शुक्रवार, 17 दिसंबर 2010

एंजिल से मुलाकात

एंजिल की क्लास (शिवकुमार तिवारी) वाईस प्रेसिडेंट
आरम्भ से पढ़ें 
अप्पु की शादी तो निपट गई, पारिवारिक माहौल में बड़ी धमा चौकड़ी हुई। अब चर्चा करते हैं निम्बाहेड़ा के एंजिल याने आदित्य बिड़ला सीमेंट के वाईस प्रेसीडेंट शिवकुमार तिवारी जी की।

इन्हे एंजिल इसलिए कहते हैं कि ये सभी के सुख दुख में शरीक रहते है और किसी को तकलीफ़ हो जाए तो एक एंजिल की तरह ही अपनी भूमिका निभाते हैं यह मुझे विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है इसलिए मैं भी इन्हे एंजिल ही कहुंगा,

मै एक यायावर की तरह भ्रमण करने वाला ही रहा हूँ और राजनीति के गलियारे में तरह-तरह के लोगों से पाला पड़ा है जो हम प्याला हम निवाला बने। लेकिन एंजिल की बात ही कुछ और है, एंजिल के व्यक्तित्व ने मुझे प्रभावित किया। एंजिल एक सुहृदय सुंदर व्यक्तित्व के स्वामी हैं और अपनापन भी इतना है कि एक पराए को अपना बनाने में समय नहीं लगता।

इतनी बड़ी फ़ैक्टरी को चलाने के लिए सबसे घुल मिल जाने वाला व्यक्तित्व ही प्रथमत: काम आता है। अगर एक मजदूर के कार्य की प्रशंसा करके उसके पीठ पर हाथ रख दिया जाए तो उसका उत्साह बढ जाता है और दुगनी उर्जा से काम करता है। कुछ ऐसा ही मिलनसार स्वभाव मुझे लगा।

पद्मसिंग, तुहिना,पीके सिन्हा, पीऊ, एंजिल, दादा,नेहा
फ़ैक्टरी के भ्रमण से पहले उन्होने कहा कि मै आपको सीमेंट बनाने एवं पावर बनाने की प्रक्रिया यहीं समझा देता हूँ जिससे आपको फ़ैक्टरी में घूमते वक्त समझने में आसानी हो जाएगी।

बस फ़िर क्या था शुरु हो गया एक इंजीनियरिंग का पीरियड। बहुत दिनों बाद लगा कि एक क्लास रुम में हम बैठे हैं और सीनियर प्रोफ़ेसर हमारा मार्ग दर्शन कर रहे हैं।

क्लास रुम और यहां फ़र्क इतना बस था कि क्लास रुम में नास्ता नहीं दिया जाता यहाँ नास्ते की प्लेट हमारे हाथों में थी कोल्ड ड्रिंक के साथ। बच्चे भी लेक्चर का आनंद ले रहे थे। एंजिल भी मजे से हमें जानकारी दे रहे थे। हमें भी आनंद इसलिए आ रहा था कि नोट्स किसी से चेक नहीं कराने हैं।
इंकलाब जिंदाबाद

सीमेंट के लिए लाईम स्टोन कहां से आता है और उसमें अन्य केमिकल मिलाकर क्लिंकर कैसे बनाया जाता है? क्लिंकर की पिसाई कहां होती है और उसे सीमेंट के ग्रेड में बदल कर कैसे उपयोग में लाया जाता है? इन सब विषयों पर चर्चा हुई।

उन्होने हमारे प्रश्नों का जवाब भी खुश होकर दिया। जिससे हमारे ज्ञान में वृद्धि हुई। थर्मल पावर प्लांट में कोयला हमारे बिलासपुर से ही आता है। पानी पास के स्रोत से।

पानी को फ़िल्टर किया जाता है, उससे सारे मिनरल निकाल लिए जाते हैं। तब पानी और कोयले के संयोग से बनी हुई भाप टरबाईनों को घुमाती है और उससे बिजली प्राप्त होती है। हमने टरबाईने देखी और विद्युत नियंत्रित करने वाला कंट्रोल रुम भी।

