गुरुवार, 1 दिसंबर 2011

भूतों से हलाकान ब्लॉगर की व्यथा-कथा - ललित शर्मा

कहते हैं कि भूत मारता नहीं है पर हलाकान करता है, हम भूत के पीछे भागे जा रहे हैं और हलाकान हो रहे हैं 2 माह से। दो साल पहले जब मैं टोनही पर लिख रहा था तो अचानक इस विषय से मन उचट गया। उसके बाद टोनही विषय पर कोई पोस्ट नहीं लिखी गयी। तो गुरुदेव ने कहा कि -"अड़बड़ टोनही उपर लिखत रहेस, देख अब टोनहा दिस न टोनही।" उनका कहना सच हो गया, उससे आगे न बढ पाया। अज्ञात के पीछे जानने लिए भागना मनुष्य की प्रवृति है। जिज्ञासु प्रवृति  ही उसे अज्ञात की ओर खींच ले जाती है। कुछ माह पहले सावन में हरेली त्यौहार के अवसर पर ऐसा ही कुछ जानने निकला था। लेकिन रात को पास के गाँव  में एक महिला की सर्पदंश की सूचना पाकर वहाँ पहुंचना पड़ा और सारा प्लान चौपट हो गया। न भूत मिला और न भूतनी। फ़िर गुरुदेव का कहा स्मरण हो आया। उसके बाद से ही परेशानियाँ शुरु हो गयी। :)))

मेरे पीसी में भूत घुस गया। इसका बहुत इलाज करवाया पर अभी तक कोई समाधान नहीं मिला। बीमारी भी ऐसी की बड़े बड़े झाड़ फ़ूंक करने वाले बैगा लोगों की समझ में नहीं आई। हरिद्वार जाने से पहले मेरे पीसी के ब्राउजर क्रेश होने लगे। एक मित्र ने चैट पर आकर लिंक दिया अपनी पोस्ट पढने के लिए। उस लिंक पर क्लिक करते ही गुगल क्रोम क्रेश हुआ। मैने सामान्य घटना समझा, लेकिन जब - जब उस लिंक पर क्लिक किया, तब-तब ब्राउजर क्रेश हुआ। उसके बाद स्थिति यह हुई कि धीरे-धीरे कोई भी लिंक खोलने पर ब्राउजर क्रेश होने लगा। अब मुझे पोस्ट लगाने में ही असुविधा  होने लगी। ब्लॉग4वार्ता ही बड़ी मुस्किल से लिखी जाने लगी। संगीता पुरी जी के सहयोग से कुछ दिनों तक वार्ता लगती रही फ़िर रुकावट के बाद बंद हो गयी। 

मैने सभी ब्राउजर मसलन, ओपेरा, सफ़ारी, क्रोम, फ़ायरफ़ाक्स, एक्सप्लोरर, इपिक आदि पर काम करने की कोशिश की, लेकिन अंजाम वही हुआ। इन्होने साथ नहीं दिया एक-एक करके शहीद हो गए। एक मित्र के कहने पर इन्हे हटा कर फ़िर से इन्स्टाल करने की सोची। ब्राउजर रिमुव होने के बाद दुबारा लोड ही नहीं हुए। एरर बताकर फ़ाईल को इन्स्टाल होने से रोक दिया गया। आखिर में हार कर पाबला जी से रिमोट सपोर्ट लेनी की सोची तो टीम विवर ही नहीं चला। जैसे किसी ने उसे लॉक कर दिया हो। कोई भी फ़ाईल कापी  या पेस्ट नहीं हो रही थी। मामला बहुत बिगड़ गया, सोचा कि कोई भयानक शत्रु कीट की चपेट में पीसी आ चुका है जो मुझे काम ही नहीं करने दे रहा। अब इसका एकमात्र समाधान पीसी की धुलाई सफ़ाई ही थी।

हरिद्वार से आने के बाद दूसरे दिन ही मैं इसे अस्पताल में ले गया। सिविल सर्जन डॉक्टर धीरज ताम्रकार एवं इनकी टीम ने इसे चीर फ़ाड़ डाला। साफ़ सफ़ाई के बाद नया आपरेटिंग सिस्टम डाला गया। वहां इसे चला कर देखा गया। सब ठीक चला, बीमारी दूर होने की खुशी सहित घर पहुंचा, जैसे पीसी चालु किया है वैसे फ़िर पुरानी वाली बीमारी ही दिखाई दी। मतलब फ़ार्मेट होने के बाद भी समस्या जस की तक बरकरार थी। अब एक नयी समस्या और आ गयी। मेरा नेट कनेक्ट तो हो जाता था पर पेज नहीं खुलता था  जैसे किसी ने इसे जकड़ लिया हो। जैसे ईसीजी के मानिटर पर मरीज की धड़कन न होने के कारण सीधी लाईन चलती हुई दिखाई देती है, बस ऐसे ही मेरे नेट के ड्रायवर पर दिखाई दे रही थी।

