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गुरुवार, 21 अप्रैल 2011

अभियान भारतीय- एक सकारात्मक पहल -- ललित शर्मा

देश में साम्प्रदायिक विष वमन करने वालों की कमी नहीं है। मौका मिलते ही फ़िरकापरस्ती को बढावा देकर अपना उल्लु सीधा करने से नहीं चूकते। युवा भी इनकी लच्छेदार बातों में आकर रौ में बह जाते हैं और फ़िरकापरस्त अपना स्वार्थ साध लेते हैं। बुजुर्ग के मुंह से सुनाई देता है कि आज कल के नौजवानों को देश की कोई चिंता ही नहीं है। लेकिन अन्ना के आन्दोलन से जिस तरह भ्रष्टाचार के विरोध में देश भर के युवाओं ने स्वस्फ़ूर्त सहयोग दिया। उससे लगता है कि आज का युवा की सोच सड़ी गली व्यवस्था से इतर कुछ नया करने की है। वह परम्पराओं के साथ वर्तमान के प्रति भी सजग है। देश के प्रति उनकी सोच सकारात्मक है और कुछ करके दिखाना चाहता हैं। जातियता, धार्मिकता, प्रांतियाता से दूर वह राष्ट्र को एक सूत्र में बांधना चाहता है। जिनमें साहस और अदम्य शक्ति होती है वह रेत पर भी अपने कदमों के निशान छोड़ जाता है। ऐसे लोगों के अनुशरण करने वालों की कमी नहीं है।

ऐसे ही एक युवा गौरव शर्मा से आपकी मुलाकात करवा रहा हूं। इस 24 वर्षीय युवा और इनके साथियों ने 15 अगस्त 2010 को  अभियान भारतीय का श्री गणेश किया। इसका उद्देश्य भारतीयों के मन में राष्ट्रप्रेम की भावना को जगाना एवं सभी धर्म सम्प्रदायों में एकता के संदेश का प्रचार प्रसार करना है। इनका घोष वाक्य है "एक राष्ट्र, एक आवाज - हम भारतीय हैं"। ये कहते हैं कि -"आज राष्ट्र के समक्ष ज्वलंत प्रश्न है कि हम भारतवासी कब तक भांति-भांति के विभक्ति कारक तथ्यों के सहारे आपस में बंटे रहेगें। जातियता, धार्मिक अंधानुकरण एवं प्रांतियता की रेखाएं आखिर हमें कब तक एक दूसरे से पृथक करते रहेगीं?
आश्चर्य जनक बात यह है कि जब हमारा देश अंग्रेजों की दासता में सांसे ले रहा था। तब सभी फ़िरकों ने मिल कर परतंत्रता के विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद की और आन्दोलन कर अंग्रेजो को देश छोड़ने को मजबुर किया। देश आजाद होने के पश्चात लोगों ने फ़िर अपने-अपने दायरे बना लिए। यही कार्य देश के लिए घातक हो गया। आज चारों ओर अराजकता ही दिखाई देती है। देश की अधिकांश शक्ति और उर्जा इससे निपटने में ही लग जाती है। यह देश के विकास में एक बड़ी बाधा है। फ़िरकापरस्ती एवं बांटने वाली ताकतों को दरकिनार कर देश के विकास में सभी अपना योगदान दें तो वह दिन दूर नहीं जब भारत पुन: विश्वगुरु कहलाएगा।"

इस तरह के विचार इस युवक से मुझे सुनने मिले, प्रभावित हुए बिना नहीं रह सका। वर्तमान में जब आज का युवा पब और मॉल संस्कृति की गिरफ़्त में है तब वहीं एक युवा उन्हे संगठित कर लोगों में राष्ट्रप्रेम जगा रहा है जिससे देश समग्र विकास की दिशा में आगे बढ सके। सार्थक कार्य करने वालों को समाज भी साथ देता है। उसके साथ जुड़ता चला जाता है। आज गैर राजनीतिक, गैर धार्मिक, गैर जातीय नि:स्वार्थ जन चेतनात्मक अभियान भारतीय का प्रचार-प्रसार देश के कई प्रदेशों में हो रहा है, जहाँ से इस अभियान में युवा अपनी सक्रीय भूमिका निभाने आगे आ रहे हैं। दिल्ली के गोपाल दुबे, सृंजय ठाकुर, आतिश साहू, आशीष दीवान, कर्नाटक से चंद्रकांत कुकरेती, उड़ीसा से सुजाता मैथ्यू, बिहार से नूर मोहम्मद, एवं अजय जी, नवीन द्विवेदी महाराष्ट्र से सागर तिवारी, अमित दुबे, धीरज शर्मा,तापश राय, ममता रॉय विशेष रूप से आगे आए। संजय मिश्रा जी का सहयोग अभियान भारतीय को सक्रीय रुप से मिलता है।

गौरव शर्मा से मेरी मुलाकात एक कार्यक्रम दौरान हुई थी। उसके पश्चात हबीब साहब से रुबरु हुआ। आज भारत को सकारात्मक सोच एवं राष्ट्र चिंतन करने वाले नौजवानों की नितांत आवश्यकता है। वर्तमान में मुद्राराक्षसों ने भ्रष्ट्राचार करके देश को खोखला करने का ही कार्य 64 वर्षों में किया है। आम जनता भ्रष्ट्राचार की चक्की में पिस रही है। जनता की गाढी कमाई से नेता गुलछर्रे उड़ा रहे हैं। इनके विरुद्ध आज देश का युवा खड़ा हो रहा है। अभियान भारतीय एक सकारात्मक पहल है। सार्थक पुरुषार्थ करने वाले का उत्साहवर्धन करना ही चाहिए। कामना करते हैं कि इनका प्रयास रंग लाए।