सोमवार, 6 अगस्त 2012

उदयप्रकाश: लेखक पार्लियामेंट होता है

eउदय प्रकाश की कहानी से मेरा परिचय लगभग 20 वर्ष पूर्व हुआ था। इंडिया टूटे के कहानीकार विशेषांक में "वारेन हेस्टिंग्स का सांड" पढी थी। उसके बाद उन्हे कुछ और पढा। फ़िर भिलाई रंग शिल्पी के नाट्य समारोह के आयोजन में इनकी कहानी "रामसजीवन की प्रेमकथा" का मंचन नागपुर की नाट्य संस्था ने किया था। जिसके शुभारंभ का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ। उस दिन शरद कोकास भाई ने उदय प्रकाश से हमारी बात करवाई। कल उनसे प्रत्यक्ष मुलाकात महंत घासीदास संग्रहालय के सभागृह में नेलसन फ़ाउंडेशन द्वारा आयोजित अखिल भारतीय मुंशी प्रेमचंद सम्मान समारोह के दौरान हुई। रायपुर की सारी साहित्यकार बिरादरी सम्मान समारोह में उपस्थित थी। सम्मान समारोह के दौरान वरुण देवता प्रसन्न होकर लगातार बरस रहे थे। सम्मान समारोह सम्पन्न होने पर भी बारिश नही रुकने के कारण सभागृह में आपस में चर्चा करते हुए हम बारिश के रुकने की प्रतीक्षा कर रहे थे।

कार्यक्रम के प्रारंभ में अपने उद्घाटन भाषण में पद्म श्री जे एम नेलसन ने कहा कि - मै बहुत भावुक हूँ, शब्दों के माध्यम से अपनी बात कहना मेरे लिए कठिन है। एक शिल्पकार होने के नाते मेरी कला ही बोलती है। मेरी माँ शिक्षक थी, उनके साथ रहते मैं विभिन्न ग्रामीण स्कूलों में पढा। मेरी पृष्ठभूमि ग्रामीण है और वे गाँव भी मुझे प्रेमचन्द की कहानियों के गांव लगते है। इसलिए मैं अपने को प्रेमचंद के अधिक करीब पाता हूँ। प्रेमचंद के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करने के लिए हमने अखिल भारतीय स्तर पर सम्मान देने का निश्चय किया। उदय प्रकाश जी से फ़ोन पर चर्चा हुई और उन्होने रायपुर आना स्वीकार किया। इसके लिए मैं उन्हे धन्यवाद देता हूँ।
पद्मश्री जे एम नेल्सन
छत्तीसगढ के शिल्पकार पद्मश्री जे एम नेलसन ने प्रतिभाओं को सम्मानित करने का बीड़ा नेलसन फ़ाउंडेशन द्वारा उठाया। विगत 4 वर्षों से वे अपने संसाधनों पर प्रतिभाओं को सम्मानित कर उनका उत्साह बढा रहे हैं। राजेश गनोदवाले ने बताया कि सम्मान समारोह से एक दिन पहले उनका आपरेशन हुआ, अस्वस्थता के बावजूद भी वे इस कार्यक्रम की सफ़लता के लिए लगातार चिंतित थे। एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन कर उसे सफ़ल बनाना बड़ी बात है। नेलसन जी की जीवटता को मै सेल्यूट करता हूँ। कार्यक्रम 11 बजे प्रारंभ होना था, लेकिन मुख्यातिथि विधान सभा अध्यक्ष धरम लाल कौशिक एवं अति विशिष्ट अथिति शिक्षामंत्री एवं संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के विलंब से आने के कारण सम्मान समारोह लगभग डेढ घंटे विलंब से प्रारंभ हुआ। स्वागत भाषण के पश्चात उदय प्रकाश को साहित्यिक सेवाओं के लिए अखिल भारतीय मुंशी प्रेमचंद सम्मान से सम्मानित किया। सम्मान स्वरुप 11 हजार राशि नगद एवं शाल श्री फ़ल के साथ स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया।

