बुधवार, 16 मार्च 2016

स्मार्ट कार से दक्षिण भारत की ओर

भारत के दक्षिण प्रदेशों का रहन-सहन, खान-पान, पहनावा, भाषा एवं विभिन्न विषयों पर दर्शन भी उत्तर भारत भिन्न हैं, इस विभिन्नता के बाद भी उत्तर-दक्षिण दोनो जुड़े हुए हैं, इन्हें हमारी संस्कृति जोड़ती है। अगर हम उत्तर की निगाह से देखें तो अत्यधिक भिन्नता पाएगें। उत्तर भारतीयों के लिए दक्षिण में भाषाई समस्या बड़ा रोड़ा बनती है। पूर्व में भी दक्षिण भारत की यात्राएं कर चुका हूँ। परन्तु यात्राएं रेल एवं वायू मार्ग से होने के कारण के क्षेत्र को समीप से देखने एवं समझने में कठिनाई होती रही। जब तक धरातल (सड़क मार्ग) पर न उतरा जाए तब तक किसी भी संस्कृति को समझना बहुत ही कठिन है। इसे समझने के लिए यायावर जैसे दृष्टि एवं संकल्प की आवश्यकता होती है। 
नेपाल की सीमा पर स्मार्ट कार
यायावरी के लिए समय भरपूर चाहिए, जिससे निकट से किसी भी चीज की परख की जा सके। वर्तमान की भागम-भाग भरी जिन्दगी में सभी घरेलू जिम्मेदारियों की कथरी उतार कर कुछ समय यायावरी के लिए चुराना बहुत ही दुष्कर है। खासकर एक गृहस्थी व्यक्ति के लिए। जिसके आगे नाथ, न पीछे पगहा हो, वह कुछ भी कर सकता है। यायावर मन कभी चैन नहीं लेने देता। हमेशा कदम चलने को तैयार रहते हैं, थोड़ी बहुत तकलीफ़ झेलकर भी यायावरी करने को तत्पर रहते हैं, बस जरा सी हवा चली और ये व्याकुल हो जाते हैं कि अब चलना चाहिए। बहुत दिन हो गए एक स्थान पर ही ठहरे हुए। अवसर मिलते ही मन यायावरी साधने निकल पड़ता है।
नेपाल की सीमा
अब की यायावरी में पुन: साथी बने बी एस पाबला जी। पिछली नेपाल यात्रा हमने कार से संग-संग ही की थी और यह यात्रा काफ़ी सफ़ल और सकुशल रही। पाबला जी के पास मारुति ईको कार है, जिसे उन्होंने विभिन्न गजट लगाकर "स्मार्ट कार" बना रखा है। इसकी खासियत यह है कि एक बार स्टेयरिंग पर बैठने के बाद किसी से रास्ता पूछने की आवश्यकता नहीं पड़ती। रास्ता बताने वाली बाई (जीपीएस) को निर्धारित स्थान बताने पर वह स्वयं ही रास्ता बताते हुए मंजिल तक पहुंचा देती है। चौक चाराहों, मोड़ों की जानकारी 100 मीटर पहले से ही मिलने के कारण गति बनी रहती है और चालक पूर्व से ही कार्यवाही के लिए सावधान हो जाता है। 
बी एस पाबला जी स्मार्ट कार के साथ
दूसरी खासियत यह है कि इसमें 4 कैमरे लगे हैं, जो बाहर के रास्ते और भीतर के लोगों की बातचीत एवं गतिविधियों की फ़िल्म भी बनाता है। जिससे सड़क की समस्त घटनाएं रिकार्ड होती जाती हैं और यात्रा करने वालों का आत्मविश्वास बना रहता है। अगर कोई चूक भी हो जाए तो वह भी रिकार्ड हो जाती है। जिससे उसे रिप्ले करके देखा जा सकता है। तीसरी खासियत है कि पाबला जी वाहन के सुचालक है। जिसके कारण मुझे कार चलाने का मौका ही नहीं मिल पाता और लम्बी से लम्बी यात्रा सकुशल सम्पन्न हो जाती है। चौथी खासियत है कि हमारी आपस में पटरी बैठ जाती है। खान-पान और भाषा के साथ समझदारी आड़े नहीं आती। दोनों एक सी भाषा बोलते हैं और समझते हैं साथ ही खान-पान भी एक सा ही है। जिसके कारण कभी असहजता महसूस नहीं होती।
स्मार्ट कार के स्मार्ट कैमरे
मैने देखा है कि कई महीने पहले से यात्रा बनाने पर मेरी यात्रा योजना हमेशा फ़ेल हो जाती है। समय समीप आने पर कोई न कोई अड़ंगा आ जाता है और जब भी तत्काल यात्रा बनाई गई, वह सफ़लता से सम्पन्न हो जाती है। फ़ेसबुक पाबला जी ने कार से बैंगलोर यात्रा की मंशा जताई थी, पर वे असमंजस में थे। मैने देखा और कहा चलो। बस इतने में ही बात बन गई, उनका फ़ोन आने पर मैने कहा कि जरा "मालकिन" से स्वीकृति ले लेता हूँ। उनसे भी स्वीकृति लेने में पाँच मिनट ही लगे और अगले दिन यात्रा की तैयारी के लिए था। मैने अपनी तैयारियाँ कर ली, कम से कम सामान और सुविधा की सारी वस्तुएं जुटा ली गई। पाबला जी ने भी गाड़ी की सर्विंसिंग करवा कर टायर इत्यादि बदलवा लिए। अब गाड़ी जाने के लिए टनाटन होकर तैयार थी। 
हम और हमार मालकिन
इस बार की यात्रा में हमारे दर्शनीय स्थल क्या होगें, इसके लिए हमने पूर्व से कोई तय नहीं किया था। रास्ते में जो दिख जाए, उसे देख लेगें। यही योजना बनी थी। हमें अभनपुर से नागपुर, हैदराबाद होते हुए बंगलोर तक जाना था। वहां दो तीन दिन रुक कर वापस लौटना था। इस बीच रास्ते में पुरातात्विक महत्व के स्मारकों की जानकारी लेकर भी उन्हें देखना था। दक्षिण भारत के समुद्री किनारों की यात्रा तो हो गई थी, परन्तु यह बीच वाला भाग हमेशा छूट जाता था। इस यात्रा में वह भी पूर्ण होने वाला था। सड़क यात्रा का रोमांच भी अलग ही होता है, हर पर जान हथेली पे लेकर चलने वाला काम है। कई तरह की शंका कुशंकाएं मन में आती है, यात्रा के रोमांच से मन दृढ़ हो जाता है, कि बस अब चलना चाहिए। आगे पढें……