मैने सोचा कि नेट की समस्या आ गयी है, रात 10 बजे बीएसएनएल के  डीजीएम मित्र को फ़ोन लगाया, उन्होने  कुछ सेटिंग बताई, वह सब करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं निकला। थक हार कर पीसी बंद कर दिया और सो गया।  अगले दिन फ़िर इसे अस्पताल लेकर गया, डॉक्टरों ने कहा कि एन्टीवायरस की समस्या है वह ठीक से पीसी क्लीन नहीं कर रहा है, मेरे पीसी में धीरज ने नेट प्रोटेक्टर डाल रखा था। उससे स्केन करने पर एक भी वायरस पकड़ में नहीं आया। फ़िर इसे निकाल कर दूसरा एन्टी वायरस मैक्स सिक्योर इन्स्टाल किया तो उसने काफ़ी सारे वायरस पकड़ कर बाहर निकाले। मैने नेट प्रोटेक्टर के आफ़िस में फ़ोन लगा कर इसकी जानकारी दी और उन्हे एन्टी वायरस की रिपोर्ट दी। एक बार फ़िर पीसी को फ़ार्मेट करके दुबारा इन्स्टाल किया और घर पहुंचे।

इस प्रक्रिया में सुबह से शाम हो जाती थी, सुबह पीसी लेकर घर से निकलो और रात वापस पहुंचो। पीसी चालु करते ही यह लगातार दो बार रिस्टार्ट हो गया। फ़िर नेट चालु करते ही ब्राउजर क्रेश हुआ, दीपक ने ओपेरा डाला था। अब मैने गुगल क्रोम इन्टाल करने के लिए फ़ाईल डाउन लोड की, लेकिन रजिस्ट्रेशन एरर बताने के बाद वह इन्स्टाल नहीं  हुआ । अब सोचा कि हार्ड डिस्क की समस्या हो सकती है। हार्ड डिस्क बदल कर देखी जाए। फ़िर सुबह पीसी उठाया तो श्रीमती जी ने टिफ़िन भी बांध दिया, मुझे लगा कि स्कूल  जा रहा हूँ, दोपहर में खाने की जरुरत पड़ेगी। मतलब घर वालों ने भी समझ लिया था कि पीसी ले जाने पर रात को ही आना होता है, इसलिए दाना पानी साथ में दिया जाए तो ठीक है। अब टीफ़िन के साथ पीसी अस्पताल में पहुंचे। डॉक्टर भी हलकान और हम भी।

अब एक नयी समस्या सामने थी, बार बार "लो डिस्क स्पेस" का संदेश सिस्टम ट्रे के पास दिखाई देने लगा। यह संदेश कई कम्पयुटरों में देख चुका था। मैने पहले भी सी ड्राईव से काफ़ी कुछ हटा दिया था, पर यह संदेश आता ही रहा। एक बार फ़ोटोशाप पर काम करने लगा तो उस पर भी काम नहीं हुआ। मैसेज  आया कि आपकी हार्ड डिस्क में जगह नहीं है इसलिए फ़ोटोशाप रन नहीं कर रहा है। मैने छोटी हार्ड डिस्क लगा रखी थी 40 जीबी की। क्योंकि नेट चलाने के लिए 40 जीबी की हार्ड डिस्क मुफ़ीद है, मुझे अधिक जगह की आवश्यकता नहीं है। एक दिन हेमंत के नए लैपटॉप में भी "लो डिस्क स्पेस" वाला मैसेज देखा। जबकि उसकी 500 जीबी की हार्ड डिस्क में कोई पार्टीशन नहीं था। सारी हार्ड डिस्क खाली पड़ी थी। फ़िर भी भरे होने का मैसेज दिखाई दे रहा था। अब अंदाजा यही लगाया  कि यह कोई शत्रुकीट है जो हेमंत को भी हलाकान कर रहा है।

