शनिवार, 13 जुलाई 2013

एड्स पसरता गाँव गाँव, धीरे धीरे पाँव पाँव

क्यों राम प्रसाद! जब भी तुम्हें देखता हूँ, हमेशा खांसते-खखारते ही रहते हो। डॉक्टर को दिखाओ, नहीं तो टीबी हो जाएगी… मैने उसे लगातार खांसते हुए देखकर कहा। हाँ भैया! कल अस्पताल जाकर डॉक्टर को दिखाऊंगा - कह कर राम प्रसाद ने मुझसे पीछा छुड़ाया। मैं लगभग 3 माह से उसे लगातार खांसते हुए देख रहा था। वह दिनों-दिन कमजोर भी होता जा रहा था। जब भी कहीं जाने के लिए मैं घर से निकलता तो वह नीम की छाया में खांसते हुए बैठा रहता और मैं उसे हमेशा टोकता। लेकिन वह अस्पताल नहीं जाता था। एक दिन गुस्से में आकर उसे अस्पताल ले जाने के लिए तैयार हो गया तो वह आना कानी करने लगा। मैं नहीं माना और उसे जबरदस्ती बाईक पर बैठा कर अस्पताल ले गया। उसे देखते ही डॉक्टर साहब ने पहचान लिया। बोले- इसका नाम तो हमारे यहाँ एच आई वी पॉजिटिव की लिस्ट में दर्ज है। तीन महीने पहले इसने खून जांच करवाया था तब से फ़रार है।  

डॉक्टर की बात सुनकर मैं भौंचक्का रह गया। जिस बीमारी को मैं टीबी समझ रहा था वह एडस निकली। राम प्रसाद उसे इतने दिनों से छिपा रहा था। कभी बैगा गुनिया से झाड़ा फ़ूंकी करवाता तो कभी मंदिर दरगाह के सामने माथा टेकता, लेकिन अस्पताल से ईलाज नहीं करवाया। एड्स का भय उसके मन में व्याप गया था। वह दूबारा अस्पताल जाकर समाज के सामने एडस का रोगी बन कर शर्मिन्दा नहीं होना चाहता था। डॉक्टर से दवाईयाँ दिला कर उसे अपने साथ ले आया। रास्ते में कहने लगा कि - किसी को मत बताना भैया। नहीं तो मैं जीते जी तबाह हो जाऊंगा। गोली दवाई आपके कहने से नित्य ले लिया करुंगा। उसे दवाईयाँ दिलाकर मैं कुछ दिनों के लिए अपने व्यावसायिक दौरे पर चला गया। जब लौट कर आया तो राम प्रसाद के मरने की खबर मिली। अपने पीछे पत्नी और एक बेटा छोड़ गया। साथ ही अपनी बीमारी भी पत्नी को दे गया। कुछ महीनों के तड़पने के बाद उसकी पत्नी भी गोलोकवासी हो गई।

तपास करने पर भीतरी समाचार मालुम हुआ कि विवाह पूर्व रामप्रसाद के अंतरंग संबंध अपनी भाभी के साथ थे। उसका भाई ट्रक ड्रायवरी करता था। तब मुझे रामप्रसाद तक एड्स पहुंचने के कारणों का पता चला। असुरक्षित यौन संबंधों के कारण ड्रायवर एड्स के वाहक के साथ परलोक वाहक भी बन जाते हैं। उन्हें बीमारी का पता चल जाता है, जब स्वास्थ्य खराब रहने लगता है। वर्तमान में थोड़ा सा भी संशय होने पर डॉक्टर पहले एच आई वी टेस्ट के लिए लिख देते हैं, जबकि सरकारी अस्पतालों में यह टेस्ट मुफ़्त होता है। डॉक्टर का कहना है कि - एच आई वी पॉजिटिव निकलने के बाद रोगी को पता चलते ही वे गायब हो जाते हैं। इसलिए कि एड्स की बीमारी पता चलने से उनकी बदनामी न हो और इसी बदनामी को छुपाते हुए इस रोग को अन्य लोगों को बांटते हुए मर जाते हैं।

पास के ही गाँव में रहने वाली बिसाहिन के विषय में एकाएक पता चला कि वह मर गई। साथ ही पता चला कि बहुत तड़प कर मरी है। गाँव वालों को सिर्फ़ इतन पता था कि उसे बुखार आता था और हाथ पैर में फ़ोड़े फ़ुंसी हो गए थे। जिसका खूब ईलाज करवाया पर बीमारी ठीक नहीं हुई और एक दिन वह मर गई। सुन कर मुझे धक्का लगा, जब से वह चूड़ी पहन कर गाँव में आई थी तब से उसे जानता था। कभी कभार बाजार जाते वक्त उसे बाहर गाँव से आकर बसे एक मालदार किसान बसेसर से बातें करते हुए देखता था। गाँव में किसी से बातें करना साधारण बात है, अन्य प्रदेशों की तरह हमारे यहाँ इसे गंभीरता से नहीं लिया जाता। लेकिन कुछ दिनों से मुलाकात का असर दिखने लगा। कानों में सोने के बुंदे, गले में सोने की चैन, पैरों में भारी भारी पायजेब देख कर गाँव में खुसर फ़ुसर होने लगी थी। अनायास ही किसी के पास धन दिखाई देने लगे तो गाँव में चर्चा का विषय बन ही जाता है। बात आई गई हो गई।

