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बुधवार, 19 मार्च 2014

होली के बहाने कुछ तेरी मेरी ……

होली आई और गुजर गई …… होली कब हो ली पता ही न चला। सोचते रहे कि होली पर एक पोस्ट बनती है। विगत 5 वर्षों से होली पर ब्लॉग जगत के मित्रों की मौज लेने पोस्ट लिखते रहे। परन्तु इस वर्ष वह उत्साह मन में नहीं आया कि कोई पोस्ट का अवतरण हो जाए। ब्लॉग जगत भी गत वर्षों की अपेक्षा ठंडा ही रहा। कुछ ब्लॉग अपडेट ही मिलते रहे, जिसमें देशनामा की चमक कुछ अधिक दिखाई दी। ब्लॉग अडडा पे ठिया गाड़ने के बाद खुशदीप भाई के अपडेट निरंतर आ रहे हैं। बाकी के दैनिक यात्री साप्ताहिक, पाक्षिक या मासिक पोस्ट अपडेट पर उतर आए हैं। वर्तमान दशा को देख कर लगता है कि ब्लॉग की यही गति जारी रहेगी। कोई बहुत बड़ा उफ़ान या तूफ़ान अब आने से रहा। लगता है कि जैसे कोई बालक यूवावस्था को उलांघ कर सीधे ही वृद्धावस्था में पहुंच गया हो।

पार्श्वालोकन किया जाए तो लगता है कि हमने भी कुछ अधिक खास नहीं किया। सिर्फ़ दो पुस्तकें ही इस अवधि की उपलब्धि रही। पढना कम हो गया पर लेखन निरंतर जारी है। ब्लॉग पोस्टों की दिन दहाड़े डकैती भी एक बड़ी समस्या बन कर सामने आ रही है। कई अखबारों में मेरी पोस्टें अन्य किसी नाम से प्रकाशित दिखाई दीं तो कहीं किसी अन्य की पोस्ट पर मेरे द्वारा खींचे गए चित्र चिपके दिखाई दिए। बौद्धिक सम्पदा पर डकैती एक गंभीर मामला है। इसलिए कुछ महीनों से मैने ब्लॉग पर पोस्ट डालना कम कर दिया। आज ही सुनीता शर्मा (शानू) के दोहों की डकैती की खबर फ़ेसबुक पर मिली। सुनीता शर्मा ने बोफ़ार्स तोप का मुहाना खोल रखा था और कह रही थी कि "जब तक लेखनी की सम्पादिका माफ़ी नहीं मांगेगी तब तक यह मुद्दा जारी रहेगा।" चोरी के बाद सीनाजोरी किसी को पसंद नहीं और पसंद भी नहीं होनी चाहिए।

मुझसे भी एक गलती हुई, मैने भी कई मोर्चे खोल दिए। तीन किताबों पर एक साथ काम शुरु कर दिया। इससे समस्या यह पैदा हो गई कि समय अधिक लग रहा है। एक किताब का काम 80% होने के बाद भी कई महीनों से लटका पड़ा है और अभी उसकी तरफ़ देखने की इच्छा नहीं हो रही। मुझे ग्राऊंड रिपोर्ट करने में अधिक मजा आता है। पहले किसी स्थान का निरीक्षण-परीक्षण करो तथा उसके बाद लिखो। इससे मुझे आत्मिक संतुष्टि मिलती है और सूरज का ताप मेरी उर्जा में वृद्धि करता है। सौर उर्जा से जैविक बैटरी चार्ज हो जाती है। एक स्थान पर अधिक दिन नहीं टिकने की प्रवृत्ति चलने को मजबूर करती है। एक सप्ताह कहीं टिक गए तो लगता है कहीं और चला जाए। चलते चलते कहाँ तक चले जाएगें इसका पता नहीं।

पिछले साल 2 अक्टूबर से बाईक द्वारा गंगासागर से द्वारका तक जाने का कार्यक्रम लगभग पूर्णता की ओर था। इस यात्रा पर जाने के लिए सैकड़ों मित्र एक झटके में ही तैयार हो गए थे। अधिक लोगों को ले जा कर मैं अपने गले की फ़ांसी तो बनाना नहीं चाहता था। इसलिए सिर्फ़ 5 लोगों को सलेक्ट किया गया। जैसे ही तारीख समीप आई बाईक से ही रपटने के कारण हाथ फ़ैक्चर हो गया और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। उसके बाद इस यात्रा सुयोग बन ही नहीं पा रहा है। अब गर्मियों में आम चुनाव ताल ठोकने लग गया। सब चुनावों में व्यस्त हैं और हमारी बाईक यात्रा धरी की धरी रह गई। उम्मीद तो है कि किसी दिन धरी हुई बाईक चल पड़ेगी। हम फ़िर एक नई यात्रा पर चल पड़ेगें।

यात्रा ठंडी पड़ी तो व्यंग्य संग्रह के प्रकाशन में लग गए। काफ़ी मेहनत के बाद व्यंग्य संग्रह प्रकाश में आ गया। जबकि इससे पूर्व मैं रामगढ़ की गाथा लिखना शुरु कर चुका था। रामगढ़ की गाथा से पहले व्यंग्य संग्रह प्रकाशित हो गया। प्रकाशन के बाद मेरी इच्छा थी कि इसका विमोचन साहित्य से जुड़े साथियों के बीच हो और दो-चार घंटे इस पर चर्चा हो। परन्तु कुछ मित्रों ने चक्रव्यूह में ऐसा फ़ांसा कि अगर अभिमन्यू होता तो गति को प्राप्त हो जाता। तब कहीं जाकर मुझे ज्ञात हुआ कि पुस्तक प्रकाशन से महत्वपूर्ण कार्य उसके विमोचन का होता है। जिसके पास मधुरस का छत्ता है वह स्थापित लेखक बन सकता है। उसे विमोचनकर्ताओं, लेखकों एवं समीक्षकों की कोई कमी नहीं।

होली बीत गई, होलियारों के फ़ाग कम ही सुनाई दिए। पहले कई जगहों से नगाड़ों की धमक सुनाई देती थी। इस वर्ष सुबह से ही सड़कें सूनी हो गई थी। कुछ मतवाले जरुर मध्य मार्ग में चित्त पड़े थे। वाहन विश्राम पर होने के कारण कोई खतरा भी नहीं था। रामदेव एन्ड कम्पनी के गुलाल ने अच्छा मार्केट पकड़ा। पर गुलाल भी खुश्बूदार और उत्तम क्वालिटी का था। लगाते ही ठंडक का अहसास होता था। अब जिसका नेटवर्क बन गया है वह मिट्टी भी बेचेगा तो बिक जाएगी। वातावरण में उष्णता बढ रही है। दो दिनों से दोपहर के वक्त पंखा चलाने के बाद भी पसीने आने लगे हैं। ऐसे में मरुप्रदेश के दौरे का कार्यक्रम बन रहा है देखते हैं गर्मी कितनी सहन होती है। ………… सभी मित्रों को होली की शुभकामनाएँ।

