नेशनल हाईवे 43 पर बेतरतीब खड़ी ट्रक (परलोकवाहक) ने आज फ़िर एक जान ले ली। सड़क पर हो रही दुर्घटनाओं के विषय में मैं पहले भी लिख चुका हूँ। बड़ी ट्रक वाले सड़क पर कहीं भी ट्रक खड़ी कर देते हैं। इनके पीछे इंडिकेटर, पार्किंग लाईट और रेड़ियम भी लगा नहीं होता, जिसके कारण अंधेरे में ट्रक दिखाई नहीं देता और लोग पीछे से टकरा कर जान दे बैठते हैं। किसी के घर का चिराग असमय ही बुझ जाता है और बाल-बच्चे अनाथ हो जाते हैं। आर टी ओ भी बिना गाड़ी देखे फ़िटनेस दे देता है, उसे तो अपनी दक्षिणा से मतलब। चाहे जान किसी की भी जाए। ऐसी एक गाड़ी से मैं भी टकराकर अपनी एक कार होम कर चुका हूँ और 3 पसलियाँ तुड़वा चुका हूँ।
कल मेरे शिक्षक मित्र हेमसिंग वर्मा जी स्कूल से पढा कर आ रहे थे रास्ते में बरसात हो रही थी जिसके कारण वे रुक-रुक कर घर आ रहे थे। अभनपुर के पास खड़ी एक ट्रक से पीछे से टकरा गए और वहीं उनकी मृत्यु हो गयी। असमय मृत्यु से उनका परिवार और इष्ट-मित्र सदमे में है। अभी तीन-चार दिन पहले ही मैने उन्हे सपत्नीक बाजार आते हुए देखा था और मजाक भी की थी। अब यादे हीं शेष हैं, पता नहीं यह सड़क कितनों की जान लेगी। राजधानी बनने के बाद इस पर ट्रैफ़िक चौगुना बढ चुका है। सुना गया था कि फ़ोर लाईन बनाया जा रहा है लेकिन 6 साल हो गए अभी तक कोई कार्यवाही नहीं देखी। ईश्वर करे और कोई दुर्घटना का शिकार न हो। मित्र हेमसिंग जी को विनम्र श्रद्धांजलि ईश्वर उनके परिजनों को दारुण दु:ख सहने की शक्ति दे।