शनिवार, 20 अप्रैल 2013

भानगढ के भूतों की सच्चाई

भानगढ़ का राजप्रासाद
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भानगढ़ राजस्थान के अलवर जिले में सरिस्का अभ्यारण के एक छोर पर स्थित है। इतिहास अधिक पुराना नहीं है। 16 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इसका जन्म होता है और 19 वीं शताब्दी में अवसान हो जाता है। इस समय दिल्ली पर मुगलों का शासन था और दिल्ली के तख्त पर अकबर गद्दीनशीं था। आमेर के कछवाहा राजपुत राजा भारमल ने गद्दी संभालने के बाद अकबर के दरबार में प्रवेश पाया और अपनी पुत्री हरखा बाई का विवाह अकबर से करना स्वीकार किया। विवाह के बाद राजपूतों ने इसे छोड़ दिया और हरखा बाई कभी लौट कर आमेर नहीं आई। भारमल के पुत्र राजा भगवंत दास ने संभवत: इस इलाके पर अपनी पकड़ बनाए रखने लिए इस किले का निर्माण 1573 में कराया। भारमल का प्रपौत्र एवं भगवंत दास के पुत्र राजा मानसिंह ने भी अकबर के दरबार में उच्च स्थान प्राप्त किया। 

राजप्रासाद के भग्नावशेष
भानगढ़ के बसने के बाद लगभग 300 वर्षों तक यह आबाद रहा। राजा भगवंत दास ने यह गढ़ अपने छोटे बेटे माधौ सिंह को दिया। माधौसिंह के बाद उसका पुत्र छत्र सिंह गद्दी पर बैठा। छत्रसिंह एवं उसके पुत्र 1630 के युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए। विक्रम संवत 1722 में इसी वंश के हरिसिंह ने गद्दी संभाली।इसके साथ ही भानगढ की चमक कम होने लगी। छत्र सिंह के बेटे अजब सिह ने समीप ही अजबगढ़ बनवाया और वहीं रहने लगा। यह समय औरंगजेब के शासन का था। औरंगजेब कट्टर पंथी मुसलमान था। उसने अपने बाप को नहीं छोड़ा तो इन्हे कहाँ छोड़ता। उसके दबाव में आकर हरिसिंह के दो बेटे मुसलमान हो गए, जिन्हें मोहम्मद कुलीज एवं मोहम्मद दहलीज के नाम से जाना गया। इन दोनों भाईयों के मुसलमान बनने एवं औरंगजेब की शासन पर पकड़ ढीली होने पर जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह ने इन्हे मारकर भानगढ़ पर कब्जा कर लिया तथा माधो सिंह के वंशजों को गद्दी दे दी।

मंगला माता मंदिर
केशवराय मंदिर में स्थित शिलालेख में संवत १९०२ उत्कीर्ण है। इससे यह सत्यापित होता है कि १६७ वर्ष पूर्व अर्थात अंग्रेजों के आने के बाद तक यह नगर आबाद था| भानगढ़ के उजड़ने के पीछे आक्रमण या दुर्घटना जो भी कारण रहा होगा वह संवत 1902 के पश्चात का है। भानगढ़ उजड़ने के कई कारण किंवदंतियों के माध्यम से जनमानस में प्रचलित हैं। जिसमें सिंधु शेवड़े के प्रतिशोध की कहानी चटखारे लेकर सुनाई जाती है। रानी रत्नावती को सिंधु शेवड़ा पाना चाहता था और उसने तंत्र मंत्र का प्रयोग करके इस नगर को उजाड़ दिया। दूसरी जन श्रुति है कि 1720 में आमेर के राजा जयसिंह ने इसे अपने राज्य में मिला लिया था। मुगलों के दौर में राजस्थान में उनके आक्रमण हुए और भयानक युद्द भी हुए। लेकिन मुगलों का आक्रमण भानगढ़ पर हुआ दिखाई नहीं देता। नगर के भीतर जितने मंदिर हैं सभी सही सलामत हैं। अगर मुसलमानों का आक्रमण हुआ रहता तो मंदिर सलामत नहीं मिलते।