बुधवार, 12 मार्च 2014

नगाड़ों का सफ़र

संतागमन के साथ प्रकृति खिल उठती है, खेतों में रबी की फ़सल के बीच खड़े टेसू के वृक्ष फ़ूलों से लद जाते हैं, मानों प्रकृति धानी परिधान पहन कर टेसू के वन फ़ूलों से अपना श्रृंगार कर वसंत का स्वागत कर रही हो। टेसू के फ़ूलों से प्रकृति अपना श्रृंगार कर पूर्ण यौवन पर होती है तथा वातावरण में फ़ूलों की महक गमकते रहती है। पतझड़ का मौसम होने के कारण पहाड़ों पर टेसू के फ़ूल ऐसे दिखाई देते हैं जानो पहाड़ में आग लग गई हो। विरही नायिका के हृदय को भी अग्निदग्ध करने में यह ॠतू कोई कसर बाकी नहीं रखती। इसी समय होली का त्यौहार आता है और दूर कहीं नगाड़ों के बजने की मधुर ध्वनि सुनाई देती है। साथ ही होली के फ़ाग गीत वातावरण को मादक बनाने में सहायक होते हैं।
टेसू (शुक चंचु) के फ़ूल
"अयोध्या में राम खेलैं होरी, जहाँ बाजे नगाड़ा दस जोड़ी" फ़ाग गीत के साथ नगाड़ों की धमक सांझ होते ही चहूं ओर सुनाई देती है। होली के त्यौहार का स्वरुप बदलते जा रहा है लेकिन गावों में परम्पराएं कायम हैं। नगाड़ा प्राचीन वाद्य है, जिसे दुदूम्भि, धौरा, भेरी, नक्कारा, नगाड़ा, नगारा, दमदमा इत्यादि नामों से भारत में जाना जाता है। छत्तीसगढ़ अंचल में विशेषकर नगाड़ा या नंगाड़ा कहा जाता है। संस्कृत की डम धातू का अर्थ ध्वनि होता है। इसलिए इसे दमदमा भी कहा जाता है। इसका अर्थ लगातार या मुसलसल होता है। 
कोकड़ा
शनिचरी बाजार में मेरी मुलाकात नगाड़ों की दुकान सजाए मन्नु लाल हठीले से होती है, नगाड़े बनाने एवं बेचने में इनकी उत्मार्ध बुधकुंवर भी हाथ बटाती दिखाई देती है। मन्नु लाल मिट्टी की हांडियों पर चमड़ा कसते हैं और बुधकुंवर चमड़े को विभिन्न रंगों से सजाती है। इनकी दुकान में 80 रुपए से लेकर 1200 रुपए तक के नगाड़े की जोड़ियाँ विक्रय के लिए रखी हुई हैं। पूछने पर बताते हैं कि इनका पैतृक घर डोंगरगढ में है। गत 20 वर्षों से ये नगाड़ा बनाने एवं बेचने का काम करते हैं। होली के अवसर पर विशेषकर नगाड़ों की बिक्री होती है। बाकी दिनों में जूता चप्पल बेचने का काम करते हैं।
मन्नु लाल हठीले एवं बुधकुंवर
छत्तीसगढ़ अंचल में नगाड़े बनाने का काम विशेषत: चमड़े का व्यवसाय करने वाली मोची, मेहर और गाड़ा जातियाँ करती हैं। फ़ूलकुंवर कहती है कि पहले शादी के अवसर पर दफ़ड़ा एवं निशान बाजा बहुत बिकता था, परन्तु धुमाल बाजा आने के कारण इनकी बिक्री कम हो गई। दफ़ड़ा निशान बजाने वाले भी अब कम ही हैं। होली के बाद नगाड़ों की बिक्री पर विराम लग जाता है, महीनें में कोई एकाध जोड़ी नगाड़ा बिक्री होता है, वह भी कबूलना एवं बदना वाले लोग देवता-धामी मंदिर आदि में चढाने के लिए ले जाते हैं। कबुलना नगाड़े इन नगाड़ों से बड़े बनते हैं। 
नगाड़ों पर कलमकारी
नगाड़ा बनाने के लिए मिट्टी की हाँडी के साथ चमड़े का उपयोग होता है। मन्नु लाल बताते हैं कि नगाड़े की जोड़ी में दो सुर होते हैं, जिसे "गद" और "ठिन" कहते हैं। इसका निर्माण बैल या गाय के चमड़े से होता है। पशु के शीर्ष भाग का चमड़ा पतला होता है जिससे "ठिन" एवं पार्श्व भाग का चमड़ा मोटा होता है इससे "गद" नगाड़ा बनाया जाता है। हाँडी पर चमड़ा मढने के लिए भैंसे के चमड़े की रस्सियों उपयोग में लाई जाती हैं। तभी नगाड़ों से "गद" एवं "ठिन" की ध्वनि निकलती है। छोटा नगाड़ा बनाने के लिए बकरा-बकरी और अन्य जानवरों का चमड़ा उपयोग में लाया जाता है। इसे बजाने के लिए दो डंडियों का इस्तेमाल होता है जिन्हें स्थानीय बोली में "बठेना" कहा जाता है। नगाड़े की वास्तविक ध्वनि का आनंद गाय-बैल के चमड़े से मढे नगाड़े में ही आता है। 
नगाड़े बजा कर "गद" एवं "ठिन" ध्वनि का परिक्षण
मन्नुलाल कहते हैं कि होली के समय नगाड़े बेचकर 10 -15 हजार रुपए बचा लेते हैं। मंह्गाई बहुत बढ गई है, कच्चे माल का मूल्य भी आसमान छू रहा है। पहले एक ट्रक माल लेकर आते थे, वर्तमान में एक मेटाडोर ही नगाड़े लेकर आए हैं, किराया भी बहुत बढ गया। साथ ही रमन सरकार की तारीफ़ करते हुए कहते हैं कि राशन कार्ड में चावल, गेहूं, नमक, चना इत्यादि मिलने से गुजर-बसर अच्छे से चल रहा है। वरना जीवन भी बहुत कठिनाईयों से चलता था। इसी बीच फ़ूलकुंवर कहती है कि उनका स्मार्ट कार्ड नहीं बना है, आधार कार्ड बन गया है। इतना कहकर वह चूल्हे पर भोजन बनाने की तैयारी करने लगती है। 
नगाड़े संवारती बुध कुंवर
इतिहास से ज्ञात होता है कि नगाड़ा प्राचीन संदेश प्रणाली का महत्वपूर्ण यंत्र माना जाता है। इसके माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक संदेश शीघ्र ही पहुंचाया जाता था एवं नगाड़ा का प्रयोग सूचना देने में किया जाता था। जब किसी सरकारी आदेश को जनता तक प्रसारित करना होता था तो नगाड़ा बजाकर संदेश सुनाया जाता था। युद्ध काल में सेना के प्रस्थान के समय नगाड़े बजाए जाते थे, मुगलों के दरबार में फ़ैसले नगाड़ा बजा कर सुनाए जाते थे तथा किसी की जायदाद कुर्की करने की सूचना देने का कार्य भी नगाड़ा बजा कर किया जाता था।
पतझड़ का मौसम खड़ुवा के जंगल में
वर्तमान में नगाड़ा मंदिरों में आरती के समय बजाया जाता है या फ़िर होली के अवसर पर बजाया जाता है। छत्तीसगढ़ अंचल में सामूहिक होलिका दहन स्थल पर फ़ाग गीतों के साथ इसका उपयोग किया जाता है। नगाड़ा बजता है तो गायक का उत्साहवर्धन होता है और सुर ताल बैठने पर फ़ाग गीत रात के सन्नाटे को चीरते हुए दूर तक सुनाई देते हैं। नगाड़ों की ध्वनि के साथ वसंत का रंग सारे वातावरण पर छा जाता है। होली समीप है और नगाड़ों की ध्वनि मन को मोह रही है। आस पास बजते नगाड़े का होली का स्वागत कर रहे हैं …… डम डम डम डम डमक डम डम…………

