शनिवार, 5 जुलाई 2014

कब आएगें बीएसएनएल के अच्छे दिन?

केन्द्र सरकार का उपक्रम भारत संचार निगम लिमिटेड, अनलिमिटेड समस्याओं से जुझ रहा है। कहने को तो इसके पास बहुत बड़ा अमला है। ग्राहक सेवाओं के नाम पर विभिन्न स्कीमें लांच की जाती हैं। परन्तु ग्राहकों को सर्विस देने के नाम पर शुन्य है। वातानुकूलित आफ़िसों में बैठे अधिकारी ग्राहकों की सुनने के लिए खाली नहीं है। इनके पास एक्सचेंजों में पुराने एवं खराब हो चुके उपकरणों को बदलने के लिए सामान भी नहीं है।

विभाग में ऐसे सामान एवं उपरकरणों की खरीदी की गई है जिनकी कोई उपयोगिता नहीं है। इन्हें थोक के भाव में खरीद लिया गया है। परन्तु जिन उपकरणों की आवश्यकता एक्सचेजों में हमेशा होती है, उन्हें खरीदने के लिए धन नहीं है। बीएसएनएल के लगभग एक्सचेंजों में बैटरियाँ खराब हो गई हैं। जैसे ही लाईट बंद होती है, मोबाईल, डब्लू एल एल इत्यादि सेवाएँ तत्काल ठप्प हो जाती हैं। बैटरियों में 10 मिनट का भी बैकअप नहीं है। ऐसे स्थिति में बीएसएनएल को बैटरियाँ बदलनी चाहिए परन्तु कंडम बैटरियों का ही दोहन हो रहा है। 

विभाग में नए कर्मचारियों की भर्ती एक अरसे से बंद है, जो कुछ मैदानी अमला जो बचा है अकर्मण्य हो चुका है। उसे कोई लेना देना नहीं है। ऐसी स्थिति में बीएसएनएल के अधिकतर मोबाईल नम्बर पोर्टेबिलिटी की सुविधा के तहत अन्य कम्पनीयों में स्थानांतरित हो चुके हैं। विद्युत व्यवस्था फ़ेल होने पर सर्विस हमेशा ही बंद हो जाती है। निजी कम्पनियों ने अपने टॉवर चलाने के लिए जनरेटर की व्यवस्था कर रखी है और निर्बाध सेवा दे रहे हैं। 

बीएसएनएल भारत सरकार के लिए सफ़ेद हाथी साबित हो रहा है। अगर हम देखे तो अन्य कम्पनियों की अपेक्षा इसकी सेवाओं में 80% गिरावट आई है। ग्राहकों का विश्वास टूटते जा रहा है और वे इससे विमुख होते जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में सरकार को बीएसएनएल की सेवाओं की दशा सुधारनी होती। सरकारी उपक्रम होने के कारण इसे अन्य कम्पनियों से अधिक अच्छी सेवा देनी चाहिए। अन्यथा एक दिन ऐसा भी आएगा कि यह उपक्रम दीवालिया होने की कगार पर पहुंच जाएगा और इसे किसी निजी कम्पनी को बेच दिया जाएगा।   

5 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छे दिन तो एक महीना पहले ही शुरु हुऐ हैं कम से कम पाँच साल तो रुकिये । अगली बार नहीं हुआ कुछ तब भी नहीं कहेंगे । एक को 65 साल दिये हैं दूसरे को कम से कम10 तो देंगे ।

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  2. कुछ समय पहले यहाँ भी हमारे मोहल्ले में ब्रॉडबैंड सेवा देने वाले निजी कंपनी के लोग प्रचार के लिए आते थे और उसी समय बीएसएनएल की सेवाएं अटक-अटक कर चलने लगती थीं. फिर एक बार इनके जीएम को व्यक्तिगत तौर पर इसकी शिकायत की गई तो अभी तो मामला ठीकेठाक चल रहा है :)

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  3. भिलाई क्षेत्र में शायद मैं पहला ग्राहक था बीएसएनएल होम ब्रॉडबैंड का
    चेन्नई- कोलकाता सर्वर फेल होने या जेसीबी के सड़क खोदने से केबल कटने के अलावा कोई स्थानीय दिक्कत ना हुई अभी तक

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  4. BS Pabla जी - हो सकता है अपवाद स्वरुप आपके शहरी क्षेत्र में कोई समस्या न हुई हो। परन्तु ग्रामीण क्षेत्र तो भगवान भरोसे ही चल रहा है। हमारे यहां बिजली बंद होने पर एक्सचेंज ठप्प हो जाता है तथा मोबाईल एवं डब्लू एल एल सेवाएं कोमा में चली जाती हैं। इसका कारण बैटरियों का उतरना बताया जा रहा है। बिजली जाने पर बैटरियों में 10मिनट का भी बैकअप नहीं रहता। बिजली आने पर उसे रिस्टोर होने में आधे घंटे का समय लगता है। जब वह रिस्टोर हो जाता है तो फ़िर बिजली चली जाती है। विगत कई महीनों से भुगत रहे हैं। शिकायत करने पर सामान न होने की मजबूरी बता दी जाती है। कल ही रात को 10 मिनट बिजली बंद होने पर नेट बंद हो गया। टेलीफ़ोन लाईनमेन को उसके घर से साथ लेकर एक्सचेंज गया तो वहां ताला लटका था। पता चला कि चौकिदार ताला लगा कर रिचार्ज होने चला गया है। ऐसे में अच्छे दिन की आशा तो लगानी पड़ती है।

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  5. अब इस बीएसएनएल के अच्छे दिन जब आएँगे तब आएँगे, लेकिन ऐसा ही हाल रहा तो अपने अनेको ग्राहकों से तो अभी हाथ धो बैठेगा …

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