परबतिया भौजी नेता गिरी में जाती है, जब कोई पार्टी वाला बुला लेता है रैली, सभा के लिए सौ पचास रुपया दिहाड़ी में, घुम-घुम के सब जानने लगी, कि इन्टर नेट और ई मेल-फ़ी मेल क्या होता है।
एक दिन बोली-"लल्ला हमार भी, ऊ का कहत है, हाँ! ई मेल बनाई दो।"
हमने कहा-"' क्या करेंगी भौजी ई मेल का? तुमको तो सुअर चराना है और क्या।"
भौजी कहने लगी-" देखो लल्ला, सरकार के बहुत सारी इस्कीम आवत है, जौन में गाँव के लोगन का फ़ारेन लेई जात है। हमने नई बिधि से सूअर के गोबर के ईकोफ़्रेंडली गोइठा तैयार किए हैं। उसको सरकार ने मान्यता दे दी है, उर्जा का स्रोत मान के। गैस बहुत मंहगी हो रही है। इसलिए गोइठा को सिगरी में डाल के खाना बनात हैं। हमार इस्कीम सरकार ने मान ली है और फ़ारेन मा सुअर बहुत होत है, तो हमको वहाँ ईकोफ़्रेंडली गोइठा बनाना सिखाने के लिए ले जात है। तो अब ई मेल की जरुरत नइ पड़ेगी?"
एक दिन बोली-"लल्ला हमार भी, ऊ का कहत है, हाँ! ई मेल बनाई दो।"
हमने कहा-"' क्या करेंगी भौजी ई मेल का? तुमको तो सुअर चराना है और क्या।"
भौजी कहने लगी-" देखो लल्ला, सरकार के बहुत सारी इस्कीम आवत है, जौन में गाँव के लोगन का फ़ारेन लेई जात है। हमने नई बिधि से सूअर के गोबर के ईकोफ़्रेंडली गोइठा तैयार किए हैं। उसको सरकार ने मान्यता दे दी है, उर्जा का स्रोत मान के। गैस बहुत मंहगी हो रही है। इसलिए गोइठा को सिगरी में डाल के खाना बनात हैं। हमार इस्कीम सरकार ने मान ली है और फ़ारेन मा सुअर बहुत होत है, तो हमको वहाँ ईकोफ़्रेंडली गोइठा बनाना सिखाने के लिए ले जात है। तो अब ई मेल की जरुरत नइ पड़ेगी?"
मैने परबतिया भौजी का ई मेल बना दिया और उसको आई डी पास वर्ड पकड़ा के छुट्टी पाए- "जाओ भौजी तोहार ई मेल-फ़ी मेल सब तैयार है। ये कागज पकड़ो इसमें तोहार लेटरबाक्स के ताला-चाबी है। जब खोलाना होय तो ये कागज ले के आ जाओ, बाद में मैं देख दूंगा, कोई समाचार, संदेश होय तो।
तीन दिन बाद भौजी पहुंच गयी हमारे पास और कहने लगी-" हमार लेटर बाक्स खोल के देखो जरा कोई चिट्ठी-पतरी आई है का?
मैने उनका ई मेल चेक कि्या तो एक मेल दिखा, जिसमें अंग्रेजी में लिखा था कि आप भाग्य शाली हैं आपका 500000 पौंड का लाटरी खुल गया है। अपना पता और टेलीफ़ोन नम्बर भेजें।
मैं मेल देख ही रहा था कि भौजी फ़िर बोल पड़ी-"बताते काहे नहीं हो लल्ला, का लिखा है?
मैने बता दिया कि एक चिट्ठी आई है, इंग्लैंड से, जिसमें लिखा है कि आपकी 500000 पौंड याने लगभग 4,00,00,000 की लाटरी खुली है। सुन के भौजी को गश आ गया। मै उनके मुंह पर पानी छींट कर होश में लाया।
बड़ी मुस्किल से मुंह से बोल फ़ूटे - "तो ये बताओ लल्ला पैसा कहाँ मिलेगा? "
अरे भौजी ऐसी लाटरी खुलने की चिट्ठी तो मेरे पास दिन भर 10-20 आ ही जाती है। उसे मैं कूड़े के डब्बे में डाल देता हूँ।"
तीन दिन बाद भौजी पहुंच गयी हमारे पास और कहने लगी-" हमार लेटर बाक्स खोल के देखो जरा कोई चिट्ठी-पतरी आई है का?
मैने उनका ई मेल चेक कि्या तो एक मेल दिखा, जिसमें अंग्रेजी में लिखा था कि आप भाग्य शाली हैं आपका 500000 पौंड का लाटरी खुल गया है। अपना पता और टेलीफ़ोन नम्बर भेजें।
मैं मेल देख ही रहा था कि भौजी फ़िर बोल पड़ी-"बताते काहे नहीं हो लल्ला, का लिखा है?
