रविवार, 28 फ़रवरी 2010

ब्लॉग़र होली मिलन भिलाई में

ल होली की पूर्व संध्या पर कुछ ब्लागर बिना किसी निश्चित कार्यक्रम के मिल लिए......... ..राजकुमार सोनी जी छुट्टी थी उन्हें अपनी माता जी से मिलने दुर्ग जाना था.....उनका फोन मेरे पास आया और पूछा कि दुर्ग चलेंगे क्या? 

मैंने हां कर दी बहुत दिन हो गये थे अपने भिलाई वाले साथियों से मिले. राजकुमार सोनी अपने साथ अवधिया जी को भी लेकर आये . फिर हम अभनपुर से पाटन होते हुए पहुँच गये दुर्ग.... 

राजकुमार जी की माता से मिले उनके दर्शन किये.... ..और फिर जम गई मित्रों की टोली और मनी धमाके दार होली...... मैं इस पर अभी ज्यादा कुछ नहीं लिख रहा हूँ.....क्योंकि.........होली मनाते हैं और फिर बाद में हमारी इस होली की जानकारी भी सुनाते हैं चित्र में बैठे है. संजीव तिवारी, बी.एस. पावला, जी.के.अवधिया, ललित शर्मा, राजकुमार सोनी, शरद कोकास, गुप्ता जी,...........
अब देखिये आनंद कैसे बढ़ता है  और किसे कहते हैं महफ़िल में चार चाँद लगना.......

हम भिलाई से निकलने की तैयारी कर रहे थे तभी हरियाणा के सुप्रसिद्ध कवि योगेन्द्र मौदगिल जी का फोन आया और उन्होंने मुझसे पूछा की आप कहाँ है? 

यही सवाल मैंने उनसे किया तो पता चला की होली की पूर्व संध्या पर भिलाई ओपन थियेटर में कवि  सम्मलेन पर आये हैं...वाह! क्या था फिर हम सब पहुच गए कवि सम्मलेन में, वहां सभी मित्र गण गर्मजोशी से मिले और कुछ फोटू मोबाईल कैमरे से ली गई. फिर योगेन्द्र जी मेरे साथ अभनपुर आ गये..........
  

21 टिप्‍पणियां:

  1. हो न फिर फसाद , मजहब के नाम पर
    केसर में हरा रंग मिले ,इस बार होली में !

    उत्तर देंहटाएं
  2. होली में दुर्ग जैसी होली प्लेस (पवित्र)
    जगह में आप सभी मनाये होली
    कोई और भी जो साथ था अदृश्य
    उसकी बात न बोली
    गाडा भर बधाई जम्मो ब्लोगर्हा मन ला

    उत्तर देंहटाएं
  3. आप तथा सभी ब्लॉगर मित्रों को होली की शुभकामनाएँ!

    उत्तर देंहटाएं
  4. yahi hai atithidevo bhav.... kitane log aisaa karate hai.? badhaai,is bhavanaake liye..शुभकामनाएं......
    होली का मतलब मिलन, रंग-अर्थ है प्यार.
    मिले सभी आ कर तभी, सतरंगी संसार.
    फागुन में सब जल गया, जितना भी था रार,
    निर्मल मन को कर गया, ये अद्भुत त्यौहार..
    फाग लिए अनुराग की, पिचकारी के साथ,
    कर देता है प्यार की, अंतस में बरसात.

    उत्तर देंहटाएं
  5. @ भैया सुरुजकांत गुप्ता जी,
    प्रथम होली की शुभकामनाएं ग्रहण किजिए।
    आपकी चर्र्चा इस पोस्ट मे की गयी है,
    लेकिन आप अदृश्य थे, इसलिए आपकी चर्चा भी अदृश्य हो गयी है।
    दुर्ग के होली प्लेस मे, होली के होली कार्यक्रम मे आप सादर आमंत्रित झारा-झारा नेवता है। आभार

    उत्तर देंहटाएं
  6. होली की रंगभरी शुभकामनाएँ स्वीकार करें!