मुंशी प्रेमचंद की कहानियों पर राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। प्रतियोगिता में सम्मिलित उत्कृष्ट चित्रों की प्रदर्शनी सभागृह के सामने लगाई गयी थी। बच्चों ने अपनी कल्पना से प्रेमचंद की कहानियों का सुंदर चित्रण किया। ईदगाह कहानी के चित्र को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। किसी भी साहित्यकार के साहित्य पर चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित करने से चित्रकार उस साहित्यकार की रचनाओं से परिचित होता है। वरना वर्तमान में नयी पीढी इन्हे बिसराते जा रही है। नयी पीढी को मुंशी प्रेमचंद के साहित्य से परिचित कराने यह कार्य पसंद आया। प्रेमचंद स्मृति राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता के विजेता डीपीएस भिलाई की आस्था केजरीवाल, डीएवी भिलाई की वंशिका सिंह और राज श्री वर्मा को प्रमाण पत्र के साथ सम्मान राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह एक अच्छी शुरुआत है।

उदय प्रकाश एवं ललित शर्मा
उदय प्रकाश कहते हैं कि" मै एक कुम्हार हूँ, जिसने कभी कोई कमीज सिल दी और लोग दर्जी कहने लगे। लेकिन सच तो यही कि मैं एक कुम्हार हूँ।" अपने उद्भोधन में उन्होने कहा कि - हिन्दी कविता में मुक्तिबोध का जो स्थान है, वही स्थान हिन्दी लेखन में मुंशी प्रेमचंद का है। लेकिन दोनो ही मूलत: हिन्दी साहित्य से संबंधित नहीं हैं। दो महान साहित्यकारों के विषय में अपनी बात रखते हुए उदय प्रकाश ने कहा कि मुक्तिबोध का संबंध मराठी साहित्य से है तो प्रेमचंद का उर्दू से। इसके बावजूद हिन्दी साहित्य में दोनो हमारे अंदर मौजूद हैं। लेखक समाज में उपेक्षित होता है, एक अर्थों में दलित, लेखक किसी एक का नहीं होता, वह सबका होता है, पार्लियामेंट की तरह। हम एक संसद हैं और हमें इसी तरह देखा जाना चाहिए। मेरी माँ बोली भोजपुरी है, मेरे पिता जी बघेली बोलते थे और मैं छत्तीसगढ में रहने के कारण छत्तीसगढी बोलता हूँ, इस तरह त्रिभाषिय हूँ। उनका बेटा विदेश में रहने के कारण तीन भाषाएं बोलता है। इसलिए लेखक किसी एक भाषा का नही हो सकता।

उदय प्रकाश एवं फ़िल्मी पत्रिका मिशाल के प्रधान सम्पादक अनिरुद्ध दूबे
सम्मान समारोह में मदर टेरेसा सम्मान भी दिए गए। जनजातिय क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए डॉ देवीचरण धूर्वे, महिला सशक्तिकरण के लिए गुरमीत धनेई, चिकित्सा सेवा के लिए डॉ शुभाशीष मंडल, बाल चिकित्सा के लिए डॉ मनोज प्रभाकर, नेत्र चिकित्सा के लिए शिशिर मिश्रा, समाज सेवा के लिए केदार सिंह राठौर एवं मानव सेवा के लिए ज्ञानचंद जैन को सम्मानित किया गया। विधानसभा अध्यक्ष धरम लाल कौशिक ने कहा कि उन्होने प्रेमचंद को पढा है। वे जन लेखक थे, दलितों की समस्याओं को उन्होने अपनी लेखनी के माध्यम से भाषा दी। शिक्षामंत्री एवं संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि मुक्तिबोध की धरती पर उदय प्रकाश जी स्वागत है। नेलसन जी ने मुंशी प्रेमचंद सम्मान अखिल भारतीय स्तर पर प्रारंभ करके बड़ा काम किया है। उन्होने उपस्थित समस्त लेखक एवं साहित्यकार बिरादरी का धन्यवाद दिया।

