वह जानेगा क्या मजा है पीने पिलाने में,
जो हो आया है इक बार तिरे मयखाने में।
दुश्मनों को भी गले मिलते देखा हमने,
दीवानों की महफ़िल लगी तिरे मयखाने में।
ईश्क हकीकी का मजा मिजाजी क्या जाने,
मयकशी ने दिया है पैगाम तिरे मयखाने में।
रफ़ीक भी रकीब जैसे मिलते रहे जहां में,
रकीब भी रफ़ीक हो गए हैं तिरे मयखाने में।
दीवानगी ले आती है रोज यहाँ मुझको,
वरना क्युं आता सर-ए-आम तिरे मयखाने में।
(C) तोप रायपुरी
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