    उत्तर देंहटाएं
  7. भल्‍ले गुझिया पापड़ी खूब उड़ाओ माल
    खा खा कर हाथी बनो मोटी हो जाए खाल
    फिरो मजे से बेफिक्री से होली में,
    मंहगाई में कौन लगाए चौदह किला गुलाल
    http://chokhat.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह बढ़िया...रंगोत्सव पर्व की हार्दिक शुभकामनाये ...

    उत्तर देंहटाएं
  9. वाह जी बहुत बढि़या. आप सभी को मुबारक होली.

    उत्तर देंहटाएं
  10. ओह काश कि ये छत्तीसगढ थोडा सा ..बस थोडा सा नजदीक होता ...खैर अब छत्तीसगढ दूर नहीं समझिए बस ....आपको आउर पूरी टोली को होली की शुभकामनाएं
    अजय कुमार झा

    उत्तर देंहटाएं
  11. ललित भाई और सभी साथियो को होली की हार्दिक शुभकामनाये.

    उत्तर देंहटाएं
  12. श्री ललित जी ! होली के अवसर पर हार्दिक मंगल कामनाएं स्वीकारिए। इसी के साथ नेचर का फैशन शो देखिए.......डॉ० डंडा लखनवी


    नेचर का देखो फैशन शो

    -डॉ० डंडा लखनवी

    क्या फागुन की फगुनाई है।
    हर तरफ प्रकृति बौराई है।।
    संपूर्ण में सृष्टि मादकता -
    हो रही फिरी सप्लाई है।।1

    धरती पर नूतन वर्दी है।
    ख़ामोश हो गई सर्दी है।।
    भौरों की देखो खाट खाड़ी-
    कलियों में गुण्डागर्दी है।।2

    एनीमल करते ताक -झाक।
    चल रहा वनों में कैटवाक।।
    नेचर का देखो फैशन शो-
    माडलिंग कर रहे हैं पिकाक।।3

    मनहूसी मटियामेट लगे।
    खच्चर भी अपटूडेट लगे।।
    फागुन में काला कौआ भी-
    सीनियर एडवोकेट लगे।।4

    इस जेन्टिलमेन से आप मिलो।
    एक ही टाँग पर जाता सो ।।
    पहने रहता है धवल कोट-
    ये बगुला या सी0एम0ओ0।।5

    इस ऋतु में नित चैराहों पर।
    पैंनाता सीघों को आकर।।
    उसको मत कहिए साँड आप-
    फागुन में वही पुलिस अफसर।।6

    गालों में भरे गिलौरे हैं।
    पड़ते इन पर ‘लव’ दौरे हैं।।
    देखो तो इनका उभय रूप-
    छिन में कवि, छिन में भौंरे हैं।।7

    जय हो कविता कालिंदी की।
    जय रंग-रंगीली बिंदी की।।
    मेकॅप में वाह तितलियाँ भी-
    लगतीं कवयित्री हिंदी की।8

    वो साड़ी में थी हरी - हरी।
    रसभरी रसों से भरी- भरी।।
    नैनों से डाका डाल गई-
    बंदूक दग गई धरी - धरी।।9

    ये मौसम की अंगड़ाई है।
    मक्खी तक बटरफलाई है ।।
    धोषणा कर रहे गधे भी सुनो-
    इंसान हमारा भाई है।।10

    सचलभाष-0936069753

    उत्तर देंहटाएं
  13. आपको सपरिवार होली की शुभकामनाएँ!!

    उत्तर देंहटाएं
  14. होली में डाले प्यार के ऐसे रंग
    देख के सारी दुनिया हो जाए दंग
    रहे हम सभी भाई-चारे के संग
    करें न कभी किसी बात पर जंग
    आओ मिलकर खाएं प्यार की भंग
    और खेले सबसे साथ प्यार के रंग

    उत्तर देंहटाएं