शुक्रवार, 25 सितंबर 2009

बालको प्लांट दुर्घटना के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए,

दैनिक नवभारत रायपुर के अनुसार बालको सयंत्र दुर्घटना मेंअभी भी १०० लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका बताई गई हैं,जबकि मृतकों की संख्या ४५ तक पहुच गयी हैं.  

३६ मजदूर शिविर से लापता भी भी बताये जा रहे हैं,बालको प्लांट विस्तार परियोजना में इन्हें अधिकांशत: झारखंड एवं बिहार से लाकर रखा गया था.

इस चिमनी का निर्माण में एक मजदूर की मौत पहले ही हो चुकी हैं,

जब चिमनी ५० मीटर थी उसी समय एक मजदूर का बलिदान हो गया था,जब यह २२५ मीटर पहुची तो अनेक मजदूरों की मौत हो गयी, 

चिमनी ढह जाने के बाद गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाये जा रहे हैं,जब कोई बड़ा निर्माण होता हैं वहां पर क्वालिटी कंट्रोल विभाग का रहना भी  जरुरी बताया जाता हैं,लेकिन अब इसकी भूमिका भी संग्दिग्ध हो गयी हैं,

अब इतने बड़े हादसे का जिम्मेदार कौन हैं, किसकी लापरवाही थी? किसने अपने कर्त्तव्य के निर्वहन में लापरवाही बरती ये तो जाँच के बाद ही पता चलेगा, 

बालको पावर प्लांट में निर्माण का कार्य चीनी कम्पनी सेपको कर रही हैं. मुख्य मंत्री ने ४८ घंटों के अन्दर मलबा हटाने का आदेश दिया हैं,

दोषियों को नहीं बख्सा जायेगा.मलबा उठाने में देर होने से जिनके बचने की आस थी वो भी ख़तम हो रही हैं,लेकिन दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए.

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