गुरुवार, 15 जुलाई 2010

ब्रह्माण्ड भैंस सुंदरी प्रतियोगिता

हमारा दुधवाला सुबह से अधपगला हो गया था, सुबह-सुबह ही अपनी लाठी हाथ में लिए घुम रहा था, मै बस स्टैंड जा रहा था, एक जजमान आने वाले थे, तो मैने रामजी को खड़े हुए देख लिया, सोचा कि सुबह-सुबह कौन इसके मुंह लगे, दारु पीया हुआ है फ़ालतु समय और दिमाग दोनो ही खराब करेगा,इसलिए बचकर निकलना चाहता था। मैं सोच ही रहा था कि वह मुझे मत देखे, लेकिन उसने देख ही लिया और जोर से आवाज दी-

"महाराज पाय लागी, रुक देवता रुक, चरण छुने दे"। ऐसा कहके उसने पैर पकड़ लिए। वह दारु के नशे में झूम रहा था।
"खुश रहो, जय हो, राम जी, कैसे सुबह सुबह दारु भट्ठी पहुंच गए" मैने पुछा
"क्या बताऊं महाराज, एक लफ़ड़ा हो गया है, मैं ठहरा अनपढ, हमारे दुधडेयरी के पास एक मास्टर किराए में रहने आए हैं, बहुत पढे लिखे और विद्वान हैं। उसी के कहने से गलती कर बैठा। आप कुछ किजिए तभी मेरी चिंता दूर होगी।" राम जी ने पैर पकड़े-पकड़े कहा
"अरे पैरों को तो छोड़, सब देख रहे हैं, सुबह-सुबह दारु पीकर मेरा फ़जीता कर रहा है बीच बाजार में।" मैने थो्ड़ा झिड़कते हुए कहा।
"नई छोड़ता मैं पैर, पहले मेरी बात सुनो और फ़िर समस्या का हल करो।" वह पैर छोड़ने को तैयार नहीं था।
"छोड़ साले पैरों को, तमाशा लगा दिया है बस स्टैंड में। जब तु पैर छोड़ेगा तभी तेरी बात सुनुगां, मैने गुस्से से कहा। तब जाकर उसने पैर छोड़े। सुबह-सुबह कोई शराबी मिल जाए तो पूरा दिन खराब कर देता है।
वह कहने लगा-" क्या बताऊं महाराज, 15 दिन पहले मास्टर जी पेपर पढ रहे थे, तो मैं उनके घर के पास से गुजरा, उनको बैठे देखा तो राम राम कर लि्या। बस यही राम-राम करना मेरे लिए बहुत बड़ी चिंता में बदल गया।"
"आगे बोल जल्दी, मेरे पास अभी समय नहीं है।" मैने कहा जल्द बाजी करते हुए कहा
मास्टर जी बोले अखबार में एक समाचार है वो तुम्हारे ही काम का है काका, तुम्हारी डे्यरी में 50-60 भैंस हैं एक एक सुंदर, और बम्बई में एबीसीएल ब्रह्माण्ड भैंस सुंदरी प्रतियोगिता आयोजित करवा रहा है, तुम भी अपनी एक भैंस उस प्रतियोगिता में साज संवार कर बतौर प्रतियोगी भेज दो। तुम्हारी जमना भैंस बहुत सुंदर है और उसका फ़िगर भी प्रतियोगिता के लायक है। जमना अगर जीत जाएगी तुम्हे बहुत लाभ होगा, पेपर और टीवी में तु्म्हारी फ़ोटो आएगी,डेयरी का मुफ़्त में प्रचार-प्रसार होगा, तुम्हे घर-घर दूध बेचने जाने की जरुरत नहीं है, जिसे दूध चाहिए वह डेयरी से आकर ले जाएगा और इनाम में लाखों रुपए नगद मिलेंगे, उसके बाद तो जमना टीवी में विज्ञापन करके लाखों कमाएगी। अगर किसी निर्माता निर्देशक की नजर पड़ गयी तो हिरोईन बनना नि्श्चित है। बस तुम बैठे बैठे खाना। इस तरह मास्टर जी ने मुझे बहुत बड़ा सपना दिखा दि्या----
"फ़िर आगे क्या हुआ? जल्दी बता, बात को लम्बी मत कर, मेरे जजमान आने ही वाले होगें।"
"मैने मास्टर को पूछा कि प्रतियोगिता में जाने के लिए क्या करना पड़ेगा?"
तो उन्होने बताया कि-" जमना को रोज दिन में तीन टाईम पीयर्स साबुन से रगड़-रगड़ के नहलाना और उसकी पूंछ को सनसिल्क शैंम्पु से धोना, फ़िर देखना 10-15 दि्न में एक दम चकाचक हो जाएगी, कोई भी नहीं कह सकता कि गंवई गांव की मुर्रा भैंस है। एक दम विदेशी लगेगी।"
"मैने भी वही किया महाराज, मेरी जमना बहुत खुबसूरत है, बड़ी-बड़ी कजरारी आँखें, कटारी जैसी भौंह, जो देखे वह दीवाना हो जाए, रोज सुबह-शाम फ़ेयर एन्ड लवली लगाता था, रात को मास्चराईजर, इससे फ़रक यह पड़ा कि एकदम गोरी हो गयी थी, त्वचा चिकना गयी थी, पूंछ के बाल खुले खुले हवा में लहराते थे  जैसे कोई नागिन असाढ में झूम रही हो।"
"फ़िर क्या हुआ?"- मैने पूछा