21 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब ललित भाई।
    साथी के साथ तालमेल बैठ जाये तो फिर सफ़र का मजा दोगुना हो जाता है।
    इस पर आपकी लेखनी...

    उत्तर देंहटाएं
  2. रास्ता बताने वाली बाई ! 😋😋😋😋

    उत्तर देंहटाएं
  3. रास्ता बताने वाली बाई ! 😋😋😋😋

    उत्तर देंहटाएं
  4. सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ------------

    उत्तर देंहटाएं
  5. पहली पोस्ट के लक्षण बता रहे हैं कि सीरीज शानदार होने वाली है। इंतज़ार रहेगा अगली पोस्टों का।

    उत्तर देंहटाएं
  6. पहली पोस्ट के लक्षण बता रहे हैं कि सीरीज शानदार होने वाली है। इंतज़ार रहेगा अगली पोस्टों का।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बढ़िया रहा ये किस्सा.. आगे का इंतजार है. :)

    उत्तर देंहटाएं
  8. हम भी साथ चल रहे है । गाडी में जगह है या नहीं ☺

    उत्तर देंहटाएं
  9. खमीर उठा जौ का रस पिया या नही ?
    आगे की पोस्टों का बेसब्री से इंतजार रहेगा

    उत्तर देंहटाएं
  10. @ जरा "मालकिन" से स्वीकृति ले लेता हूँ........स्वीकृति लेना कम, आगाह करना ज्यादा रहता है। पर अच्छा भी है अगला खुश भी रहता है, "हमसे पूछे बिना कहां जाते हैं "

    उत्तर देंहटाएं
  11. फेसबुक पर आपदोनो की यात्रा का साक्षी रहें हैं :)

    उत्तर देंहटाएं
  12. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ब्लॉग बुलेटिन और अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

    उत्तर देंहटाएं
  13. आपके यात्रा वृतांत रोचक होते ही हैं.
    अगली कडी का इन्तजार!

    उत्तर देंहटाएं