शनिवार, 16 अक्तूबर 2010

एक दिन मुख्यमंत्री निवास में---------ललित शर्मा

लवायु परिवर्तन के प्रति जागरुकता अभियान के प्रथम चरण का समापन 14 अक्टुबर को मुख्यमंत्री निवास पर हुआ। इस अवसर पर स्कूली बच्चों को पुरस्कार भी दिए गए। जिससे बच्चों का उत्साह वर्धन हुआ।कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंग,स्कूली शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष लीला राम भोजवानी,कार्यक्रम के ध्वज वाहक अशोक बजाज, एसार्ड के के डी गुप्ता, एस सी त्रिपाठी एवं स्कूली शिक्षा विभाग का अमला अपने अपने स्कूल के विद्यार्थियों के साथ मौजूद था और साथ ही हम भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंग ने पर्यावरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पेड़ पौधे, हवा-पानी, पंछी पर्वत, खेत-खलिहान सब कुछ हमारे पर्यावरण का अभिन्न हिस्सा हैं। इनसे हमें जीवन की उर्जा मिलती है, वृक्ष नहीं होगें तो चिड़ियों की चहक और फ़ूलों की महक भी नहीं होगी, इनके बिना हमारा जीवन नीरस और निरर्थक हो जाएगा। जलवायु परिवर्तन के गंभीर संकट से देश और दुनिया को बचना होगा। इस अवसर पर उन्होने पर्यावरण जागरुकता के प्रति सर्व श्रेष्ठ सुझाव देने वाले 250 स्कूली बच्चों को सम्मानित भी किया।

इसके एक दिन पूर्व अशोक बजाज जी के साथ हम भी दो कार्यक्रमों में सम्मिलित हुए। जहाँ विद्यार्थियों को पर्यावरण की सार्थकता पर संदेश दिया गया। अशोक बजाज जी ने सार गर्भित शब्दों में बच्चों के साथ पर्यावरण जागरुकता एवं जलवायु परिवर्तन विषय पर संवाद कायम किया। सवांद शैली में सरलता से बच्चों को समझाते हुए उन्होने कहा कि जब हम लोग स्कूल में पढते थे तब गाँव में लोगों को बताते थे कि आगामी 25 वर्षों में पानी बिकने लगेगा और हमें खरीद कर पीना पड़ेगा। तब ग्रामीण हमारी बातें सुनकर हंसते थे और कहते थे कि ये लड़का तो पागल हो गया है। लेकिन जब पानी खरीद कर पीना पड़ रहा है तो 25 वर्षों पुरानी बातें सत्य हो रही हैं।

पर्यावरण असंतुलन की यही स्थिति रही तो जलवायु परिवर्तन के कारण आगामी कुछ वर्षों में हमें आक्सीजन भी खरीद कर इस्तेमाल करनी पड़ेगी। वातावरण इतना दुषित हो जाएगा कि हमें पीठ पर ऑक्सीजन सिलेंडर लाद कर ले जाना पड़ेगा और जगह जगह ऑक्सीजन सिलेंडर रिफ़िलिंग सेंटर खुले होगें जहाँ खाली सिलेंडर रिफ़िल करने की सुविधा होगी। अभी से सोचना होगा वे दिन कैसे होगें। अगर इस संकट से बचना है तो अभी से तैयारी करनी पड़ेगी। हमें प्रकृति के दिए मुफ़्त अनुपम उपहार हवा-पानी और धरती को बचाना होगा। इसके लिए गंभीरता से कार्य करना पड़ेगा। तभी हम बच पाएगें अन्यथा सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के लिए भीषण खतरा उत्पन्न हो रहा है।

हवा और पानी को प्रदुषित होने से बचाने के लिए हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए, बिजली का उपयोग कम से कम करना चाहिए क्योंकि बिजली कोयला जलाने से उत्त्पन्न होती है और इससे पृथ्वी का ताप बढता है। आज हम देख रहें है मौसम में परिवर्तन स्पष्ट नजर आता है। कभी वर्षा होती है तो कभी अचानक गर्मी पड़ती है। वर्षा भी खंड-खंड हो रही है। बेमौसम वर्षा, अल्प वर्षा और अत्यधिक वर्षा जलवायु परिवर्तन का ही परिणाम है। इसलिए हमें जलवायु परिवर्तन के प्रति गंभीर होकर होकर धरती को बचाने का संकल्प लेना चाहिए। विद्यार्थियों को इस आशय की शपथ भी दिलाई गई और उन्हे लगाने के लिए एक-एक पेड़ भी दिए गए। जिसकी वृद्धि रपट भी भेजने के लिए कहा गया। वृक्षारोपण के साथ-साथ उसे बचाना भी जरुरी है।

एसार्ड नामक दिल्ली के एनजीओ के चेयरमेन डॉ के डी गुप्ता ने इस कार्यक्रम को प्रारंभ करवाने के लिए काफ़ी मेहनत की। लेकिन इनके पास कार्यक्रम के सुचारु रुप से संचालन के लिए कार्यकर्ताओं का अभाव सभी जगह दिखा। अगर इनके पास कार्यकर्ता होते तो यह कार्यक्रम और भी अच्छी तरह से संचालित हो सकता था। इनका कार्य दिल्ली से आने-जाने और फ़ोटो खिंचवाने तक ही सीमित रहा। इनसे आशा है कि भविष्य में वर्तमान की गलतियों से प्रेरणा लेकर उन्हे सुधार कुछ और अच्छा करने की कोशिश करेंगे। मैं इन्हे साधुवाद देता हूँ।

