यहाँ से पढिए
इसके द्वारा संचालित Blogger.

 

धूलि दुर्ग: कोट गढ --- ललित शर्मा

प्रारंभ से पढें
कोट गढ अकलतरा से डेढ किलोमीटर पर उत्तर दिशा में स्थित है।  है। बर्फ़ गोले की चुस्कियों के साथ काली घोड़ी के सवार कोट गढ की ओर बढते जा रहे हैं। मेरे पास अकलतरा के एक ब्लॉगर का हमेशा मेल आता है। वो लिखते हैं "http://khandeliya.blogspot.com/ पर एक छोटा सा बेकार सा पोस्ट आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी आशा है आपकी कृपामय प्रतिक्रिया मिलेगी सप्रनाम", इनका नाम ईश्वर खंडेलिया है। बाबु साहब को याद दिलाने पर वे उनकी दुकान अंकुर दिखाते हैं। पर मेरे पास उनसे मिलने का समय नहीं था। फ़िर कभी मिलेगें सोच कर आगे बढते हैं। कोट गाँव का नाम है इस गांव में गढ होने के कारण कोट गढ नाम प्रचलित हुआ। गढ प्रवेश से पहले एक बड़ा तालाब दिखाई देता है। जिसके किनारे के करंज के वृक्ष पर बच्चों की टोली जल क्रीड़ा मे वयस्त थी। गर्मी के मौसम में तालाब के पानी में पेड़ से छलांग लगा कर आनंद लिया जा रहा था। बचपन याद आ गया, कभी हम भी इसी तरह नंग धड़ंग कुदान मारा करते थे। फ़ोटो लेकर आगे बढते हैं।

बाबु साहब घोड़ी हांक रहे हैं। आगे चल कर समझ आता है कि यह तालाब नहीं, गढ की रक्षा के लिए बनी हुई परिखा (खाई) है। इसके बीच से ही गढ में जाने का रास्ता दिखाई देता है। कुछ ग्रामीण हमें अजनबी निगाहों से देखते हैं, उनकी आँखों में हमारे बारे में जानने के भाव दिखाई देते हैं। सामने महामाया माई का मंदिर है, जिसके बांए तरफ़ से कोट गढ में जाने का रास्ता दिखाई देता हैं। हम सबसे पहले गढ की मिट्टी की दीवार पर चढते हैं। वहां से किले के चारों तरफ़ बनी हुई रक्षा परिखा दिखाई देती है। गढ के तीन तरफ़ बरगवां, खटोला और महमंदपुर गांव हैं। गढ के बीच में एक तालाब है, जिसमें कुछ भैंसे गर्मी से बचने के प्रयास में डूबकी लगा रही हैं। सामने क्षितिज में सूरज अस्ताचल की ओर जा रहा है, जैसे इस गढ का वैभव चला गया। 

गढ या दुर्ग तीन तरह के होते हैं, 1 जल दुर्ग, 2 गिरि दुर्ग एवं 3 धूलि दुर्ग। कोट गढ धूलि दुर्ग की श्रेणी में आता है। गढ के चारों ओर सुरक्षा की गहरी खाई है और उससे लगी हुई मिट्टी की दीवार। पुराविज्ञ इस गढ को लगभग 25 सौ वर्ष पुराना मानते है। गढ के आस पास उस काल खंड के ईंटों के टुकड़े एवं उपकरण मिलते हैं। इस खाई में घड़ियाल, मगर एवं सांप डाले जाते थे जिससे दुश्मन गढ पर आक्रमण न कर सके। गढ की में आने के लिए परिखा (खाई) में सिर्फ़ एक ही रास्ता होता था। मगर मच्छों के प्रमाण तो इससे पास ही कुछ किलोमीटर पर कोटमी सोनार में मिल जाते हैं। गढ के दोनो तरफ़ 11 वीं 12 वीं शताब्दी की कलचुरी कालीन राज पुरुष, अप्सरा, भैरव, बजरंग बली, गणेश इत्यादि की महत्वपूर्ण मूर्तियाँ मिलती हैं। बरसात के समय में  ये खाईयां लबालब भर जाती हैं। वर्तमान में गांव के लोग अपने दैनिक जीवन में उपयोग के लिए इन खाईयों के पानी का उपयोग कर रहे हैं। साथ ही बाड़ी बखरी की सिंचाई के काम भी आता है।  