जहाँ 5-6 लोग 24 घंटे निगरानी करते रहते हैं। कहीं किसी उपकरण में खराबी तो नहीं आ गयी। यहाँ 75 से 100 मेगावाट तक बिजली बनती है। मैने कोरबा का प्लांट देखा था वहां 400x4 मेगावाट बिजली बनती है।
सीमेंट प्लांट

एंजिल हमें पावर प्लांट में स्वयं घुमाने ले गए, साथ में उनका स्टाफ़ भी था। इनके कार्यों में कुशल प्रबंधन की झलक हमें स्पष्टत: दिखाई देती है।

पहले थ्योरी समझने के कारण हमें प्लांट में लगी हुई मशीनों के विषय में समझने मे आसानी हो गयी। तुहिना ने वहाँ पर भी एंजिल से सवाल किए और प्लांट के सिस्टम को गंभीरता से समझा।

पद्म सिंग और मैं चित्र लेते रहे अपनी यादों को स्थाई रुप से संजोने के लिए। प्रद्युत भी सहभागी थे। ( इनकी चर्चा पद्मसिंग जी ने की है)

यहाँ हेलमेट लगाना आवश्यक है सुरक्षा की दृष्टि से। जब हम ग्राऊंड पर फ़ैक्टरी देखने निकले तो वर्षा प्रारंभ हो चुकी थी। इसलिए गाड़ी में बैठे बैठे ही फ़ैक्टरी का एक चक्कर लगाया।
क्लास के बाद चर्चा और चाय

जहाँ से प्लांट में लाईम स्टोन आता है वहां से लेकर क्लिंकर के निर्माण होने तक। हमें फ़ैक्टरी में आए लगभग तीन घंटे हो चुके थे अब भूख लगने लगी तो वहां से सीधे ही घर पहुंच गए खाने पर।

राजस्थान में शादियों में फ़ीणी और घेवर का अलग ही महत्व होता है। घेवर में फ़ुल चाशनी होती है और फ़ीणी में कम। इसलिए मैने फ़ीणी का स्वाद लिया, बड़ी मजेदार थी।

थोड़ी देर में एंजिल भी खाने पर आ गए और उनसे काफ़ी चर्चा हुई। एंजिल से एक यादगार मुलाकात ताजिंदगी याद रहेगी। हमने इस मुलाकात को यादों के खजाने में जमा कर लिया है।

एक यायावर की डायरी में यह मुलाकात दर्ज हो चुकी है। इंदु बहन के बहाने से यह यादगार मुलाकात हुई, उन्हे ढेर सारा साधुवाद और एंजिल को भी ढेर सारी शुभकामनाएं, हमेशा यही स्नेह बनाए रखें। आगे पढ़ें 

27 टिप्‍पणियां:

  1. आपके पोस्‍ट के माध्‍यम से शिव कुमार तिवारी जी से मिलना सुखद लगा .. सिमेंट और बिजली बनने की जानकारी भी मिली .. आभार !!

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  2. आपके नोट्स आप न कराएं, हमने चेक कर लिया, वैसे 'पास' किया ढेर सारे नंबरों सहित.
    ''यह मुझे विश्वस्त सुत्रों से ज्ञात हुआ है इसलिए मैं भी इन्हे एंजिल ही कहुंगा'' में सूत्रों, इन्‍हें, कहूंगा ... जैसे कुछ संशोधनों पर विचार कर सकते हैं.

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  3. @ राहुल सिंग

    सही कर दिया गया है। बताने के लिए आभार

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  4. bhaai llit ji aek jivnt chitrn bdhayi ho . akhar khan akela kota rajsthan

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  5. अच्छी प्रस्तुति. प्रेरणा देने वाली जानकारी के लिए आभार.