(डिस्क्लैमर - सभी चित्र एवं लेखन सामग्री लेखक की निजी संपत्ति हैं, इनका बिना अनुमति उपयोग करना कापीराईट के अधीन अपराध माना जाएगा। अनुमति के लिए shilpkarr@gmail.com पर सम्पर्क करें।)

सोमवार, 25 मार्च 2013

ब्लॉग हायर सेकेंडरी परीक्षा ………4013


विषय - ब्लॉग होली विशिष्ट (इतिहास)
समय : 3 घंटे                                                                                                                                                 पूर्णांक - 100
निर्देश (1) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। कुल 25 प्रश्न हैं।

(अ) सही विकल्प चुन कर लिखिए (10 अंक)
(1) "धान के देश में" ब्लॉग़ के लेखक किस नाम से जाने जाते थे
 (अ) अवधिया चाचा (ब) जीके अवधिया (स) पीके अवधिया (द) बेदांती महाराज

(2) "मन पखेरु उड़ चला"  किस मशहुर कवियत्री का ब्लॉग है।
(अ)संध्या शर्मा (ब) सुनीता शर्मा (स)मोनिका शर्मा (द)वाणी शर्मा

(3) "उसने कहा था" ब्लॉग की माडरेटर कौन है।
(अ) माधवी शर्मा गुलेरी (ब) चंद्रप्रकाश गुलेरी (स) साधना गुलेरी(द) दिव्या गुलेरी

(4) श्याम कोरी उदय किस काव्य धारा के कवि हैं
(अ) ब्लॉग (ब) फ़ेसबुक (स) आरकुट (द) गुगल प्लस

(5) कविता वर्मा जी "कासे कहूँ" ब्लॉग पर साहित्य की विधा में लिखती थी
(अ)काव्य (ब) कहानी (स) यात्रा वृतांत (द) व्यंग्य

(ब) उचित संबंध जोड़ो (5 अंक)

(1) अनुप शुक्ला               - मानसिक हलचल
(2) लाला समीर लाल        -पराया देश
(3) ताऊ                           -फ़ुरसतिया  
(4)राज भाटिया                -रामप्यारी
(5)ज्ञानदत्त पाण्डे            -उडन तश्तरी

प्रश्न 2 से लेकर 11 तक प्रति प्रश्न 2-2 अंक हैं।

प्रश्न (2) ब्लॉग किसे कहते हैं, उदाहरण सहित परिभाषा लिखो

प्रश्न (3) संध्या शर्मा के ब्लॉग "मैं और मेरी कविताएं" से एक कविता लेकर उसके रस, छंद एवं अलंकार की व्याख्या कीजिए?

प्रश्न (4) ब्लॉग पर घनाक्षरी छंद रचने वाले ब्लॉगर का नाम बताएं और उनके द्वारा रचित एक छंद लिखें।

प्रश्न (5) "जलजला" ब्लॉग जगत में कब और क्यों सक्रीय हुआ?

प्रश्न (6) ब्लॉग लेखन को लेकर भारत में साईबर एक्ट की धारा 66/ए के अंतर्गत प्रथमत: किस ब्लॉगर पर जुर्म दर्ज हुआ था? उनके ब्लॉग का नाम लिखें।

प्रश्न (7) लंठ महाचर्चा लिखने वाले ब्लॉगर एवं ब्लॉग का नाम बताएं?

प्रश्न (8) जाट धर्म शाला नांगलोई में ब्लॉगरमीट कब और क्यों हुई थी?

प्रश्न (9) ब्लॉग पुरस्कारों का प्रारंभ क्यों और कहाँ हुआ?

प्रश्न (10) ताऊ द्वारा आयोजित ब्लॉग पुरस्कार किस नाम से जाना जाता है?

प्रश्न (11) चिट्ठा चर्चा पर विवाद कब और क्यों नहीं हुआ?

प्रश्न 12 से 20 तक 3-3 अंक हैं।

प्रश्न (12) नामी और बेनामी कमेंट का आशय क्या है?

प्रश्न (13) एक साथ दो-दो कमेंट कापी पेस्ट करने वाले ब्लॉगर का नाम बताएं?

प्रश्न (14) किस हिन्दी ब्लॉगर के ब्लॉग पर सबसे अधिक टिप्पणियों का रिकार्ड कायम हुआ?
                                                          या
प्रथम ब्लॉग़ युद्द किसके बीच एवं कहाँ हुआ था?

प्रश्न (15) ब्लॉग सत्ता पर अधिकार पाने की लड़ाई में कितने ब्लॉग और ब्लॉगर खेत रहे?
                                                         या
द्वितीय ब्लॉग युद्द के कारक बताएं?