इस गढ से मराठा कालीन इतिहास भी जुड़ा हुआ है। वर्तमान में दिखाई देने वाले दरवाजे मराठा शासकों ने बनाए थे। इससे जाहिर होता था कि यह गढ उनके आधिपत्य में भी रहा है। महामाया मंदिर के बाएं तरफ़ का मुख्य द्वार सलामत है। इसके बगल में कुछ  मूर्तियाँ खुले में रखी हैं, जिस पर श्रद्धालुओं ने फ़ूल पान चढा रखे थे। गढ के भीतर घूमने के लिए समय कम था और भीतर ऐसा कुछ निर्माण भी नही है जिसे देखा जा सके। तालाब के ईर्द गिर्द खुला मैदान पड़ा है। गढ की मिट्टी की दीवारों पर बडे बडे वृक्ष हैं। मुझे गढ में आने के पांच दरवाजे दिखाई दिए। प्राचीन कालीन सुरक्षा से सुसज्जित कोट गढ देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस समय के राजा किस तरह से अपने जान माल की सुरक्षा का इंतजाम करते थे। बाबु साहब और हमने गढ के मुख्य द्वार की कुछ फ़ोटुंए भी ली।

किसी पुरानी जगह से जुड़ी हुई कोई जनश्रुति न हो, ये तो हो ही नहीं सकता है। कुछ ऐसा ही इस गढ के साथ जुड़ा है। कहते हैं कि कोट गढ से लेकर अकलतरा के हाथी बंधान तक एक सुरंग है। इसके गढीदार भुनेश्वर मिश्र हुआ करते थे। उनके पास एक अदभुत घोड़ी "बिजली" थी। वे इस सुरंग के माध्यम से ही घोड़ी पर सवार होकर अकलतरा के हाथी बंधान तक जाया करते थे। उनकी सोनाखान के जमीदार से दुश्मनी थी और आपस में लड़ाई होते रहती थी। वे देवी शक्ति के पुजारी थे। एक बार सोनाखान का जमीदार खांडा लेकर उन्हे मारने आया तब देवी ने उनकी जान बचाई। सुरंग का रास्ता तो मुझे दिखाई नहीं दिया। फ़िर कभी आए तो अवश्य ही ढूंढने का प्रयास करेगें। गुगल अर्थ से देखने पर कोट गढ की वर्तमान स्थिति का पता चलता है, चित्र में गोलाई में बनी हुई खाई स्पष्ट दिख रही है और अभी तक मौजूद भी है। बाबु साहब से रास्ते भर कोट गढ के विषय में चर्चा होते रही, अब हम चल पड़े कटघरी की ओर…… (कटघरी, राहुल सिंह जी के पूर्वजों का गांव है) ....... आगे पढें

Comments :

14 टिप्पणियाँ to “धूलि दुर्ग: कोट गढ --- ललित शर्मा”
डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…
on 

बहुत बढ़िया यात्रा वृतांत ....

Rahul Singh ने कहा…
on 

ब्‍लागर के नजरिए से बहुत सारी ऐसी चीजें देखने को मिल जाती हैं, ध्‍यान में आ जाती हैं, जो आमतौर पर ओझल होती हैं, आप और बाबू साहब, दोनों ब्‍लागर के चित्र में मानों हजारों साल का इतिहास को जीवंत हो कर झलक गया है. शानदार, लाजवाब.

Rahul Singh ने कहा…
on 

अच्‍छा और इस बीच खंडेलिया परिवार में अंकुर के पुत्र रत्‍न का जलवा भी रहा हांगा, इसी आसपास किसी दिन, जब आप वहां थे.

Ramakant Singh ने कहा…
on 

खाया पिया कुछ नहीं गिलास फोड़ा बारह आना की भांति
किया धरा कुछ नहीं यश पाया सोलह आना .
आपके और श्री राहुल सिंह जी केसानिध्य के चलते मैं तो कोटगढ़ के संग इतिहास पुरुष बन ही गया .

मन गदगदा गे आउ चोला फसफसा गे

संध्या शर्मा ने कहा…
on 

राहुल सिंह जी की बात से सहमत हूँ कई बार बहुत सी बातें और चीजें सामने होकर भी ओझल होती हैं, उसे देखने और समझने के लिए आप जैसी पारखी नज़रों की जरुरत होती है. बहुत बारीकी से वर्णन करते हैं, आप अपने यात्रा वृत्तान्त का. सब कुछ जैसे आँखों के सामने फिर से जी उठता है.
सुन्दर ऐतिहासिक जानकारियों से भरपूर विवरण के लिए आभार...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…
on 

सौन्दर्य बिखरा पड़ा है, उससे सबका परिचय कराने का बहुत बहुत आभार।

shikha varshney ने कहा…
on 

घूम आये हम भी ..आभार आपका.

