शनिवार, 24 दिसंबर 2011

केरा तबहिं न चेतिया जब ढिंग लागी बेर -- ललित शर्मा

पूर्णानंद सोनी
धूरा कार्यक्रम छोड़कर अहमदाबाद से वापसी करनी पड़ी। गाड़ी 10 घंटे विलम्ब से रायपुर पहुंची। अशोक भाई से सूचना मिली थी कि पुराने मित्र पूर्णानंद सोनी ईलाज के दौरान हमें छोड़ चले। बहुत अफ़सोस हुआ, सब सदमे में थे। पुर्णानंद सोनी से मेरी मुलाकात का सिलसिला अशोक भाई के माध्यम से 1986-87 में प्रारंभ हुआ था। सरल हृदय एवं मृदुभाषी व्यक्तित्व सहज ही आकर्षित करता था। कभी कभी हम लोग गंभीर चर्चा के दौरान भी हास्य की ओर उन्मुख हो जाते थे। परम्परागत पेशे में रमे रहते थे। आज सुबह भी उनका मुस्कुराता हुआ चेहरा मेरी आँखों के सामने घूम रहा है। जैसे हमसे अभी बोल उठेगें। नश्वर लोक में आना-जाना लगा रहता है। लेकिन समय से पहले जाना ईष्ट मित्रों एवं परिजनों के लिए दुखदाई होता है। कल सुबह अशोक भाई के साथ उनके अंतिम सफ़र में शामिल हुए। एक अच्छा मित्र हमें छोड़ गया। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे एवं परिजनों को दारुण दु:ख सहने की असीम शक्ति भी। लगभग 12 बजे उनका अंतिम संस्कार सम्पन्न हुआ।

राजिम विश्राम गृह में पहुंचने पर पता चला कि दूर्गा प्रसाद गौतम की पुत्री दुर्घटना का शिकार होकर काल का ग्रास बन गयी। इस विषय में जानने के लिए उनके घर पहुंचे। तो दूर्गा प्रसाद जी महासमुंद गए थे, उनका वापसी का इंतजार किए। दूर्गा प्रसाद के आने पर पता चला कि उनकी पुत्री ज्योति छुरा में शिक्षाकर्मी थी। एक सप्ताह पूर्व रविवार को शाम 4 बजे अपनी ड्युटी पर जाने के लिए स्कूटी से छूरा के लिए निकली थी। रास्ते से वह 100% जली हुई अवस्था में मिली। एक सप्ताह मृत्यू से जुझती रही, लेकिन मृत्यू को जीत न सकी, हार गयी और परिजनों को रोता छोड़ कर चली गयी। जो बातें दूर्गा प्रसाद ने बताई उससे तय है कि वह "लव जेहाद"  का शिकार हो गयी। यह समस्या देश में बढ चुकी है।लड़कियों को अपना शिकार बनाओ और उन्हे बरबाद करो। ऐसी घटनाएं माँ-बाप के लिए त्रासदी से कम नहीं होती।

दूर्गा प्रसाद का कहना था कि लड़की ने उसे बताया कि फ़रीद उसे रास्ते में मिला। जिसे वह जानती थी, लेकिन इनके परिजन उसके विषय में  नहीं जानते थे और कभी देखे भी नहीं थे। लड़की की शादी ब्याह की बात चल रही थी और वे लड़का देख रहे थे शादी के लिए। लड़के के साथ वह छूरा न जाकर महासमुंद मार्ग पर चली गयी। शेर गाँव के पास सड़क के किनारे उसने मिट्टी तेल डाल कर आग लगा ली। आग लगाने का कारण लड़के द्वारा प्रताड़ित करना बताया। आग लगने के बाद वह तुरंत ही जल गयी। जलने से बचने के लिए सड़क के किनारे रेत पर उलटने पलटने लगी तब भी लड़के ने उसे बचाने की कोई कोशिश नहीं की। उसे छोड़ कर वह भागना चाहता था। लड़की के कहने पर उसने परिजनों को फ़ोन लगाकर बताया कि तुम्हारी लड़की जल गयी है। इसे अस्पताल ले जाओ। लड़की के अस्पताल ले जाने के लिए कहने पर लड़का तैयार हुआ। बड़ी मुश्किल से  पूरी जली हुई निर्वस्त्र लड़की स्कूटी पर बैठ कर अस्पताल के जाने लगी तो लड़के ने अपने दोस्त को फ़ोन कर एक कम्बल मंगाया और उसे महासमुंद अस्पताल ले गया।

