बुधवार, 3 मार्च 2010

लगा हमको ब्लॉगिंग का रोग, सजनिया छूटे न

ब क्या बताये हम अपनी कहानी.........आये थे ब्लागिंग  करने को और दरबानी करने लगे.........इसे ही कहते हैं........आये थे हरिभजन को ओटन लगे कपास.......... हम एक दिन दिल्ली में खाली बैठे थे तो टाइम पास करने के लिए नेट में चलाने लग गए..........तभी हमारे मित्र मोहित त्यागी आ गये, पूछने लगे क्या कर रहे हो यार.......मैंने कहा यूँ ही नेट में सर फोड़ी कर रहे हैं.........बोले आप अपना प्रोफाइल ऑरकुट में बनाईये.........हमारा भी है.........तो हमने कहा हमें मालूम ही नहीं है...........कैसे बनता है? 

तो उन्होंने कहा मै बना देता हूँ.......हमने कहा बना दीजिए..........और उसदिन मोहित जी ने हमें भी आरकुटिया दिया........बस वो दिन था हमारे जिन्दगी का सबसे अच्छा दिन............अब क्यों था? आप यह भी सुन लीजिये......हम अखबारों में पढ़ते थे.........कि अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लाग पर ये लिखा वो कहा.......और  उनका लिखा सब लोग पढ़ते हैं.........

तो हम कौन अपने आप को उनसे कम समझते थे........लेकिन हमें कौन बताये कि ये ब्लाग कहाँ और कैसे बनता है? एक दिन आर्कुट का परिक्षण निरीक्षण करते हुए देखा कि उहाँ ब्लाग लिखा हुआ था......बस हमने उसको चटका दिया........और उसके कहे अनुसार ब्लाग बना के बच्चन हो गए.......

हुआ यूँ कि बहुत दिनों से बड़े-बड़े नेताओं के यहाँ चक्कर काटते रहे........उनसे टिकिट मांगते रहे..........सोचते रहे कभी हमारा भी भाग्योदय होगा......जहाँ भी रहे पार्टी का जम के सेवा किये..........लेकिन खरी-खरी कौन सुनता है?.......

कहीं ना कहीं हमारा जमीर आड़े आते रहा........अब टिकिट नहीं मिला तो जब नीतीश बाबु रेल मंत्री बने तो हमने सोचा कि टिकिट नहीं सही एकाध रेल ही मिल जायेगी .............हम अपने गांव और शहर के बीच चलाएंगे...............लेकिन रेल का भी निजी करण होते होते रुक गया..........तो अब हम क्या कहते नीतीश बाबु को.......जेहि विधि रखे राम तेहि विधि रहिये..........

फिर एकाध दो कमेटी में हमें नियुक्ति मिल ही गई........हम अपने काम में लग गए.....ये दिल्ली है........यहाँ के दफ्तर सिर्फ नेता लोगों को और उनके कारिंदों को ही पहचानते हैं......हमारी भी कुछ पहचान हमारे लीडरों के वजह से हो गई.....

सोचा कि हमारे क्षेत्र के विकास के लिए ही कुछ योजना बनाया जाये..........और वहां अपना फिल्ड मजबूत किया जाये........लेकिन भैया ये तो अफसर शाही है........इससे निपटना टेढ़ी खीर है.........फाईल तरबूज की चलती है मंत्री जी के यहाँ से और फिर अफसर उसकी जो छटाई करते हैं.....कि आखिर में योजना का साईज निम्बू जैसा होके रह जाता है..............

अबके इलेक्शन में हमारी लाटरी खुल ही गई थी.........जब हमारी योजना बहन मायावती तक पहुँच गयी लोकसभा इलेक्शन से पहले ..........उन्होंने बुलाकर पूछा क्या चुनाव के बारे में पूछा........पता नहीं हम भी किस दुनिया में थे...........

हमने कह दिया नहीं लड़ना है..........बस बात ख़तम हो गयी...........दो दिन लखनऊ की सैर करवाए मंत्री जी और फिर हम वापस आ गए..........

