शनिवार, 30 दिसंबर 2017

प्राचीन प्रतिमा शिल्प में स्वर्ग की अप्सरा अंजना : खजुराहो

तीखे तीखे नयन…। नायिका के नयनों की सुंदरता का वर्णन करते हुए कवियों ने खूब कागज काले किए एवं इन्हें विभिन्न उपमाओं से विभुषित किया। आँखे ही वह रास्ता है, जहाँ से कामदेव का प्रवेश हृदय में होता है और रोम रोम रोमांचित हो जाता है, लग जाती है लगन। कवि बिहारीे सुंदरियों के ऐसे त्रिगुण आकर्षक नयनों का वर्णन करते हुए कहते हैं…

अमिय हलाहल मद भरे, सेत स्याम रतनार।
जियत, मरत, झुकि झुकि परत, जिहि चितबत एकबार।।

कवि ने आँखों के सफ़ेद भाग की तुलना अमृत से,काली पुतलियों की विष से एवं आंखों की हल्की लाली की मद से की है। कवि कहता है कि नायिका जिसकी ओर शांत भाव से ताकती है तो वह जी उठता है, जिस व्यक्ति की ओर घूर कर देखती है तो समझो उसका मरण ही है एवं जिसकी ओर अनुरागपूर्वक देखती है तो मानो वह प्रेम में मतवाला होकर झूमने लगता है। त्रिगुण वाले नयन आकर्षक माने गए हैं।  

प्राचीन मंदिरों के प्रतिमा शिल्प में स्वर्ग की एक अप्सरा अंजना को सम्मिलित किया जाता है। यह प्रतिमा बहुधा मंदिरों की भित्ती संरचना में जड़ी हुई दिखाई दे जाती है। त्रिभंगी मुद्रा में एक स्त्री करदर्पण में मुखड़ा देखते हुए अंजन शलाका से आँखों में काजल आंजती हुई दिखाई देती है। 

वैसे तो स्त्रियों के नेत्रों का वास्तविक शृंगार लज्जा को माना गया है, पर नयनों की सुंदरता बढाने के लिए आँखों में काजल आंजती हुई नायिका या अप्सरा को शिल्प में दिखाया जाना तत्कालीन काल में सौंदर्य के प्रति स्त्रियों के जागरुक होने का ही प्रमाण है। 

शिल्पकारों ने अंजन शलाका से आँखों में काजल आंजती हुईै नायिका को अपने शिल्प में विशेष स्थान दिया है । पद प्रतिष्ठा के अनुसार सोने, चांदी, अष्टधातु या हाथी दांत की अंजल शलाकाएँ होती थी। उत्खनन में हाथी दांत की अंजन शलाकाएँ प्राप्त होती हैं। 

नयनों को अलंकृत करने चलन प्राचीन काल से लेकर वर्तमान तक दिखाई देता है। आँखों में आंजने के लिए काजल बनाने विधि भी प्राचीन ग्रंथ बताते हैं, जिनमें काजल एक औषधि रुप में नयन दोष दूर करने के लिए प्रयुक्त होती है। 

वर्तमान में अंजन शलाकाओं एवं काजल का स्थान शीश पेंसिल ने ले लिया है परन्तु नयनों के सौंदर्य के प्रति आज भी स्त्रियाँ चैतन्य हैं एवं काजल से अलंकृत नयनों की एक नजर ही हृदय में पैठने के लिए काफ़ी है। उपरोक्त चित्र खजुराहो के मंदिरों से लिए गए हैं।

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विक्रम साराभाई और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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    1. खजुराहो के प्रतिमा शिल्प में स्वर्ग की अप्सरा अंजना पर बड़ी रोचक और ज्ञानवर्धक सामग्री के लिए ललित शर्मा जी को बधाई. कृपया एक संशोधन कर लें - 'अमिय हलाहल मद भरे --' दोहा रसलीन का है, कवि बिहारी का नहीं.

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