शनिवार, 12 दिसंबर 2009

सड़क दुर्घटनाओं में अकाल युवा मौतें



मैं अपनी बाईक से शाम को घर आ रहा था। 

आज कल हमारी सड़क पर ट्रैफिक कुछ ज्यादा हो गया है। 

पहले इतना नहीं था और दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं। कुछ ना कुछ रोज घटित होता रहता है। 
सड़क दुर्घटना

मैं अपनी साईड में था सामने से दो मोटर सायकिलें भी आ रही थी। उनके पीछे एक ट्रक था। 

अचानक ट्रक ने पीछे वाली मोटरसायकिल को टक्कर मारी, वह साईड पटरी पर गिर गया. 

आवाज सुन कर उसके आगे वाली मोटर सायकिल वाले लोग रुके, 

पलक झपकते ही उस गिरे हुए सवार के पास पहुंचे तब तक उस ट्रक वाले ने उनकी मोटर सायकिल पर अपनी ट्रक चढ़ा दी, 
सड़क दुर्घटना

जिससे मोटर सायकिल चकना चूर हो गयी. मैं रुका और उस पहले सवार को अस्पताल पहुचाने के लिए थाने में फोन किया। 

ट्रक का ड्राईवर तुरंत ट्रक छोड़ कर रफू चक्कर हो गया। अगर वे बाईक सवार रुकते नहीं तो वे भी दुर्घटना के शिकार हो जाते, 

इसे ही कहते हैं "जाको राखे सांईया मार सके ना कोय" इस दुर्घटना से सम्बंधित चित्रों को भी आप देखिये।

5 टिप्‍पणियां:

  1. चलो शुक्र है जान बची तो लाखों पाये वर्ना इन ट्रक वालों का कोई भरोसा नहीं शुभकामनायें

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  2. मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है!

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  3. भईया अधिकतर ट्रक चालक डोडा और अफीम के नशे में सोते हुए ट्रक चलाते हैं, हमारे स्‍वयं की सावधानियां धरी की धरी रह जाती हैं. पर आपका हेडिंग शाश्‍वत है.

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  4. ललित भाई की जय हो,
    वरना आज सड़क पर हादसा देखकर आंख मूंद कर निकल जाते हैं...

    जय हिंद...

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  5. भाग जाने का एक कारण पिटने का भय भी है। आपने सहायता की जानकर बहुत खुशी हुई।
    घुघूती बासूती

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