शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

रेल तू महाठगनी जग जानी

शिया का सबसे बड़ा एवं 150 वर्ष पुराना रेल संगठन कहलाने वाला भारतीय रेल उपक्रम कहने को तो यात्री सुविधाएं देने के नित नए दावे करता है परन्तु यहाँ सुविधाओं से अधिक अव्यवस्थाएं दिखाई देती है और अव्यवस्थाएँ भी इतनी घातक हैं कि यात्रियों का प्राण हरण कर लेती हैं। सुविधाओं के नाम से यात्रियों से धन की भरपूर वसूली की जाती है, जब सुविधा देने की बारी आती है तो सारी व्यवस्था ही वेंटिलेटर पर चली जाती है। नित नई योजनाएँ बनाकर भिन्न भिन्न शुल्क लाद कर यात्रियों की जेब डाका डाला जा रहा है। रेल यात्रियों की सलाहकार समितियाँ बनाई हुई हैं लेकिन उनकी सलाहों को कूड़ेदान के हवाले कर दिया जाता है। ये मानकर चलिए कि यात्री स्टेशन के प्लेटफ़ार्म पर पहुँचते ही लूट का शिकार होने लगता है तथा यह लूट एक मुश्त न होकर किश्तों में होती है। जिसका सामना प्रत्येक रेलयात्री को करना पड़ता है।

सबसे अधिक लूट खान-पान सेवा द्वारा की जाती है। घटिया खाद्य सामग्री को मनमाने मूल्य पर बेचा जाता है और यह सब जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे बदस्तुर जारी है। कुछ दिनों पूर्व मैने रेल्वे स्टेशन के पार्किंग स्टैंड पर अपनी बाईक खड़ी की और मुझे 5 रुपए की पर्ची दी गई। जिसमें लिखा था "पहले 12 घंटे के 5 रुपए, 12 घंटे से 24 घंटे के 10 रुपए अतिरिक्त, 24 घंटे के से आगे 15 रुपए अतिरिक्त"। 24 घंटे के बाद आने पर मुझसे 30 रुपए लिए गए। स्टेशन पर पानी की बोतलें लोकल कम्पनियों की रखी जाती है, जिन्हें ब्रांडेड कम्पनियों के दाम से भी 5 रुपए अधिक पर बेचा जाता है। खाद्य सामग्री का कोई माई बाप नहीं है, बाजार मूल्य से दुगने भाव में बेची जाती हैं और यात्रियों को मजबूरी में खरीदना पड़ता है।

लम्बी दूरी की गाड़ियों के साथ चलने वाली पैंट्री कार के भीतर का हाल अगर कोई देख लेगा तो वहाँ का भोजन कभी नहीं करेगा। पैंट्री कार में गंदगी चारों तरफ़ पसरी रहती है। पैंट्री कार से सामान की बिक्री भी रेल्वे द्वारा तय मूल्यों से अधिक पर की जाती है साथ ही तय मात्रा से कम ही खाद्य सामग्री दी जाती है। गर्मी के दिनों में शीतल पेय एवं बोतल बंद पानी को ठंडा करने की कीमत भी अलग से वसूली जाती है। अगर रायपुर से दिल्ली तक का सफ़र कोई व्यक्ति करता है तो उसे कम से कम 200 रुपए तो सिर्फ़ पानी पर ही खर्च करने पड़ते हैं। स्टेशन पर मिलने वाली खाद्य सामग्री भी मानकों पर खरी नहीं उतरती। वेंडरों का यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार आम बात है। 

ये तो स्टेशन तक का मामला था। चलती हुई गाड़ियों में अपने सामान की सुरक्षा स्वयं करने के बाद भी सामान चोरी हो जाते हैं। हिजड़ों के दल के दल यात्रियों का भयादोहन कर खुले आम वसूली करते दिखाई देते हैं, रुपए नहीं देने पर धमकी पर उतर आते हैं, शिकायत करने पर सुरक्षा बल एवं टी टी कन्नी काट लेते हैं। जबकि इन्हें मालूम रहता है कि कौन से स्टेशन से हिजड़े चढ कर यात्रियों को परेशान करते हैं। इन हिजड़ों के पास टिकिट भी नहीं होती। आर पी एफ़ से शिकायत करने पर कहा कि - "इन हिजड़ों के कौन मुंह लगे?" इन्हे तो वीरता पुरस्कार देना चाहिए क्योंकि ये मर्दों के मुंह लग लेते हैं लेकिन हिजड़ों के नहीं। टी टी और सुरक्षा बलों की ड्युटी यात्रियों की सहायता के लिए की जाती है, टीटी टिकिट चेक करने पर अन्य किसी बोगी में मुंह छिपा कर बैठ जाते हैं फ़िर दुबारा दिखाई नहीं देते, सुरक्षा बल सिर्फ़ वसूली करते दिखाई देते हैं। 