चुनाव से पहले एक बार फिर बात उठी हम तैयार हो गये इलेक्शन लड़ने के लिए............हमारे साथी लोग भी तैयार और हम भी तैयार ...........लेकिन इलेक्शन के ५ दिन पहले सड़क दुर्घटना घट गई  और हम हास्पिटल में पहुँच गये........बस यहाँ पर भी दुर्भाग्य ने पीछा नहीं छोड़ा.........और चुनाव निकल गया.......

अब खाली घर में बैठे-बीते क्या करते? तभी हमें याद आया कि एक दिन हमने ब्लाग बनाया था.......अब चलो उस पर ही लिखा जाये.........बस फिर क्या था? 

ब्लागिग में आ गये जोर शोर से,  कुछ फालतू की किस्सा, कहानी, कविता लिखने लगे और पढ़ने लगे.............हमें इसे समझने में ही कई महीने लग गये ........बिना गुरु के ज्ञान नहीं .........हम ढूंढने निकले तो यहाँ गुरु लेकिन बड़े-बड़े गुरुवर मिले.......

एक दिन हमने ज्योतिषी से पूछा कि हमारे दिन कैसे चल रहे हैं तो उन्होंने बताया कि ठीक नहीं चल रहे हैं .........आगे कुछ समस्या आ सकती है........लेकिन दो साल में ठीक हो जायेंगे........हम खुश हो गये चलो दो साल बाद दिन ठीक हो जायेंगे.........हो सकता है हमें फिर चांस मिल जाये........क्या भरोसा कब क्या हो जाये.?......

थोड़ी मन को शांति मिल जाये..........इतने साल दिल्ली के दफ्तरों के चक्कर काटते हुए बीते  एक दिन हमारे काम ही आ जाये.....एक दिन हम अपने आर्कुट पर गए तो वहां सैर करने वालों में  हमें फुरसतिया जी की फोटो दिखी...........हम तो धन्य हो गये..........कि अब हमारे आर्कुट पर महान ब्लागर के चरण पड़ने लगे........हमें कुछ सीखने मिलेगा........अपने-अपने फिल्ड में सब सीनियर हैं ........लेकिन दुसरे के फिल्ड में जाकर जूनियर बनना पड़ता है..........तो हम यहाँ आकर जूनियर बने .........

अब हम बिलकुल खाली हैं..................कोई नौकरी में भी नहीं रखने वाला............क्या किया जाये सोचते बैठे थे तभी कल हमने फुरसतिया पर देखा कि हमारे लिए दरबानी की नौकरी तैयार है............हमने इसे गंभीरता से लिया....आज कल चपरासी की नौकरी मिलना मुस्किल है........उसके लिए भी क्वालिफिकेशन पूरा होना चाहिए और फिर मंत्री संतरी की सिफारिश अलग से...............

हम दरबानी के लिए  अहर्ताएं पूरी करते है..........6 फुट की काठी है.........मूंछे हैं..........बन्दुक हमारे घर की है और चलाना भी आता है..........निशाना भी अच्छा है इसका भी सर्टिफिकेट हमारे पास है...........बहुत दंड पेले हैं भैंस का दूध पीकर ..........तो दिमाग भी थोडा ठस है ............मालिक का इशारा हो जाये तो दो चार ऐसे ही चित्त कर देंगे.....ईमानदार भी हैं.........पढ़े-लिखे भी हैं................ 

इसलिए हमने सोचा कि जब हम दरबानी  के लिए अहर्ताएं पूरी कर रहे हैं ........तो साल दो साल यही करके देख लेते हैं..........क्या फर्क पड़ता है...........इसलिए हमारा निवेदन है कि हमारी योग्यताओं को देखते हुए हमें शीघ्र ही दरबानी के लिए बुलाया जाये..........अपने बंगले कोठी का पता ठिकाना दें तो हम वहां पहुँच जायेंगे..........

(हमें तो ब्लागिंग का रोग लग गया है......इसे छोड़ कर तो जाने वाले नहीं हैं.......आप लोग सीनियर से भी सीनियर ब्लागर हैं और हिंदी ब्लागिंग आपने पैदा की है............... इसलिए आपकी बात तो माननी ही पड़ेगी)  
 

38 टिप्‍पणियां:

  1. मालिक पढ़ लिये। जान भी लिये कि आपके कने एक अदद बन्दूक है और अल्ला के फ़जल से आपका निशाना भी अच्छा है। लेकिन नौकरी का तो भैया ऐसा है कि वो बस कल्लै तक थी। होली की मौज तक। होली बीती,नौकरी रीती।

    अब तौ फ़टाक देना कौनौ चुनाव-फ़ुनाव लड़ि डारव। बनिके मंत्री हनक दिखाव!