दीवाली आगमन की तैयारियाँ शुरु हो गई थी। ग्रामीण अपने घर-बार लीप-पोत कर संवार रहे थे। रंग-रोगन, चूना-वार्निश पुताई का काम घर-घर में शुरु था। अरसे के बाद शाम को बाजार से वार्निश लाने गया तो पता चला कि बसेसर की मौत हो गई है। लगभग 35 साल का गबरु जवान लड़का था। उसकी एकाएक मौत की खबर ने मुझे चौंका दिया। कारण पूछने पर पता चला कि 6 महीने से उसे कोई बीमारी हो गई थी तथा डेढ महीने से वह बिस्तर पर पड़ा था। अड़ोसी पड़ोसियों को भी पता नहीं था कि उसे कौन सी बीमारी थी। मेरी आँखों के सामने बिसाहिन का चेहरा घूम गया। गाँव में इनके संबंधों को लेकर चर्चा आम हो चुकी थी। दोनो की ही बीमारी से मौत होना संदेह को जन्म दे रहा था कि अवश्य ही इन्हें एड्स ने ग्रास बना लिया। अब यह बीमारी इन्हें कहाँ से लगी यह तो भगवान ही जानता है पर मौत का संदेह एड्स पर ही जाता है। 

इन घटनाओं के अलावा आस-पास के गाँवों से एड्स जैसी बीमारी से मृत्यू होने के संदेहास्पद समाचार प्राप्त होते रहते हैं। मेरी जानकारी कई लोग हैं जिनकी मृत्यू एड्स से होने का संदेह है। लेकिन तकनीकि जाँच के अभाव में पुष्टि करना संभव नहीं है। गाँवों में भी एड्स जैसी बीमारी शनै-शनै अपने पैर फ़ैला रही है। जागरुकता के अभाव में लोग काल का ग्रास बनते जा रहे हैं और जाने-अनजाने में अपने साथी को भी एड्स जैसी हत्यारी बीमारी भेंट दे रहे हैं। अब तो हाल यह हो गया है कि डॉक्टर से इंजेक्शन लगवाने में भी डर लगने लगा है। नाई से शेविंग कराना भी असुरक्षित हो गया है, कब दाढी को उस्तरे ने थोड़ा सा छीला और कब व्यक्ति एड्स से ग्रसित हुआ पता ही नहीं चलेगा। कागजों में एड्स जागरुकता अभियान चलाने वाले स्वास्थ्य विभाग को इस ओर ध्यान देना चाहिए। ग्रामीण अंचल में एड्स के प्रति नागरिकों को जागरुक करना चाहिए तभी इस बीमारी से ग्रसित होने से लोग बच सकते हैं।

(सत्य घटना पर आधारित इस लेख में पात्रों के नाम एवं स्थान बदल दिए गए हैं।)

16 टिप्‍पणियां:

  1. दयनीय स्थिति है, जो भी हुआ हो, पर जीवन की मर्यादा मृत्यु के पहले तक बनी रहे। व्यक्ति और समाज को सत्य स्वीकार करने का साहस बना रहे।

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  2. सामाजिक और पारिवारिक सन्देश देती पोस्ट बधाई आपकी जागरूकता के लिए आपके गर्भाशय प्रकरण ने भी अपना असर दिखाया आभार

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  3. स्थिति तो बहुत ही खराब है, आपका सुझाव बढिया है.

    रामराम.

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  4. कल 14/07/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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  5. (ऐसे भी) जानलेवा हो सकता है उस्‍तरा.

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  6. jagrukta ke sath logo ke dimag me ye bat bhi baithana hogi ki beemari sirf beemari hai ...sajag samachar...

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  7. जागरूकता का सन्देश देती पोस्ट....
    साभार....

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  8. जागरूकता का सन्देश देती सार्थक पोस्ट..ाभार

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  9. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (14 -07-2013) के चर्चा मंच -1306 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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  10. विमल मित्र ने जब 'सुरसतिया' लिखी तो जाम कर विरोध हुआ..पर बात हकीकत के करीब थी ,अब इसे मान कर काम करें कोई हर्ज नहीं. अगर नहीं , तो कोई नया रोग अगली पीढ़ी को विरासत में मिलेगा..! इसको हम चेतावनी के रूप में लेवें.ललित जी इस लेखन के लिए एक अदद बधाई मेरी तरफ से ..!

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  11. बड़ी भयावह और विकट स्थिति है ये !
    लोग शहरों से एड्स लेकर गांवों में परोस में रहे है !!

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  12. ओह दुखद है .. सरकार केवल नीति बना देती है ... बहर हाल जो भी है ..पर ब्लोग के माध्यम से जागरुक्ता जगाने का आपका यह प्रयास सराहणीय है .. शुभकामनायें ..

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  13. जागरूकता बहुत जरूरी है । २-३ साल पहले तक सरकार इस विषय में काफी प्रचार कर रही थी पर आजकल दिखाी नही देता । सारे चेनल्स के लिये इन्हे प्रसारित करना भी आवश्यक कर देना चाहिये ।

    जरूरी पोस्ट ।

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  14. आँखे खोल देना वाला और दिल दहला देने वाला लेख

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