Surendra Singh Bhamboo ने कहा…
on 

आपके साथ साथ हमने भी कोट गढ़ का भ्रमण कर लिया बहुत ही अच्छा यात्रा वृत्तांत

Sunita Sharma ने कहा…
on 

garho ke bare me rochak jankari ke liye badhai........

केवल राम : ने कहा…
on 

आँखों देखा इतिहास संजोया जा रहा है, आपकी इन पोस्ट्स के माध्यम से ......भविष्य में यह एक सन्दर्भ क रूप में प्रयोग होगा ....ऐसा विश्वास है .....!

Vivek Rastogi ने कहा…
on 

आपके साथ तो बहुत सारी जगहें घूम रहे हैं ।

sangita ने कहा…
on 

behatreen yatra vrittant.

Vineet Mishra ने कहा…
on 

aai shabaash...:)

वाणी गीत ने कहा…
on 

आपके ब्लॉग के मध्यम से पर्यटन और ऐतिहासिक स्थलों की महत्वपूर्ण रोचक जानकारी प्राप्त होती रहती है !
आभार !

एक टिप्पणी भेजें

शिकवा रहे,कोई गिला रहे हमसे,आरजु एक सिलसिला रहे हमसे।
फ़ासलें हों,दूरियां हो,खता हो कोई, दुआ है बस नजदीकियां रहें हमसे॥

 

