यह जसगीत बहुत ही सुंदर बना है। 36गढ मे परम्परा से गाए जाने वाले गीतों मे इसका शुमार है। रचयिता कौन है? इसकी जानकारी तो मुझे नही मिल पायी, लेकिन आप इस गीत का आनंद अवश्य ले। प्रस्तुत है---
बनवासी बनगे रे मोर राम बेटा
बनवासी बनगे रे मोर राम बेटा
कैकई के कारने उदासी बनगे रे
गुरु वशिष्ठ जी हां बताईस, पुत्र जग कराईन
उही जग के खीर प्रसादे, हमन तोला पायेन
तोला कैइसे छोड़ो रे मोर बेटा, तोला घर दुवार के
कैकई के कारने उदासी बनगे रे
महल अटारी के रहवैया, बन मा कइसे रहिबे
कांटा सही तोर काया सुखाही, भुख प्यास ला सहिबे
अड़बड़ दुख पाबे रे हीरा बेटा तैहा मोर दुलार के
कैकई के कारने उदासी बनगे रे
तैं जाथस तोर संग जाबो, कहिथे लछमन सीता
तीनो परानी के जाए ले, घर हो जाही रीता
बनवासी बनगे राम बेटा, मोर दुलार के
कैकई के कारने उदासी बनगे रे
तोर जाएके बात ला सुनके, आंखी मा आगे पानी
मैं हां दुखियारी कही डारेंव, तोर बनवास कहानी
तोला कईसे छेकों रे, किलकइया बेटा, तोला घर दुवार के
कैकई के कारने उदासी बनगे रे
बनवासी बनगे रे मोर राम बेटा
बनवासी बनगे रे मोर राम बेटा
कैकई के कारने उदासी बनगे रे
गुरु वशिष्ठ जी हां बताईस, पुत्र जग कराईन
उही जग के खीर प्रसादे, हमन तोला पायेन
तोला कैइसे छोड़ो रे मोर बेटा, तोला घर दुवार के
कैकई के कारने उदासी बनगे रे
महल अटारी के रहवैया, बन मा कइसे रहिबे
कांटा सही तोर काया सुखाही, भुख प्यास ला सहिबे
अड़बड़ दुख पाबे रे हीरा बेटा तैहा मोर दुलार के
कैकई के कारने उदासी बनगे रे
तैं जाथस तोर संग जाबो, कहिथे लछमन सीता
तीनो परानी के जाए ले, घर हो जाही रीता
बनवासी बनगे राम बेटा, मोर दुलार के
कैकई के कारने उदासी बनगे रे
तोर जाएके बात ला सुनके, आंखी मा आगे पानी
मैं हां दुखियारी कही डारेंव, तोर बनवास कहानी
तोला कईसे छेकों रे, किलकइया बेटा, तोला घर दुवार के
कैकई के कारने उदासी बनगे रे