शनिवार, 26 फ़रवरी 2011

इनकम टैक्स छापा और वेवफ़ा मुर्गी : व्यंग्य

पूछ-परख दो तरह के लोगों की ही होती है, कुख्यात या विख्यात। कुख्यात होने के लिए दुष्कर्म करने पड़ते हैं, विख्यात होने के लिए सत्कर्म। जीवन भर सत्कर्म करो लेकिन कोई पूछने वाला नहीं रहता।
लेकिन एक बार किसी हवाले-घोटाले में नाम आ जाए सारा जग उससे परिचित हो जाता है। परसों की ही बात है, एक पत्थर की दूकान वाले के यहाँ इनकम टैक्स का छापा पड़ गया। जैसे ही यह खबर शहर में फ़ैली, पड़ोसी को बुखार चढ गया। 
आते ही बोला-“महाराज किरपा करो, इनकम टैक्स वालों ने बैंड बजा रखी है।“

मैने कहा-“बढिया तो हो रहा है, जिसकी इनकम नहीं उसकी कदर नहीं और तुमने कौन सी कसर छोड़ रखी है। यहाँ वहाँ जहाँ तहाँ सब खदाने तुम्हारी ही हैं। करोड़ों का कारोबार चलता है।“

“प्रभु ऐसा नहीं है, जैसा आप समझते हैं। ग्राहक फ़ंसाने के लिए रोल पट्टी तो देना पड़ता है। थोड़ा बहुत क्या झूठ बोल दिया, पंगे ही गले पड़ गए।“

“मतलब जैसा तुम कहते हो वैसा नहीं है, मतलब सरासर झूठ। कंगले के कंगले। तब तो ठीक है कि तुम्हारे यहाँ इनकम टैक्स का छापा पड़ जाए।“

“मरवाओगे क्या प्रभु मुझे।“ माथे पर पसीना चुचवाते वह बोला।

“अरे भाई जिस कंगले के यहां इनकम टैक्स का छापा पड़ जाता है। उसकी मार्केट वैल्यु बढ जाती है। बाजार में जिसको कोई दो रुपए की उधारी न दे, छापे के बाद उसे करोड़ों की उधारी मिल जाती है। तुम्हे पता है कि नहीं कल्लु मल बनिए की बेटी का रिश्ता नहीं हो रहा था। उसका कोई रिश्तेदार इनकम टैक्स में अफ़सर है, उसने कल्लु मल के यहाँ छापा लगवा दिया। बस फ़िर क्या था दूसरे दिन से लड़के वालों की लैन लग गयी। इनकम टैक्स के छापे के बहुत फ़ायदे हैं।“

“यह तो आपने बहुत ज्ञान की बात बताई महाराज।”

“अरे मैं तो कब से चाह रहा हूँ कि मेरे घर पर भी कोई इनकम टैक्स की रेड मारे। जिससे मेरा भी नाम नामी-गिरामियों की लिस्ट में आ जाए। लेकिन ससुरे हमारा नाम का बोर्ड देख कर ही भाग लेते हैं। कहीं हम उनके गले ना पड़ जाएं, कौन कवि लेखक से पंगा ले?   कविता-व्यंग्य मार-मार मुंह सूजा देगा। न इधर के रहेंगे न उधर के।“

“हां! आज तक सुना नहीं किसी कवि-लेखक के यहाँ इनकम टैक्स का छापा पड़ा हो।“

“जिसका खुद का ही छापा खाना हो, उसे कौन कैसे छापेगा?

अब चचा को ही लो, हर कार्यक्रम में वे किसी ना किसी कवि,लेखक,साहित्यकार का सम्मान करते हैं। कार्यक्रम न भी हो तो अनुराग के साथ घर तक अभिनन्दन, सम्मान-पत्र भेज देते हैं, अब तक इतना सम्मान बाँट चुके हैं कि उनका ही सम्मान जाता रहा। 

परसों ही कह रहे थे- "कोई हमारा भी सम्मान कर दे, थोड़ा ही सही। कंगाल कर दिया सालों ने सम्मान ले-लेकर।"
हमने कहा-" इनकम टैक्स की रेड मरवा लें फ़िर देखे सम्मान की बरसा होने लगेगी चारों तरफ़ से।“