"उसे मुंबई भे्जते समय आयोजकों ने कहा कि उसके साथ एक मैनेजर भेजना पड़ेगा, अब मैनेजर के काम के लिए मैने अपनी डेयरी में काम करने वाले बरातु को तैयार किया, वह पढा लिखा है अंग्रेजी जानता है, नौकरी नहीं मिली तो गोबर-कचरा करता है। जमना आखिर भैंस ठहरी चारा पानी के बाद गोबर तो करेगी ही और कोई उसका समय निश्चित नहीं है, कहीं कैटवाक करते समय ही पतले गोबर का एक छर्रा मा्र कर पूंछ हिला दिया तो फ़िर हो गया काम सबका। इसलिए उसके लिए एक बरमु्डा पेंट भी सिलाया। उसके चारे पानी की व्यवस्था करना बरातु के जिम्मे कर के मैने जमना को मुंबई भेज दिया महाराज।"
"चलो ठीक किया, अगर जमना जीत जाएगी तो तुम्हारी किस्मत बदल जाएगी, इनाम के पैसे और भी भैंस खरीद लेना। इसमें चिंता की क्या बात है?" मैने कहा
"आप चिंता कहते हैं मेरे यहाँ प्राण निकल रहे हैं"।
"क्यों?"- मैने उसके सामने एक प्रश्नवाचक चिन्ह खड़ा किया
"मेरा पोता कालेज में पढता है, अभी घर आया तो बता रहा था कि जो भी सुंदरी प्रतियोगिता में मुंबई चल देती है, वह वापिस नहीं आती, हारे चाहे जीते, वहीं रहकर संघर्ष (स्ट्रगल) शुरुकर देती है, अगर कामयाब नहीं होती तो मैनेजर या आयोजक के साथ ही लिविंग इन रिलेशनशिप बना कर रह जाती है। बता रहा था कि प्रतियोगिता के निर्णायक के रुप में देश-विदेश से तरह-तरह के पड़वे भी आ रहे हैं, उद्घाटन के लिए शक्तिकपूर और अमन वर्मा को बु्लाया गया है, कहीं कास्टिंग काऊच हो गया तो मेरी इज्जत का क्या होगा? मैं गांव में किसी को मुंह दि्खाने के ला्यक नहीं रहुंगा। गांव की बदनामी होगी सो अलग, मेरी जमना भोली भाली है कोई सहरावत या बिपासा थोड़ी है।"
पोता बता रहा था कि अगर वापस आ गयी तो दुहाती नहीं है, फ़िगर खराब होने का डर हो जाता है, क्योंकि प्रतियोगिता तो हर साल होती है,हो सकता है अगले साल फ़िर जाना पड़ जाए। अब इस फ़िगर के चक्कर में मेरा शुद्ध नुकसान हो रहा है। मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा है,इसलिए सुबह से पी-पी कर घुम रहा हूँ और आपको ढुंढ रहा था।"
"अब मैं क्या कर सकता हूँ तुम्हारे लिए"।
"आपकी जजमानी मुंबई तक चलती है महाराज, मैं जानता हूँ आप मुंबई आते-जाते रहते हैं, मेरी जमना को आप ही वहां के खलनायकों से बचा सकते हो, मुझे नहीं बनाना उसे ब्रह्मान्ड सुंदरी। हाय मेरी जमना, जबसे तू गयी है कोठा है सूना, उसे वापस ला दो महाराज, मैं वादा करता तुम्हारे लौटते ही 10किलो फ़ेयर एण्ड लवली, 5किलो लिपिस्टिक, 20किलो माश्चराईजर लेकर आउंगा, हर महीने तुम्हारा गोल्डन फ़ेसि्यल करवाऊंगा, चाहे इसके लिए मुझे कर्जा लेना पड़े या डेयरी बेचना पड़े।लेकिन तुझे एक दम अफ़सर की बीबी जैसे सजा कर रखुंगा भगवान, एकदम सजाकर।"
"हां तो हो गयी तेरी बात पूरी कि और भी कुछ बचा है, मैं तेरी जमना को वापस लाने का प्रयास करता हूँ, और तु सुबह से दारु पी के मत घुम ,जाकर घर में सो जा, तेरी जमना वापस आ जाएगी कहीं नहीं जाएगी।'-अब शराबी से पीछा छुड़ाने के लिए मुझे नेता की तरह आस्वासन देना पड़ा।
"ठीक है महाराज, आप कह रहे हैं तो जा रहा हूँ नहीं तो और भी पीने का मन था, मेरे को चिंता है कि जमना आएगी तो दुहाएगी नहीं ऐसा कहते हैं, उसको इनाम मिले या न मिले, ब्रह्माण्ड सुंदरी बने या न बने, लेकिन मेरा तो रोज का नुकसान हो रहा है, दुहना नीचे रखते ही, दोनो समय 20 किलो दूध दुहाती थी। बहुत नुकसान हो जाएगा।"
" भैंसी चाहे कोठा (डेयरी) की हो या ब्रह्माण्ड सुंदरी, वो जहाँ जाएगी उसे दुहाना ही पड़ेगा, यहां तो डेयरी में तुम एक ही दुहने वाले, बाहर देखो कितने सारे दुधवाले भैंस हाथ में रस्सी लेकर घुम रहे हैं कि कोई भैंस मिलती और दूह डालते, जाओ राम जी तुम भी घर जाओ और मुझे भी जाने दो जजमान के आने का समय हो गया है।"- उसे आश्वस्त करके मैं चल पड़ा जजमान की ओर..............