प्रश्न (16) रायपुर में आयोजित 24 जनवरी 2010 की ब्लॉगर मीट को ब्लॉग मठाधीश ने विद्रोह क्यों माना?
                                                            या
प्रेस क्लब में आयोजित ब्लॉगर मीट में कौन सा प्रस्ताव सर्व सम्मति से पारित हुआ?

प्रश्न (17) गत्यात्मक ज्योतिष ब्लॉग की जुझारु ब्लॉगर का नाम बताएं एवं गत्यात्मक ज्योतिष की 500 शब्दों में व्याख्या करें?
                                                         या
ब्लॉग जगत की चिट्ठा चर्चाओं के नाम बताईए एवं  चर्चित चिट्ठा चर्चा ब्लॉग4वार्ता प्रारंभ करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? (500 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न (18) घुमंतु ब्लॉगर ललित शर्मा का जीवन दर्शन क्या था? तथा उनकी खोजों का वर्णन 500 शब्दों में कीजिए?
                                                                               या
10 प्रमुख ब्लागरों के नाम एवं ब्लॉग का नाम बताएं तथा 50 शब्दों में उनके ब्लॉग लेखन के विषय की जानकारी दें?

प्रश्न (19) बेनामी हमला सबसे पहले किस ब्लॉग पर कब और क्यों हुआ था? बेनामी हमले के कारकों की व्याख्या कीजिए?
                                                                               या
ब्लॉग पर कमेंट करने के कुछ महीनो के बाद कमेंट मिटाने वाले ब्लॉगर का जिक्र करते हुए, कमेंट मिटाने की मानसिक स्थिति का 300 शब्दों में विश्लेषण कीजिए?

प्रश्न (20) हरियाणा के रोहतक नगर में स्थित तिलियार ब्लॉगर मीट का आयोजन क्यों और किसने किया था? मीट में उपस्थित ब्लॉगर्स का नाम बताते हुए, मीट के पश्चात उपजे विवाद पर प्रकाश डालिए?
                                                                               या
समस्त चिट्ठा चर्चाओं का जिक्र करते हुए, उनकी उपयोगिता का 500 शब्दों में विश्लेषण कीजिए?

प्रश्न क्रमांक 21 से 24 तक 5-5 अंक हैं।

प्रश्न (21) ब्लॉग जगत के घुमक्कड़ों की चर्चा करते हुए, बताईए की वे घुमक्कड़ी के लिए उर्जा कहाँ से पाते हैं? 500 शब्दों में
                                                                                 या
"मेरे दिल के अरमां  रहे रात जलते,रहे सब करवट पे करवट बदलते। यूँ हारी है बाज़ी मुहब्बत की हमने,बहुत रोया है दिल दहलते- दहलते " ये लाईन किस प्रसिद्ध कवियत्री की हैं बताईए एवं संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए?

प्रश्न (22) न दैन्यम न पलायनम, क्वचिदन्यतोअपि, सिंहावलोकन, आलसी का चिट्टा, आरंभ, देशनामा आदि ब्लॉग की सामग्री के विशिष्टता पर 100-100 शब्दों में जानकारी दें?
                                                                               या
ब्लॉग जगत के आडियो ब्लॉग्स की जानकारी देते हुए उनकी सामग्री का विश्लेषण 500 शब्दों में करें?
प्रश्न (23) नुक्कड़ की स्थापना कब हुई थी? नुक्कड़ के सहयोगी लेखकों का जिक्र 500 शब्दों में कीजिए?
                                                                             या
जन्मदिन एवं विवाह की साल गिरह की जानकारी देने वाले ब्लॉग का क्या नाम था तथा उसके बंद होने के कारणों का उल्लेख करें?

प्रश्न (24) ब्लॉग लेखन के कारकों का उल्लेख करते हुए नए ब्लॉगर का ब्लॉग जगत की हाईवे, गली-गलियारों का जिक्र करते हुए 500 शब्दों में मार्ग दर्शन कीजिए?
                                                                            या
ब्लॉग लेखन के लिए आवश्यक सामग्री का जिक्र करते हुए कुछ उल्लेखनीय ब्लॉगों के विषय में 500 शब्दों में जानकारी दीजिए।

प्रश्न -(25) निबंध लिखिए (750 शब्दों में) अंक 18

अजय झा के ब्लॉग, ब्लॉग जगत का आस्कर, बेनामी टिप्पणीकार, एग्रीगेटर्स, ब्लॉगिंग के आयाम
                                                                            या
ब्लॉगिंग के गूढ रह्स्यों की जानकारी देते हुए पिता को पत्र लिखिए ?

गुरुवार, 24 मार्च 2011

ब्लॉगवुड के होली समाचार जारी है --- ललित शर्मा

ब्लॉगवु्ड रेड़ियो-- सुनिये होली समाचार (अर्चना चावजी से)


"बुरा न मानो होली है"
मिडियम वेब चार दो शुन्य मेगाहार्टज पर ये ब्लॉगवुड का रेडियो केन्द्र है , सभी श्रोताओं को रंग पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं।अब आप ललित शर्मन: से ब्लॉग वुड के बचे-खुचे मुख्य समाचार सुनिए।

प्रेस के क्लब के चपरासी के हवाले से खबर मिली है कि अध्यक्ष अनिल पुसदकर छाली वुड की एक सेवानिवृत अभिनेत्री से विवाह करने जा रहे हैं। यह समाचार काफ़ी दिनों से प्रेस क्लब के गलियारों में चल रहा था। अब इसकी पुष्टि अनिल पुसदकर के विश्वसनीय ब्लॉग गुरु संजीत त्रिपाठी ने कर दी है। शादी के लिए 3 तरह के निमंत्रण पत्र छापे गए हैं, लाल वाला निमंत्रण पत्र दिखाने पर ही पार्टी में बिना उपहार के प्रवेश दिया जाएगा। बाकी कार्ड वालों नव दंपत्ति के बच्चों के लिए उपहार लाने पड़ेगें।

छत्तीसगढ भंडारण निगम बोर्ड की आपातकालीन बैठक आहूत की गयी, भंडारण निगम के मोटे चूहों के उत्पात एवं अनाज के नुकसान को देखते हुए अध्यक्ष अशोक बजाज की सहमति से निर्णय लिया गया है कि बड़ी संख्या में अफ़्रीका के जंगलों से बड़ी बिल्लियाँ खरीदी जाएगीं। जो चूहों का शिकार कर भंडारण निगम के नुकसान को कम करेंगीं। बिल्लियों के निरीक्षण के लिए भंडारण निगम का एक दल अध्यक्ष के नेतृत्व में जल्द ही बुरकीनाफ़ासों की यात्रा पर जाएगा। इस खरीदी हेतु बोर्ड ने 1800  करोड़ का ग्लोबल टेंडर निकालने की सहमती दे दी है।