    कानपुर में होली तो अभी तक चल रही है सो होली मुबारक।

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  2. होली मुबारक हो ललित जी। फुरसतिया जी का सुझाव अच्छा है। चुनाव लड़ ही डाला जाए।

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  3. एक बार यह रोग लग जाए फिर कहाँ जाने वाला...ब्लॉगिंग ऐसी ही ऐसी चीज़..

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  4. Idea accha hai votes ki sath ghant yaha tippani ke madhyam se ho jaeji :D
    Likin blogging ki lut se ubhara bada mushkil hai sahabji ye nasha bahut bada hai..!!
    Sadar

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  5. भले ही आपको ब्लॉगिंग का रोग लगा हो लेकिन वायरस आपके भीतर नेतागिरी के ही है जो कभी भी अपना प्रभाव दिखा सकते हैं । एक दिन आयेगा जब आप इस ब्लॉगिंग से ऊब जायेंगे और छत्तीसगढ़ की ही किसी पार्टी से टिकट प्राप्त कर चुनाव लड़ेंगे ।
    यह बात मैं बहुत गम्भीरता से कह रहा हूँ इसे हलके में न लें ।
    मेरी शुभकामनायें ।

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  6. पं. डी.के. शर्मा वत्स जी और बहिन संगीता पुरी जी के साथ हमारी भी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं!
    आपकी ग्रह-दशा बहुत बढ़िया चल रही है!
    आप हिन्दी ब्लॉगिंग के शहन्शाह बनने वाले हैं!

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  7. आज तो भैया हम भी nice ही लिखेंगे क्योंकि हमारा सिद्धान्त है कि जब अपने पल्ले कुछ ना पड़े तो nice लिखकर टिप्पणी कर दो।

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  8. ऐसा है जी, दरबान की नौकरी आप भले ही कल्लो, पर हम तो हैण्ड्स अप करके दरबाजे पर आयेंगे फिर । क्योंकि दरबान का निशाना पक्का और दिमाग ठस हो तो रिस्क कौन ले :)

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  9. आपको शुभकानाएं और अग्रिम बधाई।
    अरे भाई , नौकरी की नहीं , नेता बन कर देश की सेवा करने की।

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  10. इत्ता क्वालि-फाइड दरबान कहाँ मिलेगा
    ज़ल्दी कीजिये

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  11. चुनाव तो लड़ ही लो ललित,चुनाव की लड़ाई मे कुछ मिलता तो है यंहा लड़ते रहोगे तो कुछ मिलने वाला भी नही।वैसे अब तो अपने यंहा चुनाव भी नही बचे सब हो गये,फ़ुरसत है चार साल तो क्या इरादा है?हा हा हा मस्त रहो होली खेलो प्यार बांटो और दरबानी ही करना है तो यंहा छत्तीसगढ मे बहुत से लोगों को लूटा जा रहा है उन्हे बाबूलालों से बचाओ।

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  12. बढ़िया सोच और उत्तम विचार ललित जी ,

    मगर कोशिश करना की नेता बढ़िया बनो , वर्ना आपको तो मालूम है की मैं इन नेतावो की कितनी ऐसी-तैसी करता हूँ ! :)

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  13. यह सही रहा ....दिली शुभकामनायें भैया, वैसे कहीं और ढूँढ़ते तो अच्छा था !

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  14. अंडर एसटीमेशन तो वैसे सही नहीं है.... पर हम तो आपको नमन करते हैं....

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  15. gazab kar rahe ho...likh-likh kar sabki छ्utti hi kar doge kyaa...? aaj ka lekh mazedaar hai. haasy bhi hai aur vyangya bhi hai. kul milaa kar lalit hai...

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  16. hujur kaha naukari ke chakkar me pad rahe hain, netagiri hi sahi hai, aap chunav ladiye bas , hamara vote pakka, aapke area ke nivasi nahi honge fir bhi pakka ;)

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  17. bahut hi achha likha hai.blogger ke saath-satha ek manje hue neta ki jhalak mil rahi hai. vaise blogger ke nata ka bhi chunav hona chahiye. mujhe lagta hai aap chunav jarur jitenge. isse blogjagat ka bhi bhalaa hi hoga.