29 टिप्‍पणियां:

  1. भैंस के माध्‍यम से बहुत करारा व्‍यंग्‍य लिखा है। किसी टिप्‍पणी की गुंजाइश नहीं है बस बधाई।

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  2. वाह!...आज के समय की बुराइयों पर सीधे चोट करता बहुत ही करारा एवं सटीक व्यंग्य
    मज़ा आ गया पढ़ कर

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  3. बहुत दिनों के बाद आप को पढ़ा और लगा कि पीछे के लेख भी अवश्य पढ़ने चाहिए।
    आप पूरे फॉर्म में आ गए हैं। तीखापन ग़जबे है !

    @ जमना आखिर भैंस ठहरी चारा पानी के बाद गोबर तो करेगी ही और कोई उसका समय निश्चित नहीं है, कहीं कैटवाक करते समय ही पतले गोबर का एक छर्रा मा्र कर पूंछ हिला दिया तो फ़िर हो गया काम सबका। इसलिए उसके लिए एक बरमु्डा पेंट भी सिलाया"
    @
    भैंसी चाहे कोठा (डेयरी) की हो या ब्रह्माण्ड सुंदरी, वो जहाँ जाएगी उसे दुहाना ही पड़ेगा, यहां तो डेयरी में तुम एक ही दुहने वाले, बाहर देखो कितने सारे दुधवाले भैंस हाथ में रस्सी लेकर घुम रहे हैं कि कोई भैंस मिलती और दूह डालते, जाओ राम जी तुम भी घर जाओ और मुझे भी जाने दो जजमान के आने का समय हो गया है।"

    ग़जब कर डाला

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  4. सर्वप्रथम आपको हमारा प्रणाम स्वीकार हो पण्डित जी! कई भाषाओं के ज्ञाता! अति सुन्दर अनुवाद। देयर इज़ नो एनी मेटर ऑफ विवाद। महराज आजकल गा भैंस कहां दिखथें गा पंड़रिन (पंड़वा के उल्टा) मन परतियोगिता मा जादा दिखथे। जय जोहार।

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  5. गुरूजी परनाम .... आप हमरे ब्लॉग में आये अऊर टिप्पणी किये ... हमका बहुत अच्छा लगा ...
    अऊर आपका इ भैसन वाली कहानी ... एकदम गजब ! मज़ा आ गया पढके ...
    हास्य, व्यंग्य दोनों रस पि लिए ...
    जय हो ...