शेवड़ों का धूणा
तीसरी किंवदंती भानगढ़ को जयपुर विस्थापित करने के विषय में सुनाई जाती है। अंग्रेजों के शासन काल में जयपुर के राजाओं ने भानगढ़ नगर को जयपुर विस्थापित किया होगा। इस तर्क पर मैं सहमत हूँ, क्योंकि 18 वीं सदी में मराठों एवं पिंडारियों के आक्रमण के कारण राजपुताना त्रस्त हो गया था। इसलिए सारी शक्ति को एकत्र कर जयपुर में स्थापित करने की दृष्टि से भानगढ़ नगर का विस्थापन संभव है। पूर्ववर्ती राजाओं एवं बादशाहों द्वारा अपनी राजधानी को विस्थापित एवं स्थानांतरित करने के अनेकों उदाहरण इतिहास में मिलते हैं। इस तरह भानगढ़ के विस्थापन का कारण सामरिक कारण रहा होगा। तब से यह नगर उजड़ गया और यहाँ दुबारा कोई बसने नहीं आने के कारण देख रेख के अभाव में यह नगर खंडहर बन गया होगा। इस इलाके में पानी की कमी थी। जिसके कारण यहाँ अकाल की स्थिति बन जाती थी। कहते हैं कि 1783 में भयंकर अकाल पड़ा, जिसमें भूख प्यास से काफ़ी लोग त्रस्त होकर काल का ग्रास बन गए। अकाल के कारण फ़ैली महामारी से भानगढ़ उजड़ गया। यहाँ के निवासी भानगढ़ छोड़ कर चले गए।

असमाजिक तत्वों की उपस्थिति 
भानगढ़ उजड़ने के बाद यहाँ असामाजिक तत्वों का बसेरा हो गया। वीरान स्थान पर पहाड़ियों के बीच स्थित यह नगर अपराधियों के छिपने के लिए उत्तम था। उनके द्वारा ही यहाँ भूत प्रेतों की कहानियाँ गढ़ी गई होगीं। जिससे कि आस पास के क्षेत्र के लोग भानगढ़ के खंडहरों की तरफ़ न आए और उनकी गतिविधियाँ निर्विघ्न जारी रहें। गड़े धन के प्रति लोगों का लगाव सदैव रहा है। यहाँ पर भी गड़े खजाने की खोज में लोग आते होगें तथा खजाने को प्राप्त करने के लिए नान प्रकार की तांत्रिक क्रियाए करने के कारण भय का वातावरण निर्मित होता होगा। वर्तमान में भी असामाजिक तत्वों की उपस्थिति के चिन्ह भानगढ़ में दिखाई देते हैं। दारु की खाली बोतलें एवं डिस्पोजल गिलास यत्र तत्र बिखरे पड़े है। दिन रात समूचा किला तांत्रिकों एवं बाबाओं के हवाले रहने के कारण यहाँ भय का वातावरण बना रहता है।

चौकीदार से चर्चा
वर्तमान में मोस्ट हंटेड प्लेस (घोर भूतिया स्थान) में पर्यटकों की रुचि बढती जा रही है। चमत्कार एवं भूत प्रेतों से संबंधित कहानियाँ रोमांच पैदा करती हैं और पर्यटक रोमांचकारी स्थानों पर जाकर उस रोमांच को अनुभव करना चाहता है। मानव की जिज्ञासु प्रवृति होने के कारण वह ऐसे स्थानों पर सत्यता की परख करने लिए पहुंचता है। वर्तमान में पर्यटकों के शौक में बदलाव दिखाई दे रहा है। पूर्व में लोग तीर्थ स्थानों का पर्यटन करते थे तथा वर्तमान में प्राकृतिक दृष्यों के साथ कौतुहल वाले स्थानों पर सैर करने जाते हैं। जैसे हम भी भानगढ़ की सच्चाई की खोज में 15 सौ किलो मीटर की दूरी तय करके पहुंच गए। मुझे भानगढ़ में कोई भी भूतिया आभास  नहीं हुआ। जैसे अन्य स्थानों को देखा वैसा ही यह भी लगा। भूतों की कहानी सिर्फ़ वातावरण में तैरती है। जिसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं होता।

अनंत से आता प्रकाश
आधुनिक युग में जहाँ तक बिजली पहुंच गई है वहाँ तक के सारे भूत प्रेत अंधेरे क्षेत्रों की ओर पलायन कर गए हैं। भूत अंधेरे में ही लोगों को दिखाई देते हैं। क्योंकि लोगों की मानसिकता ही वैसी बन गई है। अंधेरा होते ही अज्ञात का भय उत्पन्न हो जाता है और उसे भूत प्रेत दिखाई देने के साथ विचित्र आवाजें भी सुनाई देने लगती हैं। यही स्थिति भानगढ़ की है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहाँ झाड़ियों में जंगली जानवर विचरण करते हैं। किसी पर्यटक के साथ रात को कोई दुर्घटना न हो जाए इसलिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने यहाँ दिन ढलने के बाद प्रवेश पर पाबंदी लगा रखी है। सर्वे के 16 चौकीदार यहाँ कार्य करते हैं, किसी ने भी भूत प्रेतों को यहां पर नहीं देखा। इससे यही सत्यान्वेषण होता है कि व्यक्ति अपने भीरुपन को घर में छोड़ कर आए और उन्मुक्त होकर भानगढ़ के पुरावशेषों की सैर करे तो बहुत आनंद आएगा। ……… आगे पढ़ें

19 टिप्‍पणियां:

  1. भानगढ़ के प्रति लोगों के मन से भय और आशंका तिरोहित कर के ही रहेंगे आप , अँधेरे में तो अपना साया भी भूत जैसा दीखता है , फिर इतने बड़े किले में भयभीत होना स्वाभाविक है , इसलिए ही एक छोटी कहानी बढ़ते बढ़ते इतनी हो गयी कि यह स्थान भुतहा माने जाने लगा होगा .
    रोचक !