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  18. नेता बनके ब्‍लॉगिंग करते तो नोट मिलते

    ब्‍लॉग बनाके नेता बनेंगे तो वोट मिलेंगे।

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  19. जिन्होने नौकरी निकली है वही धारणा दे दीजिये
    नौकरी की नौकरी ब्लॉगिंग की ब्लॉगिंग

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  20. नेता लोगों के साथ फोटो सच्‍ची-मुच्‍ची की है या हमें ही होली के रंग में ऐसी दिख रही है? होली की शुभकामनाएं।

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  21. ....लगता है कुछ लोग आपकी मूछों से जलने लगे हैं इसलिये ही मूछों का उटपुटांग अर्थ निकालने मे मस्त हैं ....खैर छोडो नौकरी करें आपके दुश्मन .... अभी तो ब्लागिंग मे ही दो-चार हाथ अजमाने का समय है ...समय आने पर "समाज सेवा" करना ही ज्यादा हितकर होगा .... चुनाव, चुनाव तो कभी भी लडकर जीता जा सकता है ....राजनीति के बडे-बडे कद्दावर नेताओं के साथ ताल्लुक होना अच्छी बात है,बधाई !!!

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  22. @ डॉ श्रीमति अजीत गुप्ता,
    सब कुछ असली है नकली कुछ भी नही।
    हां मैने अभी आकर देखा तो,होली का नाम लेकर
    पोस्ट मुद्दे से भटकाने की कोशि्श अवश्य हुई है।

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  23. पोस्ट कुछ और कहना चाह रही थी और टिप्पणियों ने इसे कुछ और दिशा दे दी. यही होता है गलत टाईमिंग. राजनित के मंजे हुए खिलाड़ियों से गलत टाईमिंग की उम्मीद वैसे कम ही होती है. सही समय पर पुनः जागरुक होवें. शुभकामनाएँ. :)

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  24. ओह, अब पढ़ी आपकी टिप्पणी..आप जान चुके हैं यह बात पहले ही...

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  26. महत्‍वाकांक्षी व्‍यक्ति समय पास भी यूं ही नहीं किया करते .. आपसे समाज को बडी उम्‍मीदें होंगी .. सफलता के लिए शुभकामनाएं !!

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  27. शर्मा जी , राम राम , अरे बधाई हो ..मालिक लोग नौकरी पे रखने लगे हैं ...हां भाई अधिकारी उधकारी लोग हैं ..रख सकते हैं , हमें भी कोई चपरासी वाला पोस्ट दिलवाईयेगा ..जब आपका सेलेक्शन हो जाए ...सुने अबकि होली के बहाने ..कई बडे लोग अपने मन की ठेल गए ...कुछ हमारे जैसे ही बेचारे रह गए ..बस हैप्पी होली ..हैप्पी होली करते रह गए ....देखिए होली के दिन स्टाफ़ अपाईंट कर लिए होते ..तो बाकी का समय फ़ुर्सत में बीतता मौज लेते हुए ..:) स्माईली चेप दिए हैं ....हां राजा से प्रजा भली ...आप तो हमारे बीच रहिए ...बस यही बहुत है ..
    अजय कुमार झा

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  28. कमाल है!
    एक तरफ कहा जा रहा कि यह दरबानी का ऑफर बस कल्लै तक था। होली बीती,नौकरी रीती।
    दुसरी तरफ वहीं कहा जा रहा
    कानपुर में होली तो अभी तक चल रही है!!

    मतलब, आपके लिए अभी भी गुंजाईश है ललित जी!
    आप तो बस रवानगी ले लो :-)

    हमारे लिए भी कोई जगह तलाश लेना भई। एयर इंडिया के महाराजा जैसा पोज़ बनाए खड़े रहेंगे!!

    बी एस पाबला

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  29. मन्नै दिखण लागरया सै कि इबकै उंट पहाड कै नीचे आकै ई मानैगा. यो त इस्सा उंट सै कि खुदई कुल्हाडी पै पैर मरण लागरया सै.

    रामराम.

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