रेलवई मंत्रालय ने रेल्वे के प्रवीण पाण्डेय को बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। अब प्रवीण पान्डेय अपनी सेवाएं दिल्ली में देंगे। उन्होने फ़ोन पर अपना वर्जन देते हुए कहा कि किसी भी ब्लॉगर को इमरजेंसी कोटे से टिकिट कन्फ़र्म करानी है तो वे नि:संकोच उनसे सम्पर्क कर सकते हैं। वे अपनी प्रारंभिक बैठक में ही बेरोजगार ब्लॉगरों के लिए रेल्वे में भर्ती का कोटा आरक्षित करने का उद्यम करेंगे। जिससे रेल्वे की योजनाओं का प्रचार प्रसार ब्लॉग के माध्यम से हो सके तथा ब्लॉगर्स को रेल्वे का विज्ञापन भी दिलाएगें।

अब तहलका में तहलका कर रहे राजकुमार सोनी को पत्रकारिता जगत का  सबसे बड़ा "न्यूज श्री सम्मान " देने की घोषणा चचा ने की है। उन्होने बताया कि वे हरिभूमि की तरह यहाँ भी  खोजी पत्रकारिता की मिशाल पेश करेगें। इनके पास समाचारों के समस्त स्रोत हैं, जिनका इस्तेमाल बखुबी कर सकते हैं।प्रेस क्लब से उड़ता हुआ समाचार है कि ये अब प्रेस क्लब का अध्यक्ष बनने के लिए कमर कस चुके हैं और इनका पत्रकारों से सम्पर्क जारी है। अहफ़ाज रशीद इसमें मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।

राडिया प्रकरण में एक नया मोड़ आ गया है। इसमें एक और पत्रकार की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। जी न्यूज के प्रोड्यूसर खुशदीप सहगल ने सतीश सक्सेना एवं शाहनवाज सिद्धकी को मंत्री मंडल में शामिल कराने के लिए पुरजोर प्रयास किया। मुखबिर के हवाले से बताया गया है कि लेन-देन को लेकर मामला अटक गया और इनका प्रयास विफ़ल रहा। सतीश सक्सेना एवं शाहनवाज सिद्धकी ने इनको तबियत से गरियाया है। इनके चक्कर में ये न घर के रहे न घाट के। डॉ दराल से मिली जानकारी के अनुसार इनका पंगा सी एस ओ आर क्लब में भी हुआ था।

ब्लॉगप्रहरी की सफ़लता के पश्चात एक नया एग्रीगेटर ब्लॉगमंडली भी लांच हो चुका है। जबलपुरिया फ़ाड़ू शायर महेन्द्र मिश्र ने भी नया इंटरनेट लाईव चैनल शुरु किया है। इनका कहना है कि सभी टीवी चैनल अपनी विश्वसनीयता खो चूके हैं इसलिए बस इंटरनेट का सहारा है। ये प्रतिदिन सुबह और शाम को मिसिर चैनल पर कविता एवं गद्य पाठ कर रहे हैं और प्रतिद्वंदियों की खाट खड़ी करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।

होली पर अंतर सोहिल एवं यौगेन्द्र मौदगिल में घमासान युद्ध हो गया। बात तो दोस्ती के तलाक तक पहुंच गयी। अम्ब्रेला छतरी की मध्यस्थता के पश्चात माहौल कुछ शांत हुआ है पर भीतर तूफ़ान जारी है। तिलियार के वेटर से मिले समाचार के अनुसार दोनो का विवाद पहले पैग को ही लेकर हो गया। पहले आप और पहले आप के लखनवी अंदाज में बात जूतम पैजार तक पहुंच गयी। अम्ब्रेला छतरी ने आते ही पैग ढकेल लिया, तब तक बार बंद हो चुकी थी, अब दोनो को शांत होना पड़ा।

धर्मशाला से खबर आ रही है कि केवल राम पर किसी साए का असर हो गया है। तभी से ये अपने ब्लॉग पर चलते-चलते ईश्किया शायरी करने लगे हैं। इधर महफ़ूज अली का रिश्ता भी तय हो गया है। शीघ्र ही इनका निकाह लीबिया के राष्ट्रपति गद्धाफ़ी की भतीजी से होने वाला है। रायटर के अनुसार निकाह के पश्चात लीबिया का शासन महफ़ूज अली के हाथों में देने की प्रबल संभावना व्यक्त की जा रही है। क्योंकि वहाँ के विद्रोहियों से ये अपने लाठी बल्लम से निपटकर शांति स्थापित कर सकते हैं। इनके ईष्ट मित्र बारात में जाने की तैयारी रखें, पता नहीं कब आपातकालीन बुलावा आ जाए।

गिरीश पंकज से शिकायत रही है कि उन्होने “मिठलबरा की आत्मकथा” नामक उपन्यास सत्य घटना पर केन्द्रित किया है जिसे काल्पनिकता का जामा पहनाने की कोशिश की गयी है। गौरतलब है कि इस उपन्यास के प्रकाशित होने के बाद बहुत धमाल मचाया और पत्रकारिता जगत की धांधलियों का भंडाफ़ोड़ कर दिया। गिरीश पंकज ने बताया कि अब वे “मिठलबरा” नम्बर 2 लिख रहे हैं। चाहे उन्हे जेल भेज दिया जाए लेकिन सच कहने से नहीं चूकेगें।

ताऊ गरही सम्मेलन में पिट्सबर्ग के भारतीय अनुराग शर्मा ने भौजी का वेश बना कर सतीश सक्सेना पर बहुत लट्ठ बरसाए,वे भौजी समझ कर लट्ठ खाते रहे। जैसे ही उन्हे राज का पता चला तो संसदिय सौंध के महिला थाने में इनके विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करा दी है। इंटरपोल से इनके नाम का रेड़ कार्नर नोटिस जारी किया जा चुका है। काजल कुमार मित्र धर्म निभाकर आपसी समझौता कराने में लगे हुए हैं, अख्तर खान अकेला ने फ़रियाद तीसरा खंबा पर दर्ज करने की सलाह दी है। जहाँ दिनेश राय द्विवेदी की अध्यक्षता में वकीलों का एक पैनल इस मामले पर कानूनी मशविरा करेगा।

