सोमवार, 9 अगस्त 2010

चमचा साधै सब सधै

हिन्दी फ़िल्मों में हीरो के साथ एक चमचा अवश्य ही रहता है जो उसकी हां में हां मिलाता है। बिना चमचे के तो कोई फ़िल्म ही नहीं बनती। चमचा पहले कास्टिंग किया जाता है, हीरो बाद में।

हीरो तो बहुत मिल जाएगें पर उपयुक्त चमचा मिलना बहुत ही मुस्किल है। चमचा ऐसा होना चाहिए कि जिसे हीरोईन भी पसंद करे। क्योंकि हीरो और हीरोईन के बीच चमचे को सेतु का काम करना पड़ता है। इसलिए हीरो-हीरोईन दोनो की रजामंदी होना जरुरी है।

डायरेक्टर,प्रोड्युसर से लेकर पूरी युनिट में सभी के पास एक-एक चमचा होता है। क्योंकि बिना चमचा के किसी का काम नहीं चलता। चमचा छोटा हो या बड़ा लेकिन चमचागिरी के गुणों से ओत-प्रोत होना चाहिए।

कमर तक झुक कर कोर्निश करने वाले एवं दंडवत लेटने वाले चमचे ज्यादा पसंद किए जाते हैं। इस विशेष योग्यता का होना निहायत ही जरुरी है। तभी चमचा अपने मालिक के हृदय में स्थान पाता है।

कभी कभी सोचना पड़ता है कि दिनचर्या में यह चमचा कहां से घुस गया? जिसके बिना काम चलता ही नहीं है। भारतीय संस्कृति में भोजन बिना चमचे के ही किया जाता है, हाथ से खाने में थाली से भोजन सीधा मुंह में जाता है।

अगर अंधेरा भी हो जाए तो आंख मुंद कर भी खाएं तो हाथ सीधा मुंह में ही जाता है। जो कि चमचे से संभव नहीं है। फ़िर भी चमचा इतनी सहजता से हमारे जीवन में प्रवेश कर गया कि पता ही नहीं चला और पूरा राज काज अपने हाथों में ले लिया।

बिना चमचे के तो अब दिनचर्या चलाना क्या कुछ भी सोचना मुस्किल है। अत्र-तत्र-सर्वत्र चमचा ही चमचा, रसोई से लेकर सत्ता के मठ मंदिरों तक चमचे का ही राज चलता है।यथेष्ट तक पहुंचने के लिए पहले चमचे को साधना पड़ता है। तभी कार्य संभव हो पाता है।

अंग्रेज जब भारत में आए तो अपने साथ चमचा लेकर आए। उन्हे हाथ से खाना नहीं आता था। अंग्रेजो ने चमचे के दम पर 200 साल राज किया। जमकर चमचों का इस्तेमाल किया उन्होने।

बड़े बड़े खिताबों से नवाजा गया चमचों को, लोहे से लेकर सोने-चांदी के हीरे जड़े चमचे तैयार किए गए। साम-दाम-दंड-भेद प्रक्रिया को अपनाया। चमचों के साथ छुरी कांटे का भी जमकर इस्तेमाल किया और सोने की चिड़िया को खोखला कर दिया। इस दुष्कृत्य में चमचों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अंग्रेज चले गए लेकिन चमचा छोड़ गए। चमचा संस्कृति आजाद भारत की उर्वरा भूमि में बड़ी तीव्रता से पुष्पित पल्लवित हूई।

चमचों ने मालिक बदल दिए, अंग्रेजों के द्वारा इस्तेमाल किए गए चमचों की मांग ज्यादा थी क्योंकि उन्हे राज काज का सारा गुर मालूम था। इसलिए चमचों ने अपनी उपयोगिता को बनाए रखा।

चमचे सर्वव्यापक हैं और सर्वव्याप्त हैं। आप सत्ता के गलियारों में कहीं भी जाएं,हर जगह चमचे तैनात मिलेंगे। अगर आपको कोई सही काम भी करवाना है तो चमचों से ही सम्पर्क साधना पड़ेगा।

कभी भी आपने बिना चमचे की स्वीकृति से काम कराने की कोशिश की तो वे आपका बना बनाया रायता फ़ैला देंगे। कोई काम नहीं हो पाएगा। इसलिए पहले चमचे को साधना जरुरी है,