चचा को बात जंच गयी, उन्होने भी अपने रिश्तेदार से सम्पर्क किया। जल्द ही उनके यहाँ भी इनकम टैक्स की रेड पड़ जाए तो सम्मान गति को प्राप्त होएं। अब तो जिन्दगी में दो ही काम रह गए हैं सम्मान पाना और सम्मान करना। अब चैन नहीं है। रिश्तेदार भी ने भी सोचा कि इस कंगले के यहाँ इनकम टैक्स की रेड पड़वा दुंगा तो साला और भी अधिक अकड़ कर चलेगा। अभी तो अपने मतलब से पेट में घुसा जा रहा है। उसने भी बदला लिया। चचा के दुश्मन पड़ोसी के यहां इनकम टैक्स की रेड पड़वा दी।

पड़ोसी के यहाँ इनकम टैक्स की रेड की खबर सुनते ही चचा झनझना गए। कैसे-कैसे रिश्तेदार हैं विपत्ति के टैम काम भी नहीं आते। वो तो कल्लु मल बनिए का रिश्तेदार था जिसने उसका मार्केट में रुतबा बढा दिया। चचा के सगेवाले ने एक तीर से दो निशाने साध लिए। 

अब पड़ोसी रोज चचा को सुनाकर कहता और भीतर ही भीतर गदगद हुआ जाता –“ ऐसे पड़ोसी किसी को मत देना भगवान, मुंह में राम बगल में छूरी। शकल तो कृष्ण जैसी चिकनी चुपड़ी बना कर रखते हैं और काम कंस या दु:शासन जैसा करते हैं। अब देखो हमारे यहाँ इनकम टैक्स का छापा लगवा दिया। इनका सत्यानाश हो। ईर्ष्या में जल कर भस्म हो जाएगें हमें तो भगवान और कहीं दे देगा“

सुन कर चचा के तो बदन में आग लग जाती। अगर उनका बस चलता तो दो खून करते, पहला अपने रिश्तेदार का और दूसरा पड़ोसी। अब सुनिए मुकद्दर की बात, चचा ने मुर्गी पाल रखी थी। शुरु में तो दो चार अंडे दिए, फ़िर अंडे देने बंद कर दिए। चचा को शक हो गया कि मुर्गी अंडे कहीं दूसरी जगह जाकर देती है। गुस्से में आकर उन्होने मुर्गी को 5 दिन दबड़े में बंद कर दिया। मुर्गी ने अंडे नहीं दिए। चचा ने थक हार कर स्वीकार कर लिया कि यह मुर्गी अंडे नहीं देती। दो दिनों बाद हम उनके पड़ोसी के यहाँ दोपहर में पहुंचे। देखा कि एक मुर्गी सरपट आकर कुर्सी के उपर से टेबल की खुली दराज में घुस गयी।

मैने कहा -"मुर्गी दराज में घुस गयी निकालो उसे।"

चचा के पड़ोसी ने जवाब दिया कि- "यह चचा की मुर्गी है, अंडे मेरे यहां आकर देती है।"

 नसीब खराब हो तो अपनी मुर्गी ही अंडे पड़ोसी के यहाँ दे जाती है, इनकम टैक्स की रेड का सम्मान तो बहुत दूर की बात है। आदमी तो क्या मुर्गी भी बेवफ़ा हो जाती है।

16 टिप्‍पणियां:

  1. नसीब की बात है !
    इनकम टैक्स का छापा शोहरत दिलवाता है , कभी कभी पोल भी खुलवाता है ...जैसे प्रियंका के घर शाहिद मिले !

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  2. कुख्यात होने के लिए दुष्कर्म करने पड़ते हैं, विख्यात होने के लिए सत्कर्म। जीवन भर सत्कर्म करो लेकिन कोई पूछने वाला नहीं रहता।
    :) सहमत हूँ आपसे .... बडी ज़बदस्त पोस्ट लिखी है....

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  3. bhtrin vyngy he jnaab hmare yhan bhi hm chhapa pdhvane ki soch rhe hen . akhtar khan akela kota rajstan

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  4. आपकी इन चुहल पोस्‍टों से हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत एक कुनबे में सिमट कर घनिष्‍ठ होता लगता है.

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  5. सम्मानपिपासुओं को सम्मान मुबारक, हम लेखक भले।

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  6. बदनाम भी होंगे तो क्या नाम न होगा ?

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  7. इनकम टैक्स को दफ़ा करो जी पहले इस बेवफ़ा मुर्गी को पकडो...

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  8. वाह बड़ी जबरदस्त पोस्ट....पढ़कर मजा तो आया ही साथ ही कुछ ज्ञान की बातें भी समझ में आ गयी ...

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  9. हमें तो भगबान बचाए ऐसे सम्मान से :) बढ़िया व्यंग.

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  10. ये तो सीधे ही सिक्सर मार दिया.:)

    रामराम

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  11. गजब का व्‍यंग्‍य। मजा आ गया ललित जी।

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