अभी अभी समाचार मिला है कि छत्तीसगढ की समस्त देशी विदेश शराब दुकानों का ठेका जी के अवधिया एन्ड कम्पनी को दे दिया गया है। ज्ञात हो कि ललितकला के लोकार्पण के अवसर इन्होने मुख्यमंत्री से शराब का कोटा पुरा न होने की बात कही थी। मुख्यमंत्री ने इन्हे होली का तोहफ़ा दिया है। इस खुशी में जी के अवधिया तीन दिनों से सुबह से ही टुन्न हो जाते हैं। अजय सक्सेना को इन्होने ने ग्रुप मैनेजर बनाया है। जी के अवधिया को ठेका मिलने के बाद ही अजय सक्सेना ने पत्रिका को छोड़ दिया था।

डी आर डी ओ ने अन्य ग्रहों पर ब्लॉगिंग की संभावनाओं एवं विकास को लेकर एक अध्ययन दल मंगल ग्रह पर भेजने का निर्णय लिया है। अध्ययन दल का नेतृत्व प्रख्यात ब्लॉगर निर्मला कपिला करेंगी और संगीता पुरी वाणी शर्मा, डॉ मोनिका शर्मा, दर्शन कौर धनोए, संगीता स्वरुप,एवं वन्दना गुप्ता  शामिल रहेगीं। सहयोग के लिए विशेष रुप से पुरातत्वविद राहुल सिंह को भेजे जाने की संभावना है, वे मंगल ग्रह पर एलियन की तलाश भी करेंगे।

भाजपा कार्यालय की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया है कि स्वराज्य करुण ने जनसम्पर्क से त्याग पत्र देकर पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इन्हें पार्टी का मुख्य विशेष प्रवक्ता नियुक्त किया है। इनका नाम बुकर पुरस्कार के लिए भेजा गया  है। याज्ञवल्क्य वशिष्ठ ने सहारा चैनल से इस्तीफ़ा दे कर फ़ेसबुक ज्वाईन कर लिया है। वे अपनी सेवाएं फ़ेसबुक पर भारत ब्युरो चीफ़ के पद पर देगें। संजीव तिवारी ने छत्तीसगढी फ़िल्म बनाने की घोषणा कर दी है। आर्कुट ,फ़ेसबुक एवं ब्लॉग सम्पर्कों से नायिका की तलाश जारी है। इस सिलसिले में बी एस पाबला से इनकी गहन मंत्रणा चल रही है। शरद कोकास पटकथा एवं डॉयलाग लेखने का प्रशिक्षण लेने मुंबई गए हुए हैं। उनके आते ही फ़िल्म स्क्रीप्ट का लेखन प्रारंभ हो जाएगा।

रंग पंचमी की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं, आज के समाचार समाप्त होते हैं, नए समाचारों के साथ मिलते हैं अगली होली में, इतने ही बजे इतने ही टाईम। तब तक के लिए ललित शर्मण: को आज्ञा दीजिए। नमस्कार

नोट-समय की कमी के कारण पॉडकास्ट नहीं कर पाया, क्षमा चाहुंगा
पोस्ट अपडेट की गयी।

बुधवार, 23 मार्च 2011

मेरी बेवकूफ़ी --- ललित शर्मा

वंदना अवस्थी जी ने होली पर बेवकूफ़ियों पर पोस्ट लगाई है। सोचा कि हम भी अपनी महा बेवकूफ़ी आपके साथ बांट लें। यह पोस्ट वैसे तो मैं बहुत पहले लिख चुका था। लेकिन प्रसंगवश आज पुन: प्रकाशित कर रहा हूं।कभी कभी ऐसी नादानी हो जाती है,जिसे बाद में सोच कर हम अपने आप पर ही हंसने को मजबूर हो जाते हैं. एक घटना ऐसी ही मेरे साथ घटी वह आपके साथ बाँट रहा हूँ,शायद आप के साथ भी घटी हो?
हमारा गांव कोई 10 हजार वोटरों की ग्राम पंचायत है.अब नगर पंचायत में तब्दील हो गया है. हम सब एक दुसरे को जानते हैं और सबके सुख-दुःख में शामिल होते हैं. हमारे घर से कोई आधे कि.मी. की दुरी पर श्मशान है और यहाँ जाने का रास्ता हमारे घर के सामने से ही है. जब किसी की मृत्यु होती है तो मैं शवयात्रा में अपने घर से ही शामिल हो जाता हूँ. सभी पंथों एवं धर्मों की मान्यता है की शवयात्रा में शामिल होना पुण्य का काम है. दोस्त हो या दुश्मन, परिचित हो या अपरिचित सभी की अंतिम यात्रा में शामिल होना चाहिए, ये बात मैंने भी गांठ बांध रखी है. किसी की भी शव यात्रा घर के सामने से निकले मैं अपना पंछा (अंगोछा) उठा कर उसमे शामिल हो जाता हूँ। 

एक दिन ऐसी ही एक शव यात्रा घर के सामने से निकली, उसमे सभी परिचित लोग दिखे, तो मैंने सोचा कि गांव में किसी की मृत्यु हो गयी और नाई मुझ तक नहीं पहुच पाया, मुझे जाना चाहिए । मैंने अपना अंगोछा उठाया और चल दिया, श्मशान जाने के बाद मैंने किसी से नही पूछा कि कौन मरा है? अपने हिसाब से कयास लगाया. हमारे मोहल्ले में एक फौजी रहता था और वो काफी वृद्ध हो गया था, वो लगातार बीमार भी रहता था, उसके नाती लोग उसके साथ रहते थे. श्मशान में फौजी के नाती लोग सभी क्रिया कर्मो को अंजाम दे रहे थे. अब मैंने सोच लिया कि फौजी की ही शव यात्रा है. अंतिम संस्कार के बाद घर आया तो मेरी दादी ने पूछा कि कौन मर गया? मैंने कहा फौजी।

उन्हें बता कर, नहा धो कर, पूजा पाठ करके किसी काम से बस स्टैंड चला गया. जब वापस घर आया तो देखा घर के सब लोग एक साथ बैठे थे. मै देखते ही चक्कर में पड़ गया कि क्या बात हो गयी इतनी जल्दी? मैं तो अभी ही घर से गया हूं बाहर. दादी ने पूछा " तू किसकी काठी "अंतिम यात्रा"में गया था. मैंने कहा "फौजी की."  वो बोली "फौजी तो अभी आया था. रिक्शा  में बैठ के और मेरे से 100 रूपये मांग कर ले गया है. बीमार है और इलाज कराने के लिए पैसे ले गया है". अब मैं भी सर पकड़ कर बैठ गया "आखिर मरा वो कौन था? जिसकी मैं शव यात्रा में गया था. मैंने कहा- "ये हो ही नहीं सकता मैं अपने हाथों से लकडी डाल के आया हूँ. वो किधर गया है? " उन्होंने कहा कि बस स्टैंड में डाक्टर के पास गया होगा. मैंने फिर अपनी बुलेट उठाई और बस स्टैंड में उसको ढूंढने लगा. 