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  2. इतिहास की शानदार जानकारी के साथ रोचक लेख

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  3. मैं तो शीर्षक पढ़ कर डर ही गया था पर सोलहों की सनद पाकर सांस में सांस आई :-)
    नि:संदेह सुंदर लेख

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  4. सर,,, आपने कितना रोचक और सार्थक आलेख प्रस्तुत किया है। धन्यवाद आपका।

    लेख : विश्व विरासत दिवस (World Heritage Day)

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  5. भानगढ की सच्चाई को बहुत ही विस्तृत ढंग से लेखनीबद्ध किया आपने, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  6. भानगढ़ यात्रा काफी रोचक रही. अंध विश्वासों को दर किनार करने में आपकी अहम् भूमिका रही है.

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  7. सुन्दर चित्रों संग महत्वपूर्ण जानकारी के लिए आभार संतुलित .....

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  8. भूत कहीँ होता है। जो होता है वर्तमान होता है। नहीं होने पर ही भूत होता है।

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  9. मतलब अब डरने की जरुरत नहीं है भानगढ़ के किले को आराम से निश्चिन्त होकर देखा जा सकता है...इस रोचक और महत्वपूर्ण जानकारी के लिए आपका आभार

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  10. राजा भारमल ने गद्दी संभालने के बाद अकबर के दरबार में प्रवेश पाया. भारमल का प्रपौत्र राजा मानसिंह ने भी अकबर के दरबार में उच्च स्थान प्राप्त किया.
    अकबर है कि जीन... कितना जीया था?

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  11. @संजय बेंगाणी

    जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर (जन्म: 15 अक्टूबर, 1542 ई. अमरकोट - मृत्यु: 27 अक्टूबर, 1605 ई. आगरा) भारत का महानतम मुग़ल शंहशाह था जिसका शासनकाल 1556 - 1605 ई. था।

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  12. बढि़या जानकारी. मंगला माता के मंदिर का बेहतर चित्र होता तो अच्‍छा...

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  13. बहुत तरल प्रवाह है किस्सागिरी में वाह दादा

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  14. आप इतनी रोचकता से इतिहास बता लोगों को वहाँ रात बिताने के लिये उकसा रहे हैं।

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  15. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  16. जी हां बिलकुल सही सुना आपने, हिंदुस्तान को हमेशा से ही रहस्यों , आलौकिक शक्तियों, तंत्रविद्या का देश कहा गया है। जब बात तंत्र विद्या की हो और ऐसे में हम भूत प्रेतों का ज़िक्र न करें तो फिर कहे गए शब्द एक हद तक अधूरे लगते हैं। लेकिन आगे बढ़ने से पहले चंद सवाल। हम लोगों में से कितने ऐसे हैं जो ये मानते और विश्वास करते हैं कि आज भी इस दुनिया में बुरी आत्माओं और भूतों का अस्तित्त्व है? क्या हम किसी भी माध्यम से भूतों से मिल सकते हैं? क्या हम उन्हें देख सकते हैं, उन्हें महसूस कर सकते हैं? सूर्य देव का वो मंदिर जिसको आज भी है अपनी पूजा का इंतेजार
    हम में से बहुत से ऐसे होंगे जो अवश्य ही इन बातों पर न कहेंगे वहीँ दूसरी तरफ बहुत से ऐसे भी होंगे जिनका ये मानना होगा कि धरती पर जहां एक तरफ जीवित लोग हैं तो वहीँ मृत्य आत्माओं का भी वास है। बहरहाल आज हम आपको हिन्दुस्तान के उस किले के बारे में बताएंगे जिस का सिर्फ नाम सुनकर ही बड़े बड़े दिलेरों के डर के मारे पसीने छूट जाते हैं।
    ये किला है राजस्थान के अलवर जिले में स्थित भानगढ़ का किला । अगर यहां के स्थानीय लोगों की माने तो यहां आने के बाद पर्यटक आज भी एक अलग तरह के डर और बेचैनी का अनुभव करते हैं।

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  17. भानगढ मे गढा है अरबो खरबो का सोना यह बात 100% सच है यकीन ना हो तो चले मेरे साथ my e -mail id sumeetsharma945@gmail

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