जलवायु परिवर्तन के जागरुकता कार्यक्रम में मुझे भी सम्मिलित होने का अवसर मिला। जहाँ मुझे लगा कि शिक्षा विभाग का सहयोग इस आयोजन में प्रसंशनीय रहा। जिला शिक्षाधिकारी और कार्यक्रम के नोडल अधिकारी अजीत जाट दृष्टिगोचर हुए। हां इस अवसर पर मुंख्यमंत्री निवास में ब्लागर बंधु स्वराज्य करुण जी से मुलाकात कर प्रसन्नता हुई।

21 टिप्‍पणियां:

  1. अशोक बजाज जी बढ़िया कार्यक्रम चला रहे है |
    जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरुकता लाने के लिए वृहद् स्तर पर कार्यक्रम चलाने की आवश्यकता है |

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  2. @ आदरणीय शेखावत जी को धन्यवाद ,श्रीदुर्गानवमी की बधाई .

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  3. सबसे जरूरी है अबाध जनसंख्या पर लगाम. जो कार्य किया जा रहा है वह तो महत्वपूर्ण है ही.. बजाज जी एक अच्छा कार्य कर रहे हैं और आप उन्हें हमसे मिलाकर...

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  4. जल-वायु परिवर्तन के खतरों से समाज को सचेत करने का यह कार्य हमारी नई पीढ़ी बखूबी कर सकती है. इसलिए इसकी शुरुआत स्कूली बच्चों के साथ की गयी . इसके लिए श्री अशोक बजाज और उनके सभी साथी धन्यवाद के पात्र हैं उनके इस अभियान से अगर समाज का ह्रदय-परिवर्तन हुआ तो जल-वायु परिवर्तन का ख़तरा निश्चित रूप से कम होगा. आपने इस महत्वपूर्ण आयोजन को अपने ब्लॉग पर कव्हर किया,इसके लिए आप विशेष रूप से धन्यवाद के पात्र हैं.

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  5. ये प्रयास अच्छा है
    तुलसी वन भी विकसित करावें
    ताकि आक्सीजन की कमी न हो

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  6. @गिरीश बिल्लोरे

    आपका प्रस्ताव नोट किया गया।

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  7. बजाज साहब को इस सराहनीय कार्य के लिये बहुत शाबासी और बधाई. दुर्गा नवमी एवम दशहरा पर्व की हार्दिक बधाई एवम शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  8. अशोक बजाज जी का कार्य निश्चय ही प्रशंसा के योग्य व सराहनीय है ...उनको मेरी हार्दिक शुभकामनायें ....और आपको ऐसे कार्यों को ब्लॉग पर लिखने के लिए धन्यवाद ...इसी का नाम है ब्लोगिंग...

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  9. बढ़िया कार्यक्रम की बढ़िया रिपोर्ट.

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  10. जल-वायु परिवर्तन के प्रति अगर सभी नेता ऎसा सोचे तो भारत हरा भरा हो जाये, अशोक बजाज जी ओर आप का धन्यवाद इस सुंदर पोस्ट के लिये

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  11. आप लोग बढ़िया कार्य कर रहे हैं । यहाँ तो अभी से ऑक्सिजन कैफे खुलने की बात होने लगी है ।

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  12. बढ़िया जानकारी भईया. सचमुच पर्यावरण संरक्षण आज की प्राथमिक आवश्यकता है. अशोक भईया का इस दिशा में प्रयास अनुकर्णीय है. शासन प्रशासन स्वैक्षिक संगठनो का सहयोग तथा व्यापक जनभागीदारी से ही इस महत्त्वपूर्ण कार्य संभव हो सकेगा. बधाई और शुभकामनाएं.

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  13. एक पेड सौ यज्ञ के बराबर है | आप और अशोक बजाज जी दोनों को इस कार्य हेतु बधाई |

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  14. अच्छी कोशिश , अच्छी पोस्ट ,विजय दशमी की शुभकामनाएं । पढ़िए "खबरों की दुनियाँ"

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  15. अशोक भाई के इस सार्थक प्रयास के लिए साधुवाद!!! नमन!


    आपको एवं आपके परिवार को दशहरे की बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं

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  16. ऐसी सुगढ़ रपट किसी अखबार में देखने को नहीं मिली, धन्‍यवाद.

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  17. ... सराहनीय कार्य ... बेहतरीन पोस्ट !

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  18. पर्यावरण पर लगातार लिख रहे हिन्दी ब्लागरों को एक मंच पर लाने के प्रयास किये जा सकते हैं| पर्यावरण डाइजेस्ट के श्री खुशाल जी से लेकर महेश परिमल जी जैसे लोग लगातार अपनी सेवाएँ दे रहे हैं| आपके नेतृत्व में वर्धा जैसा आयोजन पर्यावरण पर लिख रहे ब्लागरों के लिए हो तो सही मायने में हम दूसरों को भी इस तरह के लेखन के लिए प्रेरित कर सकते हैं| आप विचार करिएगा|

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