शनिवार, 30 जुलाई 2016

कुमाऊँ की सैर पर त्रिदेव

अजंता एलोरा एक बाद पुन: देखने का मन था। बाईस बरस पहले सरसरी तौर पर देखा था, अब अध्ययन की दृष्टि से देखना था। दस मई तारीख तय हुई, परन्तु उस इलाके में पानी की बहुत किल्लत हो गई थी, मित्र से पता चला कि चार दिन में पानी आ रहा है और मेरे पहुंचते तक हो सकता है हफ़्ते भर में आने लगे। पानी की किल्लत के कारण इस यात्रा को दिसम्बर तक स्थगित किया गया। एक दिन फ़ेसबुक मनु त्यागी ने पोस्ट लगाकर बताया कि 21 मई लेह लद्दाख का बाईक टूर बन रहा है। बस मैने हामी भर दी और तैयारी शुरु कर दी। 
रायपुर के तेलीबांधा तालाब पर फ़हराता राष्ट्रीय ध्वज
पहाड़ी सफ़र में हमेशा कम से कम एवँ कम वजन का सामान होना चाहिए। यात्रा के लिए मैने तत्काल पोस्ट पेड सिम खरीदा और उसे चालु करवाया, पैराशुट के कपड़े के दो लोवर, एक हाफ़पेंट, विंडचीटर, दो काले गॉगल, दस्ताने और भी बहुत कुछ खरीदा। रास्ते के लिए दवाईयाँ, खाने का पौष्टिक सामान भी आ गया। जैसे ही सफ़र के लिए निकलने की तारीख आई, वैसे ही शारीरिक व्याधि दिखाई देने लगी। अब आखरी क्षणों में यात्रा स्थगित करने की नौबत आ गई। मैने फ़ोन करके मनु को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए अपनी लेह लद्दाख यात्रा स्थगित कर दी। परन्तु दिल्ली की टिकिट कैंसिल नहीं हुई थी। अब उसका उपयोग अन्य किसी स्थान के लिए किया जा सकता था।
रायपुर रेल्वे स्टेशन से प्रस्थान
गाजियाबाद वाले सुभाष शर्मा जी ने कहा कि चलो आपको कुमाऊँ घूमा लाता हूँ। बस बात बन गई। 20 तारीख को सुबह कुमाऊँ के लिए निकलना तय हो गया। मैं निर्धारित तिथि पर दिल्ली पहुंच गया। गोंडवाना थोड़ी विलंब से पहुंची। दिल्ली पहुंचने पर सुभाष शर्मा जी ने फ़ोन पर बताया कि सरायकाले खाँ से गाजियाबाद के लिए बसें चलती है। उससे आप गाजियाबाद आ जाओ और बस स्टैंड के पास छोटा सा मंदिर है, वहाँ मिलो। संजय अनेजा जी भी वहीं पहुंच रहे हैं, साथ चलेगें। सरायकाले खाँ पे गाजियाबाद की बस लगी थी, तुरंत चढ गया। उसने 30 रुपया किराया लिया गाजियाबाद का। यह सीधे रस्ते से चलने की बजाए कई कालोनियों से घूम कर गाजियाबाद पहुंचा और ओव्हर ब्रिज के नीचे सवारियों को उतार दिया। लगभग ग्यारह बज रहे थे।
ब्रजघाट में संजय अनेजा जी के साथ गंगा स्नान
संजय अनेजा जी भी पहुंच चुके थे, उनसे फ़ोन पर बात हुई तो उन्होनें बस अड्डे के गेट के सामने खड़ा होना बताया। मैं वहां तक पहुंचा और बाऊ जी मिल गए। आगे से पोस्ट में अनेजा जी को बाऊ जी एवं सुभाष शर्मा जी को भाई साहब संबोधित किया जाएगा। सूरज बहुत अधिक तप रहा था और स्नान करने की प्रबल इच्छा हो रही थी। मन हो रहा था कि जितनी जल्दी हो सके हो सके डुबकी लगा ली जाए तो ठीक रहेगा। भाई साहब को आने में विलंब हो रहा था। हमने एक चाय पी, तब तक भाई साहब भी आ गए। पान बनवाए गए और सीधे ही सफ़र पर निकल लिए। तय हुआ कि स्नान ब्रजघाट गढ़ गंगा में किया जाएगा। 

जिम कार्बेट पार्क रामनगर के द्वार पर त्रिदेव
दोपहर लगभग एक बजे हम ब्रजघाट पहुंच चुके थे।  सीधे घाट पर जाक पहला काम स्नान करने का किए। बाऊ जी और हम गंगा नहाने का पुण्य कमाए और भाई साहब फ़ोटो खींचते रहे। इसके बाद भोजन करना था। हाईवे थोड़ा आगे बढने पर एक ढाबे पर गाड़ी लगाई और भोजन किया। इसके बाद सपाटे से आगे बढते रहे। मुझे नहीं मालूम था कि कहाँ जाना है, कहाँ रुकना है। जब जानकार साथ हो तो क्या सोचना। रामनगर के पास पहुंच कर कुछ फ़ल लिए, जिसमें एक मतीरा और कुछ लीची और केले थे। मतीरा तो हमने रख दिया, केले और लीची का सेवन किया।
रानी खेत का रिसोर्ट जहाँ हमने रात गुजारी
शाम साढे पाँच बजे हम कार्बेट नेशनल पार्क के गेट पर थे। यहाँ से फ़ेसबुक मित्र गोविंद पाटनी जी को फ़ोन किया। तो उन्होने कहा कि आप आगे बढ चुके हैं। आगे बढने के बाद लौट कर आना नहीं जमता। कार्बेट नेशनल पार्क से घुमावदार पहाड़ी रास्ता शुरु हो गया। इसके बाद सपाटे से गाड़ी चलती रही। भाई साहब इन सड़कों से अच्छी तरह परिचित लगे। उन्होने बताया कि उनका जब मन हुआ तब मोटरसायकिल लेकर इन पहाड़ों में आ जाते थे। वैसे दिल्ली वालों को पहाड़ों तक आने में अधिक समय नहीं लगता। वो हम जैसों को पहले दिल्ली तक 13 सौ किमी चलकर आना पड़ता है। सारी कसर इसी में निकल जाती है। इनकी ड्राईविंग की जितनी तारीफ़ की जाए उतनी कम है। खास कर पहाड़ी रास्तों पर।

