ब्लॉग जगत में आये तीसरा वर्षा चल रहा है...... आज ललित डॉट कॉम की वर्षगांठ है. इन वर्षों में ऐसा लगता है कि एक पूरी जिन्दगी रज्ज के जी ली. जब ब्लॉग लिखना शुरू किया था तो सोचा नहीं था कि इतने दिनों तक टिक जाऊंगा, पर अब तो यह लत लग चुकी है, यह नशा जीवन के साथ ही जायेगा.ब्लोगिंग में जब आया तो सबसे पहले हिंदी लिखने की समस्या थी. अमूमन सभी नए ब्लोगर्स के साथ होती है. पाबला जी से हिंदी राईटर मिला और उससे ब्लोगिंग का सफ़र शुरू हुआ. संजीव तिवारी जी से भी बहुत कुछ सीखने मिला. आज यह सफ़र ब्लॉग की ५०० पोस्ट तक पहुच गया. १०,००० टिप्पणियों तक भी पहुच बन गयी है. इसमें मेरे द्वारा की गयी जवाब स्वरूप टिप्पणियाँ लगभग ५० ही होंगी. ब्लॉग जगत में आकर बहुत कुछ सीखने मिला. धर्म, स्त्री-पुरुष वाद-विवाद आदि विषयों में मेरी रूचि कभी नहीं रही और आज भी नहीं है.
१९९७ में जब नेट पर आया तो हिंदी न के ही बराबर थी. डायल अप की किरर्र कुर्रर टिंग टोंग की फेक्स टोन मिलती थी तब नेट कनेक्ट होता था. नेट की दीवानगी इतनी थी कि टेलीफोन का बिल ही महीने का ६००० से ऊपर पहुँच जाता था. शुशा फॉण्ट से ही कुछ साईट लिखी जाती थी. नेट पर हिंदी का प्रचार प्रसार करने के श्रेय नि:संदेह ब्लॉग जगत को ही जाता है. अब नेट पर हिंदी की कमी नहीं है, ब्लोगर्स ने बहुत कुछ लिख कर नेट पर डाल दिया है. अगर हम किसी विषय पर सर्च करते हैं तो उससे सम्बंधित कुछ न कुछ सामग्री हिंदी में मिल ही जाती है.
ब्लॉग जगत में आने के बाद कुछ अच्छे मित्र लोग भी मिले. जिनके साथ ब्लोगिंग का सफ़र चलता रहा. ब्लोगर्स द्वारा हिंदी ब्लोगिंग को समृद्ध करने का प्रयास निरंतर चल रहा है, यह ख़ुशी की बात है, नए ब्लोगर्स आ रहे हैं. जिससे हिंदी ब्लॉग जगत समृद्ध हो रहा है.. मैं भी अपने सामर्थ्य के हिसाब से प्रयासरत हूँ, साहिर लुधियानवी का एक शेर प्रासंगिक है....... "दुनिया ने तजुर्बात-ओ-हवादिश की शक्ल में, जो कुछ मुझे दिया वो लौटा रहा हूँ मैं." सैकड़ों लोगों के ब्लॉग भी बनाकर दिए. जीवन का महत्वपूर्ण समय लगाया. ब्लॉग4वार्ता के माध्यम से ब्लोगर्स को पाठक देने का प्रयास निरंतर जारी है.
कुछ व्यवधान बीच में अवश्य आये. लेकिन वो जिन्दगी ही क्या जिसमे व्यवधान और समाधान न हो. उसका समाधान भी निकला. तभी आज तक ब्लोगिंग जारी है.हिंदी दिवस के दिन १४ सितम्बर २००९ को ललित डॉट कॉम पर पहली पोस्ट लगायी गयी थी. जिसमें पहली टिप्पणी संगीता पूरी जी की थी और दूसरी टिप्पणी समीर भाई याने उड़नतश्तरी की. एक बात तो समझ आई कि नए ब्लॉगर के लिए टिप्पणियों का बहुत ही महत्त्व है. उसे सकारात्मक टिप्पणियों से निरंतर ब्लोगिंग की उर्जा मिलती है और नकारात्मक टिप्पणियाँ उसे ब्लोगिंग से दूर भी कर सकती हैं.
पुराने ब्लोगर्स को टिप्पणियों के लेन-देन से कोई फर्क नहीं पड़ता ऐसा बड़े गुरूजी कहते हैं , उन्होंने टिप्पणी व्यापार बंद कर रखा है. किसी ने लिखा था कि एक टिप्पणी आपको बीमार भी कर सकती है. रक्तचाप बढ़ा सकती है. इसलिए किसी कि तबियत ख़राब करने के बजाय सकारात्मक टिप्पणी देने का ही प्रयास किया. मुझे जब भी समय मिलता है तो अवश्य ही नए ब्लोगर्स का टिप्पणियों द्वारा उत्साह वर्धन करने का प्रयत्न करता हूँ पर उड़नतश्तरी नहीं होने के कारण अधिक स्थानों पर नहीं पहुँच पाता. इतने दिनों में कई ब्लॉगर आये और गए. कुछ लोग ही हैं जो खूंटे पर टिके हुए हैं.
मैं मानता हूँ कि ब्लॉग जगत एक परिवार ही है. अगर कोई ब्लॉगर मित्र मुसीबत में हैं तो उसकी सहायता भी करते मैंने यही ब्लॉग जगत में देखा है. अगर किसी को किसी से लगाव नहीं होगा तो कौन सहायता करेगा? लोगों की गम और ख़ुशी में शरीक होने की संवेदनाये ब्लॉग जगत को एक परिवार के रूप में स्थापित करती हैं. जिस तरह एक परिवार में सभी विचारों के लोग रहते हैं, उनमे विचार विमर्श भी होता है. कभी किसी मुद्दे को लेकर तनातनी भी होती है. लेकिन सब रहते एक साथ ही हैं.
ऐसा ब्लॉग जगत में भी है. किसी मुद्दे पर विचार भिन्नता हो सकती है और उसका हल भी निकल सकता है. ब्लॉग जगत के सभी जिंदादिल दोस्तों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ. ब्लॉग एक ऐसा मंच है जो हमें अपनी बात कहने की स्वतंत्रता देता है. हम इसका उपयोग कितना सकारात्मक रूप में कर सकते है वह हमारे विवेक पर निर्भर करता है. पाठकों एवं ब्लॉगर मित्रों का स्नेह और साथ रहा तो कुछ बरस और भी ब्लॉग जगत में टिके रह सकते हैं.........जब तक हैं तब तक आनंद लें......थ्री चीयर्स
हिन्दी दिवस पर अर्पित हैं चंद फूलों की कलियाँ
है गांव का अल्हड़पन कुछ गांव की गलियां
कुछ हिमालयी पीर दुष्यन्ति कुछ फूल शंकरी
कुछ लहरें मन उमंग की कुछ फूलों की डलियाँ
है गांव का अल्हड़पन कुछ गांव की गलियां
कुछ हिमालयी पीर दुष्यन्ति कुछ फूल शंकरी
कुछ लहरें मन उमंग की कुछ फूलों की डलियाँ
हिंदी दिवस के अवसर पर सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरी सादर शुभकामनायें..