महासमुंद अस्पताल से उसे रायपुर मेकाहारा अस्पताल रिफ़र कर दिया गया। एम्बुलेंस में उसे मेकाहारा पहुंचाया गया। वहाँ दूर्गा प्रसाद अपने परिजनों के साथ पहुंच चुके थे। ज्योति  गौतम दूर्गा  प्रसाद की बहुत ही लाडली बेटी थी। लड़की हालत देख कर उसका हृदय विदीर्ण हो गया। इलाज शुरु हुआ, 100% जली हुई लड़की की बचने की कोई संभावना नहीं थी। एक सप्ताह मौत से जूझने के बाद वह हार गयी। उसने दूर्गा प्रसाद को दुर्घटना की कुछ जानकारी दी। ऐसी स्थिति में एक बेटी अपने बाप को ज्यादा कुछ नहीं बता सकती। दूर्गा प्रसाद गौतम का कहना है कि लड़के ने उसे किसी को कुछ नहीं बताने की धमकी दी थी। जिसके कारण वह बातें छिपा रही थी। शायद इस सदमे से दूर्गा प्रसाद गौतम का परिवार कभी उबर पाए। 

लव जेहाद के शिकारों की संख्या बढती जा रही है। कल ही याज्ञवल्क्य वशिष्ठ फ़ेस बुक पर लिख रहे हैं --"अंबिकापुर में पिछले तीन महिनों में हिंदु लडकियों का जबर्दस्‍त प्रेम विवाह हुआ ..और अधिसंख्‍य लडकियां मुस्‍लिम युवाओं के बिस्‍तर की शोभा बन गई है ..तो इस पूरे मामले को कितने सौहार्द पूर्ण तरीके से देखा जाना चाहिए." स्थिति गंभीर है, मासूम लड़कियाँ फ़रेब का शिकार हो रही हैं। केरल के हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा था कि ''ये लव नहीं ये लव जेहाद है''. भाग दौड़ भरी जिन्दगी में एक आदमी पेट की भूख मिटाने एवं परिवार पालने की जुगत लगाएगा या दिन रात बच्चों के पीछे दौड़ता रहेगा। उनकी चौकसी करते रहेगा। हिन्दू लड़कियों को फ़ंसा कर उनके जीवन से खिलवाड़ करने के घृणित कार्य को लव जेहाद का नाम मिल गया है। बहुत ही अफ़सोस जनक कृत्य है।  दूर्गा प्रसाद गौतम के परिवार से साथ घटी दुर्घटना निंदनीय है। पुलिस ने भी अभी उस लड़के से कोई पूछताछ करने की जहमत नहीं उठाई है। अगर यही मामला किसी मालदार का होता तो लड़की के अस्पताल में दाखिल होते ही पुलिस अपनी कार्यवाही प्रारंभ कर देती। केरा तबहिं न चेतिया जब ढिंग लागी बेर ।     
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25 टिप्‍पणियां:

  1. ईश्वर पूर्णानंद सोनीजी की आत्मा को शांति और उनके परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति दे...
    इतने परिवर्तन और शिक्षा के बाद भी लव जेहाद जैसी घटनाएँ कुछ ज्यादा ही सुनाई दे रही हैं, समझ नहीं आता गलती किसकी है, माता-पिता आखिर क्या करें भी तो क्या करें... दुखद घटना

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  2. ...पता नही मगर दुखी नही हूं ..अब दूख नही ..गुस्‍सा बढने लगा है ..