अब मेरे पीसी में दुसरी हार्डडिस्क डाली गयी, दुबारा आपरेटिंग सिस्टम इन्स्टाल किया गया, फ़िर रात हो गयी काम करते हुए। कुछ काम अधुरे थे इसलिए पीसी छोड़ कर घर आ गया। दूसरे दिन सुबह टीफ़िन लेकर फ़िर ड्युटी पर पहुंच गए। अब शाम तक सारा काम निपट गया। हम भी नयी हार्ड डिस्क के साथ खुशी-खुशी घर पहुंचे। लेकिन फ़िर भी ढाक के वही तीन पात निकले। सारी बीमारियाँ जस की तस थी। थक हार कर पीसी बंद करके बिस्तर का सहारा लिया। एक सप्ताह की मेहनत का कोइ सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। संगीता पुरी जी को फ़ोन लगाया तो उन्होने कहा कि " मैने आपको पहले ही कहा था कि 25-26 तारीख का दिन सही  नहीं है, फ़िर भी आप न माने, दो दिन मेहनत फ़ालतु गयी और कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला।" मैने याद किया तो संगीता जी ने मुझे 10 दिन पहले बताया था कि 25-26 तारीख ठीक नहीं है। 

अब दो दिन चुपचाप बैठे सिर्फ़ जी टॉक ही चल रहा था, कुछ मित्रों का दिमाग चाटने लगे। खाली बैठे क्या करते?  विगत 3 माह में बहुत कम ब्लॉग पढ सके और उनकी पोस्ट पर कमेंट कर सके। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि अलेक्सा रैंकिंग की वाट लग गयी, जो एक लाख तक पहुंच गयी थी वह अब करोड़ों में दिखाई देने लगी। ब्लॉगर मित्र भी सोच रहे होगें कि कमेंट लेकर जमा करते जा रहा हूँ, रिटर्न तो कुछ आ नहीं रहा  है।  मै भी भीतर ही भीतर कुढ रहा हूँ। समाधान निकालने की पुरजोर कोशिश में सतत लगा हूँ। अंत में सोचा कि डॉक्टर बदल दिया जाए, हो सकता है दुसरे डॉक्टर के हाथ लगने से बात बन जाए। लेकिन अब 4 दिसम्बर के बाद ही दुसरे डॉक्टर के पास जाने का मन था।

संजीव तिवारी जी के फ़ोन से पता चला कि अलबेला खत्री जी  रायपुर पहुंच रहे हैं, उनका पिथौरा में कवि सम्मेलन है। दोपहर तक पिथौरा से रायपुर पहुंचेगे। तो एक पंथ दो काज समझ कर सीपीयु भी साथ रख लिया। अब ज्वेल प्रकाश को सीपीयु थमाया, उसने इसे फ़ार्मेट में लगाया और मैं अलबेला भाई की सेवा में पहुंच गया, वे पिथौरा से पौने तीन बजे पहुंचे, उनकी ट्रेन 4 बजे थे। वे घड़ी चौक पर  थे, पास में  ही राहुल सिंह जी के यहाँ चाय पीकर उन्हे साथ लेकर फ़टाफ़ट अनिल भाई के ऑफ़िस पहुंचा। अनिल भाई के साथ उन्हे स्टेशन छोड़ कर आया। ज्वेल ने कहा कि पीसी बढिया चल रहा है, कोई समस्या नहीं है। शाम को पीसी लेकर घर पहुंचा, पीसी शुरु करते ही दो बार रिस्टार्ट हो गया। फ़िर वही ब्राउजर क्रेश होने वाली समस्या सामने आई। पाबला जी से चर्चा होने पर उन्होने कहा कि विंडो एक्सपी आपरेटिंग सिस्टम पुराना  हो चुका है, इसे माइक्रोसाफ़्ट ने आउट डेटेट कर दिया  है। लेकिन दुसरे लोगों के पीसी में  यही आपरेटिंग सिस्टम शान से चल रहा है। सिर्फ़ मुझे ही हलाकान कर रहा है।