आगे की यात्रा के पूर्व सेल्फ़ी
लगभग साढे आठ बजे हम रानीखेत पहुंचे तब पता चला कि आज की रात यहीं रुकना है। हल्की-हल्की बरसात हो रही थी। आधा घंटा हो गया ठहरने का ठिकाना ढूंढते, पर बंगाली पर्यटकों के कारण सभी होटल पैक थे। कहीं भी रुम नहीं मिल रहा था। फ़िर एक लड़का आया, उसने कहा कि कलावती रिसोर्ट में एक रुम मिल जाएगा। यह 6 किमी है, मारुति के शो रुम के पास। खाना भी मिल जाएगा वहीं। रुम का किराया 1800 बताया। हमने मान लिया और शहर से पहुंच गए रिसोर्ट में। पहुंचते ही बरसात जोर से शुरु हो गई। खाना उन्होने रुम पर ही खिला दिया। ठंड सी थी, इसलिए कम्बल ओढने पड़े। 
रास्ता बताते हुए सूचना फ़लक
आज जुलाई की 21 तारीख थी। सुबह 6 बजे नींद खुल गई, कलावती रिसोर्ट पहाड़ी की ढलान पर अच्छे स्थान पर है। उठने के बाद थोड़ी देर आस पास के लैंड स्केप का मजा लेते रहे। मैने चिड़ियों एवं फ़ूलों के कुछ फ़ोटो खींचे। इसके बाद स्नान करके रिशेप्शन पर पहुंचे तो होटल मालिक ने अधिक पैसे बताए। कुछ टैक्स के कुछ चद्दर धुलाई के, कुछ सफ़ाई के आदी जोड़ कर 24 का हिसाब बना दिया। भाई साहब ने कहा कि आपके आदमी ने रात को 1800 कहे थे, अब आप 2400 बता रहे हो। तो वो बोला- मैं उस लड़के का बाप हूँ। उसको हिसाब किताब नहीं मालूम। मैने कहा कि आप तो ग्राहक के साथ बड़ी धोखाधड़ी कर रहे हो। बोलो कुछ और करो कुछ। वैसे भी मैं ट्रेवल राईटर हूँ, आपकी कारस्तानी गुगल पर जिन्दगी के बाद भी पीछा नहीं छोड़ेगी और सालाना तुम्हारे 50 ग्राहक तो बिदका ही सकता हूँ ये मानकर चलो। तब जाकर कहीं वो सरेंडर हुआ। कार्ड देते हुए बोला - अच्छा लिखना सर।  जारी है पढ़ें 

7 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढिया ललित भाई।
    वैसे यह आपने सही कहा की ऐसा लिख दूंगा की कम से कम 50 ग्राहक तो टूट ही जाएगे। यह लोग ऐसा ही करते है, सही किया आपने।

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  2. वाह...त्रिदेवों का मेरे पहाड़ में स्वागत है। जहाँ जहाँ पर्यटक पहुँचने लगे वहां पहाड़ की सच्चाई और ईमानदारी धुंधली सी पड़ने लगी है, इसमें कोई दो राय नहीं।सुदूर गाँव में पहुँचकर आप खुद से इस यात्रा में इस अन्तर को देख ही चुके होंगे।

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  3. पैसे भी कम करा लिये और ग्राहक भी बिदका दिये! गलत बात!

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    1. अजीत जी, हमने तो तय पैसे ही दिए, कम नहीं कराए। हां वो जरुर बेईमानी पर ऊतर आया था। इसलिए झटका देना पड़ा। लिखने का आशय यह है कि वो अन्य पर्यटकों के साथ भी इसी तरह की हरामखोरी करता होगा।

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  4. हमारे इलाके की सैर ..आजकल तो बहुत बारिश हो रही ...
    बारिश में पहाड़ बहुत सुन्दर लगते हैं लेकिन घूमना-फिरना बरसात की बजाय से ववधान आते हैं

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  5. बड़ी बढ़िया धमकी दी होटल वाले को महाराज । रिजोर्ट का फोटो बहुत बढ़िया है ।

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  6. कुमांऊ रेजिमेंट का मुख्यालय रानीखेत मूलतः सैन्य छावनी नगर है. यहाँ की अधिकाँश भूमि छावनी परिषद् के पास है, इसलिए यहाँ यात्री विश्रामगृह पर्याप्त सँख्या में नहीं हैं. यह कलावती रिसोर्ट भी नगर की सीमा से पाँच किमी दूर रानीखेत-रामनगर मार्ग पर एक-डेढ़ किमी नीचे पहाडी ढलान पर है.

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