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  3. परमपिता परमात्मा मृतातमाओं को शान्ति तथा उनके परिजनों को दारुण दु:ख सहने की असीम शक्ति प्रदान करे।

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  4. दोनो ही घटनायें हृदय विदारक! ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। "जेहाद" शब्द ही अपनी हद पार कर देने वाला लगता है। क्या कहा जा सकता है……क्या किया जा सकता है

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  5. बेहद दुखद और शर्मनाक दुर्धटना हैं ....मासूम लड़कियां फरेब के चक्कर में अपनी ईहलीला दांव पर लगा देती हैं ..पीछे से माँ बाप पर क्या गुजरेगी यह क्यों नहीं सोचती ?
    बच्चा हाथ से भी गया और बदनामी हुई सो अलग ..

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  6. बेहद दुखद और शर्मनाक दुर्धटना हैं ....मासूम लड़कियां फरेब के चक्कर में अपनी ईहलीला दांव पर लगा देती हैं ..पीछे से माँ बाप पर क्या गुजरेगी यह क्यों नहीं सोचती ?
    बच्चा हाथ से भी गया और बदनामी हुई सो अलग ...

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  7. दिवंगतों को श्रद्धांजलि. दुर्भाग्यपूर्ण.

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  8. समाज में समरसता के स्थान पर विकृत रूप सामने आ रहा है। अत्यन्त चिन्तनीय और दर्दनाक

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  9. सोनी जी को विनम्र श्रद्धांजलि और लव के नाम पर जेहाद जैसी घटनाओं का दोषी हमारा अपना समाज और परिवार ही हैं।

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  10. देखिये तथाकथित धर्म... हिन्दू अब इस पर क्या कहते हैं.

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  11. बहुत ही ह्रदय विदारक पोस्ट है।
    ईश्वर मृतात्माओं को शांति व दोनों परिवारों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।
    लव जेहाद जैसी घटनाएओं से लगता है हमारी उदारता ही हमारे लिये घातक हो रही है।

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  12. हे भगवान्....
    बड़ी दर्दनाक घटना है ललित भईया...

    दोनों दिवंगत आत्माओं को विनम्र श्रद्धांजली.

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  13. स्व. पूर्णानंद सोनी अपने संघर्ष के दिनों के साथी थे . 17 अक्तूबर 2011 को एक सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद उन्होंने 22 दिसंबर तक मृत्यु से संघर्ष किया . ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे .

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  14. अत्य़ंत दुखद और दर्दनाक है ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

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  15. परमात्मा उनकी आत्मा को शांति दे तथा समाज मे हो रही ऐसी इन घटनाओ को रोकने के लिए कदम उठाना जरूरी है ललित जी ।

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  16. लड़कियों के जीवन से खिलवाड़ करने का घृणित कार्य बहुत ही अफ़सोस जनक है। दूर्गा प्रसाद गौतम के परिवार से साथ घटी दुर्घटना निंदनीय है। निंदनीय है कि पुलिस ने भी कोई जहमत नहीं उठाई|यह समस्या बढ चुकी है।

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  17. लड़कियों के जीवन से खिलवाड़ करने का घृणित कार्य बहुत ही अफ़सोस जनक है। दूर्गा प्रसाद गौतम के परिवार से साथ घटी दुर्घटना निंदनीय है। निंदनीय है कि पुलिस ने भी कोई जहमत नहीं उठाई|यह समस्या बढ चुकी है।

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  18. अफसोसनाक मानव जनित हादसा .

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  19. स्‍व.पूर्णानंद जी को नमन.....कुंभ के वक्‍त उनसे मुलाकात होती रहती थी..............

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  20. स्‍व.पूर्णानंद जी को नमन.....कुंभ के वक्‍त उनसे मुलाकात होती रहती थी..............

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