शुक्रवार, 26 अगस्त 2016

जतमई में नैसर्गिक सौंदर्य का आनंद

छत्तीसगढ़ में गरियाबंद जिले के छुरा ब्लॉक अंतर्गत जतमई नामक प्राकृतिक झरना है। हरितिमा से आच्छादित पहाड़ी से यह झरता हुआ यह झरना बरसात के दिनों में सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र होता है। रायपुर से लगभग 75 किलोमीटर की दूरी पर होने के कारण शहर एवं आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों के सैलानी सप्ताहांत में यहाँ पहुंच जाते हैं और जतमई माता के दर्शन के साथ झरने में जलकिलोल करने का लुफ़्त उठाते हैं। 

रविवार के दिन तो यहाँ पर रेलमपेल मची रहती है। वनक्षेत्र के रमणीय वातावरण का आनंद इस स्थान पर लिया जा सकता है। वनांचल में प्राकृतिक झरना होने के कारण कुछ वर्षों से पर्यटकों की बड़ी संख्या इस स्थान पर मनोरंजन के लिए पहुंचती है, इसके साथ ही वनदेवी जतमई के दर्शन करने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। वैसे तो जतमई का बरसाती झरना जुलाई से दिसम्बर तक ही रहता है। नववर्ष के दिन पिकनिक मनाने वालों का भीड़ अत्यधिक रहती है।


ग्राम पटेवा के निकट यह स्थान होने के कारण स्थानीय लोग एक समिति बनाकर इस स्थान का विकास कर रहे हैं। यह झरना 70 फ़ुट की ऊंचाई से गिरता है। यहां विशालकाय चट्टाने एक के ऊपर एक इस तरह से रखी हैं कि लगता है किसी कुशल कारीगर ने इन्हें स्थापित कर दिया हो। जतमई मंदिर के निकट सिद्ध बाबा का प्राचीन स्थान है, यहां पर एक चिमटा रखा हुआ है। कहते हैं कि इस स्थान पर 400 बरस पहले कोई सिद्ध बाबा रहते थे। उनके कारण इस स्थान की मान्यता अधिक हो गई। 


यहीं पर एक शेर माड़ा भी है, जिसे लोग शेरगुफ़ा कहते हैं। पहले इस स्थान पर जंगली जानवर भी बड़ी संख्या में रहते थे। भालुओं की आमदरफ़्त तो अभी भी रहती है। शहर के समीप रविवारिय मनोरंजन के लिए यह एक आदर्श प्राकृतिक स्थल है। इस स्थान का सौंदर्य देखने लायक है। एक बात गौर करने लायक यह भी है कि अत्यधिक पर्यटकों के पहुंचने के कारण इस स्थान पर प्लाटिक की पन्नियों, खाने की सामग्री के रैपरों एवं पर्यटकों द्वारा फ़ैलाई गई गंदगी के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है। प्लास्टिक के सामानों पर यहां प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

6 टिप्‍पणियां:

  1. छतीसगढ़ वाकई प्रकृति की अनुपम छत्रछाया से सरोबोर है। कितना कुछ है जो हम जानते ही नही!
    आपके प्रयासों को सलाम है।
    बढ़िया जानकारी 👍

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  2. छतीसगढ़ वाकई प्रकृति की अनुपम छत्रछाया से सरोबोर है। कितना कुछ है जो हम जानते ही नही!
    आपके प्रयासों को सलाम है।
    बढ़िया जानकारी 👍

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  3. अपने ही क्षेत्र में कई ऐसे नैसर्गिक सुंदरता वाले क्षेत्र होंगे...किंतु पर्यावरण बचाने व पर्यटन स्थल के विकास में हम सब लोगों का इसी तरह प्रयास रहे तो इसका महत्व और बढ़ जायेगा.....भाई जी तो शिल्पकार हैं ही..बहुत सुंदर ...शेर के माड़ से निकलकर खड़ा है शेर...सादर

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  4. बहुत सुन्दर रमणीक प्रस्तुति

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  5. सुन्दर जानकारी। पता नहीं था और ना ही किसी ने बताया।

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