सोमवार, 5 अप्रैल 2010

एक SMS, जिसे मैने आपके साथ बांटना जरुरी समझा

मित्रों एक SMS मुझे मिला, तो मैने सोचा की इस जानकारी को आपके साथ बांटा जाए।
इसी उद्देश्य से मैं इसे जस का तस आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ।

एक लोकसभा सांसद की तनख्वाह 42,000
आफ़िस खर्च 14,000
सांसद हास्टल मुफ़्त
बिजली 5000 युनिट मुफ़्त
टेलीफ़ोन की 1,70,000 काल मुफ़्त
ट्रेन टिकिट मुफ़्त में
दिल्ली हवाई यात्रा मुफ़्त में
सालाना कुल खर्च लगभग 32लाख
5साल में 1करोड़ 60 लाख
543सांसद 855करोड़
इस तरह हमारे टैक्स की 
गाढ़ी कमाई को निगल रहे है।
एक सजग भारतीय नागरिक होने के नाते 
हमको इसकी जानकारी होनी चाहिए
जिससे इनकी करतूतों पर रोक लग सके।

23 टिप्‍पणियां:

  1. ...इनके साथ साथ रिटायर हो चुके सांसद भी "रबडी-मलाई" खा रहे हैं...जय हो ...जय हो .....जय हो ...!!!!

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  2. सही बात। लोकसभाध्‍यक्ष के बारे में भी कुछ जानकारी यहां है http://khetibaari.blogspot.com/2010/04/blog-post_03.html

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  3. इसके बाद भी तो इनका पेट कहाँ भरता है ? घोटाले पर घोटाले किये जाते है | एक बार एम् पी बनने के बाद सात पुस्तों तक के लिए धन संपदा का जुगाड़ कर लेते है ये हमारे माननीय |

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  4. वाकई कमाल की जानकारी है. इन धनकुबेरो के लिए ये पैसा तो केवल हाथ खर्ची का है. इसके अलावा इन गुंडे छाप सांसदों की सुरक्षा इत्यादि पर, जनता की सुरक्षा को ताक में रख कर, अलग से पैसा खर्च होता है. और जैसा रतन सिंह जी ने कहाँ है इन सब के ऊपर घोटालों का पैसा, सरकारी नीतियों से चुराया हुआ पैसा इनकी अलग कमाई है. धन्य है गरीब देशवासियों के अमीर नेता.

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  5. इतने पर भी इनका पेट कहाँ भरता है?...संसद में सवाल पूछने तक के पैसे मांगते हैं

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  6. एक सांसद पाँच साल में सात पुश्तों तक का घऱ भर देता है।
    यह व्यवस्था का दोष है। इसे बदलने के बारे में आप का क्या विचार है?

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  7. हमें तो यही जानने की उत्सुकता है कि आखिर इन्हें वेतन किस बात का मिलता है?

    वेतन मिलता है कर्तव्य के निर्वहण के बदले में। कोई ड्यूटी लिस्ट है क्या इनके लिये और कर्तव्य पूरा न करने पर दण्ड का कोई प्रावधान है क्या इनके लिये?

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  8. हमें तो बहुत अफ़्सोस है कि हम लोकसभा सदस्य नही बन पाये.:(
    काश भविष्य मे ऐसा हो सके. इसी उम्मीद के सहारे हैं.

    रामराम.

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  9. मैं भी तो यही कहता फिरता हूँ ललित जी कि कब तक , आखिर कब तक ? इनकी उपयोगिता क्या है कोई समझा दे !

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  10. har saakh pe ullu baitha hai anjaame julista kyaa hoga.
    jab ek hi ullu kafi hai barbaade gulista karne ko.
    ........our kyaa kahen.

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  11. महोदय,

    पिछले कई दशक से हमारे समाज में महिलाओं को पुरुषों के बराबर का दर्जा देने के सम्बन्ध में एक निर्थक सी बहस चल रही है. जिसे कभी महिला वर्ष मना कर तो कभी विभिन्न संगठनो द्वारा नारी मुक्ति मंच बनाकर पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जाता रहा है. समय समय पर बिभिन्न राजनैतिक, सामाजिक और यहाँ तक की धार्मिक संगठन भी अपने विवादास्पद बयानों के द्वारा खुद को लाइम लाएट में बनाए रखने के लोभ से कुछ को नहीं बचा पाते. पर इस आन्दोलन के खोखलेपन से कोई भी अनभिज्ञ नहीं है शायद तभी यह हर साल किसी न किसी विवादास्पद बयान के बाद कुछ दिन के लिए ये मुद्दा गरमा जाता है. और फिर एक आध हफ्ते सुर्खिओं से रह कर अपनी शीत निद्रा ने चला जाता है. हद तो तब हुई जब स्वतंत्र भारत की सब से कमज़ोर सरकार ने बहुत ही पिलपिले ढंग से सदां में महिला विधेयक पेश करने की तथा कथित मर्दानगी दिखाई. नतीजा फिर वही १५ दिन तक तो भूनते हुए मक्का के दानो की तरह सभी राजनैतिक दल खूब उछले पर अब १५ दिन से इस वारे ने कोई भी वयान बाजी सामने नहीं आयी.

