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शनिवार, 23 अक्टूबर 2010

ये देश है वीर जवानों का--भारतीय सेना को सलाम----------ललित शर्मा

“ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का” जब इस गीत को सुनता हूँ तो मुझे हाथ में रायफ़ल लिए सीमाओं की रक्षा करते जवान याद आ जाते हैं। वैसे भी मेरा लगाव सदा से सेना के साथ रहा है क्योंकि मेरे परिवार का दाना-पानी सेना के पैसे से ही चलता था। वर्दी पहने हुए जवान अपने आभूषणों से सूसज्जित होकर जब कदम ताल करते हैं तो उनके बूटों की धमक से धरती भी हिलने लगती है। लड़ाई का मैदान हो, शांति का समय या सेवानिवृति के बाद का समय, सैनिक आजीवन सैनिक ही बना रहता है। ऐसा अनुशासन सेना में एक 17 साल के रंगरुट को सिखाया जाता है।

छत्तीसगढ में सेना सिर्फ़ एन.सी.सी. के संचालन में ही दिखाई देती थी और कहीं नहीं। एक समय था कि सेना में जाने का जज्बा यहां अन्य प्रदेशों से बहुत कम होता था। आज तो कुछ नवयुवक अपना रुख सेना की तरफ़ कर रहे हैं। विगत दिनों मैं एक मित्र की बेटी की शादी में राजस्थान के झुंझनु जिले के भड़ुन्दा खुर्द गाँव में गया था। वहां जाने पर मुझे पता चला कि वहां से लगभग 800 जवान सेना में हैं और गांव की सारी व्यवस्था सेना के जवान ही संभालते हैं,पंचायत से लेकर साफ़ सफ़ाई तक में अपनी हिस्सेदारी बंटाते हैं क्योंकि हमेशा 200 जवान तो छुट्टी में गांव आए ही रहते हैं। सेना के प्रति मैंने ऐसा आकर्षण इस गांव में देखा।

अभी दो दिनों पहले मैने जब सुना कि भारतीय सेना छत्तीसगढ में “राष्ट्र प्रहरी” थीम पर “अपनी सेना को जाने” नाम से सैन्य मेला कर रही है तो मेले में शिरकत करने की इच्छा प्रबल हो गयी। सेना का यह सराहनीय कदम है जिससे देश के नागरिक अपनी सेना को करीब से जान सकें। सेना ने छत्तीसगढ और उड़िसा का सब-एरिया ऑफ़िस रायपुर में स्थापित किया है। इस दो दिवसीय मेले का शुभारंभ राज्यपाल शेखर दत्त ने किया। इस मेले से नवजवानों को सेना में भर्ती होने के अवसरों एवं अहर्ताओं की जानकारी भी मिलेगी। इस अवसर पर सैनिकों ने अपने करतब भी दिखाए, लेकिन एक अन्य कार्यक्रम में व्यस्त होने के कारण हम इस स्थल पर विलंब से पहुंचे।

सेना के माध्यम से अपना कैरियर बनाने का सपना कुछ प्रदेशों के नौजवान बचपन से ही देखते हैं, जब सेना में भर्ती नहीं हो पाते तो मास्टरी की तरफ़ अपना रुख करते हैं। अब सेना में छत्तीसगढ के नव जवान भी भर्ती होकर अपने राज्य देश और माता-पिता का नाम रोशन कर सकेंगें। इस मेले से उनके अंदर भी सेना को अपना कैरियर बनाने का जज्बा पैदा होगा। आज छत्तीसगढ से अन्य प्रदेशों की अपेक्षा सेना में बहुत ही कम लोग हैं। अब नव जवान रुचि लेने लगे हैं, इसका सबूत सेना की भर्ती रैलियों में देखने मिलता है।आज सेना में जाने के लिए छत्तीसगढ के जवान भी उत्सुक दिखाई पड़ते है और जा भी रहे हैं।