सभागृह में उपस्थित साहित्यकार गिरीश पंकल एवं ब्लॉगर ललित शर्मा
ब्लॉगर ललित शर्मा उवाच - जहाँ तक भाषा की बात आती है तो दुनिया की कोई भाषा अकेले अपना विकास नहीं कर सकती। किसी भी भाषा के विकास में उसकी समकालीन प्रचलित सभी भाषाएं एवं बोलियाँ अपना योगदान देती हैं तभी वह भाषा अपना परचम लहरा पाती है। भारत विविधताओं का देश है। संस्कृति के साथ भाषाई विविधतताएं भी कायम हैं। 50 कोस में बोली बदल जाती है, नौकरी करने वाला हो या भ्रमण करने वाला वह भारत में तीन भाषाएं तो अवश्य बोल समझ लेता है। क्षेत्र एवं प्रांतवार भाषाओं की कड़ी एक दूसरे से गुंथी हुई हैं। अगर हम छत्तीसगढी से ही प्रारंभ करें तो भोजपुरी, झारखड़ी, मगही, मैथिली को उसके समीप पाते हैं, बिहार से उत्तर प्रदेश को जोड़े तो वहां की खड़ी बोली से लेकर राजस्थानी, गुजराती, हरियाणवी, पंजाबी, हिमाचली, कश्मीरी बोलियों और भाषाओं की एक विस्तृत मणिमाला तैयार हो जाती है। इसी तरह दक्षिण भारतीय भाषाओं की आपसी रिश्तेदारी है। भाषाई जिज्ञासा मुझ में हमेशा बनी रहती है और कई भारतीय भाषाएं बोल समझ लेता हूँ। कोई भी भाषा किसी अन्य प्रचलित भाषा का विरोध कर विकास नहीं कर सकती ऐसा मैं मानता हूँ।

17 टिप्‍पणियां:

  1. उदय प्रकाश जी को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनायें... क्षेत्रीय भाषाओँ और बोलियों के प्रति आपका स्नेह और जिज्ञासा प्रसंशनीय है, इसकी झलक आपकी पोस्ट में हमेशा देखने मिलती है.

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  2. भाषा की उदारता ही उसकी व्‍यापकता है, बधाई उदयप्रकाश जी और आयोजकों को, आपको भी.

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  3. ढेरों आकाक्षाओं से भरा उसका आकाश..

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  4. हे राष्ट्रस्वामिनी निराश्रिता,परिभाषा इसकी मत बदलो
    हिन्दी है भारत की भाषा , हिन्दी को हिंदी रहने दो,,,,,

    उदय प्रकाश जी को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनायें..
    RECENT POST...: जिन्दगी,,,,

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  5. सभी बधाई के पात्र हैं. आपने परिश्रम कर यह बात हम तक पहुंचाई इसके लिए आभार.

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  6. इस ब्लॉग के माध्यम से भी उदय प्रकाश जी को बहुत बहुत बधाई । इस कार्यक्रम में आना तय था , उदयप्रकाश जी से वादा था और नेल्सन भाई का आग्रह और आमंत्रण भी .. लेकिन परिवार में एक दुखद कार्यक्रम मे शामिल होने की अनिवार्यता के कारण आना नहीं हो सका । लेकिन विस्तार से यह रपट यहाँ पढ़ने को मिली सो अच्छा लगा । आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।

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  7. विभिन्न बोलिया या भाषाएँ एक दूसरे के संपर्क में आकर समृद्ध होती है , इनका विकास होता है ! ये एक दूसरे का रास्ता नहीं रोकती .
    उदयप्रकाशजी को बधाई !

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  8. उदय ओरकाश जी को बहुत बधाई ... भाषाएँ अक्सर परस्पर सम्बन्ध से फैलती हैं ... उनका विकास होता है ... ये एक सतत प्रक्रिया है ...

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  9. उदय प्रकाश जी को हार्दिक बधाई ...
    सार्थक प्रस्तुति !

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  10. उदय प्रकाश जी को हार्दिक बधाई ...

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  11. ksetriya basao ka sanyojan behad muskil hai,bt aapka yah skestra pre behad madhur hai,
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  12. उदय प्रकाश जी को हार्दिक बधाई और सार्थक प्रस्तुति के लिए आपका आभार!
    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें

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  13. उदयप्रकाश जी को हार्दिक बधाई। आयोजन की विस्तृत रिपोर्ट के लिये आपका आभार।
    आपके जरिये हमें बहुत से उत्सव, आयोजन, पयर्टन स्थलों की ऐसी जीवंत जानकारी मिल जाती है मानो हम वहां मौजूद हों।

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  15. उदयप्रकाश जी के प्रेमचंद सम्मान पाने के लिये बहुत बधाई । आपने उनका परिचय करवाया इसके लिये आपका धन्यवाद । बहुत दिनों बाद आपके ब्लॉग पर आई पर आप इसके लिये क्षमा कर देंगे ऐसी आशा करती हूँ । प्रेमचंद मेरे प्रिय लेखक रहे हैं और ईदगाह प्रिय कहानी ।

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