    क्या यह अपने आप में यह सन्नाटा इस मुद्दे के खोख्लेपर का परिचायक नहीं है?

    मैंने भी इस संभंध में काफी विचार किया पर एक दुसरे की टांग खींचते पक्ष और विपक्ष ने मुझे अपने ध्यान को एक स्थान पर केन्द्रित नहीं करने दिया. अतः मैंने अपने समाज में इस मुद्दे को ले कर एक छोटा सा सर्वेक्षण किया जिस में विभिन्न आर्थिक, समाजिक, राजनैतिक, शैक्षिक और धार्मिक वर्ग के लोगो को शामिल करने का पुरी इमानदारी से प्रयास किया जिस में बहुत की चोकाने वाले तथ्य सामने आये. २-४०० लोगों से बातचीत पर आधारित यह तथ्य सम्पूर्ण समाज का पतिनिधित्व नहीं करसकते फिर भी सोचने के लिए एक नई दिशा तो दे ही सकते हैं. यही सोच कर में अपने संकलित तथ्य आप की अदालत में रखने की अनुमती चाहता हूँ. और आशा करता हूँ की आप सम्बंधित विषय पर अपनी बहुमूल्य राय दे कर मुझे और समाज को सोचने के लिए नई दिशा देने में अपना योगदान देंगे.

    http://dixitajayk.blogspot.com/search?updated-min=2010-01-01T00%3A00%3A00-08%3A00&updated-max=2011-01-01T00%3A00%3A00-08%3A00&max-results=6
    Regards

    Dikshit Ajay K

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  12. कौन कहता है हमारा देश गरीब है?
    धीरे धीरे गरीबी भले न हटे
    बेचारे गरीब हटने के करीब हैं
    बहुत सुंदर एस एम एस

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  13. क्यों जले पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हो सर जी?क्या मिलेगा ये जानकारी अपने पास संजो कर रखने पर!वो बेशर्म तो इसे भी कम बताते रहते है!
    कुंवर जी,

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  14. यानि कि अब इलैक्शन लडने के बारे में सोचा जाए....देखते हैं शायद किसी पार्टी से टिकट का जुगाड हो जाए, नहीं तो निर्दलीय ही सही :-)

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  15. ये हुई ना बात.जियो ललित जियो.ऐसे ही बत्ती देते रहो,बढिया एसएमएस.

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  16. माननीयों के बारे में ऐसी चर्चा की हिम्मत नहीं अपनी।
    पहले मूँछें बढ़ाएँ, फिर बोलें। तब भी ऐसा रोब थोड़े ही आता है सबके चेहरे पर।
    आप ही एस-एम-एस करते रहें, छापते रहें।
    हम आपके साथ हैं, पीछे-पीछे।
    अगर भागना पड़ा तो हमसे आगे नहीं निकल पाएगा कोई, हाँ!

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  17. इसीलिए कहते हैं --भगवान् जब देता है, छप्पर फाड़ के देता है । लेकिन उससे पहले सांसद बना देता है।

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  18. राम चंद्र कह गये सिया से ऎसा कल युग आयेगा, हंस चुगेगा दाना तुन्का कोवा मोती खायेगा.....

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  19. Bahut achhi jaankari prastuti ki hai aapne... Sarkari office mein 20-25 varsh baad bhi parmanent nahi hone aur mahaj 3500-4000 Rupees mein kaam karne walon kee inhe koi khabar nahi.......
    Sirf table thap-thapakar swayambhu bankar inka pay badhane ka vidheyak paas hokar usi month mein mil bhi jaata hai...

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  20. ललित भाई मेरा मत है कि जो खर्चे का विवरण आपने दिया है वो बडी समस्या नही है. सम्स्या ये है कि इसके बाद भी वो देश के लिये क्या कर रहे है. और कौन लोग है जो चुनकर आ रहे है. देश के लिये उनके सोच और कर्म क्या है? ये भी कि उनकी जवाबदेही क्या है? चलो वो जनता के लिये कवाब देह है तो क्य इतना पैसा पाकर वो अपने काम के प्रति ईमानदार है. नही तो फिर इस व्यबस्था को बदलने के लिये हम और आप क्या कर रहे है.

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