मंगलवार, 30 अगस्त 2016

सरगुजा की कैलाश गुफ़ा


छत्तीसगढ़ प्रदेश का प्राकृतिक सौंदर्य अद्वितीय होने के साथ यहाँ का इतिहास भी उतना ही समृद्ध है। प्रदेश के सरगुजा अंचल हरित वनों, पर्वतों, नदियों का सौंदर्य रमणीय है। प्रत्येक स्थान पौराणिक इतिहास से भरा पुरा है और यहाँ सुरम्यता रमणीय है। रायपुर से हम इस अंचल के कैलाश गुफ़ा क्षेत्र के पर्यटन के लिए चल पड़े। रायपुर से अम्बिकापुर 358 किलोमीटर की दूरी पर है। इस नगर की पूर्व दिशा में सामरबार नामक स्थान पर 80 किलोमीटर की दूरी पर कैलाश गुफ़ा स्थित है। हम अम्बिकापुर से बतौली होते हुए पठार पर पहुंचे, यहाँ से जंगल के रास्ते पर चलते हुए गायबुड़ा नामक ग्राम से बांए सड़क पर चलकर कैलाश गुफ़ा तक पहुंचे। गायबुड़ा से सड़क सीधी पंडरापाट होते हुए बगीचा एवं जशपुर चली जाती है। धार्मिक दृष्टि से भी यह स्थान महत्वपूर्ण है। 

यहाँ आदिवासी समाज के संत रामेश्वर गहिरा गुरु जी ने प्राकृतिक गुफ़ा की चट्टानों को तराश कर वर्तमान रुप दिया है। कैलाश गुफ़ा के नीचे झरना बहता है, जहाँ स्थानीय लोग धार्मिक कर्मकांड सम्पन्न करते हैं। इस स्थान पर आने के पश्चात मन को शांति मिलती है और मनुष्य के प्रकृति से जुड़ जाता है। 

इस स्थान के प्राकृतिक सौंदर्य एवं महत्ता को देखते हुए गहिरा गुरु जी ने अपनी उपासना के लिए चयन किया। सघन वन के बीच आश्रम, गुफ़ाएं, कल-कल करता झरना एवं पक्षियों का मधुर स्वर में आगंतुकों का स्वागत मन को मोह लेता है। ऐसा लगता है कि शहरी भाग दौड़ के से थोड़ा अलग रह कर दो चार दिन इस प्राकृतिक स्थल पर व्यतीत किए जाएं।


प्रकृति से एकाकार होने के लिए यह बहुत ही आदर्श स्थान है। यहाँ श्रद्धालुओं, दर्शनार्थियों एवं पर्यटकों का बारहों मास आना लगा रहता है। यह खुबसूरत स्थान अपने साथ अनेक पौराणिक कथाओं को भी समेटे हुए है। वर्षा काल में इस स्थान की सुंदरता और भी बढ़ जाती है। झरना अपने पूरे यौवन पर होता है, वनांचल में छोटे-मोटे वन्य प्राणी भी दिखाई देते हैं। हमें इस सुंदर स्थान का भ्रमण कर अपूर्व आनंद की अनुभूति हुई। सांझ तक यहाँ रहने के पश्चात हम पंड्रापाट से बगीचा होते हुए मैनपाट के अपने अस्थाई डेरे सैला रिजोर्ट में लौट आए।

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुन्दर ललित भाई , सुन्दर चित्रों और रोचक जानकारी से भरी हुई पोस्ट | आपके साथ हम भी घूम रहे हैं

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुन्दर यात्रा वृतांत ...

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन 'वीर कनाईलाल की शहादत और ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

    उत्तर देंहटाएं