शनिवार, 12 जून 2010

साप्ताहिक कालम, बुलंद छत्तीसगढ में

कल हम रायपुर शहर में ही थे,बैठे-बैठे अचानक मुड बना और हमारे ब्लागर साथी कौशल तिवारी जी को फ़ोन लगाए, उन्होने कहा कि यहीं प्रेस में ही आ जाएं ललित भाई। उनका निमंत्रण पाकर हम उनके अखबार बुलंद छत्तीसगढ के दफ़्तर में पहुंच गए।

वहां हमें संपादक मनोज पांडे जी  कौशल तिवारी जी एवं सह संपादक फ़िरोज खान जी मिले। शायद दो महीने बाद हमारी मुलाकात हुयी थी। कौशल तिवारी जी ने बुलंद छत्तीसगढ अखबार के नेट पर भी आने की शुभ सूचना जी।

जिसे सुनकर हमें हर्ष हुआ। अब हमारे साथी बुलंद छत्तीसगढ का समाचार नेट पर भी पढ सकेंगे। यह एक अच्छी शुरुवात है। प्रिंट के साथ अखबार का नेट पर आना सुखद है क्योंकि एक व्यक्ति सभी समाचार पत्र खरीद कर नहीं पढ सकता। इसलिए जिसके पास नेट की व्यवस्था है वह नेट पर पढ सकता है। मैं भी लगभग समाचार पत्र नेट पर ही पढता हूं।

समाचारों के विषय में चर्चा होने के साथ यह तय हुआ कि ब्लाग4वार्ता नामक कालम शुरु किया जाए। जिस पर कुछ ब्लाग की चर्चा सम्मिलित हो। यह साप्ताहिक कालम प्रति सोमवार प्रकाशित होगा तथा नेट पर भी पढा जा सकता है। 

यह एक अच्छी शुरुवात है,प्रिंट मीडिया में ब्लागों की चर्चा होनी चाहिए जिससे नेट पर भी पाठकों की संख्या बढेगी। कौशल तिवारी जी ने बताया कि बुलंद छत्तीसगढ एक आन्दोलन "नई आजादी" के नाम से प्रारंभ कर रहा है। यह आन्दोलन सम्पूर्ण भारत में चलाया जा रहा है तथा नई आजादी की लड़ाई का आगाज बुलंद छत्तीसगढ पर हो चुका है।

इन्होने इस आन्दोलन के माध्यम से कुछ मुद्दे उठाए हैं जैसे-पूर्व सांसदो और विधायकों को पेंशन क्यों?, अखबारों एवं उद्योगों के लिए जमीन क्यों?, तालाब न पटे-वृक्ष न कटे, कृषि जमीन का उपयोग न बदलें, अवैध कब्जे एवं अवैध निर्माण पर कड़ी कार्यवाही हो,50% से अधिक वोट पाने वाली सरकार ही नीतिगत निर्णय ले अन्यथा हर निर्णय पर जनता का अभिमत लेना चाहिए। 

बहुत ही अच्छे मुद्दे बुलंद छत्तीसगढ ने उठाएं है। हम इन्हे साधुवाद देते हैं और कामना करते हैं कि आन्दोलन का समस्त भारत में विस्तार हो, जनता जागरुक होकर अपने अधिकारों का प्रयोग करे।

बुलंद छत्तीसगढ अखबार बेबाकी से अपनी बातें कहता है, घोटालों को लगातार उजागर करता है। इसकी साफ़गोई पसंद आती है। कौशल तिवारी जी अपने सम्पादकीय में अन्याय,अत्याचार और भ्रष्ट्राचार पर सीधा प्रहार करते हैं। जिससे कई समस्यों का सामना भी करना पड़ता है।

वे कहते हैं कि -पर्यावरण की चिंता में दुबले हो रहे लोगों के लिए यह खबर और भी दुखदायी होगी कि मोवा से विधान सभा के बीच सड़क चौड़ी करण के नाम से डेढ हजार से अधिक पेड़ काट डाले गए। यह पेड़ तब काटे जा रहे थे जब प्रदेश के मुखिया डॉ रमन सिंह द्वारा शिवनाथ नदी को बचाने फ़ावड़ा उठाया जा रहा था। 

छत्तीसगढ को वन प्रदेश कहने वालों के लिए यह दुखद स्थिति है कि सरकार विकास के नाम पर विनाश करने में लगी हुई है। उसके पास आने वाली पीढी को सुखद जिन्दगी देने के लिए कोई योजना नहीं है। वह तो सिर्फ़ अपने राजनैतिक फ़ायदे के लिए ही कार्य करती है।

ब्लाग4वार्ता अब प्रिंट मीडिया पर भी आ रहा है, इस चर्चा में शामिल ब्लागों की चर्चा अब हम प्रिंट मीडिया पर भी करेंगे। 

हमारा प्रयास है कि ब्लाग4वार्ता में सम्मिलित चिट्ठों को अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचाया जाए। हम बुलंद छत्तीसगढ परिवार को शुभकामनाएं देते हैं। बुलंद छत्तीसगढ के समाचार यहां से पढ सकते हैं।

19 टिप्‍पणियां:

  1. अरे वाह बहुत अच्छी खबर

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  2. इतनी बढ़िया खबर के लिए आपके मुंह में घी -शक्कर :)

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  3. बहुतई उम्दा सूचना छापे हो गुरु देव

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  4. ब्‍लॉग जगत के लिए एक बढिया खबर .. ऐसी निष्‍ठा हो तो बुलंद छत्‍तीसगढ अपने लक्ष्‍य को जरूर प्राप्‍त करेगा !!

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  5. ये तो जबरदस्त खबर दी..बधाईयाँ.

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  6. बुलंद रहे शेर सिंह के साथ छत्तीसगढ़ का इकबाल...

    जय हिंद...

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  7. "नई आजादी" आन्दोलन के बारे में जानकार खुशी हुई. जन-जागृति एक बड़ी ज़रुरत है

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  8. अरे वाह!...ये तो बहुत बढ़िया खबर सुने आपने...
    "नई आजादी" आन्दोलन के बारे में जानकार खुशी हुई.

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  9. सुखद समाचार! जन जागृ्ति हेतु "नई आजादी" जैसे किसी आन्दोलन की आज बहुत सख्त जरूरत है...शुभकामनाऎँ!!

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  10. यह तो बड़ा शुभ समाचार है ।
    सार्थक प्रयास रहेगा ।
    शुभकामनायें ।

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  11. अच्छी खबर ब्लोग को भी समाचार पत्र मे स्थान

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  12. सार्थक और सराहनीय प्रयास तथा उम्दा प्रस्तुती भी ...

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