गुरुवार, 23 सितंबर 2010

एक चिड़िया अनेक चिड़िया.....ललित शर्मा

हिंद देश के निवासी सभी जन एक हैं...........

22 टिप्‍पणियां:

  1. आमीन। इस वीडियो के लिए आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  2. इस वीडियो को कौन भूल सकता है :) आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  3. हिंद देश के निवासी सभी जन एक हैं...........
    सुन्दर प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं
  4. राम राम सा
    श्रीमान जी अपके ब्लॉग पर से विडियों दिखाई नहीं दे रहा है। क्या खराबी है।

    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुंदर लगा चित्र पट जी, धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  6. हिंद देश के निवासी सभी जन एक है
    फूल हैं अनेक किन्तु माला तो एक है
    बहुत सुंदर...ये कोई भूल भी सकता है....?
    http://veenakesur.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  7. ये तो हमें हमारे बचपन में लेकर चला गया हमें बड़ा प्रिय था और जो सन्देश है वो भी अभी तक हमें तो याद है | मेरी बेटी को भी काफी पसंद है आशा करती हु की जब वो बड़ी हो तो वो भी इसमे दिया गया सन्देश हमेशा याद रखे|

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुतई उम्दा किये हो सरकार
    पर कुछेक ब्लागर हैं फ़ेक ब्लागर

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सुंदर लगा चित्र
    .........धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  10. मेरे मन्दिर तेरी मस्ज़िद का हो इक दरवाज़ा,
    पास से चर्च की घण्टी सुनाई दे मुझको
    घर बिरहमन के कुराने पाक़ पढ़ी जाए
    मौलवी दे दीवाली की बधाई सबको

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत ही प्यारा वीडियो है.....यहाँ शेयर करने का आभार

    उत्तर देंहटाएं
  12. पुराने दिनों की यादें ताजा हो गई भाई साहब, धन्‍यवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  13. मैंने अनुरोध किया तो कुमार अंबुज जी ने अपनी एक पुरानी कविता भेजी है। यह अब भी सामयिक है (अफसोस) ः-
    तुम्‍हारी जाति क्‍या है कुमार अम्‍बुज/ तुम किस के हाथ का खाना खा सकते हो/और पी सकते हो किसके हाथ का पानी/चुनाव में देते हो किस समुदाय के आदमी को वोट/ऑफिस में किस जाति से पुकारते हैं लोग तुम्‍हें/और कहॉं ब्‍याही जाती हैं तुम्‍हारे घर की बहन बेटियॉं/ बताओ अपने धर्म और वंशावली के बारे में/किस धर्मस्‍थल पर करते हो तुम प्रार्थनाऍं/ तुम्‍हारी नहीं तो अपने पिता/अपने बच्‍चों की जाति बताओ/ बताओ कुमार अम्‍बुज/इस बार दंगों में रहोगे किस तरफ/और मारे जाओगे किसके हाथों।

    उत्तर देंहटाएं
  14. मैंने अनुरोध किया तो कुमार अंबुज जी ने अपनी एक पुरानी कविता भेजी है। यह अब भी सामयिक है (अफसोस) ः-
    तुम्‍हारी जाति क्‍या है कुमार अम्‍बुज/ तुम किस के हाथ का खाना खा सकते हो/और पी सकते हो किसके हाथ का पानी/चुनाव में देते हो किस समुदाय के आदमी को वोट/ऑफिस में किस जाति से पुकारते हैं लोग तुम्‍हें/और कहॉं ब्‍याही जाती हैं तुम्‍हारे घर की बहन बेटियॉं/ बताओ अपने धर्म और वंशावली के बारे में/किस धर्मस्‍थल पर करते हो तुम प्रार्थनाऍं/ तुम्‍हारी नहीं तो अपने पिता/अपने बच्‍चों की जाति बताओ/ बताओ कुमार अम्‍बुज/इस बार दंगों में रहोगे किस तरफ/और मारे जाओगे किसके हाथों।

    उत्तर देंहटाएं
  15. इस पोस्ट को एक बार फिर ऊपर लाने की जरूरत है। रिपोस्ट कर फिर अपील जारी करने की जरूरत है।

    उत्तर देंहटाएं