मध्य प्रदेश कटनी के पास 17 अप्रेल गुरुवार की रात छपरा-वाराणसी-दुर्ग सारनाथ एक्सप्रेस में लूटपाट की घटना हुई। समाचार है कि डकैती के वक्त आर पी एफ़ के जवान गाड़ी में थे और उन्होने ने लुटेरों पर कोई कार्यवाही नहीं की सिर्फ़ वाकी टाकी पर बात करते रहे। घटना को लेकर डी आर एम का कहना है कि " यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी जी आर पी की है। आर पी एफ़ सिर्फ़ रेल्वे की संपत्ति की रक्षा करता है।" 20 अप्रेल रविवार को दतिया-झांसी के बीच करारी स्टेशन के पास छत्तीसगढ़ सम्पर्क क्रांति में लूट-पाट हुई और यात्री लूट का शिकार हो गए। जब चोर डकैत ट्रेन पर हमला करते हैं तो आर पी एफ़ की बहादुरी धरी की धरी रह जाती है। घटना होने पर आर पी एफ़ एवं जी आर पी एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल कर अपनी खाल बचाते हुए दिखाई देते हैं। जब यात्रियों से तीन महीने पहले अग्रिम टिकिट की पूरी राशि वसूल कर ली जाती है उनकी सुरक्षा भी मुस्तैदी से करनी चाहिए।

गत वर्ष गुवाहाटी से आते वक्त देखा कि ट्रेन के स्लीपर की किसी बोगी में पानी नहीं था। टीटी से शिकायत करने पर उसने कहा कि मैने पिछले स्टेशन पर स्टेशन मास्टर को पानी न होने की शिकायत लिखित में दे दी है। गोवाहाटी से चल कर बोंगाई गाँव पहुंचने टी टी ने कहा कि जब तक आप लोग ट्रेन नहीं रोकोगे इसमें पानी नहीं डाला जाएगा। यात्रियों द्वारा बोंगाई गांव में चैन पुलिंग करके गाड़ी आधा घंटा रोकने के बाद भी पानी नहीं भरा गया। रात 12 बजे न्यु जलपाई गुड़ी स्टेशन पर पहुंचने के बाद यात्रियों ने गाड़ी में पानी भरने के लिए एक बार फ़िर हंगामा किया। एक घंटा गाड़ी खड़ी रही लेकिन पानी नहीं भरा। स्टेशन पर मौजूद अधिकारियों ने कहा कि गाड़ियों में पानी भरने की व्यवस्था ठेके पर दी गई है और ठेकेदार के आदमी कह रहे हैं कि टंकी में पानी नहीं है, इससे आगे चलने वाली गाड़ी को पानी दे दिया गया। बिना पानी के ही यात्रियों को लम्बा सफ़र करना पड़ा।

अगर लम्बी दूरी की चलती हुई गाड़ी में किसी यात्री की अचानक तबियत खराब हो जाए तो उसे चिकित्सा सहायता नहीं मिल पाती। आपातकालीन चिकित्सा सुविधा न मिलने से यात्रियों की जान चली जाती है। 1 जुलाई सोमवार को मुंबई हावड़ा मेल में रेल्वे की लापरवाही के चलते 35 वर्षीय संतोष दास की जान चली गई। बताया जाता है कि संतोष दास नागपुर से तड़पता हुआ 6 घंटे का सफ़र तय करके रायपुर पहुंच गया। रेल्वे के अधिकारियों को जानकारी देने के बाद भी इन 6 घंटों में किसी भी स्टेशन पर उसे चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं हो पाई, जिससे रायपुर स्टेशन पर बीमार यात्री ने प्राण त्याग दिया। यह अमानवीयत और लापरवाही की पराकाष्ठा है। इन लापरवाहियों और लूट पाट को देखते हुए तो यही लगता है कि यात्री भगवान भरोसे अपनी यात्रा सम्पन्न करके घर लौट आए तो ईश्वर की विशेष अनुकम्पा समझना चाहिए। एशिया का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क कही जाने वाली भारतीय रेल के लिए तो अब यही कहा जा सकता है - रेल तू महाठगनी जग जानी।

