शुक्रवार, 25 सितंबर 2009

भजन



फूलों  से  हो लो  तुम,जीवन   में  सुंगध   भर  लो
महकाओ तन-मन सारा भावों को विमल कर लो
फूलों से हो लो तुम ........................................

वो मालिक सबका हैं ,जिस माली का है ये चमन
वो  रहता  सबमे  है  तुम ,कर लो उसी का मनन
हो जाये सुवासित जीवन ऐसा तो जतन कर लो
फूलों से हो लो तुम.......................................

शुभ कर्मों की पौध लगाओ जीवन के उपवन में
देखो प्रभु को सबमे वो रहता हैं कण-कण में
बन जाओ प्रभु के प्यारे ऐसा तो करम कर लो
फूलों से हो लो तुम......................................

मै कौन? कहाँ से आया ? कर लो इसका चिंतन
जग में रह कर के, उस दाता से लगा लो लगन
रह  कर के  कीचड़  में  खुद को कमल कर लो
फूलों से हो लो तुम.......................................

वो   दाता   सबका  है,  दुरजन   हो   या   सूजन
वो  पिता   सबका  है,  धनवान   हो  या निरधन
ललित उसमे लगा करके जीवन को सफल कर लो
फूलों से हो लो तुम ........................................


आपका 
ललित शर्मा 


(फोटो गूगल से साभार)

7 टिप्‍पणियां:

  1. lalit bhai aapke shilpkar ke templete me kuch samsya thi tippni ka box hi nahi khul rha tha,achchha kiya aapne samay pr ise yahan lga diya,foolon ki khusbu subah se hi mahak rahi hai,sundar prernaspad racha ke liye aabhar.

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  2. राह ऐसी दिखाओ प्रभु, दुखियों की सेवा हो
    निर्बल को बल मिल जाये तेरे प्रेम की मेवा हो
    हम रहें समीप तुम्हारे,तुम पास गगन कर दो

    उम्दा खयालात हैं आपके ......सुंदर रचना .....!!

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  3. सुन्दर सन्देश देती अच्छी प्रस्तुति

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  4. जग में रह कर के ,उस दाता से लगा लो लगन
    रह कर के कीचड़ में खुद को कमल कर लो

    बहुत सुंदर और प्रेरणादायक रचना.आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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