कल भाई अशोक बजाज से चर्चा हो रही थी कि इस मेले को देखने जाना है और वादे के अनुसार मेले में पहुंचे जरुर, लेकिन कुछ विलंब हो चुका था और बरसात मजा किरकिरा कर चुकी थी, मैदान में कीचड़ हो चुका था। फ़िर भी हम सेना के अत्याधुनिक हथियार देखने का लोभ नहीं छोड़ सकते। वहां लोगों की भीड़ लगी हुई थी। नौजवान सैन्य अधिकारियों से हथियारों के विषय में जानकारी ले रहे थे। हम भी मैदान में पहुंचे तो सबसे पहले सत्ता परिवर्तन वाली एवं कारगिल युद्ध जिताने वाली 155 एम एम की तोप पर निगाह पड़ी। उसका बैरल सामने की ओर था। सैनिक उसके फ़ंक्सन चला कर बता रहे थे। हमने वहां एक सैनिक से पूछा कि यह तोप कौन सी है? तो उसने बताया कि 155 एम एम, फ़िर धीरे से कहा कि बोफ़ार्स हैं। हा हा हा मैने इसलिए इसे सत्ता परिवर्तन करने वाली तोप कहा।12000 किलो की यह तोप तत्कालीन कांग्रेस सरकार के लिए पृथ्वी से भी भारी हो गयी थी।

फ़िर आगे चले तो एक टैंक था, उसके पास श्री भगवान नामक सैनिक अफ़सर खड़े थे। हमने उस टैंक के विषय में विषय में उनसे माकूल जानकारी ली। कुछ एन सी सी के कैडेट भी टैंक के सामने खड़े होकर फ़ोटो खिंचवा कर मेले को यादगार बना रहे थे। श्री भगवान ने बताया की यह टैंक उबड़-खाबड़ मैदान, रेगिस्तान और पानी में समान रुप से चलता है। इसकी रफ़्तार 65 किलो मीटर प्रति घंटा है। इसकी तोप प्रत्येक परिस्थिति में लगातार गोले दाग सकती है। इस तरह यह टैंक सेना के लिए काफ़ी कारगर है। इनसे उत्सुकतावश एक मित्र ने पूछ लिया कि आप इसे कहां से लाए हैं तो श्री भगवान ने कहा कि आप क्या करेंगे जानकर? तो मैने कहा यार बच्चे खेलेंगे इससे। इसलिए पूछ रहे हैं। सुनकर ये भी मुस्कुराए।

तभी हमारी निगाहें सामने खड़ी एक लम्बी गाड़ी पर पड़ी। जिसमें तीन मिसाईलें लोड थी। हम उसके पास पहुंचे तो देखा कि यह ब्रह्मोस मिसाईल थी। डी आर डी ओ ने इसे अपनी तकनीक का इस्तेमाल करके बनाया है। वहां उपलब्ध एक अधिकारी ने बताया कि 2-2 सेकंड के अंतराल पर 6 सेकंड में तीनों मिसाईल एक साथ दागी जा सकती हैं तथा 300 किलोमीटर तक इनका निशाना सटीक है। मैं वहां खड़ा सोच रहा था कि गोली बंदुक तो चलाए, एक बार मिसाईल चलाने का मौका मिल जाए तो क्या कहने। लेकिन इस जन्म में वह दिन नहीं आएगा। शायद इसे चलाने के लिए सेना में अगला जन्म लेना पड़े ।

सेना ने रायपुर राजधानी में सैन्य मेला लगा कर युवाओं को सेना के प्रति आकर्षित करने का काम किया है। मैं देख रहा था कि लोग टैंक और तोपों को हाथ लगा कर देख रहे थे। इससे पहले सिर्फ़ चित्रों और फ़िल्मों में ही देखा था। वीरता का जज्बा हमारे देश के नौजवानों में कूट-कूट कर भरा है आवश्यकता है केवल उन्हे सही दिशा देने की। सेना अनुशासन और उत्तरदायित्व सीखाती है। यहां हुक्म उदुली करना बहुत ही कठिन है। आदेश पर पालन सभी परिस्थितियों में करना है। कहीं भी कोई शक की गुंजाईश नहीं होती। अगर देश के युवाओं में अनुशासन लाना है तो प्रत्येक युवा  के 12 वीं पास होते ही 5 साल के लिए सेना में सेवा करना अनिवार्य कर देना चाहिए। उसके पश्चात ही वह अन्य सेवाओं के लिए पात्र हो सके। देश का प्रत्येक नागरिक सैनिक होगा और संकट का समय आने पर दो-दो हाथ करना भी जानता होगा। इसी लिए कहा गया है कि “शस्त्र रक्षिते राष्ट्रे शास्त्र चर्चा प्रवर्तते।“