बुद्धिमान व्यक्ति यही कार्य सबसे पहले करता है। सीधा चमचे को ही साधता है। चमचा साधै सब सधै--यह मंत्र याद रखना जरुरी है। जो इस मंत्र का नित्य जाप करता है वह संसार में कभी कष्ट नहीं पाता। तीनो भुवनों के आनंद को प्राप्त करता है, तीनों लोकों में जगह पाता है।

किसी दिलजले ने कह दिया कि-"चमचों की तीन दवाई-जूता-चप्पल और पिटाई।" चमचों की पिटाई होना बहुत ही कठिन कार्य है,क्योंकि ये घर से ही पूरे शरीर में तेल लगा कर निकलते हैं,

जहां भी आपने पकड़ने की कोशिश की, तो आपका हाथ फ़िसल जाता है और ये पकड़ में नहीं आते। साथ में तेल की शीशी भी रखते हैं। आवश्यकता पड़ने पर तेल भी लगा देते हैं- "सर जो तेरा चकराए, दिल डूबा जाए, आज्जा प्यारे तेल लगवा ले, काहे घबराए, काहे घबराए"।

दुनिया का कोई भी क्षेत्र इनसे अछुता नहीं है। अगर आप खुद मुख्तयार हैं याने चमचागिरी आती है तो सोने में सुहागा समझिए। बहुत जल्दी तरक्की करेंगे। अगर नहीं आती तो इन चमचों के माध्यम से आएगी, नहीं तरक्की किस चिड़िया का नाम है, ढुंढते ही रह जाएगें।

राजनीति,नौकरी,साहित्य इत्यादि सभी क्षेत्रों में चमचों का दखल है। राजनीति में आप चमचागिरी के सहारे एक साधारण कार्यकर्ता से बड़ी जल्दी ही मंत्री पद पा सकते हैं। अगर मंत्री पद नही मिला तो कोई एम एल सी की सीट या कार्पोरेशन की अध्यक्षी को जरुर ही पा सकते हैं।

 इसके लिए आपको जरुरत से ज्यादा मीठा होने की आवश्यकता है। भले ही शुगर की बिमारी हो जाए, लेकिन मीठा तो होना ही पड़ेगा। तभी तरक्की संभव है।

नौकरी करते हैं तो हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि- "बॉस इज आल वेज राईट"। "हां जी, हांजी कहना और इसी गांव में रहना"। जी हजुरी डटकर करो, भले फ़िर दूसरा काम मत करो। बॉस की नजर में हमेशा बने रहो। फ़िर तरक्की ज्यादा दूर नहीं है।

घटिया से घटिया लिखिए,बस नामवर साहित्यकारों की चरण चम्पी करते रहिए,नजरे इनायत होने पर आपसे बड़ा साहित्यकार-कवि कोई दूसरा नहीं है। चमचागिरी महान है चमचा देश की शान है,हमारी संस्कृति की जान है।

27 टिप्‍पणियां:

  1. चमचागिरी महान है चमचा देश की शान है,हमारी संस्कृति की जान है।
    चमचागिरि पर सटीक व्‍यंग्‍य !!

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  2. भारतीय संस्कृति में भोजन बिना चमचे के ही किया जाता है, हाथ से खाने में थाली से भोजन सीधा मुंह में जाता है। अगर अंधेरा भी हो जाए तो आंख मुंद कर भी खाएं तो हाथ सीधा मुंह में ही जाता है। जो कि चमचे से संभव नहीं है।
    @ भाई जी
    आप एक बात भूल गए बेशक हमारी संस्कृति में भोजन बिना चमचे के किया जाता था पर बिना चमचे भोजन बनाना भी तो असंभव है और भारत में भोजन बनाते समय चमचे के साथ साथ चाटू का भी प्रयोग किया जाता था अब भी गांवों में चाटू प्रयोग किया जाता है राबड़ी,खिचड़ा आदि बनाने के लिए |
    और चाटुकारिता का नाम भी आप जानते ही है इसलिए ये चाटुकार व चमचे हर संस्कृति व सदी में मौजूद रहे है |

    बहरहाल आपका ये व्यंग्य पड़कर मजा आ गया :)
    लेख की प्रशंसा को चमचा गिरी मत समझिएगा :) )

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  3. हा-हा, इन चमचे कर्छो ने ही तो देश का बड़ा गरक किया ललित जी , बेहतरीन व्यंग्य !

