शुक्रवार, 11 जनवरी 2013

सिंघा धुरवा का गुमशुदा

प्राम्भ से पढ़ें 
बोरिद पहुंचकर भूख लगने लगी थी पर हमारे पास भोजन का कोई साधन नहीं था। स्कूल के समीप हैंडपंप पर पानी पीने के लिए रुकना पड़ा। मैं मंगतु यादव की परछी में जाकर कुछ देर के बैठ गया। डोकरी केजा बाई फ़िर वहीं पर मिल गयी। गाँव में सन्नाटा पसरा हुआ था। दो चार बच्चों के अलावा सिर्फ़ केजा बाई ही दिखाई दे रही थी। पूछने पर पता चला कि ग्रामवासी थाना गए हैं। कारण पूछने पर ज्ञात हुआ कि सिंघा धुरवा से नवरात्रि के अवसर पर एक व्यक्ति देवनरायण गोंड़ गायब हो गया है। उसका पता वर्तमान में भी नहीं चला पाया है। मैने जिज्ञासावश ग्रामीणों से चर्चा की। तो यह नरबलि की आशंका सामने आई।
सिंघन गढ का मुख्य द्वार
ग्रामीणों से चर्चा करने पर ज्ञात हुआ कि बोरिद एवं एक अन्य गाँव के युवकों ने समिति बनाकर सिंघा धुरवा की पहाड़ी पर चांदा दाई की पूजा एवं नवरात्रि पर्व मनाने का निर्णय लिया। जिसके लिए मंगतु जगत को बैगा एवं बोरिद के ही देवनारायण को सेऊक की जवाबदारी दी। ज्योति कलश की देखभाल करने के लिए जंगल में स्थित निर्जन पहाड़ी पर देवनारायण एवं बैगा रहते थे। श्रद्धालु दिन में ही दर्शन करके आ जाते थे। क्वांर नवरात्रि 2 अक्टुबर 2011 पंचमी के दिन देवनारायण रहस्यमय ढंग से लापता हो गया। उसके बाद आज तक उसका पता नहीं चला कि वह कहाँ गया। जंगली जानवर खा गए या उसकी हत्या हो गयी?
सिंघनगढ की चढाई
50 वर्षीय देवनारायण के दो पुत्रियाँ एवं एक पुत्र है। तब से इसका परिवार अपने बाप को ढूंढते हुए दर-दर की ठोकरें खा रहा है। घर का एक मात्र कमाऊ सदस्य लापता हो जाने से भूखों मरने की नौबत आ गयी है। अर्थाभाव में बच्चों की पढाई भी छूट गयी है। दो जून की रोटी के भी लाले पड़ गए हैं। देवनारायण के लापता होने के विषय में जब मंगतु बैगा से पूछताछ की गयी तो उसने ग्रामवासियों को गुमराह किया। उन्हे सही जवाब नहीं दिया और कहा कि देवनारायण ने अपनी पुत्रियों को पंचमी के दिन धोती एवं दूध लेकर चान्दा दाई आने को कहा था। स्थिति यह बन गयी की बैगा के झांसे में आकर देवनारायण के परिजन 3 अप्रेल 2012 तक उसकी गुमशुदा की रिपोर्ट थाने में दर्ज नहीं कर पाए।
किले का पठार
बैगा मंगतु राम ने उसके परिजनों से कहा कि नवमी को आ जाएगा। जब नवमी को नहीं आया तो कहा कि एक महीने बाद आ जाएगा। इसी तरह बैगा के गुमराह करने के कारण दिन गुजरते गए और देवनारायण वर्तमान तक लौट कर  नहीं आया। थक हार कर देवनारायण के परिजनों ने 3 अप्रेल 2012 को पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंप कर जांच कराने की मांग की। उनकी मांग  को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। देवनारायण की गुमशुदगी का मामला दो थाना क्षेत्रों में फ़ंस कर रह गया है। बोरिद गाँव तुमगाँव थाना क्षेत्र में आता है और घटना स्थल कसडोल थाना क्षेत्र में। थाना क्षेत्र के विवाद में देवनारायण की गुमशुदगी की जाँच को लेकर उसका परिवार फ़ुटबाल बना हुआ है।
किले पर अवैध निर्माण।यहीं से देवनारायण गायब हुआ था।
कहा जाता है कि देवनारायण के बल्दाकछार निवासी दामाद खुमान सिंग एवं ग्रामीणो ने शपथ पत्र देकर कहा है कि चांदा दाई के प्रबंधक एवं पुजारी मंगतु राम ने की देवनारायण के गायब होने में मुख्य भूमिका है। कहते हैं कि मंगतु राम पूजा-पाठ के साथ बलि प्रथा में विश्वास रखता है। इसलिए देवनारायण की नरबलि देने की प्रबल आशंका है।  साथ ही यह भी आशंका है कि मंगतु राम ने देवनारायण की हत्या कर दी है और देवनारायण के परिजनों एवं ग्रामवासियों को गुमराह कर रहा है। पंचमी के दिन देवनारायण के गायब होने के बाद मंगतुराम भी घटना स्थल से दो दिन के लिए गायब हो गया था और गाँव वालों को गुमराह कर रात-रात भर जंगल में उसे ढूंढने के लिए भटकाता रहा।
सिंघनगढ का उत्तरी द्वार
मंगतुराम पर हत्या या बलि देने का शक ग्रामवासियों को इसलिए भी है कि सिंगा धुरवा में चांदा दाई की पूजा के दौरान चढावा और ज्योति कलश जलाने के लिए लाखों रुपया दान आता था। मंगतुराम द्वारा दान की राशि में घपला करने की आशंका व्यक्त की जा रही है। हो सकता है देवनारायण के गायब होने के मूल में दान राशि के बंटवारे की विवाद हो। ग्रामीणों ने देवनारायण के गायब होने की रिपोर्ट पुलिस में कर दी है। अब पुलिस की जांच से ही सामने आएगा कि सिंघा धुरवा से देवनारायण के गायब होने के पीछे किसका हाथ है? ग्रामवासियों की आशंकाओं के अनुसार नरबलि हुई है या नहीं? इस प्रश्न का उत्तर पुलिस को ढूंढना है। सिंगा धुरवा के साथ एक  नरबलि की दास्तान भी जुड़ गयी।


दो दिनों तक प्रयास करने के बाद जंगल में स्थित सिंघन गढ में ऐसा क्या था जिसे मैं देखना चाहता था इसके विषय में ऐतिहासिक जानकारी आगामी आलेख में प्राप्त होगी। … आगे पढें……

7 टिप्‍पणियां:

  1. हमर छत्तीसगढ़ के प्राचीन धरोहर के गाथा

    कतेक सुन्दर प्रयास हे आपके .....जानना चाही

    इहाँ के रहइया मन ल

    लगे रहौ

    बहुत बहुत बधाई .....

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  2. अन्धविश्वास ना जाने कितने घर - परिवार की खुशियाँ तबाह कर चुका है, आदिवासियों में ज्यादा सुनाई देती हैं नरबली की घटनाएँ... दो दिनों तक प्रयास करने के बाद जंगल में स्थित सिंघन गढ में ऐसा क्या था जिसे आप देखना चाहता थे जानने की बहुत उत्सुकता है...

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  3. सिंघनगढ का सुन्दर मनोरम चित्रण ... चलो इसी बहाने हम भी सफ़र को निकल पड़ते हैं ...

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  4. शानदार अगली कड़ी का इंतजार

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  5. गाथाओं में छिपी आज की गाथा भी..पता नहीं क्या हुआ होगा..

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