बुधवार, 28 अप्रैल 2010

वह राज जो मुझसे छिपाया न गया

मित्रों किसी बात को ज्यादा दिनों तक छुपाया जाए तो वह राज कहलाती है। मै भी उस वाकये को छुपाना चाहता था,जिसे महीनों से कई तहों में दफ़्न करके रखा था।

चाह कर भी ब्लाग जगत के सामने नहीं रख पा रहा था। लेकिन अब राज खोल देना चाहता हुँ,मुझसे बोझ संभलता नहीं है। इसे उतार ही देना चाहिए। चलिए वह राज आपके सामने खोल ही देता हुँ।

बात यह है कि पाबला जी एक अच्छे शुटर हैं, हमने भी बहुत शुटिंग की है लेकिन उनके सामने टिकना बहुत मुस्किल है,उनके निशाने के आगे अच्छे-अच्छे शुटर पानी भरते हैं।

उनकी एके 47 गजब का सटीक निशाना साधती है। एक बार में 10 से लेकर 20 काटरेज तक का बर्स्ट मारती है और जब मैग्जिन फ़ुल लोड हो तो क्या कहने, बस तड़ तड़ तड़..........

आगे पीछे कुछ दिखता ही नहीं है सिर्फ़ रोशनी ही रोशनी  और घायल ही घायल। एक दिन हमने उन्हे पकड़ ही लिया शुटिंग करते-करते। अब आप खुद ही देखिए उनकी शुटिंग का अंदाज, कितना बेमिसाल है।

40 टिप्‍पणियां:

  1. बन्दूक तो हमेशा आप के हाथ में दिखाई देता है.
    पाबला जी के शूटिंग का स्टाईल तो देख लिया, हमारे यहाँ यही स्टाईल होती है जब भैंस का दूध निकालते हैं.

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  2. ये आसन कौन सा है जी?
    "मो सम कौन?" की टिप्पणी को ही हमारा इंडोर्समेंट माना जाए. उनसे बेहतर हम कह नहीं पायेंगे.

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  3. @मो सम कौन

    अभी तुमने पाबला जी की सारी क्वालिटी देखी ही कहां हैं...
    वो गाना सुना है न...

    तूने अभी देखा नहीं, देखा है तो जाना नहीं,
    दुनिया दीवानी मेरी, आगे-पीछे घूमें यहां,
    जो सोचे जो समझें वो करके दिखा दें,
    हम वो हैं जो दो और दो पांच बना दे...

    दरअसल पाबला जी एक पंथ, कई काज के अनुयायी हैं...अगले ओलंपिक खेलों के लिए पाबला जी कई विधाओं में एक साथ उतरने की तैयारी कर रहे हैं...मसलन शूटिंग, वेटलिफ्टिंग, रेसलिंग...

    एक बात और ये आसन नहीं है, ये दृश्य परिचायक है पाबला जी की फ्लेक्सिबल बॉ़डी का जो जिम्नाजियम के लिए बहुत ज़रूरी है...इस फील्ड में भी नाडिया कोमेनेची के बाद पाबला जी का नाम सबसे बड़ा होने वाला है...

    पाबला जी, बड़े दिणा बाद तुआडे नाल पंगा लैण दा मौका देता है ललित परा ने...

    जय हिंद...

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  4. कुछ और बताया जाय ,मसलन कितनी देर में लोड करते हैं ,कितने निशाने बिलकुल शिकार पर लगते हैं ,लबलबी खीचने में समय कितना लगता है ,कभी अनलोड भी होते हैं या नहीं ,आदि आदि ....कितने शिकार मारे अब तक ?

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  5. @ के एस सर:

    सर जी, गाने तो और भी सुन रखे हैं, पर मुद्दे वाली बात आप भी गोल कर गये।
    आपने भी वो पंजाबी गाना सुन ही रखा होगा, "पंगा न लै मेरे नाल. पंगा न लै" (पाबला साहब भी गा रहे होंगे, दरअसल पाबला जी एक पंथ, कई काज के अनुयायी हैं)।
    हम ठहरे मज़ाजीवी,मजे लेते रहेंगे।

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  6. मज़ाजीवी नहीं जी पंगाजीवी कहते हैं ऐसन प्राणी लोगन को ...
    और ई रहा शूटासन...flexibility में अब कौनो डाउट नहीं है बाबा .....और हाँ लग रहे हैं कि पक्का 'मध्यप्रदेश' में बासी हैं.....
    हाँ नहीं तो..!! :)

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  7. ...पाबला जी तुसी ग्रेट हो ... हो जायेगी बल्ले बल्ले ....हो जायेगी बल्ले बल्ले !!!!

