रविवार, 20 सितंबर 2009

पेंट्रीकार: चलता फिरता बीमारी का घर


पैसेंजर्स सर्विसेस कमेटी के अध्यक्ष डेरेक ओब्रायन ने आज कहा कि रेलवे स्टेशन का खाना थर्ड क्लास है। ये भारत के स्टेशनों का दौरा कर रहे हैं तथा इसकी रिपोर्ट रेल मंत्री को की जायेगी।  

ये बात इन्होंने बिलासपुर में एक पत्रकार वार्ता में कही। रेल की पेंट्रीकार एक चलता फिरता बीमारी का घर हैं, जो पुरे भारत में बीमारी बाँटते फिर रही है। 

कुछ अन्य बीमारी नहीं तो पीलिया और टी.बी. जरुर बाँट जायेगी। स्टेशनों पर भी जो खाना मिलता हैं वो खाने के लायक हैं ही नही। 

ट्रेन में पेंट्री वाले तय कीमत से ज्यादा में खाना और अन्य सामान यात्रियों को बेच रहे हैं, जो कि सीधी-सीधी लुट है। शिकायत करो तो कहते हैं कि रेल मंत्री को भी बोल दो कुछ नही होने वाला। 

पेंट्रीकार के किचन में कितनी गंदगी होती हैं?अगर कोई जा कर देखेगा तो उसका खाना खाने की हिम्मत ही नही करेगा। 

अभी कुछ दिन पहले एक न्यूज चेनल दिखा रहा था कि हापुड स्टेशन में पोस्टर कलर का दूध बना कर चाय बेची जा रही है। 
८ रूपये में २० लीटर दूध बनता है। जो पीने पर एक बार में ही किडनी फेल कर देगा, पर रेलवे के अधिकारियों को अपनी ऊपर की कमाई से मतलब है, यात्रियों की सेहत से कोई लेना देना नहीं, 

यात्री को मजबूरी में यहाँ का खाना लेना ही पड़ता है। मरता क्या न करता, रेल सुविधाओं कि तरफ रेलमंत्री को विशेष ध्यान देना चाहिए और जवाबदेही तय करनी चाहिए। 

पैसेंजर्स सर्विसेस कमेटी के अध्यक्ष डेरेक ओब्रायन घटिया खाने कि बात स्वयं स्वीकार कर रहे हैं। रेल के खान-पान विभाग में भी माफिया का बोल बाला है, कई तो ऐसे-ऐसे वेंडर हैं जो बरसों से जमे है। 

किसी नए आदमी को इस सिस्टम में घुसने ही नही देते। इनकी रेल अधिकारियों से इतनी सेटिंग हैं कि चाहे सरकार बदल जाए, रेल मंत्री बदल जाए, मगर इनकी ठेकेदारी नहीं बदलती। 

जो अधिकारी इन पर सिकंजा कसता है वह अधिकारी जरुर बदल जाता है। पता नही रेल के खान-पान व्यवस्था के दिन कब बहुरेंगे।

7 टिप्‍पणियां:

  1. अंतिम पैराग्राफ में आपने जो लिखा वही सच इस पर भारी है. पूरा सिस्‍टम सडेली है भाई. पर चुप तो रहा नहीं जा सकता, आसमान में सुराख हो न हो, पत्‍थर तो तबीयत से उछालना ही पडेगा.

    आभार इस जानकारी को हम सबमें बांटने के लिए.

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  2. आपकी बात सही है एक बार मुझे भी जोंडिस हो चूका है,रेल का खाना खा के,

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  3. पूरी रेल व्यवस्था को लालू रोग लग गया है,

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  4. रेलवे में ठेकेदारों का माफिया ही काम कर रहा है
    बहुत सही कहा आपने

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  5. rel me khana kaise banta hai iska sarve karva kar kya mamta isko sudhar payegi

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  6. अमाँ यार पूरा भारत ही चलती फिरती बिमारी है, आप को पैण्ट्री कार की सूझ रही है। एक एक कर के यह बला ट्रेनों से गायब ही हो रही है। लालू और ममता दोनों को यात्रियों के स्वास्थ्य का पूरा ख्याल था/है।
    चिंता न करें।

    खाना अच्छा और किफायती होने पर जनता अधिक खाती है। आप तो जानते ही हैं कि अधिक खाने से मोटापा और डायबिटिज वगैरह होते हैं। देश में खाद्यान्न संकट भी है। रही बात माफिया ठेकेदार वगैरह के फलने फूलने की तो वे भी देश के नागरिक हैं, उनके साथ देश फल फूल रहा है। नेता जी को मिलने वाले चन्दे और पैसों से लोकतंत्र मजबूत हो रहा है...आप ने इन पक्षों को तो देखा ही नहीं। एकतरफा लिख कर हमारे पवित्र मस्तिष्कों को दूषित न किया करें।

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