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  6. @सूर्यकान्त गुप्ता

    भैया यह प्रतियोगिता बच्चों(पंड़वा-पंड़रिन)के लिए नहीं है।
    इसमें अनुभवी जवान लोगों को ही प्रवेश दिया जाता है।
    हम जानते थे कि आप यही सलाह देने वाले हैं-आभार

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  7. ha...ha....ha...
    hindi mey bhi is rachanaa kaachchha anuvaad hua hai. badhai.

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  8. कटाक्ष के साथ एक करार व्यंग्य. मजा आ गया पढ़ कर के.

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  9. भैंस के माध्यम से करारा व्यंग्य मारा है आपने तो
    भाषा को देसी प्रवाह कहीं भी बाधक नहीं बनता वरन् एक सांस में रचना पढ़ने को बाध्य करता है.
    बधाई

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  10. @ राजकुमार सोनी

    दादा जी, हम देशी मनई जो ठहरे,
    अंग्रजी कहां से लाएं,जब महुआ लगा लेते हैं
    तो एसेइच लिखते हैं,अंग्रेजी लगाने के बाद अंग्रेजी आ जाती है।
    सब उसका ही खेल है।
    आप आए हमारे ब्लाग पर उसकी कुदरत है
    हम कभी आपको और आपके झोले को देखते हैं।
    कुछ लाए क्या? खई खजानी,चखना वखना।
    हा हा हा

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  11. वाह क्या करारा कटाक्ष किया है !

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  12. धार-ही-धार!
    लगता है पहली धार तो नहीं ही रही होगी,
    या शायद-
    रही ही हो।
    आभार!

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  13. प्रतीकात्मक रूप से बडी कडी बात कह दी है आपने।
    आपकी लेखनी की धार देखकर सलाम करने को जी चाहता है।
    --------
    पॉल बाबा की जादुई शक्ति के राज़।
    सावधान, आपकी प्रोफाइल आपके कमेंट्स खा रही है।

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  14. आज तो शब्द नहीं मिल रहे कुछ कहने को ..भैंस के मद्ध्यम से बहुत कुछ कह डाला आपने ....करार कटाक्ष.बधाई स्वीकारें.

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  15. जब तक लौटेगी वह पहचान भी पाएगा ?

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  16. जमना के माध्यम से बड़ा जबरदस्त कटाक्ष किया है और अंत में शानदार संदेश!!

    शानदार आलेख, ललित बाबू!!

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  17. @ सत्य गौतम

    आपकी टिप्पणी का मेरी पोस्ट से कोई संबंध नही है।
    अपनी बात अपने ब्लाग पर कहें तो उत्तम होगा।
    इसलिए मै हटा रहा हूँ।

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  18. बहुत सुन्दर ढंग से आपने ब्यंग किया है|
    आशा

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  19. आपने रामजी को भरोसा दिलाया है कि मुबई जाकर उसकी जमना भैंस को ब्रम्हांड सुन्दरी काम्पीटिशन वालों से
    वापस लाने का प्रयास करेंगे . प्रयास शुरू हुआ कि नहीं ? या फिर ये भी रामजी से याने कि बेचारी जनता से पीछा छुड़ाने
    के लिए नेताजी का कोई नया चुनावी वायदा है ? ज़रूर बताएं महाराज ! जय हो ! - स्वराज्य करुण (दिल की बात )

    j

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  20. tikha wyangya hai.......... bhains ke madhayam se aapne jo katakchha kiya hai..... tarif ke liye shabd kam pad rhe hai........ bahut bahut badhai. aapko. ab shayad gaon ki koi apne bhains bramhand sundari pratiyogita me bhejane se pahle 100 bar sochega. ya shayad bheje hi nahi. tarife kabil lekh ke liye punah badhai

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