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  8. तो यही है उनकी स्‍फूर्ति का राज

    स्‍वस्‍थ जीवन का बज रहा साज

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  9. चलो बढ़िया आप वापस आ गए ....नहीं तो हम ये शूटिंग नहीं देख पाते :)

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  10. ललित जी!
    उस राज का पर्दाफास करने के लिए शुक्रिया!

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  11. भई हम तो कुछ नहीं कहेंगे इस बारे में!

    कुंवर जी,

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  12. पाबला जी की शूटिंग के क्या कहने! और उनकी शूटिंग को आपने शूट कर लिया, आपके भी क्या कहने!

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  13. हां हमने भी देखा है पाब्ला जी की शूटिंग का कमाल्।

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  14. अरे भाइयो किसी ने गौर किया क्या?? बन्दूक की नली तो अपनी तरफ किये बैठे हैं ??? इरादा क्या है ??
    किसी ने कहा.. जी करता है सेना में भरती हो जाऊं लेकिन यही नहीं पता कि बन्दूक की नली किधर को रखनी होती है ... कोई बोला किधर भी रखो ... भला देश का ही होगा .... हा हा हा

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  15. शूटर को शूट कर दिया जी आपने

    प्रणाम

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  16. villege me to pani ka louta,gilas ya bottle lekar aisa aasan karte hain.narayan narayan

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  17. @अरविंद मिश्रा जी
    पाबला जी की गन हमेशा लोड़ ही रहती है मैग्जिन चेंज करने का समय है 5 सेकंड। सारे निशाने 10 प्वाइंट (बुल)पर लगते हैं। ट्रिगर चार्ज ही रहता है..........शिकारो के सिर और खाल तो आप इनके घर की दीवारों पर टंगे हुए देख सकते हैं।

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  18. चलो बढ़िया आप वापस आ गए ....नहीं तो हम ये शूटिंग नहीं देख पाते

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  19. are sarkaar !
    paabla jee ke hath men bandook ke saath mobile bhee dikh rahaa hai ...
    yaanee '' door sanchaaree aur takneekee shot '' !!!
    waise nishaane to lag hee jaate hai !
    dekh rahaa hun nishaanaa sahee hai ! aabhaar !!!

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  20. यह एक और नयी विशेषता पता चली,पाबला जी के बारे में....कई सारे गुण एक साथ हैं...

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  21. पाबला जी अगर हम इस स्टाईल मै बेठे तो पेंट तो जरुर फ़ट जायेगी, वेसे क्या बात है जी

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  22. ललित जी बात पचा ही जाते तो अच्छा होता।
    अब जब बात सामने आ ही गयी है तो आपकी भी तारीफ करेंगे। फोटो जबरदस्त उतारी है।

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  23. ये पाबला जी का बाई डिफ़ाल्ट आसन है जो कि अक्सर उस वक्त अपने आप निकल जाता है जब उनके हाथ में उनका कैमरा होता है और सामने शिकार आ जाते हैं , शूटिंग भी सायलेंसर फ़िट करके की जाती है मजाल है जो एक भी शौट मिस कर जाए । मगर ललित जी ने इस आसन में ही एक शूटर को शूट कर लिया , इसे कहते हैं सोने पर सुहागा

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  24. अरे भैया , ये इस्टाइल तो हमको भी नहीं आती थी।
    बढ़िया पोज़!

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  25. क्या कहने साहब
    जबाब नहीं
    प्रसंशनीय प्रस्तुति
    satguru-satykikhoj.blogspot.com

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  26. क्या कहने साहब
    जबाब नहीं
    प्रसंशनीय प्रस्तुति
    satguru-satykikhoj.blogspot.com

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  27. आप बेकार ही में इत्ती लम्बी दम्बूक रखे रहते हो ललितजी।
    देखो ना पाबला जी मिनी एके ४७ से शूटमशूट मचाए पड़े हैं, हत्ता कि एक गोल धरती भी संभाल रक्खी है आगे की ओर। हा हा।

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  28. हम तो पहले ही यहाँ से भागने के लिए बिस्‍तर समेट रहे हैं, तो हमें तो क्‍या निशाना बनाएंगे पाबला जी। अब आप लोग ही इनकी बंदूक का निशाना बनिए। हम तो चले।

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  29. स्मार्ट इंडियन जी की ही टिप्पणी को मेरी टिप्पणी माना जाए... :)

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  30. बाप रे.. हम तो डर गए.. काँप रहे हैं थर-थर.. :)

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  31. ललितजी! आप भी कम नही 'शूटर' को ही 'शूट' कर लिया.
    ये तो शूट करके सर और घर की दीवार पर तांक देते हैं.
    आपने इन्हें ब्लॉग पर चिपका दिया.
    हा हा हा

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