मैने बता दिया कि एक चिट्ठी आई है, इंग्लैंड से, जिसमें लिखा है कि आपकी 500000 पौंड याने लगभग 4,00,00,000 की लाटरी खुली है। सुन के भौजी को गश आ गया। मै उनके मुंह पर पानी छींट कर होश में लाया।
बड़ी मुस्किल से मुंह से बोल फ़ूटे - "तो ये बताओ लल्ला पैसा कहाँ मिलेगा? "
अरे भौजी ऐसी लाटरी खुलने की चिट्ठी तो मेरे पास दिन भर 10-20 आ ही जाती है। उसे मैं कूड़े के डब्बे में डाल देता हूँ।"
भौजी को बात कुछ हजम नहीं हुई, मुझे ही गरियाने लगी, "लल्ला हम तुम्हारी सब चाल बाजी समझत हैं। हम अनपढ हैं समझ के बेवकूफ़ बना कर पुरा रुपया हड़पना चाहत हो। हमार भी नाम परबतिया है, पाई-पाई ले के छोड़ूंगी।"
अब गश खाने का समय मेरा था। समझाऊं तो समझाऊं कैसे? भौजी सड़क पर खड़े होकर होले पढी रही थी। तभी उसने कहा कि-" हमारा लेटरबाक्स का ताला चाबी लगा के हमारा कागज वापस करो। कल हम शहर जाकर देखाएगें।" मैने सोचा, चलो बला टली। उसका कागज देकर राम-राम किया। उसके बाद भौजी 2-3 महीना दिखाई ही नहीं दी।
अब गश खाने का समय मेरा था। समझाऊं तो समझाऊं कैसे? भौजी सड़क पर खड़े होकर होले पढी रही थी। तभी उसने कहा कि-" हमारा लेटरबाक्स का ताला चाबी लगा के हमारा कागज वापस करो। कल हम शहर जाकर देखाएगें।" मैने सोचा, चलो बला टली। उसका कागज देकर राम-राम किया। उसके बाद भौजी 2-3 महीना दिखाई ही नहीं दी।
एक दिन खेत जाते समय मिल गयी। मैंने पूछ ही लिया -" का हुआ भौजी तोहार लाटरी का, मिल गया रुपया?
बस मेरा तो ये कहना हुआ और भौजी फ़ट पड़ी -" का बताएं लल्ला, बताने में भी शरम आत है, तुमने सही कहा था। लेकिन हमारे ही दिमाग पर पत्थर पड़ गया था। ऊ लाटरी के चक्कर मा हमार सब सुअर बेचा गए। 30,000 रुपया जमा कराए बैंक में उनके खाते में। लालच पड़ गया था कि रुपया मिलेगा तो कम से कम सुख से तो जीएगें। जब पैसा नहीं आया तो थाने में गए रपट लिखाने, दरोगा साहब बोले, इंग्लैंड का मामला है, वहीं रपट लिखाओ जाके। बताओ अब कैसे इंग्लैंड जाएं। ये अंग्रेज बहुत बदमाश हैं, पहले यहाँ रहके लूटते रहे देश को और जब छोड़ दिए तो ई मेल से लूट रहे हैं, सत्यानाश होई जाए इनका। किस मुंह से तुम्हे बताने आते।
बस मेरा तो ये कहना हुआ और भौजी फ़ट पड़ी -" का बताएं लल्ला, बताने में भी शरम आत है, तुमने सही कहा था। लेकिन हमारे ही दिमाग पर पत्थर पड़ गया था। ऊ लाटरी के चक्कर मा हमार सब सुअर बेचा गए। 30,000 रुपया जमा कराए बैंक में उनके खाते में। लालच पड़ गया था कि रुपया मिलेगा तो कम से कम सुख से तो जीएगें। जब पैसा नहीं आया तो थाने में गए रपट लिखाने, दरोगा साहब बोले, इंग्लैंड का मामला है, वहीं रपट लिखाओ जाके। बताओ अब कैसे इंग्लैंड जाएं। ये अंग्रेज बहुत बदमाश हैं, पहले यहाँ रहके लूटते रहे देश को और जब छोड़ दिए तो ई मेल से लूट रहे हैं, सत्यानाश होई जाए इनका। किस मुंह से तुम्हे बताने आते।
मैने कहा-" भौजी, लतखोर बाज नहीं आते, चाहे जितना लतिया लो, जी भर के जुतिया लो। मेरे पास हजारों बार ई मेल आया है और मैने इन्हे लतियाया है, और कहा कि मुझे आपका ईनाम-ईकराम नहीं चाहिए, धरे रहो अपने पास।" अगर इनके ई मेल से रुपया मिलता तो मैं आज देश का सबसे धनी आदमी होता, ऐसे ही फ़ालतु घर में बैठ कर कम्प्युटर नहीं खटखटाता।
नोट गंवा के भौजी हालत गंभीर है, कल की महिला सभा में जाते टैम सायकिल पिचंर हो गई। अब कैसे करें?
फ़ूलचंद चचा से 14 रुपए मांग कर ले गयी। तब इनकी सायकिल का पंचर बना। घर वाला ठहरा निखट्टू। कोई काम-धाम तो करता नहीं, दिन भर बैठे ठाले ताश पीटता हैं, और मेम साहेब बिहाने-बिहाने तगाड़ी धर के सुअर चराने निकल जाती है।
नोट गंवा के भौजी हालत गंभीर है, कल की महिला सभा में जाते टैम सायकिल पिचंर हो गई। अब कैसे करें?
फ़ूलचंद चचा से 14 रुपए मांग कर ले गयी। तब इनकी सायकिल का पंचर बना। घर वाला ठहरा निखट्टू। कोई काम-धाम तो करता नहीं, दिन भर बैठे ठाले ताश पीटता हैं, और मेम साहेब बिहाने-बिहाने तगाड़ी धर के सुअर चराने निकल जाती है।
