गुरुवार, 3 मई 2012

टेसू के फ़ूल

लाया हूँ मैं
सहज ही तुम्हारे लिए
टेसू के फ़ूल
जो अभिव्यक्ति है
मेरी प्रीत की
गुलाब तो
अभिजात्य वर्ग के
नकली प्रेम की
निशानी है
गुलाबी प्रेम में
झलकती है
बेवफ़ाई/कटुताई
टेसू के फ़ूल
निर्मल निर्दोष
सहज और सरल हैं
अभिव्यक्त करते हैं
निश्चछल प्रीत को
उनमें भरी ज्वाला
भस्म कर देती है
अंतस के कलुष को
भर जाता है प्रकाश
अंतरमन में
होती है प्रीत मुखरित
जनम जनम की

26 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढिया ..
    टेसू के फूल जैसी ही सहज और सरल अभिव्‍यक्ति !!

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  2. गुलाब तो
    अभिजात्य वर्ग के
    नकली प्रेम की
    निशानी है
    xxxxxxxxx

    टेसू के फ़ूल
    निर्मल निर्दोष
    सहज और सरल हैं

    गुलाब और टेसू के माध्यम से आपने दो वर्गों की मानसिकता और उनके प्रेम की वास्तविकता को गहनता से अभिव्यक्त किया है .....! जहाँ तक सच्चे प्रेम का सम्बन्ध है वह इनका मोहताज नहीं होता ...!

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  3. गुलाब तो
    अभिजात्य वर्ग के
    नकली प्रेम की
    निशानी है
    गुलाबी प्रेम में
    झलकती है
    बेवफ़ाई/कटुताई
    टेसू के फ़ूल
    निर्मल निर्दोष

    बहुत सुंदर सार्थक अभिव्यक्ति // फूल की ही तरह खुबशुरत रचना //

    MY RECENT POST ....काव्यान्जलि ....:ऐसे रात गुजारी हमने.....

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  4. टेसू के फूल सी
    सहज निर्मल
    निश्छल अभिव्यक्ति
    जन्मों की प्रीत की

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  5. उनमें भरी ज्वाला
    भस्म कर देती है
    अंतस के कलुष को
    भर जाता है प्रकाश
    अंतरमन में
    होती है प्रीत मुखरित
    जनम जनम की
    अंतःकरण की अभिव्यक्ति को शब्दों ने मुखर किया .
    अद्भुत निराला भाव ,अनोखा संयोजन .....

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  6. कितना सुंदर बिम्ब .... प्रभावित करती है कविता

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  7. टेसू के फूल बहुत खूबसूरत हैं , भीषण गर्मी से झुलसते मौसम के बीच खुशगवार- सा !
    मगर गुलाबी प्रेम में झलकती है कटुताई ...वो कैसे !!
    हर फूल और रंग का अपना रंग है !!

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  8. फ़िज़ां में चारों तरफ़ टेसू के फ़ूल ही गमक रहे हैं जी । बहुत बहुत बढिया

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  9. tesu ke phoolon see sundar post.aabhr.mere blog par svagat hae

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  10. टेसू और पलाश के फूलों में ही देश की माटी की सुगंध आती है .
    गुलाब तो अब वैसे भी गंधरहित हो गए हैं .
    बढ़िया भाव व रचना .

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  11. बेचारे गुलाब - आपने उन्हें बैठे बिठाए नकली कह दया | माना के टेसू बड़े प्यारे हैं - परन्तु बेचारे गुलाबों ने क्या गुनाह किया है ? :)

    ऐसे ही - माना कि गरीब सच्चा प्रेम कर सकते हैं | परन्तु अमीरों का प्रेम झूठा ही है - यह कैसे मान लिया जाए ? उनका कुसूर सिर्फ यह है की वे अमीर घर में जन्मे ?

    discrimination तो discrimination ही है - चाहे वह गुलाब के विरुद्ध हो या टेसू के :)

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  12. गुलाब तो
    अभिजात्य वर्ग के
    नकली प्रेम की
    निशानी है
    गुलाबी प्रेम में
    झलकती है
    बेवफ़ाई/कटुताई
    टेसू के फ़ूल
    निर्मल निर्दोष
    सहज और सरल हैं


    गहन अनुभूतियों और दर्शन से परिपूर्ण इस रचना के लिए हार्दिक बधाई।

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  13. अरे वाह .... आज तो मिजाज बदले हुये हैं .... बहुत सुंदर भाव लिए प्रेम को अभिव्यक्त करती रचना

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  14. वाह...वाह...............
    बहुत सुंदर.................

    और तो और टेसू के फूल रंग भी तो जाते हैं प्रेम के रंग से......

    सादर
    अनु

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  15. जो भी मन की सहजता और सरलता को व्यक्त कर दे, वही रंगीला है।

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  16. बहुत खूब

    एक सहज सरल निर्मल निर्दोष निश्छल हाजिरी मेरी भी

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  17. रचना में दर्शन तत्व पूरी तरह मुखरित हुआ है। सुन्दर कृति के लिये आभार!

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  18. पलाश जब खिलते थे अकलतरा के समीप के दलहा पहाड़ पर तो लगता था पहाड़ पर जैसे आग लगी हुई है आज पहाड़ नंगा हो गया है पत्थर ही दिखाई पड़ते है ,आपकी कविता ने मौन मधुर स्मृतियों की सुधि जगा दी धन्यवाद .और हाँ यह भी याद दिलाया की पलाश के फूल सिर्फ पहाड़ो और जंगलो में आग नहीं लगाते .

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  19. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    इंडिया दर्पण
    की ओर से शुभकामनाएँ।

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  20. ललितजी बहुत सुन्दर हैं आपकी ये सुन्दर और रौबदार मूछें, जब भी इन्हें देखती हूँ गौरवान्वित जाती हूँ , पता नहीं क्या हो जाता है मुझे. और हाँ आप बहुत अच्छा लिखते हैं, मेरे ब्लॉग पर जरुर आइये

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  21. जेठ की दुपहरी में
    बूँद बूँद पिघला सूरज
    आग की नदी
    क्षितिज से उतर कर
    बहने लगी धरती पर
    दहकने लगे पलाश
    अमलताश से आम तक
    जा पहुची पीली ज्वालायें
    और तब खिले टेसू के फूल्

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  22. टेसू के फ़ूल
    निर्मल निर्दोष
    सहज और सरल हैं
    अभिव्यक्त करते हैं
    निश्चछल प्रीत को
    उनमें भरी ज्वाला
    भस्म कर देती है
    अंतस के कलुष को
    भर जाता है प्रकाश
    अंतरमन में
    होती है प्रीत मुखरित
    जनम जनम की

    वाह बहुत सुन्दरता से उकेरा है भावो को

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