एक जगह पान ठेले के सामने वो मुझे रिक्शे में बैठे मिल गया. मैंने उतर के देखा और  उससे बात की. अब मैं तो सही में पागल हो चूका था कि "आखिर किसकी शव यात्रा में गया था?" मेरी तो समझ में नहीं आ रहा था, क्या किया जाये? फिर मेरे दिमाग में आया कि फौजी के नातियों से पूछा जाये. अब पूछने में शर्म भी आ रही थी कि वे क्या सोचेंगे? महाराज का दिमाग सरक गया है. काठी से आने के बाद पूछ रहा है कौन मरा था? किसकी काठी थी? मैं इसी उधेड़ बुन में कुछ देर खडा रह फिर सोचा कि चाहे कुछ भी पूछना तो पड़ेगा. ये तो बहुत बड़ी मिस्ट्री हो गयी थी.मौत तो उनके घर में हुयी थी. लेकिन किसकी हुयी थी यही पता करना था.  आखिर मैं उनके घर गया. दूर में मोटर सायकिल खड़ी करके उसके छोटे नाती को वहीँ पर बुलाया और  उससे पूछा.तो उसने बताया कि उसके पापा (फौजी के दामाद)की मौत हुयी है वो भी काफी दिन से बीमार चल रहे थे.

रविवार, 20 मार्च 2011

होली है भई होली है रंग बिरंगी होली है ---- ललित शर्मा

सभी मित्रों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं।



नया मौसम आया है जरा सा तुम संवर जाओ
जरा सा हम बदल जाएँ, जरा सा तुम बदल जाओ

जमी ने भी ओढ़ ली है एक नयी चुनर वासंती
गुजारिश है के फागुन में जरा सा तुम महक जाओ

नए चंदा- सितारों से सजाओ मांग तुम अपनी
परिंदों के तरन्नुम में जरा सा तुम चहक जाओ

तुम्हारे पैर की पायल नया एक राग गाती है
जरा सा हम मचल जाएँ जरा सा तुम थिरक जाओ

"ललित" के मय के प्याले में तुम भी डूब लो साकी
जरा सा हम बहक जाएँ जरा सा तुम बहक जाओ

शनिवार, 19 मार्च 2011

ब्लॉगवुड के होली समाचार रेड़ियो ब्लॉगवुड पर --- ललित शर्मा

सुनिए रेडियो ब्लॉगवुड




मिडियम वेब 420 मेगाहार्टज पर ये ब्लॉगवुड का रेडियो केन्द्र है अब आप ललित शर्मण: से ब्लॉग वुड के मुख्य समाचार सुनिए।

एफ़ बी आई के हवाले से खबर मिली है कि 2 जी स्पैक्ट्रम घोटाले की रकम उड़नतश्तरी से ले जा कर मंगल ग्रह के एलियन बैंक में जमा की गयी है। कहा जाता है कि देश के शातिर घोटाले बाज अब जान चुके हैं कि स्विसबैंक के खातों की जानकारी विकिलीक्स से लीक हो जाती है। मंगल ग्रह पर रकम ले जाने वाली उड़नतश्तरी तलाश जारी है। तलाश में जनता हवलदार का काफ़िला सायकलों से रवाना हो चुका है। एक उड़न तश्तरी  सत्यानंद विहार के कांजी हौस में बंद होने के समाचार भी मिले हैं जिसकी सूचना एफ़ बी आई को दे दी गयी है।

मशहूर पॉडकास्टर गिरीश बिल्लौरे अपने गिरोह के साथ कुतुबमीनार की तस्करी की योजना बनाते हुए गुवारीघाट थाने की पुलिस द्वारा धर लिए गए। इनसे काफ़ी मात्रा में अलसहे बरामद किए गए। इन पर कबूतर बाजी का भी आरोप चल रहा है, पिछले दिनों कनाडा यात्रा के दौरान ये अपने दल में 40 लोगों को लेकर गए थे जिसमें से 5 की ही वापसी  हुई है। पुलिस ने मुखबिर से मिली सूचना को पुख्ता मानकर कार्यवाही कर  सफ़लता प्राप्त की। नगर चौकीदार ने इन्हे गिरफ़्तार करने वाले पुलिस दल को पुरस्कृत करने का निर्णय लिया है।

ताऊ की भैंस चम्पाकली का अपहरण हो गया है। चम्पाकली ब्रह्माण्ड सुंदरी प्रतियोगिता में शामिल होने गयी थी तभी से लापता है। ताऊ ने अपना शक रामप्यारे पर जाहिर किया है और चम्पाकली के न मिलने पर फ़िर से हिमालय यात्रा पर जाने की धमकी दे दी है, चम्पाकली की तलाश जारी है। देखते हैं अब भैंस किस करवट बैठती है।

अभी अभी ताजा खबर मिली है कि चितौड़ की मशहूर बज्जकार इंदू पुरी को राज्य सभा में मनोनीत कर दिया गया है। एजेंसी के हवाले से बताया गया कि मनमोहनी सरकार 2 जी स्पैक्ट्रम घोटाले में विपक्ष से घिर चुकी थी और विकिलीक्स के खुलासे ने सरकार की कमर तोड़ कर धर दी। ऐसी परिस्थिति में उन्हे किसी मजबूत सहारे की आवश्यकता थी। अब राज्यसभा में इंदुपुरी सरकार का बचाव करेंगी। इस आशय की खबर आज दिन भर संसद के गलियारों में चलते रही कि इनके लिए विशेष रुप से माँ-बहन एवं बाप-भाई मंत्रालय की स्थापना की जा रही है। इस खबर से ब्लागवुड में हर्ष व्याप्त है। अन्दरुनी खबर है कि मठाधीशों के पिछलग्गु चमचों ने इन्दुपुरी के राज्यसभा सदस्य मनोनीत किए जाने पर जंतर-मंतर पर धरना देने की योजना बनाई है।