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  6. आप के साथ हम भी घूम लिए ।
    सुन्दर प्रस्तुति।

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  7. एंजिल जी से अच्छी मुलाक़ात और सीमेंट फैक्टरी का ज्ञानवर्द्धक लेख ...अच्छा लगा ..

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  8. शिव कुमार जी का परिचय पा कर हमे भी अच्छा लगा। जल्दी जल्दी अपनी डायरी के पन्ने खोलते रहिये। शुभकामनायें।

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  9. एक एन्जिल, एक देवदूत, एक कर्मठ अधिकारी.. एक व्यक्तित्व के इतने आयाम... सचमुच अनुकरणीय व्यक्तित्वा!! तिवारी जी से मुलाक़ात बहुत ही प्रेरणादायक रही!!

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  10. bade logon kee yahi pahchaan hoti hai ..ve kabhi khud ko bada nahi dikhate zameen se jude rahte hain ..bahut achhee post.

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  11. आपकी पोस्ट की चर्चा कल (18-12-2010 ) शनिवार के चर्चा मंच पर भी है ...अपनी प्रतिक्रिया और सुझाव दे कर मार्गदर्शन करें ...आभार .

    http://charchamanch.uchcharan.com/

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  12. बहुत सुंदर जानकारी जी कभी हम गये तो यहां जरुर जायेगे, धन्यवाद

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  13. एक सुखद व्यक्ति के बारे में जानकर अच्छा लगा।

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  14. बढ़िया मुलाकात...



    मगर आप कहाँ गुम हो गये??

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  15. इस प्रकार के लोगो को अपनी पोस्ट में जगह देकर एक सराहनीय कार्य कर रहे है |

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  16. हम तो हर पोस्ट पर देर से पहुँचते हैं... लेकिन उस दिन फैक्ट्री में आपके साथ ही क्लास ले रहे थे ... पढ़ने में सब से जिज्ञासु "बच्ची" का जिक्र करना शायद आप भूल गए हैं... यद्यपि फोटो देख कर समझने वाले समझ जायेंगे... यादें ताज़ा करने के लिए आपका आभार !!

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  17. एन्जिलजी के बारे में पढ़ कर बहुत अच्छा लगा.
    किसी भी परेशानी,दुःख तकलीफ में ये तुरंत आ खड़े होते हैं.और आम लोगो की तरह कहते नही-'मेरे लायक कोई काम हो तो बताना'
    बल्कि अपने स्तर पर पता लगा कर उस व्यक्ति के कष्ट-मुक्त करके छोड़ते हैं.लोग अक्सर इनसे अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक मसले तक शेअर करते हैं.अपनी इतनी लम्बी उम्र में मैंने उनके जैसा दृढ चरित्र और ज्ञानी व्यक्ति नही देखा.हिंदी,अंग्रेजी,संस्कृत,उर्दू,फ़ारसी के ज्ञाता है.किसी भी विषय की गजब पकड़ तक नोलेज रखते हैं जिसका ज़िक्र ललित भैया ने नही किया है.
    लोग यूँही नही कहते तिवारी साहब को 'एन्जिल'
    बदले में इन्होने कभी थेंक्स की उम्मीद तक नही की.'गीता के सार' को जी रहे हैं एन्जिलजी.

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  18. @ एंजिल जी की टिप्पणी मेल से

    "Bahut badi baat kah di bhaiya. Ye chhota sa admi jo insaan banene ki koshish me laga hai.

    Jo bhi ho, itne achchhe achchhe logo se milane ke liye bahut bahut shukriya.

    jai ho indu maiyya ki. jisko chahen sona bana den, paaras (patthar)jo hai.

    Snmayabhav me aapko quality time nahi de saka, iske liye chhama kar dijiyega.

    agar phir mil paye to bahut khushi hogi.

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  19. फीणी से समझा कि गोवा वाली फेनी जैसी कोई चीज होगी,
    सो मेरे किस काम की, पर पढ़ कर लगा कि मेरे ही काम की चीज है,
    याद रहने से आगे काम देगा.

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