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पानीपत के युद्ध के विषय में हम इतिहास में पढते आए हैं,1526 में पानीपत की पहली लड़ाई में बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराया था। पानीपत की दूसरी 1556 में हुई। पानीपत की तीसरी लड़ाई 1761 में हुई।
अब पानीपत की चौथी लड़ाई तब से ही जारी है जीजिविषा के लिए। पानीपत अब एक औद्यौगिक नगर बन चुका है। उद्योगों में बाहर से आकर हजारों लोग काम करते हैं। रोजी रोटी की लड़ाई हर आदमी लड़ रहा है।
यहां के लोग साफ़ पानी के लिए भी लड़ाई लड़ रहे हैं। औद्यौगिक प्रदूषण ने यहां के जमीनी पानी को प्रदूषित कर दिया है। घर-घर एक्वागार्ड लगे हैं और पीने के लिए फ़िल्टर प्लाँट से पानी खरीदना पड़ता है। पानीपत में तो मेरा पड़ाव कुछ घंटो का ही था। इसलिए अधिक जानकारी नहीं ले पाए। हमे रोहतक के लिए भी निकलना था
पानीपत के युद्ध के विषय में हम इतिहास में पढते आए हैं,1526 में पानीपत की पहली लड़ाई में बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराया था। पानीपत की दूसरी 1556 में हुई। पानीपत की तीसरी लड़ाई 1761 में हुई।
अब पानीपत की चौथी लड़ाई तब से ही जारी है जीजिविषा के लिए। पानीपत अब एक औद्यौगिक नगर बन चुका है। उद्योगों में बाहर से आकर हजारों लोग काम करते हैं। रोजी रोटी की लड़ाई हर आदमी लड़ रहा है।
यहां के लोग साफ़ पानी के लिए भी लड़ाई लड़ रहे हैं। औद्यौगिक प्रदूषण ने यहां के जमीनी पानी को प्रदूषित कर दिया है। घर-घर एक्वागार्ड लगे हैं और पीने के लिए फ़िल्टर प्लाँट से पानी खरीदना पड़ता है। पानीपत में तो मेरा पड़ाव कुछ घंटो का ही था। इसलिए अधिक जानकारी नहीं ले पाए। हमे रोहतक के लिए भी निकलना था
देश की मशहूर हस्ती भाई योगेन्द्र मौदगिल जी के साथ हम उनके घर पहुंचे। भाभी जी और बेटे बेटी से मुलाकात हुई। बेटा योगेन्द्र जी के काम में हाथ बंटाता है और पढाई भी करता है। इसीलिए ये बेफ़िक्र होकर कवि सम्मेलन करते फ़िरते हैं।
सफ़र में निकले कई दिन हो गए थे। छत्तीसगढ से मध्यप्रदेश,राजस्थान और दिल्ली होते हुए हरियाणा में प्रवेश कर चुके थे। कई दिनों तक पक्का खाना खाया। अब कुछ अलग तरह का खाने का मन था।
शायद भगवान ने सुन ली। जब खाने की टेबल पर पहुंचे तो भाभी जी ने पकौड़े वाली कढी बना रखी थी। वाह क्या कहने। मनवांछित भोजन देखकर ही आनंद आ गया। हरियाणा की एक मशहूर सब्जी पनीर भी है। यहां आपको शादी ब्याह और भी कोई कार्यक्रम हो, पनीर की सब्जी जरुर मिलेगी।
अगर किसी के यहाँ नही मिली तो कह देंगे कि – “सुसरे नै के इंतजाम करया था। एक दम घटिया। पनीर का साग भी कोनी बणाया।“ और अगर पनीर का साग मिल गया तो सबसे पहले उससे ही प्लेट भर लेंगे। चाहे पीच्छे कुछ ना मिले तो भी काम चल ज्यागा।)