रांची के कवि सम्मेलन में तब हंगामा खड़ा हो गया जब मंच पर एक शायर ने कम पारिश्रमिक मिलने की बात कह कर गजल पढने से मना कर दिया। इस कवि सम्मेलन के कर्ता धर्ता अलबेला खत्री बताए जाते हैं। शायर ने अलबेला खत्री पर आरोप  लगाया कि उन्हे पारिश्रमिक तो सभी कवियों के बराबर दिया गया था। लेकिन बीच में अलबेला खत्री ने गुल गपाड़ा कर दिया। यह खबर जैसे ही अन्य कवियों को मिली उन्होने अलबेला खत्री को घेर लिया। पुलिस ने बड़ी मशक्कत के बाद अलबेला खत्री को बचाया। उन्होने भागलपुर में शरण ली है। समाचार मिलने तक कवि मंच पर धरने पर बैठे थे। अलबेला खत्री ने आरोप लगाया है कि कवियों को भड़काने के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ है।

ब्लॉगवुड के नागरिकों ने राजीव तनेजा की हरकतों से परेशान होकर अविनाश वाचस्पति के नेतृत्व में मौजपुरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। इन्हे शिकायत है कि ये लम्बी-लम्बी कहानियाँ लिख जबरिया पढने के लिए लिंक देते हैं एवं विशुद्ध व्यावसायिक प्रयोजन से ब्लॉगरों के चित्रों से खिलवाड़ कर रहे हैं। इस बात की गवाही सुनीता शानु, पवन चंदन एवं खुशदीप सहगल ने दी है।

तेहरान रेड़ियो के हवाले से एक खबर मिली है कि ब्लॉगवुड में खतरनाक वायरस का प्रवेश हो चुका है। यह वायरस कम्पयुटर प्रोगाम के साथ ब्लॉगर के दिमाग में भी प्रवेश कर जाता है। जिससे ब्लॉगर बहकी-बहकी होलियाना पोस्ट लिख जाते हैं। पोस्ट में क्या लिख गए उन्हे ही पता नहीं रहता। ब्लॉग बुखार जांचने वाले डॉ बी एस पाबला कई ब्लॉगरों की खोपड़ी खोल कर उनका परिक्षण कर रहे हैं लेकिन अभी तक इस वायरस के हमले के कारणों का पता नहीं चला है। एन्टमोलाजिस्ट डॉ अजय झा विशेष रुप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं किसी तरह इस खतरनाक वायरस से मुक्ति मिल सके।

अब आज के मौसम का हाल सुनिए। मौसम विज्ञानी संगीता पुरी के अनुसार कल होली पर व्हिस्की और भांग धतूरे की छींटे पड़ने की संभावना है। अबीर गुलाल के बवंडर के साथ रंग की भारी बारिश हो सकती है। ओलों की जगह भांग के पेड़े गिर सकते हैं। विशेष कर धनु, कुंभ, कन्या एवं वृषभ राशिवाले पेड़ो पर कब्जे को लेकर आपस में लड़ भी सकते हैं। मेष, वृश्चिक, तुला एवं मीन राशिवालों को रसगुल्ले घर पर मिलने की संभावना है। बाकी राशियों वाले की 10-20 करोड़ की लाटरी लग सकती है, वे अपनी मेल बाक्स पर सतत निगाह बनाए रखें।

आज के समाचार समाप्त होते हैं, कल नए समाचारों के साथ मिलते हैं आपसे इतने ही बजे इतने ही टाईम। तब तक के लिए ललित शर्मण; को आज्ञा दीजिए। नमस्कार

पोस्ट अपडेट की गयी

सोमवार, 1 मार्च 2010

बुरा न मानो होली है

सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं...........कुछ चित्र हमने भी बनाये हैं..........होली पर उनका लुफ्त उठायें......फुरसती मौज लें.................
ब्लाग जगत के बोड़ी बिल्डर
के साथ कुछ और ब्लागर 
..........महफूज अली...........

 
..........जी के अवधिया......


अरविन्द झा रेल मंत्रालय 


राजकुमार ग्वालानी


दिनेश राय दिवेदी जी 

  
रूपचंद शास्त्री जी 


योगेन्द्र मौदगिल 


मै ही नही पहचान पाया कौन है? आप मदद कीजिये 


संजीव तिवारी सुपर मेन 
राजकुमार सोनी
 
गिरीश बिल्लोरे पोडकास्टर   


पहचानिए 


एक्साईज सूर्यकान्त गुप्ता

आप सभी को होली की ढेर सारी शुभकामनाएं...

रविवार, 28 फ़रवरी 2010

ब्लॉग़र होली मिलन भिलाई में

ल होली की पूर्व संध्या पर कुछ ब्लागर बिना किसी निश्चित कार्यक्रम के मिल लिए......... ..राजकुमार सोनी जी छुट्टी थी उन्हें अपनी माता जी से मिलने दुर्ग जाना था.....उनका फोन मेरे पास आया और पूछा कि दुर्ग चलेंगे क्या? 

मैंने हां कर दी बहुत दिन हो गये थे अपने भिलाई वाले साथियों से मिले. राजकुमार सोनी अपने साथ अवधिया जी को भी लेकर आये . फिर हम अभनपुर से पाटन होते हुए पहुँच गये दुर्ग.... 

राजकुमार जी की माता से मिले उनके दर्शन किये.... ..और फिर जम गई मित्रों की टोली और मनी धमाके दार होली...... मैं इस पर अभी ज्यादा कुछ नहीं लिख रहा हूँ.....क्योंकि.........होली मनाते हैं और फिर बाद में हमारी इस होली की जानकारी भी सुनाते हैं चित्र में बैठे है. संजीव तिवारी, बी.एस. पावला, जी.के.अवधिया, ललित शर्मा, राजकुमार सोनी, शरद कोकास, गुप्ता जी,...........
अब देखिये आनंद कैसे बढ़ता है  और किसे कहते हैं महफ़िल में चार चाँद लगना.......

हम भिलाई से निकलने की तैयारी कर रहे थे तभी हरियाणा के सुप्रसिद्ध कवि योगेन्द्र मौदगिल जी का फोन आया और उन्होंने मुझसे पूछा की आप कहाँ है? 

यही सवाल मैंने उनसे किया तो पता चला की होली की पूर्व संध्या पर भिलाई ओपन थियेटर में कवि  सम्मलेन पर आये हैं...वाह! क्या था फिर हम सब पहुच गए कवि सम्मलेन में, वहां सभी मित्र गण गर्मजोशी से मिले और कुछ फोटू मोबाईल कैमरे से ली गई. फिर योगेन्द्र जी मेरे साथ अभनपुर आ गये..........