सोमवार, 14 दिसंबर 2009

माया सभ्यता के कैलेंडर का महाप्रलय

महाप्रलयमहाप्रलय होने वाला है, दुनिया खत्म हो जाएगी। लोग बाग चिल्ला रहे हैं टी.वी. चैनलों में लगातार, फिल्मे बन रही है, 

इलेक्ट्रानिक मिडिया और प्रिंट मिडिया भी प्रमुखता से खबरे छाप रहा है. "अब दिसम्बर २०१२ में महाप्रलय होने वाला है?" 

इस खबर को बड़े ही डरावने तरीके के प्रस्तुत किया जा रहा है. लोग खबरें देख देख कर आशंकित हैं कि "क्या होगा २०१२ में'

 इससे पहले भी कई बार महाप्रलय की सुचना जारी हो चुकी है, लेकिन महाप्रलय नहीं आया. एक बार पहले भी महाप्रलय की स्थिति बनी थी, 

शायद १९८० में जब "स्काईलेब" नामक प्रयोग शाला पृथ्वी पर गिरने वाली थी. लोग रात-रात भर जागते थे कि कहीं उनके मोहल्ले और मकान पर ही ना गिर जाये. 

आदिवासी पिछड़े अंचलो में लोग रोज दारू और मुर्गा की पार्टी कर रहे थे, जमीन जायदाद और घर बेचकर, जब दुनिया ही ख़तम होगी तो क्या धन सम्पत्ति लेकर तो नहीं जाना है. 

यहीं खा पीकर ख़त्म किया जाये. बस फिर शुरू हो गया दौर बेच-बेच कर खाने पीने का. जब स्काईलेब गिर गया और उसके बाद की स्थिति कितनी ख़राब हुई? ये उस समय देखने वाले ही बता सकते हैं.

अब भी यही होने वाला है, लोगों को डराया जा रहा है. महाप्रलय के नाम पर, 

एक फिल्म भी आ गयी है. माया सभ्यता का हवाला देकर "दिसम्बर २०१२", महाप्रलय भले ही आए या ना आए  लेकिन ये फिल्म बनाने वाले की तिजोरी में नोटों का प्रलय जरुर आ जायेगा. 

टी.वी. चैनल वाले टी.आर.पी. की बाढ़ ला रहे हैं. जबकि ऐसा कुछ नहीं होने वाला.ये कहानी फ़िल्मी फंताशी के आलावा कुछ नहीं है.

इस प्रलय के पहले एक महाप्रलय अवश्य आ चूका है "वह है बेलगाम महंगाई" इस प्रलय से बचने का रास्ता कोई नही निकाल रहा है. 

"सरकार भी शतुरमुर्ग की तरह रेत में सर गडाए खड़ी है" महंगाई काम करने का रास्ता कोई नहीं ढूंढ़ रहा है.

 दिसंबर २०१२ वाला महाप्रलय चाहे ना आये लेकिन इस महंगाई के महा प्रलय में बहुत कुछ तबाह होने वाला है. ये किसी को नही दिख रहा है. 

महंगाई के महाप्रलय से बचने का रास्ता अवश्य ढूँढना चाहिए. अन्यथा बहुत देर हो जाएगी/

8 टिप्‍पणियां:

  1. अपने तो
    खाओ, पिओ और सो...
    क्या पता कल हो न हो..


    -२०१२ तक तो यूँ भी जी गये तो कोई पुण्य प्रताप ही कहायेगा हरकतें देखते हुए. :)

    उत्तर देंहटाएं
  2. ललित जी! स्काईलैब का मामला अलग था और २०१२ के प्रलय वाला मामला अलग। स्काईलैब का गिरना तो निश्चित था, शुक्र है कि वैज्ञानिकगण ने उसकी दिशा परिवर्तित कर उसे समुद्र में गिराने में सफलता प्राप्त की।

    उत्तर देंहटाएं
  3. इतनी आसानी से प्रलय होनेवाला नहीं .. अभी धर्म बचा हुआ है .. आपके आलेख में स्‍काईलैब के बारे में पढकर बचपन की एक बात याद आ गयी .. उस समय मेरा छोटा भाई ईश्‍वर से प्रार्थना करता था कि स्‍काईलैब हमारे गांव में गिर और सबलोग मर जाएं .. बस वो बचे और उसका पसंदीदा होटल !!

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत दिनों से आपके ब्लॉग को खोलते वक्त प्रोब्लम आ रही थी ललित जी, Don't send को किल्क करते तो फिर से ब्लॉग रिफ्रेश हो जाता, आज ठीक दीखता है ! वैसे आपको बता दूं कि यही सोच कर तो राहुल भैया ने भी हाल ही में कहा कि वह २०१२ के बाद शादी करेंगे :)

    उत्तर देंहटाएं
  5. जब आएगी तो देखेंगे। वैसे भी हम उसे रोक तो सकते नहीं।
    घुघूती बासूती

    उत्तर देंहटाएं
  6. देखा जायेगा आज तो जी लें धन्यवाद्

    उत्तर देंहटाएं
  7. सचमुच कुछ नहीं होने वाला है -यह लैंड ग्रैबर का तो कोई कुचक्र तो नहीं ?

    उत्तर देंहटाएं
  8. ललित जी
    आपन मेल पता भेजी भाई
    इहाँ जबलपुरिया-ब्रिगेड
    बात जोहत है

    उत्तर देंहटाएं