अनिल भाई से काफ़ी दिनों के बाद मुलाकात हुई थी, अलबेला जी  को स्टेशन छोड़कर आने के बाद थोड़ी देर आपस में चर्चा हुई। घर पहुंचने के बाद सिस्टम ने पुराना वाला रवैया ही दिखा। अब गुगल देवता से समाधान लेने की सोची, वहाँ इसी विंडो की यही समस्याएं फ़ोरम पर दिखाई दी। उसे समझने की कोशिश की। लेकिन बात नहीं बनी, सोचा कि बीमारी दो जगह हो सकती है। पहला तो एसएमपीएस में और दुसरी मदर बोर्ड या उसके ड्रायवर में। क्योंकि वर्ड पेड पर लिखने लगा तो वर्ड पेड भी क्रेश होकर बंद हो गया। बीमारी नेट के ब्राउजर से प्रारंभ होकर वर्ड पेड तक पहुंच गयी है।  आज ज्वेल नया एसएमपीएस लेकर आएगा तो उससे चला कर देखेगें। भूत अगर भाग गया तो ठीक, नहीं तो 4 तारीख को नया सीपीयु बनाना तय है और उसके बाद  भी समाधान नहीं हुआ तो ब्लॉगिंग और नेट को अलविदा ही कर दिया  जाएगा। इतना हलाकान होना ठीक नहीं। कीबोर्ड छोड़कर वही अपनी सदाबहार कलम उठाएगें और कागज पर लिखना फ़िर से प्रारंभ करेगें। तब तक के लिए नमस्ते।

33 टिप्‍पणियां:

  1. अरे दादा इतनी जल्दी हिम्मत हारने लगे ... आप तो फौजी हो ... फिर भी ऐसी बात ...
    एक नया पीसी तैयार करवा लो ... सब ठीक हो जायेगा !

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  2. (अवसर का लाभ उठा कर) हम भविष्‍यवाणी करते हैं- आपका लेखन इसी तरह फलता-फूलता रहेगा. (हम यह भी जानते हैं कि आप इसे सही साबित कर सकते हैं, इसीलिए अनाधिकार चान्‍स ले लिया है.)

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  3. अस्थायी समस्या है. मदर बोर्ड भी समस्या खड़ी कर सकता है.

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  4. भूत बवाल तो सुन रखा था ...यह ललित बवाल पहली बार पड़ा हैं ....क्या खूब लिखा हैं ? हंस -हंस कर बुरा हाल हैं ..
    ईश्वर से अरदास हैं की जल्दी आपकी समस्या का निराकरण करे...

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  5. ओह !! खतरनाक रहे आपके ये कुछ दिन मगर पीसी का भूत जयादा दिन तक नहीं रहेगा किसी एक्सपर्ट डाक्टर से दिखवाइए !

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  6. कल 02/12/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  7. हार्डडिस्क बदलने के बाद ये तो तय है कि अब आपके पीसी में भूत पिशाच नहीं रहे फिर एसएमपीएस के कारण रिस्टार्ट होना तो समझ आ रहा है पर प्रोग्राम क्रेश होने वाली बात नहीं पच रही|

    आप विंडो एक्सपी की का जो पैक इस्तेमाल कर रहे है उसकी जगह कोई दूसरा इस्तेमाल कर देखें हो सकता है आप जिस सीडी से विंडो इंस्टाल कर रहे है उसकी कुछ फाइल करप्ट हो गयी हों|

    इस पीसी में एक बार उबुन्टू इन्सटाल करके भी देखें|

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  8. आपकी व्यथा पढ़ते पढ़ते हम ही हलकान हो गए . समझ सकते हैं आपकी क्या हालत हुई होगी .
    वैसे प्रोब्लम तो हमें भी समझ नहीं आ रही .

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  9. ओह हो ये भूत तो गज़ब परेशां किये दे रहा है ...हिम्मत न हारिये न भागे तो दूसरा पी सी :).

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  10. अभी दो महीने पहले मेरे जुगाड में भी यही समस्या आ गयी थी, विंडो व हार्डडिस्क खुद बदली पर बात नहीं बनी, आखिर कार एक जानकार के पास गया तो मालूम हुआ कि पहला मामला डीवीडी राईटर में कमी थी जिससे विंडो सही तरह से इंस्टाल नहीं होती थी, दूसरा पंगा रैम में था दो रैम में से एक रैम ने अवरोध खडा कर रखा था, डीवीडी राईटर व रैम दोनों बदलने पर "जाट देवता का सफ़र" जारी है

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  11. हमारे लिए रतन सिंह शेखावत और बी एस पाबला जी से आगे कोई टिप्पणी नहीं !

    वैसे एक गणित ये भी है कि अगर सीपीयू नया लेना पड़े तो ...