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  4. ...घटिया से घटिया लिखिए,बस नामवर साहित्यकारों की चरण चम्पी करते रहिए,नजरे इनायत होने पर आपसे बड़ा साहित्यकार-कवि कोई दूसरा नहीं है ...

    सार तत्व, सार्थक लेखन के लिये बधाई!

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  5. indu puri goswami @ BUZZ - 'बस नामवर साहित्यकारों की चरण चम्पी करते रहिए,नजरे इनायत होने पर आपसे बड़ा साहित्यकार-कवि कोई दूसरा नहीं है। चमचागिरी महान है .' आ बात म्हारे दिमाग में बैठी गई.अब ए बतो कि मैं किनकी चमची बनू? बनू तो सही . यो लेख लिख्यो तो है तो माराज पर मार्ग दर्शन भी दीज्यो. अट्ठे तो सब साहित्यकार ही है. छोटो कुण ? बडो कुण आ बात तो आप चोखी तरा जानो हो सा.चमची इंदु पुरी गुरु कुण? आप्नेईच बना लूँ?
    हा हा हा @

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  6. @ Ratan Singh Shekhawat

    मैने अंग्ररेजी चमचे पर ध्यान केन्द्रित किया था, दे्शी चाटुओं को अंगरेजी चमचों ने चलन से बाहर कर दिया। सत्ता हस्तान्तरण हो गया भाई जी।

    चाटु कुणा म्हे पड़यो रोवै है,चमचो काम तांईं मौको ही कोनी दे रहयो

    राम राम सा

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  7. आनन्द आ गया चमचा पुराण पढ़ कर!

    चमचा में गुण बहुत है सदा राखिए संग।
    काम वही साधे सभी तेल लगावे अंग॥

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  8. :):) बढ़िया चमचा पुराण ...अच्छा व्यंग

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  9. चमचा तो रसोई से लेकर राजनीती तक हर जगह जरुरी है :) बढ़िया व्यंग.

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  10. Maharaaj paay lagi.
    chamchammate hue chamche me rakhiye chamcham.
    chamcham ke swad ka nahi chamche ka kariye bakhaan hardam. chamche ke har jagah bade bade kamal hain. ho jaata iski vajah se bade se bada dhamaal hai. kuchh bhi ho aaj aapke dvaraa iske puraan lekhan ka aaya achchha khayal hai. jay johaar...

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  11. चाटु कुणा म्हे पड़यो रोवै है,चमचो काम तांईं मौको ही कोनी दे रहयो

    @बात तो साँची है

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  12. चमचे सर्वव्यापक हैं और सर्वव्याप्त हैं।
    ....aapka chamacha puran sarvabyapt ho gurudev......subhakamanaaye.

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  13. बिन चमचा सब सून ...
    बढ़िया है चमचा पुराण ...!

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  14. चमचों का ही है जमाना,लगाए चमचों को टिकाना..

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  15. चमचागिरि पर सटीक व्‍यंग्‍य !!

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  16. लेकिन इन चमचो की इजजत क्या होती होगी? इन से ज्यादा तो घर के कुते की इज्जत होती है, वेसे यह चमचे सारा हिसाब किताब ही बिगाड देते है, आफ़िस का , देश का.......
    आप के लेख से सहमत है , लेकिन पढ कर हंसी बहुत आई कि बेठे बेठे आप क्यो इन चम्चो के पीछे पढ गये.....बेचारे अपने आप से नजरे चुरा रहे होंगे:) बेचारे चमचे!!!!!!!!!!!

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  17. अच्छा रहा चमचा प्रसंग। बधाई।

    प्रमोद ताम्बट
    भोपाल
    www.vyangya.blog.co.in
    http://vyangyalok.blogspot.com

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  18. शीर्षक पूरी पोस्ट की बात कह देता है ! शुभकामनायें !

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  19. चमचागिरी महान है चमचा देश की शान है,हमारी संस्कृति की जान है


    -जय हो महाराज...बहुते सटीक...बिन चमचा सब सून!!!

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  20. एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं !

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  21. "घटिया से घटिया लिखिए,बस नामवर साहित्यकारों की चरण चम्पी करते रहिए"...
    बड़ी दूर तक मार करते हो भाई.. :-)
    प्रहारक क्षमता से लैस..तीखा...मारक व्यंग्य

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  22. badiya vyang...chamchgiri sikhane ki classes ka pata bhi bata dete to...

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