सफ़र में निकले कई दिन हो गए थे। छत्तीसगढ से मध्यप्रदेश,राजस्थान और दिल्ली होते हुए हरियाणा में प्रवेश कर चुके थे। कई दिनों तक पक्का खाना खाया। अब कुछ अलग तरह का खाने का मन था।
शायद भगवान ने सुन ली। जब खाने की टेबल पर पहुंचे तो भाभी जी ने पकौड़े वाली कढी बना रखी थी। वाह क्या कहने। मनवांछित भोजन देखकर ही आनंद आ गया। हरियाणा की एक मशहूर सब्जी पनीर भी है। यहां आपको शादी ब्याह और भी कोई कार्यक्रम हो, पनीर की सब्जी जरुर मिलेगी।
अगर किसी के यहाँ नही मिली तो कह देंगे कि – “सुसरे नै के इंतजाम करया था। एक दम घटिया। पनीर का साग भी कोनी बणाया।“ और अगर पनीर का साग मिल गया तो सबसे पहले उससे ही प्लेट भर लेंगे। चाहे पीच्छे कुछ ना मिले तो भी काम चल ज्यागा।)
गरम गरम कढी पकौड़े और पनीर की सब्जी के साथ भोजन करके हम चल पड़े रोहतक की ओर। ठंड कुछ अपना असर दिखाने लगी थी।
रोहतक से पहले हमने राज भाटिया जी को फ़ोन लगा दिया था। उन्होने सुभाष नगर गुरुद्वारे के पास का पता दिया। हम पूछते-पुछते पहुंच गए।
बस आखरी बार एक ताऊ से पूछा था गुरुद्वारे का पता। ताऊ भी कानों में सुनने मशीन लगाए जैसे तैयार ही बैठा था कि हम आवैंगे और उससे गुरुद्वारे का पता पूछेंगे।
ताऊ ने गुरुद्वारे का पता बता दिया। जैसे ही हमने गाड़ी टर्न की सामने राज भाटिया जी खड़े दिख गए। ओ ज्जी की बतावां साड्डी ते बल्ले बल्ले हो गयी। सबने मिल के कस के जफ़्पी पाई और चल पड़े घर की ओर् । राज भाटिया जी रास्ता बताते रहे और योगेन्द्र की कार ड्राईव करते रहे। इस तरह भाटिया जी के घर पहुंच गए।
रोहतक से पहले हमने राज भाटिया जी को फ़ोन लगा दिया था। उन्होने सुभाष नगर गुरुद्वारे के पास का पता दिया। हम पूछते-पुछते पहुंच गए।
बस आखरी बार एक ताऊ से पूछा था गुरुद्वारे का पता। ताऊ भी कानों में सुनने मशीन लगाए जैसे तैयार ही बैठा था कि हम आवैंगे और उससे गुरुद्वारे का पता पूछेंगे।
ताऊ ने गुरुद्वारे का पता बता दिया। जैसे ही हमने गाड़ी टर्न की सामने राज भाटिया जी खड़े दिख गए। ओ ज्जी की बतावां साड्डी ते बल्ले बल्ले हो गयी। सबने मिल के कस के जफ़्पी पाई और चल पड़े घर की ओर् । राज भाटिया जी रास्ता बताते रहे और योगेन्द्र की कार ड्राईव करते रहे। इस तरह भाटिया जी के घर पहुंच गए।
जाते ही राज भाटिया जी सवाल किया कि –“ बाकी कहाँ हैं? मैने कहा जी – मन्ने तो बेरा कोनी। आज नहीं तो काल आ ज्याँगे।“
राज भाटिया जी ने जर्मनी की चाय (काफ़िनो) पिलाई और कहा कि चलिए सामान लेने चलते हैं। तब तक अंतर सोहिल भी पहुंच चुके थे।
अब बाजार सामान लेने पहुंच गए। दो बीयर तीन सिगनेचर के खंबे लिए। चिकन लिया और हरी सब्जियाँ आदि खरीदी।
सब्जी की दुकान में लिखा था " कृप्या थैला साथ लेकर आएं थैली बंद हो गयी है, धन्यवाद।" 6 कांच के गिलास लिए भविष्य के लिए। नहीं तो फ़िर लेने पड़ते। खाना बनाने में सभी ने हाथ बंटाया। योगेन्द्र जी ने मटर छीले, मैने भी कुछ किया। राज भाटिया जी ने गोभी काटी। कुल मिलाकर सभी ने थोड़ा थोड़ा काम किया। तब तक मैने रोस्ट तैयार कर दिया था। रेखा रोटियाँ बनाने लगी।