18 टिप्‍पणियां:

  1. रेलयात्रा कठिनयात्रा होती जा रही है, लूटखसोट और बदतमीजी को देखकर मन बहुत दुखता है लेकिन क्या ऐसा केवल रेल में है ? कचहरी, बेंक, निगम, सरकारी कार्यालय, सफाई कर्मचारी, सरकारी अधिकारी, जन प्रतिनिधि या व्यापारिक प्रतिष्ठांन -सब ऐसा ही करते हैं। लूट और दुर्व्यवहार राष्ट्रधर्म हो गया है। किसी को कुछ कहो तो खाने को दौड़ता है।
    आप युवा हैं, पता नहीं कैसे निभाएंगे ? मैं तो ये सब देखकर ध्यानस्थ होने की कोशिश करने लगता हूँ, जब कभी ऐसा नहीं कर पाता और भूल से बोल पड़ता हूँ तो डांट खाता हूँ और पछताता हूँ और स्वयं से पूछता हूँ '' मूर्ख, आखिर चुप न रह सका, क्यों बोला ?"

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  2. @Dwarika Prasad Agrawal ji

    सारी समस्याएं लोकसेवकों द्वारा स्वयं को मालिक समझने से उत्पन्न हो रही है। जब तक दारु और पैसे में वोट खरीदे बेचे जाते रहेगें, नागरिक अपने कर्तव्यों को समझकर उसका पालन नहीं करेगें,त तब तक इन समस्याओं से यूँ ही जुझना पड़ेगा।

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  3. जब लम्बी मूछ वालों की सुनवाई नहीं होती तो बाकी जनता तो यों ही लुटती रहेगी :-)

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  4. अन्याय के खिलाफ़ जनता जबतक जागरूक नहीं होगी, मिलकर आवाज़ नहीं उठाएगी "वो भी बिना किसी राजनीतिक सहयोग के" तब तक कुछ नहीं होगा... सराहनीय प्रयास ....ऐसे ही जगाते रहिए सोने वालों को. शुभकामनायें...

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  5. बिल्कुल सही लिखा आपने, भगवान बचाये रेलयात्रा से पर अन्य कोई साधन भी तो नही है. अत: मजबूरी है रेलयात्रा करना और इसी मजबूरी का फ़ायदा उठाया जा रहा है.

    रामराम.

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  6. रेल यात्रा में असुविधाओं की कहानी ट्रेन सी लम्बी और यात्री सुविधा इंजन सी छोटी.
    ..

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  7. राम भरोसे सफ़र में राम का नाम लेकर ही निकलना चाहिए। सुरक्षित वापसी पर प्रसाद बाँटने में कोई बुराई नहीं।

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  8. बहुत सही खबर ली!
    रेल तू महाठगनी जग जानी
    त्रिगुण फांस लिए बोले मधुर बानी !!

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  9. bahut lambee vyatha katha hai ji rail ki.......rail ki hi tarah......

    aapka aalekh baanch kar aankhem khul gayin

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  10. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन नहीं रहे कंप्यूटर माउस के जनक डग एंजेलबर्ट - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  11. रेल की व्यथा... और दर्द सब बयान कर दिया ..........:)

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  12. रेलवे एक बहुत बड़ा syastem है उसी के अनुसार इसमें बहुत सारी खामियां भी है.... जरुरत है सुधार की ...

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  13. लम्बी दूरी की ट्रेन में एक ही पैंट्री में चाय/कॉफ़ी/पानी के दाम शहरों के हिसाब से कम ज्यादा होते देखे .

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  14. कदम कदम पर लूट है, इस लूट से कब तक बचेंगे? रेल का तो अभी यह हाल है कि लगता ही नहीं इसका कोई मंत्रालय भी है क्‍या?

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  15. कल 07/07/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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  16. रेल यात्रा और उसकी सुविधा संग असुविधा का सांगोपांग वर्णन

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