लोकप्रिय पोस्ट

पोस्ट गणना

स्वागत है आपका

FeedBurner FeedCount

यहाँ भी हैं

ईंडी ब्लागर

ललित डॉट कॉम

लेबल

aarang abhanpur ayodhya bastar bhilai bsp chhattisgarh delhi indian railway jyotish kathmandu lalit sharma lalqila lothal mahanadi malhar manpat minakshi swami nepal raipur rajim sirpur tourism uday ufo yatra अकलतरा अक्षर धाम अघोरपंथ अचानकमार अधरशिला अनुज शर्मा अनूपपुर अन्ना हजारे अबुझमाड़ अभनपुर अभ्यारण अमरकंटक अम्बिकापुर अयोध्या अलवर असोढिया सांप अहमदाबाद आकाशवाणी आमचो बस्तर आम्रपाली आयुर्वेद आरंग आर्यसमाज आश्रम आसाढ इजिप्त इतिहास इलाहाबाद उतेलिया पैलेस उत्खनन उत्तर प्रदेश उत्तरांचल उदयपुर उपनिषद उपन्यास उल्लू उसने कहा था एड्स एलियन ऑनर किलिंग ओबामा औरत औषधालय कचहरी कटघरी कटघोरा कनिष्क कबीर करवा चौथ करैत कर्णेश्वर कलचुरी कवि सम्मेलन कविता कहानी कहानीकार कांगड़ा फोर्ट कांगेर वैली काठमांडू काठमाण्डू काम कला कामसूत्र कालाहांडी कालिदास काव्य गोष्ठी काव्य संग्रह काश्मीर काष्ठशिल्प किन्नर किसान कीबोर्ड कुंभ कुटुमसर कुरुद केंवाच कोकशास्त्र कोट गढ कोटमी सोनार कोटा कोण्डागाँव कोबरा कोमाखान कोरवा खरसिया खल्लारी खाटु श्याम जी खारुन नदी खेती-किसानी खैरथल गंगा गंगानगर गंधर्वेश्‍वर मंदिर गजरौला गढमुक्तेश्वर गढ़ मंडला गणेश गरियाबंद गर्भपात गर्म गोश्त गाँव गांधी नगर गाजीपुर गायत्री परिवार गीत गुगा नवमी गुगापीर गुजरात गुप्तकाल गुलेरी जी गुफ़ाएं गैस चूल्हा गोंडवाना गोदना गोवाहाटी गोविंद देव गौतम बुद्ध ग्वालियर गड़ा खजाना घाट घुमक्कड़ घुड़सवारी घोंघा घोटाला चंदेल राजा चंद्रकांता चंबा चकलाघर चटौद चमड़े का जहाज चम्पारण चिट्ठा जगत चिट्ठाजगत चित्तौडगढ चित्रकला चित्रकार चित्रकूट चीन चुक्कड़ चुनारगढ चुड़ैल चूल्हा चूहेदानी चेन्नई चैतुरगढ छत्तीसगढ छत्तीसगढ पर्यटन छूरा जगदलपुर जन्मदिन जबलपुर जयचंद जयपुर जांजगीर जादू-टोना जापानी तेल जैन विहार जोधपुर ज्योतिष झारखंड टोनही डायबीटिज डीपाडीह डॉक्टर तंत्र मंत्र तट तनाव तपोभूमि तरीघाट तिब्बत तिलियार तीरथ गढ तीवरदेव त्रिपुर सुंदरी दंतेवाड़ा दंतेश्वरी मंदिर ददुवा राजा दरभंगा दलाई लामा दारु दिनेश जी दिल्ली दीवाली दुर्ग धमतरी धर्मशाला नंगल नकटा मंदिर नगरी सिहावा नगाड़ा नदी नरबलि नर्मदा नागपुर नागार्जुन निम्बाहेड़ा नूरपुर नेपाल नौगढ़ नौतनवा पंचकोसी पंजाब पठानकोट पत्रकारिता परम्परागत कारी्गर पर्यटन पर्यारवण पशुपतिनाथ पांडीचेरी पाकिस्तान पाटन पाण्डव पाण्डुका पानीपत पापा पाली पुरातत्व पुराना किला पुराना महल पृथ्वीराज चौहान पेंटिंग पेंड्रारोड़ प्राचीन बंदरगाह प्राचीन विज्ञान प्रेत साधना फणीकेश्वर फ़िंगेश्वर बनारस बरसात बवासीर बसंत बांधवगढ बागबाहरा बाजी राव बाबा रामदेव बाबाधाम बाला किला बालोद बिलासपुर बिल्हा बिहार बुद्ध बूढ़ा नीलकंठ बैद्यनाथ धाम ब्लागर मिलन ब्लॉगप्रहरी भगंदर भरतकुंड भाटापारा भानगढ़ भाभी भारत भारतीय रेल भिलाई भीम भूत प्रेत भैंस भैया भोंसला राजा भौजी मणि पर्वत मथुरा मदकुद्वीप मदन महल मद्रास मधुबन मधुबन धाम मधुमेह मध्य प्रदेश मनसर मराठा मल्हार महआ महादेव महानदी महाभारत महासमुंद महुआ महेशपुर माँ माओवादी मिथुन मूर्तियाँ मुंबई मुगल साम्राज्य मुद्रा राक्षस मुलमुला मेवाती मैकाले मैनपाट मैनपुर मोहन जोदरो मौर्यकाल यात्रा युद्ध योनी रचना शिविर रजनीगंधा रतनपुर रत्नावती रमई पाट रहस्य राज राजभाषा राजस्थान राजिम राजिम कुंभ राजीव राजीव लोचन रानी दुर्गावती राबर्टसगंज रामगढ रामटेक रायगढ रायपुर रायफ़ल शुटिंग रावण राहुल सिंह रींगस रेड़ियो रेल रोहतक लक्ष्मण झूला लखनपुर ललित डॉट कॉम ललित डोट कॉम ललित शर्मा लाल किला लाफ़ागढ लिंग लिट्टी-चोखा लोथल वन देवी वनौषधि वर्धा विनोद शुक्ल विराट नगर विश्वकर्मा विश्वकर्मा जयंती विष्णु मंदिर वृंदावन वेलसर वैशाली की नगर वधू व्यंकटनगर व्यंग्य शरभपुर शव साधना शहडोल शांति कूंज शिल्पकार शिव लिंग शिवनाथ शुटिंग शोणभद्र संध्या शर्मा संभोग सतमहला सरगुजा सरयू सरिस्का सहवास सातवाहन्। साहित्य सिंघनगढ सिंघा धुरवा सिंधु शेवड़ा सिरपुर सिहावा नगरी सीकर सीता बेंगरा सुअरमारगढ़ सुअरमाल सेक्स सेना सोनौली सोहागपुर हनुमान गढी हमीरपुर की सुबह हरिद्वार हरियाणा हरेली हसदा हाथी हावड़ा। हिंदी भवन हिडिम्बा टेकरी हिमाचल प्रदेश हिमाचली शादी होल्डर ॠग्वेद ॠषिकेश રુદ઼ા બાઈ ની બાવ લોથલ હું છું અમદાબાદ​