    नए सीपीयू की कीमत = यह पोस्ट = भूतों द्वारा किया गया नुकसान-उनकी वजह से लिख पाई पोस्ट का फायदा = नया सीपीयू :)

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  12. मेरा ख़्याल है कि आपको एक नया CPU, नई हार्ड डिस्क और नया OS ख़रीद लेने चाहिए. हो सके तो कीबोर्ड, मानीटर और माउस भी नए ही ले लो. इंटरनेट प्रदाता भी बदल लें. उसके बाद (25-26 तारीख के अलावा) पूर्व दिशा में मुंह कर, कहीं भी पवित्र पीपल या बरगद के नीचे बैठ कर इसे चलाया करें. (हो सके तो पावर लाइन नज़दीक के खंभे से कांटा डाल कर ली जाए.) इस टोटके से केवल दो ही बातें हो सकती हैं पहली तो ये कि कंप्यूटर का भूत तो क्या कालोनी भर के भूत सिर पर पांव रख कर भागे डोलेंगे...या फिर दूसरी बात ये कि समस्या हल न हो तो एक नए एक्सपर्ट की देखरेख में, पूरी प्रक्रिया फिर से दोहराना शुरू कर दें.

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  13. जल्द समाधान हो इस व्यथा का!
    Best wishes:)

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  14. तें टोनही खोजे बर बाहिर जाये के प्लान बनावट रेहे अउ ओ हर त कंप्यूटर म बईठे हवे... देखवा भई बने कस बईगा गुनिया ल... तभे बनही....
    सादर...

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  15. जूझना सिखा देता है यह वायरस का किस्सा।

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  16. Ohh yeh bhoot to bahut takatwar lagta hai...

    Mere laptop ka bhoot bhi ek mahine baad utra hai... Aur desktop per abhi bhi chadha hua hai...

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  17. भूत पिसाच निकट नहिं आवै, हनूमान जब नाम सुनावै ...

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  18. महावीर के आगे इन भूतों की क्या मज़ाल!

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  19. बहुत दर्द भरी दास्ताँ है आपकी ...जैसे सैनिक से उसका हथियार छीन लिया गया है ...
    किसी अच्छे ओझा से झाड फूंक करवाएं ...एक पीसी एक्स्ट्रा रखिये , आड़े वक़्त में काम आता है !

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  20. अच्छी लगी यह भूत की कहानी...आपकी जुबानी

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  21. फिर भी ाप ब्लागिन्ग का मोह नही छोदे पायेंगे ये भूत या भूतनी जो भी है एक बार जिस के पीछे पद जाती है फिर छोडने का नाम नही लेती\ मै कई बार ऐसी समस्या से3 झूझ चुकी हूँ। लेकिन टीम व्यूयर ने मेरा साथ दिया। शुभकामनायें।खतरनाक भूतनि है जल्दी उपाय कीजिये\

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  22. विश्‍व एडस दिवस पर वायरस चर्चा रोचक लगा.....जानकारी ही बचाव है

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  23. 25 और 26 नवंबर का खास ग्रहयोग सिर्फ आपको ही नहीं मेष राशि के अधिकांश जातकों को परेशान करनेवाला था .. इसकी चर्चा मैने अपने इस लेख में की थी .. विद्यार्थियों के बाद खासकर उनलोगों को अधिक प्रभावित कर रहा है .. जिनकी जन्‍म कुंडली में मेष राशि में चंद्रमा के अतिरिक्‍त और ग्रह भी हैं , खासकर बुध .. 23 और 24 दिसंबर को एक बार पुन: कष्‍ट झेलने का बाद ही इस समस्‍या से मुक्ति मिलेगी !!

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  24. सशक्त लोकपाल लाओगे तो पिंड छूटेगा इस अन्ना वायरस से

    जै रम जी की

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  25. ye to galat bat hai...aap bhoot se trast hai ye samjh aata hai lekin ye ki blogging chod denge ka bhoot hamare sir kyon baitha rahe hai????yahan achchhe achchhe gunia hai is bhoot ko bhaga hi denge...shubhkamnayen.

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  26. बाहर ठीक रहता है घर आते ही......
    एक बार जिस टेबल पर रहता है उस पर गंगा जल छिडक लेना था।
    और यह क्या? मशीन से हार मान रहे हैं?

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  27. आपसे निवेदन है इस पोस्ट पर आकर
    अपनी राय अवश्य दें -
    http://cartoondhamaka.blogspot.com/2011/12/blog-post_420.html#links

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  28. waah bhai lalit ji !
    badhiya post !

    aur haan.........anil pusadkar aur rahul ji se milwaane ke liye hardik aabhaar
    jai hind !

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