राज भाटिया जी ने जर्मनी की चाय (काफ़िनो) पिलाई और कहा कि चलिए सामान लेने चलते हैं। तब तक अंतर सोहिल भी पहुंच चुके थे।
अब बाजार सामान लेने पहुंच गए। दो बीयर तीन सिगनेचर के खंबे लिए। चिकन लिया और हरी सब्जियाँ आदि खरीदी।
सब्जी की दुकान में लिखा था " कृप्या थैला साथ लेकर आएं थैली बंद हो गयी है, धन्यवाद।" 6 कांच के गिलास लिए भविष्य के लिए। नहीं तो फ़िर लेने पड़ते। खाना बनाने में सभी ने हाथ बंटाया। योगेन्द्र जी ने मटर छीले, मैने भी कुछ किया। राज भाटिया जी ने गोभी काटी। कुल मिलाकर सभी ने थोड़ा थोड़ा काम किया। तब तक मैने रोस्ट तैयार कर दिया था। रेखा रोटियाँ बनाने लगी।
लैपटाप चालु किया तो पता चला कि नेट नहीं चल रहा है, उसका माऊस ढूंढा तो राज भाटिया जी ने उसे खराब होने की सजा दी है, जर्मनी में माऊस बिगड़ने पर उसे इसी तरह सुधारा जाता है। यह हमें पता चला।
फ़िर हमने भी गप्प शप्प मारते हुए अपनी महफ़िल जमाई और रज्ज के मजा लिया। जैसे कयामत की रात हो। खाना खाते रात के 1 बज गए। सबने अपना अपना बिस्तर संभाल लिया।
रात 3 बजे करीब मेरी आँख खुली तो योगेन्द्र भाई कमरे में चक्कर काट रहे थे। मैने पुछा कि क्या हुआ? क्यों जाग रहे हैं? उन्होने कहा कि नींद नहीं आ रही। राज भाटिया जी अपने गुदड़े उठा के कमरे में चले गए थे।
मैने कहा- “ सो जाओ जी, बहुत रात हो गयी, अब तो पौ फ़टने वाली है।“ योगेन्द्र जी ने सोने का यत्न किया। मैं भी कहके सो गया। सुबह आँख खुली तो योगेन्द्र जी खर्राटे चालु थे। राज भाटिया जी ने बताया कि मेरे खर्राटों के कारण योगेन्द्र जी नींद खराब हो गयी और वे अपने बिस्तरे उठाकर दूसरे कमरे में चले गए।
बात तो ये है कि जब सारे ही खर्राटे लेने वालें हों तो जिसे पहले नींद आ गयी वही राज करेगा – बोले सो निहाल आगे पढ़ें
फ़िर हमने भी गप्प शप्प मारते हुए अपनी महफ़िल जमाई और रज्ज के मजा लिया। जैसे कयामत की रात हो। खाना खाते रात के 1 बज गए। सबने अपना अपना बिस्तर संभाल लिया।
रात 3 बजे करीब मेरी आँख खुली तो योगेन्द्र भाई कमरे में चक्कर काट रहे थे। मैने पुछा कि क्या हुआ? क्यों जाग रहे हैं? उन्होने कहा कि नींद नहीं आ रही। राज भाटिया जी अपने गुदड़े उठा के कमरे में चले गए थे।
मैने कहा- “ सो जाओ जी, बहुत रात हो गयी, अब तो पौ फ़टने वाली है।“ योगेन्द्र जी ने सोने का यत्न किया। मैं भी कहके सो गया। सुबह आँख खुली तो योगेन्द्र जी खर्राटे चालु थे। राज भाटिया जी ने बताया कि मेरे खर्राटों के कारण योगेन्द्र जी नींद खराब हो गयी और वे अपने बिस्तरे उठाकर दूसरे कमरे में चले गए।
बात तो ये है कि जब सारे ही खर्राटे लेने वालें हों तो जिसे पहले नींद आ गयी वही राज करेगा – बोले सो निहाल आगे पढ़ें









